टाइफाइड का कारण लक्षण इलाज और परहेज – Typhoid Fever

टाइफाइड बुखार को मोतीझरा Motijhara , दानों वाला बुखार , मियादी बुखार Miyadi Bukhar तथा आंत्रिक ज्वर Antrik jvar आदि

नामों से भी जाना जाता है। यह बुखार ” सेलमोनेला टाइफी ” नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। इस बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने

पर आठ से तीस दिन बाद इसके लक्षण पैदा होने लगते हैं। ये लक्षण कम या ज्यादा हो सकते हैं। इसमें लगातार बुखार आना , कमजोरी , पेट

में दर्द , भूख बंद होना ,कब्ज , सिरदर्द , जी घबराना आदि होने लगते हैं।  कुछ समय बाद किसी किसी को छाती पर लाल रंग के दाने हो जाते

हैं। यदि समय पर उपचार ना हो तो बुखार लम्बे समय तक आता रहता है और शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। बुखार तेज होता है , यह

104 – 105  डिग्री तक भी हो सकता है। इसका बुरा प्रभाव लीवर तथा पित्ताशय पर भी पड़ता है।

 

टाइफाइड

 

टाइफाइड का बैक्टीरिया इंसान के आँतों में तथा रक्त में रहता है । इससे ग्रसित व्यक्ति के मल में यह बैक्टीरिया मौजूद होता है। सफाई

आदि का उचित ध्यान नहीं रखने के कारण या मक्खी , मच्छर आदि के माध्यम से यह बैक्टीरिया खाने पीने की चीजों के द्वारा दूसरे व्यक्ति में

प्रवेश कर जाता है। यह बैक्टीरिया सिर्फ इंसानो पर असर करता है। टाइफाइड का वेक्सीन यानि टीका उपलब्ध है।

 

टाइफाइड के लक्षण – Typhoid Symptoms

 

पहले सप्ताह में बुखार धीरे धीरे बढ़ता है। बुखार के साथ दिल की धड़कन कम या ज्यादा हो सकती है , सिरदर्द , कफ आदि होने लगते है और

परेशानी होने लगती है। कुछ लोगों को नाक से खून आ सकता है। रक्त में सफ़ेद कण कम हो जाते हैं। पेट दर्द भी हो सकता है। ब्लड कल्चर

करने पर बैक्टीरिया पॉजिटिव आता है। पहले सप्ताह में सामान्यतः विडाल टेस्ट नेगेटिव आता है।

 

दूसरे सप्ताह में बहुत कमजोरी आ सकती है। बुखार 104 डिग्री तक होने लगता है। धड़कन असामान्य हो जाती है। कुछ लोगों के पेट और

छाती के निचले हिस्से में लाल दाने उभरने लगते हैं। साँस या खांसी में अलग तरह की आवाज आने लगती है। पेट में दर्द और पेट की तकलीफ

बढ़ जाती है और पेट में गुगुड़ाहट की आवाजें आती हैं। इस समय दस्त भी हो सकते हैं। अलग प्रकार की बदबू वाले हरे रंग के दस्त होते हैं।

कभी कभी कब्ज भी हो सकती है। लीवर और तिल्ली ( Spleen ) में सूजन आ सकती है। इस समय विडाल टेस्ट पॉजिटिव आता है।

इस बुखार की विशेष बात यह है कि दूसरे सप्ताह तक बुखार सामान्यतः दिन के समय तेज रहता है।

 

तीसरे सप्ताह में कुछ अन्य परेशानी भी हो सकती है जो इस प्रकार हैं –

 

—  आतों में रक्त का रिसाव हो सकता है जो मल में दिखाई देने लगता है। यह चिंता की बात होती है। इसका तुरंत इलाज होना चाहिए।

—  दिमाग में सूजन आ सकती है जिसके कारण तेज सिरदर्द , चक्कर आना , अत्यधिक थकान आदि होने लगते हैं।

