पैदल चलने और मॉर्निंग वाक के फायदे – Walking Benefits

पैदल चलना यानि walking एक ऐसी गतिविधि है जो प्रकृति ने इंसान को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए दी है। इंसान ने अपने

दिमाग का उपयोग करके इसके लिए कई विकल्प  तलाश कर लिए हैं। जैसे कार , स्कूटर , बस , ट्रैन आदि। इस वजह से इंसान का पैदल

चलना walk  बंद हो गया है।

 

पैदल चलना एक ऐसी गतिविधि है जिससे सारे शरीर को फायदा मिलता है और शरीर स्वस्थ बना रहता है। यह क्रिया बंद होने के कारण कई

प्रकार की शारीरिक परेशानी होने लगती है। डॉक्टर के पास जाने पर वह वॉक करने या पैदल चलने की सलाह देता है। तब मजबूर होकर

गार्डन में जाकर मॉर्निंग वाक शुरू करनी पड़ती है। इसे शुरू करने के बाद राहत भी महसूस होती है। अगर शुरू से मौका मिलने पर पैदल

चलने की आदत रखी जाये तो कई प्रकार की बीमारियों से बचाव हो सकता है। आइये जानते है पैदल चलने के फायदे और वाक करने का

सही तरीका।

पैदल

 

पैदल चलने के फायदे  – Walking Benefits

कृपया ध्यान दे : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं। 

 

वजन

पैदल चलने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है। बॉडी शेप में आती है। यदि नीचे के हिस्से यानि जाँघो और कूल्हों को शेप में लाना है तो

नियमित वाकिंग से अच्छा कुछ नहीं है। आधा घंटे की तेज चाल से लगभग 200 कैलोरी जल जाती है। पहले कभी कोई एक्सरसाइज नहीं की

है तो वाकिंग से शुरू करें। यह दर्द रहित वजन कम करने का अच्छा साधन हो सकता है। पर इससे बहुत अधिक वजन कम होने की आशा

ना करें।

 

मांसपेशी

वाक करने से शरीर की लगभग सभी मांसपेशी काम आती है और सभी की एक्सरसाइज हो जाती है। इससे उन्हें ताकत मिलती है।

शुरुआत में वाक करने से एक दो दिन थोड़ा दर्द हो सकता है।  फिर दर्द नहीं होता बल्कि अच्छा परिणाम मिलने से ख़ुशी होती है।

चलने से हाथ , पैर और पेट की माँसपेशियां मजबूत बनती हैं।

 

हृदय

पैदल चलना हृदय के लिए बहुत लाभदायक है। यदि रक्त में कोलेस्ट्रॉल अधिक हो तो ब्रिस्क वाक यानि तेज चाल से चलने से कम हो जाता है।

इससे हृदय की मांसपेशियों की कसरत हो जाती है और हृदय मजबूत होता है। नियमित वाक करने से ब्लड प्रेशर का स्तर सही बना रहता है

जो हृदय के लिए लाभदायक होता है।

 

मेनोपॉज के बाद पैदल घूमने वाली महिलाओँ में ब्लड प्रेशर अपेक्षाकृत कम पाया ,आधा घंटा रोजाना चलने वाली महिलाओं में हृदय रोग में

कमी पाई गई। पैदल चलना स्वस्थ रहने का सबसे आसान और अच्छा तरीका है।

 

जॉइंट पेन

अधिकतर जोड़ में मौजूद कार्टिलेज में सीधे तौर पर रक्त की सप्लाई नहीं होती है। उनको जोड़ों के बीच मौजूद द्रव से पोषण मिलता है। पैदल

चलने से इस द्रव में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। पैदल नहीं चलने से जोड़ों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जो उसके

क्षरण का कारण बन सकता है।

 

वॉक करने से रीढ़ की हड्डी के प्रत्येक अंग को फायदा मिलता है। पीठ को पोषक तत्व मिलते हैं और विषैले तत्व निकल जाते हैं। यह पीठ की

जकड़न कम करता है। इसके साथ कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से गतिशीलता बढ़ती है। वाक करने से हड्डी मजबूत बनती है। इससे जोड़ों

