अहोई माता की आरती अष्टमी वाली – Ahoi Astami Mata ki aarti

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अहोई माता की आरती Ahoi mata ki arti अहोई अष्टमी के दिन विशेष रूप से पूजन के बाद गाई जाती है। अहोई अष्टमी का पूजन और व्रत

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अहोई माता के पूजन के बाद कहानी सुनने और अंत में भक्ति भाव से आरती गाने से व्रत का सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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अहोई माता की आरती – Ahoi Mata Ki Aarti

 

जय   अहोई  माता   जय  अहोई   माता  ।

तुमको निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता ।।

जय अहोई माता ….

 

ब्रह्माणी  रुद्राणी  कमला  तू ही जग दाता ।

सूर्य  चन्द्रमा  ध्यावत  नारद  ऋषि  गाता ।।

जय अहोई माता ….

 

माता  रूप  निरंजन  सुख  सम्पत्ति दाता ।

जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता ।।

जय अहोई माता ….

 

तू   ही  पाताल  बसंती  तू   ही  सुखदाता ।

कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि की त्राता  ।।

जय अहोई माता ….

 

जिस  घर थारो  बासो बहि में गुण आता ।

कर सके सोई कर ले मन नहीं घबराता ।।

जय अहोई माता ….

 

तुम   बिन   सुख  न  होवे   पुत्र न कोई  पाता ।

खान पान का वैभव तुम बिन कोई नहीं पाता  ।।

जय अहोई माता ….

 

शुभ  गुण  सुंदर युक्ता  क्षीर  निधि  जाता ।

रतन  चतुर्दिश  तुम  बिन कोई नहीं पाता  ।।

जय अहोई माता ….

 

श्री अहोई  माँ  की  आरती जो कोई गाता ।

उर  उमंग अति  उपजे  पाप  उतर जाता ।।

जय अहोई माता ….

 

बोलो श्री अहोई माता की ……

जय !!!

 

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