—  मांसपेशियों में ऐंठन , दांत किटकिटाना आदि हो सकते हैं।

—  अजीब अजीब चीजें दिखना जैसे कोई सपना आ रहा हो , अजीब सी रौशनी , रंग , आकार आदि दिखना ,अजीब से आवाजें आना हो

सकता है।

—  न्यूमोनिया या ब्रोंकाइटिस होने की सम्भावना होती है।

—  गॉल ब्लेडर में सूजन और दर्द हो सकता है।

—  हड्डियों में दर्द होता है।

 

तेज बुखार जारी रहता है। बहुत कम समय के लिए उतरता है फिर चढ़ जाता है। पानी की कमी यानि डिहाइड्रेशन होने की सम्भावना होती है।

और मरीज चेतना शून्य सा होने लगता है। पेट और छाती पर लाल दाने और चकत्ते फैल जाते हैं। चौथे सप्ताह के शुरू होने पर बुखार कम

होना शुरू हो जाता है।

कृपया ध्यान दे : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं।

टाइफाइड होने का कारण – Cause of Typhoid

 

टाइफाइड होने का मुख्य कारण साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना होता है। बाजार में खुले में रखी खाने पीने की चीजों का सेवन करना ,

टाइफाइड से ग्रसित व्यक्ति का झूठा खाना पीना , संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़ाया जाना आदि भी इसके फैलने के कारण बनते हैं। संक्रमित

व्यक्ति के मल में यह बैक्टीरिया होता है। इस मल पर मक्खी मच्छर के बैठने के बाद यह कीट खाने पीने की चीज पर बैठ जाये तो बैक्टीरिया

मक्खी के पैरों के माध्यम से खाने पीने की चीजों पर आ जाते है। ऐसी वस्तु जो भी ख़ाता है उसे भी टाइफाइड हो जाता है। इस प्रकार यह

बीमारी एक से दूसरे को फैलती रहती है।

 

यदि संक्रमित व्यक्ति शौच जाने के बाद हाथों को अच्छे से नहीं धोता और उन्ही हाथों से दूसरे लोगों के लिये खाना बनाता है तो ऐसा खाना खाने

वाले को यह बुखार हो सकता है। कभी कभी सीवरेज की लाइन और पीने के पानी की पाइप लाइन पास पास होती है। ऐसे में किसी कारण

से सीवर लाइन का पानी पीने के पानी वाली पाइप लाइन में चला जाये तो ऐसा पानी मियादी बुखार सहित कई बीमारियों के फैलने की वजह

बन सकता है।

 

टाइफाइड का टेस्ट – Test for Typhoid

 

रक्त की या मल की जाँच कराने तथा विडाल नामक टेस्ट कराने से पता चलता है कि बुखार टाइफाइड या मोतीझरा है या नहीं। विडाल टेस्ट

करने में समय लगता है तथा कभी कभी इसकी रिपोर्ट सही नहीं आती है। टाइफाइड का एक अन्य टेस्ट भी होता है जिसे टाइफीडोट कहते है।

इससे दो तीन दिन के बाद ही टाइफाइड का पता चल जाता है। चिकित्सक के बताये अनुसार टेस्ट कराना उचित होता है।

 

टाइफाइड से बचने के उपाय – Protection and prevention

 

टाइफाइड से बचने के लिए साफ सफाई का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। इसके कीटाणु इंसान के मल में होते हैं अतः खुले में शौच नहीं

चाहिए जाना , शौच के बाद सही तरीके से हाथ धोने चाहिए  , खुले में रखी खाने पीने की चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए। दूसरे

व्यक्ति का झूठा खाने पीने से बचना चाहिए। पीने के पानी को शुद्ध करके या उबाल कर पीना चाहिए। खाने पीने की चीजें हमेशा ढ़ककर

रखनी चाहिए। मक्खियों को मिटाने के प्रयास करने चाहिए। मक्खी दूर करने के शानदार उपाय जानने के लिए यहाँ क्लीक करें

 

टाइफाइड का टीका  – Typhoid Vaccine

 

टाइफाइड का टीकाकरण दो प्रकार से हो सकता है। पीने की दवा के रूप में तथा इंजेक्शन के रूप में । पीने की दवा हर पांच साल तथा

