तिल चौथ , माही चौथ , सकट चौथ व्रत विधि – Til chauth , Mahi , sankat chauth

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तिल चौथ Til Chauth का व्रत माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है। इसे माही चौथ  Mahi Chauth  व सकट चौथ sakat Chauth  के नाम से भी जाना जाता है। सकट शब्द संकट का अपभ्रंश हैं।

गणेश जी ने इस दिन देवताओं की मदद करके उनका संकट दूर किया था। तब शिवजी ने प्रसन्न होकर गणेश जी को आशीर्वाद देकर कहा कि आज के दिन को लोग संकट मोचन के रूप में मनाएंगे। जो भी इस दिन व्रत करेगा उसके सब संकट इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाएंगे। अतः इसे संकट चौथ sankat chauth भी कहते हैं।

तिल चौथ

इस दिन गणेश जी तथा चौथ माता की पूजा की जाती है। तिलकुट्टा बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। शाम के समय चाँद निकलने पर चाँद को अर्ध्य दिया जाता है। उसके बाद व्रत खोल जाता है। व्रत खोलने के लिए पहले तिलकुट्टा खाते है , फिर भोजन किया जाता है।

तिल चौथ , माही चौथ , संकट चौथ 2019 कब है

इस वर्ष तिल चौथ जिसे तिलकुटा चौथ Tilkuta chauth या संकष्ट चतुर्थी sankasht chaturthi के नाम से भी जाना जाता है – 24 जनवरी , गुरुवार को है।

तिल चौथ से एक दिन पहले ही यानि तीज के दिन सिर धोना चाहिए या मेहंदी लगाना आदि कर लेने चाहिए । चाहे तो तिलकुट्टा भी तीज के दिन ही बना कर रख सकते है।

तिलकुट्टा बनाने की विधि – Tilkutta vidhi

सामग्री  :

सफ़ेद तिल     –  200  ग्राम

गुड़ या बूरा     –  125  ग्राम

विधि  :

सफ़ेद तिल को साफ करके सेक लें। ठंडा होने पर ग्राइंडर में मोटा पीस लें इसे बारीक नहीं करना है । गुड़ को कददू कस करके तिल के साथ ग्राइंडर में एक बार थोड़ा सा घूम कर मिक्स कर लें। तिलकुट्टा तैयार है। चाहें तो गुड़ की जगह बूरा चीनी भी डाली जा सकती  है।

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तिल चौथ की पूजा विधि – Til Chauth pooja vidhi

—  एक पट्टा धोकर साफ कर लें। उस पर साफ कपड़ा बिछा दें।

—  पाटे पर थोड़े गेंहू व गणेश जी की प्रतिमा या फोटो रखे।

—  एक लोटा पानी से भरकर पाटे पर रखें।

—  एक पूजा की थाली तैयार करें। इसमें रोली , चावल , लच्छा , मेहंदी , थोड़े गेंहू , गुड़ ,साबुत तिल , तिल कुट्टा  व दक्षिणा के पैसे रखें।

—  पाटे पर जो गेंहू रखें है उस पर चौथ ( यदि उद्यापन करके बनवा रखी हैं ) रखें।

—  यदि चौथ बनवाई हुए नहीं  हो तो चाँदी की कोई वस्तु जैसे अंगूठी या सिक्का आदि को चौथ माता के रूप में रखकर पूजा की जा सकती है।

—  पाटे के चारो तरफ एक-एक  बिंदी रोली से लगा दें। लोटे पर स्वस्तिक बना दें और कुमकुम से तेरह बिंदी लगा दें।

—  अब पूजा शुरू करें।

—  पहले गणेश जी की पूजा करें।

—  जल का छींटा देकर स्नान कराएं।

—  फिर रोली का टीका लगाकर अक्षत ( चावल ) अर्पित करें  , लच्छा चढ़ायें।

—  पुष्प या फूल माला अर्पित करें।

—  दक्षिणा के रूप में कुछ पैसे चढ़ाएं।

—  तिलकुट का लडडू बनाकर गणेश जी को भोग लगाये। श्रद्धा पूर्वक नमन करें।

—  इसी प्रकार चौथ माता की पूजा करें। नमन करें।

—  फिर हाथ में तिल , गुड़ व आखे (साबुत गेंहू ) लेकर तिल चौथ की कहानी सुने।

तिल चौथ की कहानी के लिए यहाँ क्लीक करें

—  गणेशजी की कहानी सुने ।

गणेश जी की कहानी के लिए यहाँ क्लीक करें

—  चौथ माता का गीत गाएँ। गीत नीचे बताया गया है।

—  गणेश जी और अपने इष्ट देव की आरती गाएँ।

—  इस प्रकार पूजा संपन्न होती है।

—  अब थोड़ा तिलकुट्टा प्रसाद के रूप में खाएं।

—  कथा सुनते समय हाथ में लिए गए तिल , गुड़ और आखे से तथा लोटे के पानी से चाँद उगे तब अर्घ्य देना चाहिए।

