मेनोपोज़ रजोनिवृति के असर से कैसे बचें – How To Face Menopause

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मेनोपोज़ Menopause का अर्थ है महिलाओं में माहवारी पूर्ण रूप से बंद हो जाना तथा माँ बनने की क्षमता समाप्त होना। मेनोपॉज सामान्य रूप से 49 से 52 वर्ष की आयु में होता है। पर बहुत जल्दी या बहुत देर से भी हो सकता है।

लगातार एक वर्ष तक माहवारी नहीं हो तो इसे मेनोपोज़ कहा जाता है। यह ओवरी में एस्ट्रोजन हार्मोन्स का बनना कम हो जाने या रुक जाने से होता है। एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण सिर्फ माहवारी ही कंट्रोल नहीं होती बल्कि इसका प्रभाव  ह्रदय , हड्डियां , स्तन , त्वचा , बाल , दिमाग , तथा मूत्राशय पर भी पड़ता है।

मेनोपोज़ का माहवारी शुरू होने की उम्र से कोई संबंध नहीं होता है। माँ को जिस उम्र में मेनोपोज़ हुआ हो उससे थोड़ा बहुत अंदाज लगा सकते है की आपको मेनोपोज़ किस उम्र में होगा । मेनोपोज़ का पता लगाने के लिए किसी प्रकार का कोई टेस्ट सफल नहीं है। क्योकि हार्मोन का लेवल सामान्य तौर पर बहुत तेजी से कम ज्यादा होता रहता है

यदि किसी स्थिति में आपरेशन के द्वारा ओवरी निकाल दी जाती है तो तुरंत मेनोपोज़ हो जाता है। सर्जरी में यदि सिर्फ गर्भाशय निकाला जाये और ओवरी नहीं निकाली जाये तो माहवारी तो नहीं होती लेकिन ओवरी में हार्मोन बनते रहते है और ऐसे में प्राकृतिक तरीके से मेनोपोज़ होता है।

मेनोपोज़ एकदम से नहीं होता बल्कि यह धीरे धीरे होने वाला परिवर्तन है। जब मेनोपोज़ होने वाला होता है तब शरीर में कुछ परिवर्तन इसके संकेत हो सकते है। मेनोपोज़ किसी प्रकार का रोग या बीमारी नहीं होकर शरीर में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव मात्र है। मानसिक रूप से मजबूत रहकर इसे स्वीकार करने से परेशानी कम होती है।

मेनोपोज़

मेनोपोज़ के लक्षण – Symptom Of Menopause

मेनोपोज़ के कारण नीचे दिए गए लक्षण में से कुछ लक्षण महसूस हो सकते है। जिनसे आप मेनोपोज़ से गुजरने का अंदाजा लगा सकते है।

अनियमित माहवारी – Irregular Period

मेनोपोज़ होने से पहले माहवारी अनियमित हो सकती है । पीरियड कम या ज्यादा मात्रा में तथा कम या अधिक दिनों तक हो सकते है। यदि 45 वर्ष की उम्र का आस पास पीरियड मिस होता है और प्रेगनेंसी नही है तो यह मेनोपोज़ की शुरुआत हो सकती है।

हॉट फ्लेशेज़ ( गर्मी व पसीना ) – Hot Flash

मेनोपोज़ के लक्षणों में हॉट फ्लेशेज़ ( गर्मी व पसीना ) मुख्य है। जिसमे गर्मी का अनुभव होता है , तेज पसीना आ सकता है , कंपकंपी छूट सकती है  तथा चेहरा लाल हो सकता है , ह्रदय की धड़कन बढ़ सकती है ।

यह अहसास एक दो मिनट से लेकर 20 -25  मिनट तक रह सकता है। एकदम से गर्मी लगने लगती है फिर एकदम से सामान्य लगने लगता है। हर महिला में इसकी तीव्रता अलग हो सकती है।

गर्म लगना अक्सर चेहरे , हाथ या छाती से शुरू होता है या गर्दन के पिछले हिस्से या पूरे शरीर में भी हो सकता  है। छूने से गर्म भी लगता है त्वचा गर्मी से लाल हो जाती है ।

Hot Flashes का कारण निश्चित तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन हार्मोन में तथा शरीर में होने वाले  परिवर्तन ही इसकी वजह होते है। हॉट फ्लेशेज़ मेनोपोज़ से कुछ साल पहले से शुरू हो सकते है और कुछ वर्ष बाद तक हो सकते है।

किसी को दिन भर होते रहते है , किसी को  सप्ताह में एकाध बार। किसी को बिल्कुल नहीं होते। यह गर्म वातावरण में अधिक होते है। किसी किसी पर सिर्फ रात में सोते समय इसका प्रभाव पड़ता है। दिन में कुछ नहीं होता। इससे नींद ख़राब होती है और नींद पूरी नहीं होने के कारण शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ने लगते है।

अनिद्रा – Sleepless

मेनोपोज़ के कारण नींद में खलल पड़ सकता है। या तो नींद आती नहीं है या बीच में नींद खुलने के बाद वापस नींद आने में परेशानी होती है।

योनि में सूखापन – Vaginal Drynes

मेनोपोज़ के समय एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण योनि में सूखापन आ जाता है। इसके कारण योनि में जलन या खुजली महसूस हो सकती है तथा यौन क्रिया के समय दर्द महसूस हो सकता है। इस वजह से यौन सम्बन्ध में अरुचि हो जाती है।

मूत्राशय में संक्रमण – UTI

यह एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण होता है। इस समय मूत्राशय व मूत्र नली में  संक्रमण की सम्भावना अधिक होती है।