इंजेक्शन हर दो साल में लेना पड़ता है। यह महंगा नहीं होता है और कारगर होता है। टाइफाइड फैलने की संभावना हो तो टीका अवश्य लगवा

लेना चाहिए।

 

टाइफाइड में खाना पीना और परहेज – Typhoid Parhej

 

बुखार में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है अतः खाने पीने का ध्यान रखना चाहिए। खाने पीने में ऐसी चीजें ही लें जो आसानी से पच जाये और

पेट में किसी प्रकार की जलन आदि पैदा ना करे। तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना ठीक रहता है। फलों का उपयोग अच्छा होता है ,इससे

प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। परन्तु अत्यधिक खट्टे या अधिक रेशे वाले फल ना लें। खाना पीना बंद नहीं करना चाहिए अन्यथा अधिक

कमजोरी आ जाती है। परहेज का ध्यान रखें। जितना हो सके पूरा आराम करें। समय पर दवा लें। दवा का कोर्स पूरा करें। बीच में दवा लेना

बंद न करें।

 

क्या खायें पीयें –

 

फल जैसे पपीता , सेब , चीकू , अनार आदि।

जूस में मौसमी का जूस , संतरे का जूस पानी मिलाकर , नारियल पानी आदि ले सकते है।

बिना घी लगी पतली चपाती।

मूंग दाल का पानी या पतली दाल।

दलिया ,  मूंग दाल की खिचड़ी।

ताजा छाछ

बीज निकले मुनक्का , कम मात्रा में अंजीर

मलाई निकला हुआ दूध  Tonned milk ले सकते है।

सबसे जरुरी – समय पर और दवा का पूरा कोर्स ।

 

परहेज , क्या नहीं खायें पीयें  –

 

पचने में भारी चीजें जैसे उड़द दाल , भिंडी , पत्ता गोभी , शिमला मिर्च आदि।

ज्यादा घी , तेल , मक्खन , मिठाई आदि

फ़ास्ट फ़ूड जैसे पिज्जा , बर्गर आदि।

तला हुआ खाना कचोरी , समोसे , नमकीन आदि।

अधिक खट्टे फल जैसे अनानास ना लें।

मिर्च मसाले युक्त भोजन।

लहसुन , प्याज।

मांस , मछली।

शराब , सिगरेट , कोल्ड ड्रिंक।

ज्यादा चाय , कॉफी।

 

टाइफाइड का घरेलु उपचार – Typhoid ke gharelu nuskhe

 

—  2 ग्राम खूब कला , 4 अंजीर और 10 मुनक्का ( बीज निकाल दें ) पीस कर चटनी बना लें। यह चटनी सुबह और शाम को नियमित खाएं।

टाइफाइड में लाभ होता है।

 

—  दो गिलास पानी में पांच लौंग डाल कर आधा रहने तक उबालें। फिर छान लें और ठंडा होने दें। यह पानी टाइफाइड में पीने से टाइफाइड

जल्दी ठीक होता है।

 

—  तुलसी के पत्ते – 8 -10 और 3 -4 काली मिर्च लेकर बारीक़ पीस लें। इसमें थोड़ा पानी मिला लें। इसे लेकर आधा गिलास पानी पी लें। यह

दिन में दो बार लें। इससे टाइफाइड जल्दी ठीक होता है।

—  गिलोय घनवटी 2  गोली दिन में तीन बार , ज्यादा बुखार हो तो एक गोली सुदर्शन घनवटी और ज्वर नाशक क्वाथ एक चम्मच लेने से

टाइफाइड बुखार में आराम मिलता है। इन्हे चिकित्सक से सलाह करने के बाद और उनके कहे अनुसार ही लें।

 

—  एक गिलास ताजा छाछ में एक चम्मच धनिया पत्ती का रस मिला कर सुबह शाम लेने से टाइफाइड में आराम मिलता है।

 

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Disclaimer : The above mentioned has been given for informational purpose only and have been put together from the various published media and internet. For any treatment proper expert advice is recommended.

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