निमोनिया के लक्षण सावधानी और उपचार – Pneumonia symptom and care

निमोनिया Pneumonia फेफड़ों में होने वाला एक तीव्र संक्रमण है , जो घातक भी हो सकता है । यह एक या दोनों फेफड़ों में हो सकता है।

यूनिसेफ के अनुसार भारत समेत दुनिया भर में यह संक्रमण 5 साल से छोटे बच्चों की मृत्यु का एक मुख्य कारण है। निमोनिया बैक्टीरिया ,

वाइरस या फंगी के कारण हो सकता है। जिसमे से स्ट्रेप्टोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला निमोनिया सबसे ज्यादा होता है।

इसके लिए टीका उपलब्ध है।

 

इनके अलावा एस्पिरेशन न्यूमोनिया भी होता है। यह खाने पीने का सामान , लार व उल्टी आदि का फेफड़े में चले जाने के कारण होता है।

दिमागी चोट के कारण या किसी विषैली वस्तु के प्रभाव से निगलने की प्रक्रिया बाधित होने से ऐसा हो सकता है।

 

न्यूमोनिया वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है पर 2 साल से छोटे बच्चे और 65 साल से अधिक उम्र के वृद्ध लोगों को इसका खतरा

अधिक होता है। किसी बीमारी से ग्रस्त , बीड़ी सिगरेट व शराब का अधिक उपयोग करने वाले लोगों को यह ज्यादा परेशान कर सकता है।

सारी दुनिया में 12 नवम्बर निमोनिया दिवस के रूप में घोषित है ताकि निमोनिया के प्रति जागरूकता बढ़े।

 

निमोनिया के लक्षण – Pneumonia symptoms

निमोनिया

निमोनिया के लक्षण हल्के फुल्के या तीव्र हो सकते हैं। इनमे कुछ लक्षण इस प्रकर हैं –

 

—  कम या तेज बुखार आना

—  कंपकंपी छूटना

—  खांसी

—  सिरदर्द

—  साँस लेने में दिक्कत

—  साँस लेने या खासते समय छाती में तेज दर्द

—  हृदय की धड़कन तेज होना

—  जी घबराना और उल्टी होना

—  थकान

—  भूख ना लगना

 

निमोनिया का टेस्ट – Pneumonia Diagnosis

 

लक्षण और हालात देखकर चिकित्सक निमोनिया होने का अंदाजा लगा सकते है। फेफड़े का एक्स-रे और सीटी स्कैन के माध्यम से निमोनिया

की सही स्थिति का पता चल पाता है। रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगाने के लिए अंगुली या कान पर सेंसर लगाया जाता है। खून ,

कफ या पेशाब की जाँच से भी पता लगाया जाता है।

 

इसके अलावा आवश्यकता होने पर ब्रोंकोस्कोपी की जा सकती है। इसमें पतली नली फेफड़ों में डालकर अंदर की स्थिति देखी जाती है।

 

क्या निमोनिया एक से दूसरे को होता है

 Is Pneumonia Contagious

 

जी हाँ , यह एक से दूसरे को लग सकता है। लेकिन अधिकतर न्यूमोनिया बहुत तेजी से नहीं फैलते ।

दो प्रकार के न्यूमोनिया – माइकोप्लास्मा तथा ट्यूबरकुलोसिस  बैक्टीरिया वाले निमोनिया के एक व्यक्ति से दूसरे को लगने की संभावना

अधिक होती है।

 

वाइरल और बैक्टीरिया वाले न्यूमोनिया से ग्रस्त व्यक्ति के छींकने या खांसने से कीटाणु हवा में तथा कई प्रकार की सतह पर फ़ैल जाते है।

इस हवा में साँस लेने वाले व्यक्ति को न्यूमोनिया हो सकता है या ऐसी जगह से हाथ लगने से यह हाथ के माध्यम से दूसरे को लग सकता है।

इसलिए हाथों की सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

 

फंगस के कारण होने वाला न्यूमोनिया इस तरह एक से दूसरे को नहीं फैलता है।

न्यूमोनिया जन्म के तुरंत बाद बच्चे को रक्त के माध्यम से हो सकता है।

यदि किसी को न्यूमोनिया है तो मास्क से नाक और मुँह ढकने से बचाव होता है।

 

निमोनिया का उपचार – Pneumonia treatment

 

इसका उपचार संक्रमण के प्रकार और उसकी तीव्रता पर निर्भर करता है। बैक्टीरिया के कारण निमोनिया हो तो डॉक्टर एंटीबायोटिक देते हैं।

समय पर दवा लेने से दो से तीन सप्ताह में यह ठीक हो जाता है। वाइरस के कारण होने वाला निमोनिया एंटीबायोटिक दवा से ठीक नहीं होता।