पर दबाव कम होता है और यह अर्थराइटिस के दर्द में आराम देता है।

 

मूड

पैदल चलने से मन को ख़ुशी मिलती है क्योंकि इससे एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव होता है। यह नर्वस सिस्टम पर अच्छा प्रभाव डालता है और

इससे गुस्सा और क्रोध कम होता है। इसके अलावा वाक करने के लिए जाने से साथ से , पडोसी से या दोस्त से संपर्क होता है। इससे

अकेलापन दूर होता है। मॉर्निंग वाक आपको प्राकृतिक रौशनी में ले जाता है। जिससे आपको विटामिन D प्राप्त होता है। यह भी मन अच्छा

होने का कारण बनता है। कभी भी मन ख़राब हो तो आधा घंटे की वॉक कर लें , मन अच्छा हो जायेगा।

 

अधिक ऑक्सीजन

पैदल चलने से साँस की गति बढ़ती है। इससे फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन का प्रवाह होता है। रक्त को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है। इससे

ऊर्जा का स्तर सुधरता है और स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। फेफड़े की भी कसरत हो जाती है और वे मजबूत होते हैं तथा उनकी कार्यविधि

में सुधार होता है।

 

याददाश्त

उम्र बढ़ने पर याददाश्त में कमी होने लगती है। नियमित पैदल चलने वाले लोगों में ऐसा होने की संभावना कम होती है। अर्थात वाक करने से

स्मरण शक्ति अच्छी बनी रहने में मदद मिलती है। इससे अल्जाइमर जैसी बीमारी होने की संभावना कम हो जाती है।

 

नींद

अच्छी नींद के लिए कई प्रकार की जरुरत वाक करने से पूरी हो सकती है। जैसे पेट हल्का रहना , मानसिक तनाव कम होना ,  हल्की

एक्सरसाइज होना । गार्डन में मॉर्निंग वाक करने के बाद थोड़ा प्राणायाम भी किया जा सकता है। इस तरह नियमित प्राणायाम हो जाता है

और प्राणायाम करने से भी अच्छी नींद आती है।

 

वॉक कैसे करनी चाहिए – How to walk

 

जितना तेज , अधिक दूरी तक और नियमित पैदल चलते हैं उतना ही अधिक फायदा मिलता है। लेकिन अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही

पैदल चलना चाहिए।  वाक करने का सही तरीका यह है –

—  गर्दन सीधी रखनी चाहिए।

—  सामने देख कर चलना चाहिए जमीन पर देख कर नहीं।

—   ठोड़ी जमीन के सामानांतर हो।

—   पेट थोड़ा अंदर खींच कर रख सकें तो अच्छा है।

—   कंधे सामान्य रूप से हिलने चाहिए।

—   पीठ सीधी रखें आगे या पीछे की तरफ झुका कर ना चलें।

—   हाथों को आजादी से हिलने दें  , कोहनी से थोड़े मुड़ते हों तो चलता है।

—  सामान्य चाल से चलें , जिसमे पैर की अंगुलियाँ , एड़ी , घुटने , आदि पूरे गतिशील हों।

 

वाक के लिए क्या पहनें – Walking shoe and cloth

 

जूते

वाक करने के स्पोर्ट्स वाले जूते जिनमे हवा के लिए जाली लगी होती है , पहनना अच्छा रहता है। कम हील वाले और आरामदायक जूते पहनें।

पैर की अँगुलियों पर चुभने नहीं चाहिए। ज्यादा ढ़ीले या टाइट नहीं होने चाहिए। मोज़े कॉटन वाले पहने। इनसे ग्रिप अच्छी रहती है और ये

पसीना सोख लेते हैं।

 

कपड़े

कपड़े आरामदायक हों जिनमे हवा लगती रहे।  मौसम के हिसाब से कपड़ों का चुनाव करें। सर्दी में गर्म और पूरी आस्तीन के कपड़े पहन

कर निकलें। सर्दी से जल्दी प्रभावित होते हों तो सिर और कान ढकने की व्यवस्था  वॉक पर जायें।

अक्सर वॉक करने के लिए गार्डन में जाते है। वहां मच्छर होने की संभावना होती है। अतः हाफ पेंट या बरमुडे की बजाय पजामा पहनना

