गुर्दे की पथरी समस्या बचाव और उपचार – Kidney Stone And Preventions

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गुर्दे की पथरी Kidney Stone एक आम समस्या है। गुर्दे की पथरी ठोस आकार की पत्थर की कंकरी जैसी होती है ।  इसके कारण तेज दर्द हो सकता है तथा संक्रमण और दूसरी कई प्रकार की परेशानी हो सकती है।

पथरी गुर्दे Kidney के अलावा पित्ताशय Gall Blader  में या लीवर में भी बन सकती है। पित्ताशय में बनने वाली पथरी गुर्दे की पथरी से बिलकुल अलग होती है। गुर्दे में पथरी के बनने के कई कारण हो सकते है।

गुर्दे यानि किडनी में पथरी बनना बहुत लोगों को परेशान करता है। गुर्दे मे बनने वाली पथरी गुर्दे में फंसी हो सकती है या यह खिसक कर मूत्र नली में भी आ सकती है।

छोटी और चिकनी पथरी अपने आप पेशाब के साथ निकल भी जाती है। लेकिन बड़ी और नुकीली पथरी परेशानी पैदा करती है। किडनी के अलावा पथरी मूत्राशय या मूत्र नली में भी बन सकती है। पथरी का दर्द बहुत तेज होता है।

pathary

गुर्दे की पथरी बनने के कारण – Stone Formation

Gurde me Pathri banne ke karan

हम जो भी खाना खाते है। उसमे से पोषक तत्व ग्रहण करने के बाद बचे हुए अपशिष्ट पदार्थ जो काम के नहीं होते उन्हें शरीर मल द्वार से तथा पेशाब के माध्यम से बाहर निकाल देता है ।

गुर्दे जब पेशाब के द्वारा अनुपयोगी पदार्थ बाहर निकालते है तो उन्हें पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। यदि पानी कम होता है तो अपशिष्ट पदार्थ जमना शुरू हो जाते है। ये जमकर सख्त हो जाते है। इस तरह गुर्दे में पथरी बन जाती है।

 

यदि किडनी में एक लीटर से कम पेशाब बन रहा है तो किडनी में पथरी बनने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है। गुर्दे की पथरी बीस साल से चालीस साल की उम्र में ज्यादा बनती है। पुरुषों में महिलाओं की अपेक्षा पथरी अधिक बनती है।

आनुवंशिकता के कारण यानि घर में किसी को गुर्दे की पथरी है तो आपको भी हो सकती है।

इसके अलावा मोटापा , थायरॉइड , डिहाइड्रेशन , अधिक प्रोटीन व नमक वाला भोजन या कुछ विशेष प्रकार की दवा आदि के कारण भी पथरी बन सकती है।

कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उस शब्द से सम्बंधित बातें विस्तार से जान सकते है।

किडनी में बनने वाली पथरी एक जैसी नहीं होती है । विभिन्न कारणों से बनने वाली गुर्दे की पथरी ये होती है :

कैल्शियम ऑक्जेलेट

इस प्रकार की गुर्दे की पथरी सबसे ज्यादा पाई जाती है। यह कैल्शियम और ऑक्जेलेट की अधिकता के कारण बनती है। जब शरीर में ऑक्जेलेट की मात्रा अधिक होती है तो किडनी में कैल्शियम के साथ मिलकर यह पथरी बना देता है।

अधिक ऑक्लेजेट की मात्रा वाली चीजें ज्यादा लेने से इस प्रकार की पथरी बन सकती है।

मूंगफली , बादाम ,  भिन्डी , चुकंदर , पालक , अमरुद , शकरकंद  , आलू की चिप्स आदि अधिक ऑक्सेलेट वाली चीजें है।

यूरिक एसिड

इस प्रकार की पथरी महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक बनती  है। जिन्हें गठिया रोग होता है उनको इस प्रकार की पथरी बन सकती है।

