अच्छी और बुरी आदतों का गृह नक्षत्रों पर असर और दूसरा नजरिया – Habits

आदत का मतलब है वह काम जो हम बार बार और रोज करते हैं। कुछ आदत अच्छी होती हैं और कुछ बुरी। बुरी आदतों से नुकसान होता है।

आदत बुरी हो और उससे हमें या किसी दूसरे को कुछ नुकसान पहुँचता हो तो उसमे बदल लेना ठीक होता है।

 

शास्त्रों के अनुसार मनुष्य द्वारा किये गये कार्य शुभ या अशुभ फल देने वाले होते हैं और उनसे गृह नक्षत्र प्रभावित हो सकते हैं। इन कार्यों में

दैनिक जीवन की आदतें भी शामिल हैं। शास्त्रों में बताई गई ऐसी ही कुछ बातों का यहाँ उल्लेख किया गया है और उन्हें एक दूसरे नजरिये से

देखने की कोशिश की गई है जिससे आप भी जरूर सहमत होंगे।

 

कुछ लोग पश्चिमी सभ्यता की नक़ल करते हुए भारतीय संस्कृति की बातों को सिरे से नकार देते हैं क्योंकि वे विज्ञान के इस युग में धर्म या

शास्त्रों में विश्वास नहीं करते । हो सकता है कि कुछ बातें गले नहीं उतरती हों लेकिन शास्त्रों की कुछ बातें किसी धर्म विशेष वाले व्यक्ति के

लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभदायक हैं । इसी प्रकार की कुछ आदतों का यहाँ उल्लेख किया गया है जिन्हे बदल लेने

या अपनाने से फायदा ही होगा ।

 

कहीं भी थूंकने से नुकसान

 

शास्त्रों के अनुसार कहीं भी थूंकने की आदत से यश , सम्मान नहीं मिलता और मिलता भी है तो टिकता नहीं है। इससे सूर्य गृह पर दुष्प्रभाव

पड़ता है जो नुकसानदायक हो सकता है।

 

दूसरा नजरिया :

 

थूँकने से हवा में हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया को फैलने और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को बीमारी लगने का खतरा पैदा होता है।

जैसे किसी को फ्लू हुआ है और वह व्यक्ति यहाँ वहाँ थुंकता है तो इससे दूसरे व्यक्ति को भी फ्लू हो सकता है। इसी तरह कई बीमारियाँ एक

से दूसरे को लग सकती हैं। इसके अलावा थूंक या लार में ऐसा कोई नुकसानदायक तत्व नहीं होता जिसे शरीर से बाहर निकलने की जरुरत

हो। अतः थूँकना शरीर की कोई मूलभूत जरुरत नहीं है। अतः यह आदत गन्दी हो और इसे तुरंत छोड़ लेना चाहिए।

 

किसी विशेष मजबूरी के चलते थूँकना पड़े तो वाश बेसिन जैसी जगह थूँकना चाहिए और पानी डालकर सफाई भी कर देनी चाहिए। कुछ

लोगों को खंखार कर गले से कफ निकाल कर थूँकने की आदत होती है। इससे गले को फायदे की जगह नुकसान होता है। सुबह गार्डन में

घूमने जाते है तो वहाँ भी थूँकना चालू रहता है । इससे दूसरे लोगों को बहुत परेशानी होती है। इसी प्रकार कुछ लोग गुटका खाकर यहाँ वहाँ

थूँकते रहते है जिसे सम्मान की दृष्टि से तो कोई नहीं देख सकता।

 

थाली में झूठा छोड़ना और बर्तन वहीं छोड़ देने के नुकसान

 

थाली में झूठा छोड़ने से सभी ग्रहों पर विपरीत असर होता है विशेष कर गुरु और शनि पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है । इससे कुछ ना कुछ

समस्या हमेशा खड़ी रहती है। समय और पैसा कहाँ चला जाता है पता ही नहीं चलता। खाना खाने के बाद थाली वहीं पर छोड़ने से शनिदेव

नाराज हो जाते हैं। मानसिक शांति छिन जाती है और कई प्रकार की अड़चने आने लगती हैं।

 

दूसरा नजरिया :

 

धरती पर उपलब्ध अन्न या जल एक सीमित मात्रा में हैं। इनका सदुपयोग करने पर ही इनका लाभ मिलता रहेगा अन्यथा आज जो सुविधा