हार्मोन की कमी का प्रभाव मूत्राशय पर पड़ता है जिसके कारण  UTI  यानि यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है। बार बार पेशाब के लिए जाना पड़ सकता है। पेशाब में जलन हो सकती है। खाँसने से , छीकने से , जोर से हंसने से या कोई भारी सामान उठाने से लीकेज हो सकता है।

मनःस्थिति में बदलाव – Mood Swing

हार्मोन के बदलाव का प्रभाव दिमाग पर भी पड़ता है। इसके कारण मनःस्थिति में बार बार परिवर्तन होने लगता है। कभी मूड बहुत अच्छा होता है फिर एकदम से ख़राब हो जाता है। बेवजह गुस्सा , चिंता , चिड़चिड़ाहट , एकाग्रता में कमी , डिप्रेशन आदि होने लगते है।

रूखे बाल – Dry Hair

बालों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। बाल गिरने शुरू हो सकते है। रूखे और बेजान हो सकते है।

त्वचा – Skin Problem

त्वचा सूखी सूखी लगने लगती है। यह भी हार्मोन की कमी के कारण होता है।

दर्द – Body Pain

इसके अलावा कमजोरी महसूस हो सकती है। कमर दर्द या जोड़ों में दर्द और सूजन महसूस हो सकता है। किसी किसी को सिर दर्द या स्तन में दर्द भी महसूस हो सकता है।

मेनोपोज़ के बाद शरीर पर प्रभाव -Effects of menopause

मेनोपोज़ के बाद शरीर का वजन  बढ़ सकता  है। विशेष कर कमर और पेट पर अत्यधिक चर्बी जमा हो सकती है।

किसी किसी को आदमियों की तरह छाती , मूंछ और दाढ़ी पर बाल उग सकते  है।

यदि स्मोकिंग करते है , हाई ब्लड प्रेशर है , वजन अधिक है या कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है तो मेनोपोज़ के बाद इन कारणों ह्रदय रोग होने के सम्भावना बढ़ जाती है।

चालीस वर्ष के बाद वैसे तो हड्डी धीरे धीरे थोड़ी कमजोर हो जाती है लेकिन मेनोपोज़ होने पर हड्डी का कमजोर होना बढ़ सकता है । इससे फ्रैक्चर होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

मेनोपोज़ की परेशानियों  से बचने के उपाय – How to protect

कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उस शब्द के बारे में विस्तार से जानिए। 

– कुछ लोग हार्मोन थेरेपी लेकर इस परेशानी से बचने की कोशिश करते है। हार्मोन थेरपी फायदा भी करती है। लेकिन इसके गंभीर साइड इफ़ेक्ट हो सकते है। इसलिए धीरज रखते हुए पोष्टिक भोजन लेकर अपनी दिनचर्या को सुधारकर इसके असर को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

—  पोष्टिक आहार लें। दाल , फल , सब्जी , दूध , मेवे आदि को अपनी डाइट में शामिल करें। अखरोट, बादाम , अलसी के बीज आदि लें , पानी खूब पियें ।

सुबह की सूरज की धूप में कुछ समय अवश्य रहें। कैल्शियम युक्त पोष्टिक भोजन , विटामिन D , एक्सरसाइज आदि से हड्डियों का कमजोर होना रोका जा सकता है। इस समय शराब सिगरेट आदि से दूर रहने में ही समझदारी है।

—  हॉट फ्लेशेज़ गर्म वातावरण या गर्म वास्तु के उपयोग से बढ़ सकते है अतः ठन्डे स्थान में रहें। कूलर या AC में रहने से आराम मिलता है।

यदि किसी विशेष गर्म वस्तु के सेवन से हॉट फ्लेशेज़ होते हों तो उसे ना लें। गर्म चीजें कम लें। तेज मिर्च मसाले वाला खाना, फ़ास्ट फ़ूड, चाय कॉफी कम करें , विशेषकर रात को ना लें। सिंथेटिक और टाइट कपड़े ना पहने।

—  अनिद्रा को दूर करने के लिए पढ़ें अच्छी नींद के घरेलु नुस्खे। इन्हें अपनाएँ ,इससे नींद ख़राब नहीं होगी और तरोताजा महसूस करेंगें।

—  शारीरिक सम्बन्ध पर इसका प्रभाव मानसिक रूप से अधिक पड़ता है और शारीरिक रूप से कम अतः निश्चिन्त होकर यौन क्रिया का आनंद लिया जा सकता है । इससे तनाव में बहुत राहत मिलती है।

यौन क्रिया के कारण रक्त संचार बढ़ने से योनि स्वस्थ बनी रहती है। डॉक्टर से सलाह करके लुब्रिकेशन क्रीम आदि का उपयोग करें। इन्फेक्शन का डर हो तो इनसे बचाने वाला गर्भ निरोधक यूज़ कर सकते है।

—  किसी की प्रकार की मूत्र समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह से इलाज लें।

—  यदि त्वचा पर प्रभाव पड़ता दिखाई दे तो उबटन आदि का उपयोग करके त्वचा को स्वस्थ रखा जा सकता है।

—  बालों को थोड़ा अधिक समय देकर हेयर स्पा आदि लगाएं। इससे बालों का रूखापन मिटेगा। बालों का गिरना भी बंद होगा।

—  अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत रखें। हँसने और खुश रहने की आदत डालें। योगासन , प्रणायाम आदि सीखकर इनका नियमित अभ्यास करें। जो काम आपको ख़ुशी दे उसे दिनचर्या में शामिल करें।

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