क्योकि एंटी बायोटिक दवा सिर्फ बैक्टीरिया पर असर करती है। इस प्रकार के निमोनिया के लिए होमियोपैथी की दवा अच्छा काम कर सकती

है।   कुछ लोगों को उपचार में अधिक समय लग सकता है या उपचार में दिक्कत आ सकती है विशेषकर उन लोगों को जिनकी प्रतिरोधक

क्षंमता कमजोर हो या डायबिटीज , अस्थमा , हृदय रोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त हों।

 

बच्चो को निमोनिया से बचाने के लिए PCV ( pneumococcal conjugate vaccine ) नामक टीका लगवाना चाहिए। यह टीका

बैक्टीरिया से होने वाले खतरनाक निमोनिया से बचाता है। इसे शिशु के जन्म से दूसरे , चौथे , छठे महीने में और उसके बाद 12 -15 वें महीने

में अथवा डॉक्टर की सलाह से लगवाना चाहिए। इसके अलावा पौष्टिक आहार , छः महीने तक सिर्फ स्तनपान , घर में धुआँ से बचाव ( बीड़ी ,

सिगरेट , चूल्हे में छाने या लकड़ी से धुआँ ) आदि का ध्यान रखने से बच्चों को होने वाले न्यूमोनिया से बचाव किया जा सकता है।

 

निमोनिया के घरेलु उपाय – Pneumonia Gharelu nuskhe

 

—  दो कप पानी में 25 ग्राम पोदीना , 10 ग्राम अदरक , 10 काली मिर्च , 15 पत्ते तुलसी डालकर उबालें। आधा रह जाये तब छानकर गुनगुना

रह  जाये तब पियें। सुबह शाम दो बार इसे लेने से निमोनिया में आराम आता है। बुखार , कफ , भूख में कमी आदि दूर होते हैं।

 

—  छोटे बच्चे को निमोनिया हो तो उसके कमरे में चौबीस घंटे शुद्ध देसी घी का मोटी बत्ती वाला दीपक जलाने से निमोनिया में आराम मिलता

है।

 

—  एक चम्मच तुलसी के पत्ते का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह शाम लेने से कफ़ और खांसी में बहुत आराम मिलता है।

 

—   चौथाई चम्मच तुलसी के पत्ते के रस में थोड़ी सी पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर दिन में तीन बार लेने से छाती में जमा बलगम साफ होता

है और दर्द में आराम मिलता है।

 

—  तुलसी के पत्ते – 20 और काली मिर्च – 15 इन दोनों को बारीक़ पीस लें। इसे आधा गिलास गुनगुने पानी में मिला दें। दिन में दो तीन बार यह

लेने से निमोनिया का असर कम हो जाता है।

 

—  आधा चम्मच अदरक का रस और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार लेने से कफ खांसी में और निमोनिया में आराम आता है।

 

—  एक गिलास पानी में आधा चम्मच दाना मेथी उबाल लें।  गुनगुना रहने पर कुछ बूँद नींबू का रस मिलाकर पियें। दिन में दो तीन बार लेने से

निमोनिया में आराम आता है।

 

—  निमोनिया में कच्चे लहसुन का उपयोग बहुत लाभदायक होता है। इससे हर प्रकार के निमोनिया में फायदा पहुंचता है। लहसुन पीस कर

छाती पर लगाने से भी निमोनिया ठीक होने में मदद मिलती है।

 

—  तारपीन का तेल पसलियों और छाती पर लगाकर कुछ देर कम्बल ओढ़ कर रहने से निमोनिया में होने वाले छाती के दर्द और तकलीफ में

आराम मिलता है।

 

—  गाजर , चुकंदर , पालक और ककड़ी का मिक्स जूस पीने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण दूर होने में मदद मिलती है।

 

—  गर्म पानी में नीलगिरी का तेल और पिपरमिंट का तेल मिलाकर भाप लेने से फेफड़ों में जमा कफ ठीक होता है। टी ट्री ऑइल की भाप लेने

से निमोनिया में आराम मिलता है।

 

न्यूमोनिया में ध्यान रखने योग्य बातें – Pneumonia Care

 

—  पूर्ण विश्राम करें।

—  तरल अधिक मात्रा में लें , पानी खूब पियें।

—  छींक और खांसी के समय ध्यान रखें।

—  धूम्रपान ना करें।

—  हल्का और सुपाच्य खाना लें। ठंडी चीजें ना लें। गर्म सूप आदि ले सकते है।

—  ठण्ड और सर्दी से बचाव करें।

—  फल आदि अधिक लें। लेकिन खट्टे और ठन्डे फल ना लें।

—  चावल , चीनी , दही आदि कफ बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ कम ही लें।

 

 

Disclaimer : इस लेख का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना मात्र है। निमोनिया घातक हो सकता है। किसी भी उपचार के लिए कृपया चिकित्सक

से सलाह अवश्य लें।

 

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