आसानी से मिल रही है उसे प्राप्त करने के लिए बड़े संघर्ष भी करने पड़ सकते हैं। विश्व भर में कई लोग ऐसे हैं जिन्हे भूखे पेट रहना पड़ता है

क्योंकि कुछ लोग अन्न या खाने पीने के सामान को व्यर्थ फेंक देते है। अतः जूठा छोड़ना एक प्रकार से किसी दूसरे व्यक्ति का खाना छीनने के

सामान है। इसलिए यह आदत बदल लेनी चाहिए। थाली में उतना ही खाना लेना चाहिए जिसे खा सकें और जूठा न छोड़ना पड़े।

 

परिवार में महिलाओं पर थाली उठाकर रखने और साफ करने की  जिम्मेदारी आ जाती है। कोई और आपकी झूठी थाली उठाये यह ठीक नहीं

है। यदि आप बीमार हैं या असक्षम हैं तो अलग बात है अन्यथा खाने खाने के बाद खुद की थाली खुद ही उठा कर यथास्थान रखनी चाहिये।

आपका यह छोटा सा प्रयास घर के काम में अच्छी मदद साबित हो सकता है और यह एक दूसरे के प्रति सम्मान दर्शाने का माध्यम बन सकता

है। रिश्तों में सम्मान होने सम्बन्ध मजबूत होते हैं। आप किसी के यहाँ मेहमान बन कर भी जाएँ और थाली खुद उठाकर रखें या सिर्फ पूछ लें की

थाली कहाँ रखनी है तो यह अच्छा ही लगेगा। इससे मेजबान की नजर में आपकी कद्र बढ़ जाती है।

 

घर आये मेहमान या पानी मांगने वाले को पानी पिलाने के फायदे

 

घर पर आये किसी भी व्यक्ति को पानी जरूर पूछे और उसे स्वच्छ पानी पिलायें। पानी पिलाने से आप चन्द्रमा और राहु का सम्मान करते हैं

और राहु की वजह से कभी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

 

दूसरा नजरिया :

 

पानी शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। प्यास लगने पर पानी न मिले तो हालत बुरी हो सकती है। इसे सभी ने कभी न कभी महसूस किया हुआ

होता है। अतः मानवीय संवेदना आपमें है तो आप पानी जैसे चीज के लिए किसी को मना नहीं कर पाएंगे। पानी पीने के बाद सामने वाला व्यक्ति

आपके के मन में आपके प्रति आदर के भाव आयेंगे और आपको मानसिक ख़ुशी और संतुष्टि अवश्य हासिल होगी। किसी की मदद करके

मिलने वाली संतुष्टि और उसके शारीरिक लाभ वैज्ञानिक भी स्वीकार कर चुके हैं। इस लाभ को प्राप्त करने का इतना आसान तरीका शायद ही

कोई होगा। अतः कोई भी पानी मांगे चाहे वो नौकर , भिखारी या फटीचर हाल वाला व्यक्ति ही क्यों न हो उसे पानी जरूर पिलायें।

 

प्यासे को पानी पिलाने के फायदे

 

घर में पौधे लगाने और उन्हें पानी देने के फायदे

 

जिस घर में रोजाना पौधों को पानी दिया जाता है वहां परेशानियों का सामना करने की हिम्मत बढ़ती है और संकट का जल्दी समाधान होता है।

इस तरीके से हम चन्द्रमा , शुक्र और बुद्ध का सम्मान करते हैं।

 

दूसरा नजरिया :

 

पेड़ पौधे हमें ऑक्सीजन देते हैं यह हम बचपन से सुनते आये हैं। तुलसी का पौधा घर में लगाना , उसकी पूजा करना ये हमारी संस्कृति का

हिस्सा है। तुलसी के पौधे के पास थोड़ी देर रहने मात्र से उसमें से निकलने वाले तत्व शरीर को फायदा पहुंचा सकते हैं। तुलसी के पत्ते बहुत

सी बीमारियों में दवा का काम करते हैं। पौधों को पानी देने से सुकून का अहसास होता है। हरा रंग मन को भी हरा कर देता है।

 

रोजाना खाली हाथ घर लौटने के नुकसान

 

रोज खाली हाथ घर आने से धीरे धीरे उस घर की लक्ष्मी चली जाती है और दरिद्रता आती है। घर के सदस्यों में निराशा के भाव आने लगते हैं।

