चाँदी का वर्क नुकसानदेह या फायदेमंद – Silver warak on sweets

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चाँदी का वर्क Silver Leaf चांदी से बनी हुई बहुत बारीक़ परत होती है। मिठाई के ऊपर जैसे काजू कतली , बेसन चक्की , बंगाली मिठाई आदि पर इसे जरूर लगाया जाता है । यह फायदेमंद है या नुकसानदायक आइये जानें।

वर्क लगी मिठाई शानदार दिखती हैं। मिठाई के अलावा चांदी का वर्क सजावट के लिए पान , मीठी सुपारी ,इलायचीखजूर , च्यवनप्राश आदि पर भी लगाया जाता है।

वर्क लगी हुई मिठाई या अन्य वस्तु खाते समय मन में थोड़ी बहुत जरुर शंका होती है कि जो वर्क पेट में जा रहा है वो कहीं नुकसान तो नहीं करेगा। आइये देखें वर्क क्या होता है , वर्क कैसे बनता है और चांदी का वर्क फायदा करता है या नुकसान।चाँदी का वर्क

कृपया ध्यान दे : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं। 

वैज्ञानिक दृष्टि से चांदी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते है जो मिठाई को लम्बे समय तक ख़राब होने से बचा सकते हैं। इसी गुण के कारण इसे उपयोग में लेने का चलन शुरू हुआ। लेकिन वक्त के साथ यह सिर्फ सजावट का माध्यम बन गया है। इसे किसी भी खाने की चीज पर लगाने से उसमे एक अलग ही आभा प्रकट होने लगती है।

चांदी का वरक भगवान की मूर्ति जैसे हनुमान जी या गणेश जी की मूर्ति पर लगाकर उनकी शोभा भी बढ़ाई जाती है।

चाँदी का वर्क कैसे बनता है

Varak banane ka tarika

चांदी के वर्क बनाने के लिए चमड़े का उपयोग किया जाता है। चांदी को चमड़े में रख कर विशेष प्रकार के हथौड़े से लम्बे समय तक कूट कूट कर पतला किया जाता है। जिससे पतली झिल्ली जैसी परत बन जाती है , इसे ही चांदी का वर्क कहते हैं।

इसे निकाल कर कागज में रखा जाता है। फिर पैक करके बेचा जाता है। पशु के चमड़े पर से यह आसानी से उतर जाती है। इसलिए इसे चमड़े में रखकर हथोड़े से कूटा जाता है। इस विधि से बने हुए वरक warak पूजा , व्रत आदि में काम लेने योग्य नहीं होते।

वर्तमान में वर्क बनाने के लिए पशु के किसी भी अंग के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। इसे अब जर्मन बटर पेपर नामक शीट पर या विशेष प्रकार से बनाये गए काले कागज की मदद से बनाया जाता है।

इसके अलावा इसे बनाने में फ़ूड ग्रेड कैल्शियम पाउडर का उपयोग किया जाता है। चांदी के वर्क अब मशीन की मदद से बनाये जाते है। इस प्रकार के बनाये गए वरक wrk पूजा में काम लिए जा सकते हैं। इन्हे भगवान की मूर्ति पर भी लगाया जा सकता है।

चाँदी का वर्क फायदा करता है या नुकसान

Silver leaf ke fayde nuksan

मिठाई के एक टुकड़े के साथ चांदी के वर्क की बहुत कम मात्रा ही पेट में जाती है। शुद्ध चांदी से बने वर्क सीमित मात्रा में शरीर के लिए नुकसान देह नहीं होते हैं। लेकिन अधिक मात्रा या नियमित उपयोग नुकसान देह हो सकता है।

चांदी का अधिक मात्रा में शरीर में जाना अर्जिरिया नामक बीमारी की वजह बन सकता है जिसमे त्वचा नीली जैसी हो जाती है। इसके अलावा इसे बनाते समय साफ सफाई और शुद्धता का ध्यान नहीं रखा गया हो तो यह बीमारी का कारण बन सकता है।

चांदी के नकली वर्क बहुत नुकसानदायक हो सकते है। इनसे लीवर , फेफड़े या किडनी की बीमारी होने की सम्भावना हो सकती है। विशेष कर अल्युमिनियम से बनाये वर्क अधिक नुकसानदेह होते हैं।

चाँदी का वर्क नकली या मिलावटी

चांदी के वर्क से सम्बंधित कुछ विचलित करने वाली बातें सुनने में आती है। जैसे यह कि कुछ लोग नकली वर्क भी बनाते हैं। शुद्ध चांदी के बजाय एल्युमिनियम के या मिलावटी वर्क बनाये जाते हैं।

अल्युमिनियम एक भारी धातु है जो शरीर के लिए नुकसानदेह होती है। एल्युमिनियम के बर्तन और फॉइल नुकसान के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

FSSAI ने चांदी के वर्क के संदर्भ में नियम जारी किये है जिसके अनुसार सिर्फ 99 .9 % शुद्ध चांदी से ही वर्क बनाये जाने चाहिए। शुद्ध चांदी के वर्क ही खाने योग्य होते  हैं। नियम की पालना किस हद तक होती है यह एक अलग बहस का विषय हो सकता है।

भारत में ITRC द्वारा की गई छानबीन के अनुसार बाजार में मिलने वाले वर्क में लगभग 10% एल्युमिनियम के पाए गए। बाकि के 90 % में से लगभग 60% में शुद्ध चांदी नहीं पाई गई। इनमें कॉपर , क्रोमियम , निकल , लेड तथा केडमियम आदि धातुओं की मिलावट पाई गई थी।

Ref :  toxic metal contaminants in food-grade silver foils

वर्क की शुद्धता बनाये रखने के सन्दर्भ में मजबूती से पालना नहीं हो पाती है। अतः वर्क लगी मिठाई खाने से पहले इस बात पर गौर जरूर कर लेना चाहिए।

असली वर्क की पहचान – Asli Warak ki pahchan

—  असली चांदी का वर्क इतना पतला होता है कि उसे अंगुली और अंगूठे के बीच मसलने पर वह गायब हो जाता है , नजर नहीं आता । जबकि मिलावट वाला वर्क मसलने पर धातु की गोली बन जाती है।

—  मिलावटी या नकली वर्क असली वर्क की अपेक्षा मोटा होता है।

—  चाँदी का वर्क उच्च श्रेणी के भरोसेमंद ब्रांड का होने से शुद्धता का भरोसा किया जा सकता है।

—  पैकेट पर पेकिंग की डेट चेक करके ही लेना चाहिए। पुराना होने पर काला हो सकता है।

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