जब भोजन में प्यूरिन नामक तत्व अधिक होता है तो उससे पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ जाता है। पेशाब में यूरिक एसिड के अधिक होने से गुर्दे में पथरी बनने की सम्भावना बढ़ जाती है।

मांसाहार में शाकाहार की अपेक्षा प्यूरिन अधिक होता है। कुछ सब्जियाँ जैसे गोभी , पालक, मशरूम , मटर , फलियाँ आदि में भी प्यूरिन अधिक होता है अतः ये पथरी का कारण बन सकते है।

स्ट्रॉवाइट

इस प्रकार की पथरी महिलाओं में अधिक बनती है। इनका आकार बड़ा भी हो सकता है जो पेशाब को रोक सकता है। यदि पेशाब अधिक क्षारीय हो और किसी प्रकार का संक्रमण हो तो इस प्रकार की पथरी बन सकती है।

पौष्टिक भोजन की कमी , ज्यादा देर तक पेशाब रोके रखना या यूरिन इन्फेक्शन (  Urin Infection – UTI )  के कारण पेशाब अधिक क्षारीय हो जाता है अतः पेशाब के लिए तुरंत जाना चाहिए।

सिस्टीन

इस प्रकार की पथरी बहुत कम लोगों में बनती है। इसका कारण अनुवांशिक होता है। इस प्रकार की गुर्दे की पथरी को निकाल देने के बाद यह दुबारा फिर से बन जाती है। नमक कम लेने से तथा फल , सब्जी का अधिक उपयोग करने से इसका बनना कम किया जा सकता है।

पथरी के दर्द के लक्षण – Stone Symptoms

Pathri ka dard

जब पथरी किडनी से खिसक कर मूत्र नली में आती है तो बहुत तेज दर्द होता है। यह दर्द पीठ में नीचे की तरफ या पेट में हो सकता है। यह दर्द बार बार उठता है फिर बैठ जाता है फिर से होने लगता है। दर्द इतना तेज होता है कि व्यक्ति चैन से बैठ नहीं पाता है।

 

पथरी होने के अन्य लक्षण में पेशाब में रक्त आना , पेशाब गुलाबी होना , पेशाब भूरा होना ,पेशाब लाल रंग का आना हो सकता है। पथरी किडनी से निकल कर मूत्र नली में आती है तो मूत्र नली नाजुक होने के कारण छिल जाती है। उसमे रक्त आने लगता है। यह रक्त पेशाब में दिखने लगता है।

उल्टी , जी घबराना , बुखार , कंपकंपी,  बार बार पेशाब की इच्छा पर कम पेशाब आना आदि भी किडनी में पथरी के लक्षण हो सकते है।

जब पथरी मूत्र नली में फंस जाती है तो पेशाब में रूकावट होने लगती है। इससे किडनी में संक्रमण हो सकता है और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

गुर्दे की पथरी की जाँच – Test For Kidney Stone

Gurde ki pathri ke test

—  पथरी की जाँच करने के लिए कई प्रकार के टेस्ट होते है।

—  रक्त में कैल्शियम , फास्फोरस , यूरिक एसिड ,आदि की  जाँच की जाती है।

—  किडनी सही से काम कर रही है या नहीं यह जानने के लिए रक्त में यूरिया नाइट्रोजन और क्रिएटिनिन की जाँच होती है।

—  पेशाब की जाँच करके उसमे श्वेत कण ,  बेक्टिरिया , रक्त आदि का पता लगाया जाता है।

—  यदि छोटी पथरी पेशाब में निकली हो तो वह पथरी किस प्रकार की है इसकी जाँच की जाती है।

—  पेशाब में रूकावट का एक्स-रे , सोनोग्राफी ,  एमआरआई  , सीटी स्केन के द्वारा पता लगाया जाता है।

गुर्दे की पथरी का उपचार – Kidney Stone Treatment

Gurde ki pathri ka upchar

सामान्य अवस्था में गुर्दे की पथरी के लिए ये उपचार किये जाते है :-

लिथोट्रिप्सी

लिथोट्रिप्सी आवाज की तरंगों ( Sound Waves ) के द्वारा  पथरी का चूरा बनाकर पेशाब के माध्यम से निकालने का तरीका है। यह बिना चीरा आदि लगाए बाहर से ही मशीन से की जाती है।