अतः घर लौटते समय कुछ ना कुछ सामान घर के लिए जरूर ले लेना चाहिए। इससे घर में सुख समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता रहता है।

 

दूसरा नजरिया :

 

घर में पुरानी चीजों का निकलते रहना और नई चीजें आते रहने से उमंग और उत्साह का वातावरण बना रहता है। परिवार के सदस्यों के साथ

हर चीज का एक अलग ही आनंद प्राप्त होता है , चाहे वो खाना पीना हो या घूमना फिरना । फल , सब्जी , मिठाई आदि लौटते समय घर के

लिए ले जाने से परिवार के सदस्य खुश होते हैं और इस बहाने घर के सदस्यों की मदद भी हो जाती है। इससे घर के सदस्यों के आपसी सम्बन्ध

प्रगाढ़ होते हैं।

 

सुबह उठने के बाद बिस्तर नहीं समेटने से नुकसान

 

बिस्तर से उठने के बाद भी यदि बिस्तर , चादर , कम्बल बिखरे हुए रहें तो खर्चे अनावश्यक रूप से बढ़ जाते हैं। दिनचर्या अस्त व्यस्त रहती है।

कोई काम सही तरीके से नहीं हो पाता। अतः चद्दर , तकिये , कम्बल आदि सुबह उठते ही समेट देने चाहिए।

 

बिस्तर

दूसरा नजरिया :

 

सुबह उठते ही बिस्तर समेट देने से आपका दिमाग अगले काम की तरफ पूर्णतया केंद्रित हो जाता है। यह असल में टाइम मैनेजमेंट का एक

हिस्सा है। इससे आप समय से तैयार हो पाते हैं। शांति पूर्वक नाश्ता आदि ले पाते है। अपने जरुरी पेपर्स ,फोन , चाबियाँ आदि साथ लेना नहीं

भूलते। बिस्तर नहीं समेटने से उसी में घुसे रहने की इच्छा होती रहती है। इससे दिनचर्या लेट हो जाती है। आप अपने काम के लिए सही समय

पर पहुँच नहीं पाते। जल्दबाजी में कुछ न कुछ गड़बड़ होने क संभावना अधिक होती है।

 

जूते चप्पल इधर उधर फैला का रखने के नुकसान

 

शास्त्रों के अनुसार इस आदत के कारण शनि और चन्द्रमा पर बुरा असर होता है। शत्रु बहुत परेशान करते हैं। बिना वजह लोग परेशानी

पैदा करते रहते है। अतः चप्पल जूते आदि यथा स्थान जमा कर रखने चाहिए।

 

दूसरा नजरिया :

 

जूते चप्पल पहन कर बाहर घूमने के कारण उनके साथ गन्दगी और बैक्टीरिया के घर में आने की सबसे ज्यादा सम्भावना होती है। अतः इसका

ध्यान रखना बहुत जरुरी है कि ये यथा स्थान रखे गए हो अन्यथा पूरे घर में गन्दगी फ़ैल जाती है। बाहर से आने पर शूज़ खोल कर शू रेक में

रखने के बाद घर के अंदर जाना इसका समाधान है। अगली बार आपके बाहर जाते समय तुरंत आपको अपने शूज़ मिल जाते है। बाहर जाते

समय यदि जूते नहीं मिलते तो चिड़चिड़ाहट होने लगती है इसके कारण आगे के काम डिस्टर्ब हो सकते है।

 

अतः अच्छी आदतें जरूर अपनायें , चाहे वो कहीं से भी जानने को मिलें। इससे सिर्फ स्वास्थ्य ही ठीक नहीं रहता बल्कि सामाजिक और

पारिवारिक रिश्ते भी मजबूत बने रहते हैं।

 

क्लिक करके इन्हे भी जानें और लाभ उठायें :

 

घर खर्च कम कैसे करें 

पैदल चलने और मॉर्निंग वाक के फायदे 

खटमल से बचने के घरेलु उपाय 

घर में ये औजार जरूर रखें ताकि परेशानी न हो

SIP के माध्यम से शेयर मार्किट में निवेश कैसे करें 

बिजली का बिल कम करने के उपाय 

सिरका के शानदार घरेलु उपयोग 

चमड़े के जूते चप्पल की देखभाल के तरीके 

परीक्षा के समय बच्चों की मदद कैसे करें 

गुड़ के फायदे और नुकसान 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *