गणेश चतुर्थी पूजन सरल विधि – Ganesh Chaturthi Pooja

860

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi गणेश जी का जन्म दिन है। गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसीलिए हर वर्ष इस दिन गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। आइये जानें पूजन की विधि।

गणेश जी बुद्धि , सौभाग्य , समृद्धि  , ऋद्धि सिद्धि देने वाले तथा विघ्नहर्ता  यानि संकट दूर करने वाले माने जाते है । विनायक  Vinayak  , गजानन Gajanan  , लम्बोदर  Lambodar  , गणपति  Ganapati  आदि सब गणेश जी के ही नाम है।गणेश चतुर्थी

सफलता  या लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सम्पूर्ण ज्ञान हासिल करना , अपनी त्वरित बुद्धि से विवेकपूर्ण निर्णय करना , लगातार मेहनत और प्रयास करते रहना , जरुरी होते है । गणेश जी की पूजा का यही सन्देश है। इसी वजह से गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाता है।

महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी और गणेश विसर्जन  Ganesh Visarjan बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाते है। घर और मंदिरों में गणेश जी की बड़ी सुन्दर प्रतिमाएँ साज श्रृंगार के साथ स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा  Pran Pratishtha की जाती है । दस दिन यानि अनन्त चतुर्दशी Anant Chaturdashi तक भक्ति भाव और विधि विधान से गणेश जी की  पूजा की जाती है ।

ग्यारवें दिन किसी जलाशय , नदी या समुद्र में मूर्ती को विसर्जित किया जाता है। गाजे बाजे के साथ नाचते गाते लोग गणेश विसर्जन में  हिस्सा लेते है। हर तरफ  “गणपति बाप्पा मोर्या ” जैसे शब्द गूंजते नजर आते है।

पर्यावरण तथा धार्मिक दोनों ही दृष्टि से गणेश जी की मूर्ती मिट्टी से बनी होनी चाहिए ना की POP – Plaster of peris से। POP से बनी रंगबिरंगी मूर्ती से जल प्रदूषित होता है। इससे जल में रहने वाले कई जीव मर जाते हैं। अतः मिट्टी से बनी मूर्ती की ही पूजा करें। घर में गणेश जी की मूर्ती मिट्टी से बनाना सीखने के लिए यहाँ क्लीक करें। 

गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले कई जगह मंदिरों में सिंजारा Ganesh ji ka sinjara मनाया जाता है जिसमे गणेश जी को मेहंदी अर्पित की जाती है। महिलाएं भजन गाती है। प्रसाद आदि वितरित किये जाते है।

गणेश चतुर्थी की तारीख

Ganesh Chaturthi 2018 Date

 13 सितम्बर 2018  , गुरुवार

गणेश पूजन का शुभ समय

सुबह  11 : 03   से दोपहर  1 : 30

चन्द्रमा को किस समय नहीं देखें

chand kab nahi dekhe

इस दिन चाँद को देखना अशुभ माना जाता है। कहते है चाँद को गणेश जी का श्राप लगा हुआ है। इस दिन चाँद को देखने से झूठा कलंक लग सकता है। भगवान श्री कृष्ण को भी चाँद देखने पर मणि चोरी के झूठे कलंक का सामना करना पड़ा था। ये धार्मिक मान्यताएं है परन्तु इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण जरूर होंगे ।

तृतीया तिथि को  चाँद नहीं देखने का समय            –  12  सितम्बर  को शाम 4 : 07   से  8 : 33

चतुर्थी तिथि के दिन चाँद नहीं देखने का समय        –  13  सितम्बर  को  सुबह   9 :31   से  रात  9 : 12

गणेश जी का पूजन करने की सामग्री और विधि

ganesh ji ka poojan kaise kare

गणेश पूजन की सामग्री – Ganesh Poojan Samagri

चौकी या पाटा

जल कलश

लाल कपड़ा

पंचामृत

रोली , मोली , लाल चन्दन

जनेऊ

गंगाजल

सिन्दूर

चांदी का वर्क

लाल फूल या माला

इत्र

मोदक या लडडू

धानी

सुपारी

लौंग ,

इलायची

नारियल 

फल

दूर्वा – दूब

पंचमेवा

घी का दीपक

धूप , अगरबत्ती

कपूर

गणेश पूजन की विधि – Ganesh Poojan Vidhi

सुबह नहा धोकर शुद्ध लाल रंग के कपड़े पहने। गणेश जी को लाल रंग प्रिय है। पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में होना चाहिए।

—  सबसे पहले गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं । उसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं ।

—  गणेश जी को चौकी पर लाल कपड़े पर बिठाएं। ऋद्धि सिद्धि के रूप में दो सुपारी रखें।

—  गणेश जी को सिन्दूर लगाकर चांदी का वर्क लगाएं।

—  लाल चन्दन का टीका लगाएं। अक्षत ( चावल ) लगाएं।

—  मौली और जनेऊ अर्पित करें।

—  लाल रंग के पुष्प या माला आदि अर्पित करें। इत्र अर्पित करें।

—  दूर्वा अर्पित करें।

—  नारियल चढ़ाएं। पंचमेवा चढ़ाए।

—  फल अर्पित करेँ।

—  मोदक और लडडू आदि का भोग लगाएं।

—  लौंग इलायची अर्पित करें।

—  दीपक , अगरबत्ती , धूप आदि  जलाएं।

—  गणेश मन्त्र उच्चारित करें –

ऊँ  वक्रतुण्ड़  महाकाय  सूर्य  कोटि  समप्रभ  । निर्विघ्नं  कुरू  मे  देव  ,  सर्व  कार्येषु   सर्वदा ।।

—  कपूर जलाकर आरती करें। गणेश जी की आरती गाएँ।

इन्हे भी जानें और लाभ उठायें :

ऋषि पंचमी / घट स्थापना और नवरात्री पूजा / शरद पूर्णिमा / आंवला नवमी व्रत / करवा चौथ व्रत और पूजन / धन तेरस कुबेर पूजन दीपदान / दिवाली लक्ष्मी पूजन / तुलसी विवाह / सकट चौथ व्रत / वार के अनुसार व्रत /

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here