इसे करते समय एनीस्थेसिया देकर बेहोश किया जाता है। लिथोट्रिप्सी करने में लगभग एक घंटे का समय लग सकता है। इस प्रक्रिया में पेट पर या पीठ पर नील पड़ सकती है। इससे  किडनी या आसपास के अंगों में कुछ रक्तस्राव भी हो सकता है। लेकिन ये सब सामान्य होता है। हॉस्पिटल से एक दिन में ही छुट्टी मिल जाती है।

 

यूरेटेरोस्कोपी

यदि पथरी मूत्रनली में या पेशाब की थैली में फंस जाती है तो इसे एक विशेष यंत्र युरेटेरोस्कोप द्वारा निकाला जाता है। इसमें कैमरा आदि की मदद से पथरी को पकड़ कर बाहर खींच लिया जाता है।

गुर्दे की पथरी के घरेलु उपाय – Kidney Stone Home Remedies

Gurde ki pathree ke gharelu nuskhe

—  पथरी होने से बचने का मुख्य तरीका पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का उपयोग होता है। पानी पर्याप्त मात्रा में जरूर पीना चाहिए। इसके अलावा शिकंजी , शरबत , छाछ , जूस , नारियल पानी , सूप आदि लेने चाहिए । इससे  किडनी की सफाई होती रहती है और पथरी नहीं बनती।

तुलसी के बीज का चूर्ण 20 ग्राम , खाने का सोडा 10 ग्राम मिला लें। इसमें से आधा चम्मच सुबह और आधा चम्मच शाम को छाछ के साथ लेने से पथरी गल कर निकल जाती है। इसे लेने से दुबारा पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है।

—  तुलसी के सूखे पत्ते 20  ग्राम , अजवाइन  20 ग्राम , सेंधा नमक 10  ग्राम। ये तीनो मिलाकर बारीक पीस लें। इसमें से आधा चम्मच सुबह और आधा चम्मच शाम को गुनगुने पानी के साथ लेने से पथरी के दर्द में बहुत आराम मिलता है।

— पपीते की जड़ सूखा कर पीस लें। यह चूर्ण दो चम्मच लेकर आधा गिलास पानी में रात को भिगो दें। सुबह छान कर इसे पी लें। 21 दिन लगातार इस प्रयोग से पथरी पेशाब के साथ निकल जाती है।

—  कुलथी के उपयोग से पथरी में बहुत लाभ होता है। कुलथी की दाल बना कर खाएं ।

20  ग्राम कुलथी एक गिलास पानी में डालकर उबालें। जब पानी चौथाई रह जाये तब छानकर गुनगुना पिएँ। इसे सुबह शाम इस तरह कुछ दिन लेने से पथरी निकल जाती है ।

—  पिसे हुए जवाखार , गोखरू और पत्थरचट 2 -2 ग्राम मिलाकर पानी के साथ कुछ सप्ताह तक लेने से पथरी मिट जाती है।

—  मूली का रस 25 ग्राम तथा यवक्षार एक ग्राम मिलाकर लेने से पथरी गल कर निकल जाती है।

— एक गिलास पानी में एक नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर सुबह शाम लगातार कुछ सप्ताह तक पीने से पथरी निकल जाती है।

— करेला पथरी में फायदा करता है। दो करेले के रस और एक कप छाछ मिलाकर कुछ दिन लगातार पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।

—  छाछ में अजवाइन का चूर्ण मिलाकर पीने से किडनी स्वस्थ रहती है। इससे चेहरे की सूजन कम होती है।

—  आधा गिलास मूली के पत्ते सहित रस में नींबू का रस और काली मिर्च मिलाकर कुछ दिन लगातार पीने से पथरी गल कर निकल जाती है।

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