अधिक उपयुक्त होगा। या फिर पैरों में मच्छर से बचाने अली क्रीम लगाकर जायें।

गर्मी के मौसम में पसीना जल्दी सोखने वाले हल्के कपड़े पहने।

 

वॉक कितनी देर करें – Walking Time

 

अधिकतर लोगों को पता नहीं होता कितना चलना चाहिए। एक्सपर्ट के अनुसार रोजाना कम से कम आधा घंटे चलना चाहिए। सप्ताह में पांच

दिन 45 मिनट चलने से भी लाभ मिल जाता है। कम उम्र में अधिक दूरी तक अधिक स्पीड में चल सकते हैं। 30 साल की उम्र तक तेज चाल से

चलने के साथ जॉगिंग कर सकते है या दौड़ भी सकते हैं। इस उम्र में घंटे डेढ़ घंटे तक यह कर सकते हैं।  30 से 50 तक की उम्र में 45 मिनट

चलना चाहिए। बीच बीच में गति धीमी कर सकते हैं। हल्की जोगिंग भी कर सकते हैं।  50 के बाद आधा घंटे पैदल चलना पर्याप्त होता है।

थकान लगती हो तो बीच में रुक कर बैठ सकते हैं। इससे मेटाबोलिज्म अच्छा रहता है।

 

वॉक पर जाते समय ध्यान देने योग्य बातें

 

—  वॉक पर जाने के लिए ऐसी जगह चुने जहाँ हवा शुद्ध हो और हरियाली हो , गन्दगी बदबू आदि न हो।

—  सुनसान जगह पर जाने की बजाय जहाँ कई लोग आते हो वहाँ वॉक के लिए जाएँ। विशेष कर महिलाओं के लिए सुरक्षा की दृष्टि से यह

ठीक रहता है।

—  महंगे गहने या चेन आदि पहन कर ना जायें। वॉक पर जाती समय चेन खिंचने जैसी घटनायें सुनने में आती रहती है।

—  जूते सही तरीके के पहने। जूते का सोल थोड़ा मोटा और गद्दीदार हो ताकि पैर को आराम मिले और झटके से नुकसान नहीं हो।

—  ऐसी जगह से सावधान रहें जहाँ रास्ता टूटा फूटा हो , गड्डे हों , खुले हुए मेनहोल हों , ऐसे पेड़ हों जिनकी डालियाँ नीचे लटकी हुई हों

और जिनसे चोट लगने की संभावना हो।

— शुरू में 5 -7 मिनट धीमी चाल से चलें। ताकि मांसपेशियाँ वार्म अप हो जाये। बाद में स्पीड बढ़ा सकते हैं। इसी प्रकार तेज चाल के बाद तुरंत

ना रुकें। 5 -7 मिनट में धीरे धीरे स्पीड कम करते हुए रुकें।

 

इस पर नजर रखें कि आप कितनी दूरी तक या कितने समय तक पैदल चले और किस चाल से चले। दिनों दिन खुद में सुधार होता देख

कर आपको ख़ुशी मिलेगी। आपका उत्साह बढ़ेगा और आप नियमित रहेंगे। इसके लिए मोबाइल में एप डाउन लोड किया जा सकता है।

आपको खुद को यह देखकर आश्चर्य होगा कि आप एक सप्ताह में या एक महीने में कितना चल लिए।

 

खुद से वादा करें कि रोज वॉक करनी ही है। यदि अकेले घूमना पसंद नहीं हो तो अपने जीवन साथी , पड़ौसी या दोस्त को साथ ले जाने के लिए

पूछ सकते हैं। या अपनी पसंद का संगीत सुनते हुए वॉक कर सकते हैं। एक ही जगह रोजाना जाने से ऊब होती हो तो जगह बदल कर जाएँ।

एक दो दिन किसी कारण से वॉक पर न जा पायें तो खुद को याद दिलायें कितना अच्छा महसूस होता था जब वॉक पर जाते थे। और वापस

वॉक शुरू कर दें।

 

याद रखिये इस ओर पहला कदम आपको एक शानदार मंजिल की तरफ ले जायेगा यानि – अच्छा स्वास्थ्य।

 

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