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चाँद को अर्घ्य देते समय ऐसे बोलना चाहिए  :

चंदा हेलो उगीयो , हरिया बांस कटाय ,साजन ऊबा बारने , आखा पाती लाय ,
सोना की सी सांकली गले मोतियां रो हार , तिल चौथ का चाँद ने अरग देवता , जीवो वीर भरतार।

तिलकुट्टे पर रूपये रख कर बायना निकाल कर सासू  माँ को दें। पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें। उनकी अनुपस्थिति में बायना जेठानी या ननद को दिया जा सकता है। इसके बाद पहले तिलकुट्टा और फिर खाना खाएँ ।

दूसरे दिन चौथ माता या चाँदी की वस्तु जो भी आपने पूजा में रखी थी , वह संभालकर अपने पास रख लें तथा बाकि सभी सामान मंदिर में या ब्राह्मण को दे दें।

कृपया यह पोस्ट बुकमार्क करके रख लें ताकि तिल चौथ वाले दिन इसका उपयोग आसानी से कर सकें।

बुकमार्क करने का तरीका – मोबाइल में ऊपर दायीं तरफ के तीन डॉट पर क्लिक करें फिर स्टार पर क्लिक करें। जब भी दुबारा पोस्ट देखनी हो तो तीन डॉट पर क्लिक करके लिस्ट में बुक मार्क पर क्लिक करें यह पोस्ट खुल जाएगी )

तिल चौथ का उद्यापन , उजमन

Til Chauth ka udyapan

तिल चौथ का उद्यापन जिस साल घर में लड़के का जन्म हुआ हो या लड़के की शादी हो उस साल किया जाता हैं। तिल चौथ का उद्यापन के दिन तीन पाव ( 750 ग्राम ) तिल व आधा किलों गुड़ या बूरा लेकर तिलकुट्टा बनाया जाता है।

इससे लगभग सवा किलोग्राम तिलकुट्ट बनता है। तेरह सुहागिन महिलाओं को तिलकुट्टा खिलाकर भोजन कराया जाता है। सासु माँ को बायना दिया जाता है। चौदह प्लेट में तिलकुट्ट की की चौदह ढेरियां बनायें ।

इनके साथ सासु माँ के बायना के लिए साड़ी , ब्लाउज़ व श्रध्दानुसार रूपये रखें। ऊपर बताये अनुसार पूजा करें। तिल चौथ की कहानी सुने। श्रद्धा पूर्वक चौथ माता को नमन करके विनती करें और कहें –

 ” हे चौथ माता ! आपकी कृपा से मैं उद्यापन कर रही हूँ आशीवार्द प्रदान करना।
 मुझ पर और मेरे परिवार पर कृपा बनाए रखना “

अब सबसे पहले बायना सासू माँ को दें। उनका आशीर्वाद ले। साथ में फल व मिठाई आदि भी दे सकते है ।

इसके बाद बची हुई तेरह ढेरियों से तेरह सुहागन औरतो को खाना खिलाते समय पहले तिलकुट्टा परोसें  फिर भोजन करायें । खाना खिलाने के बाद विदा करते समय एक प्लेट में थोड़ा तिलकुट्टा साथ ले जाने के लिए दें।

तिल चौथ के उजमन के समय जिमाने के लिए  हलवा , पूरी , सब्जी , मिठाई , नमकीन आदि बनाये जाते है। यदि घर पर बुलाकर खाना खिलाना सम्भव न हो तो तेरह जगह खाने की थाली निकाल कर व बाँटने वाले बर्तन (कटोरी /प्लेट ) में तिल कुट्टा डाल कर तेरह सुहागनों के घर भी भिजवा सकते हैं।

चौथ माता का गीत – Chauth mata ka Geet

चौथ चन्दरावल  म्हारी माय , उभा उभा सुरजजी बिनव मोरी माय।

राज पाटरी माता तूही रखवाल , चौथ चन्द्रावल तू ही रखवाल।

उभी उभी सासू बवा बिनव मोरी माय ,

उभी उभी दिवर जिठाण्या बिनव मोरी माय।

चुड़ा चुंदड़ की माता तू ही रखवाल , दुधा जोबन माता तू ही रखवाल।

भाई भतीजा माता तू ही रखवाल , चौथ चन्द्रावल….

चौथ माता की… जय !!!

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