मोतियाबिंद की परेशानी और इससे छुटकारा – Cataract and visibility

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मोतियाबिंद Cataract की समस्या सामान्यतया 55 वर्ष या अधिक उम्र में होती है। यदि इस उम्र में आँखों से अजीब सा धुंधलापन दिखाई दे तो यह मोतियाबिंद हो सकता है। इसे आँखों में जाला आना या सफ़ेद मोतिया भी कहते हैं।

मोतियाबिंद विश्वभर में आँखों की रोशनी जाने का मुख्य कारण है। शुरू में ऐसा लग सकता है कि शायद चश्मे का  नंबर बढ़ गया है इसलिए दिक्कत हो रही है। चश्मे की वजह से धुंधला दिखना और मोतियाबिंद की वजह से धुंधला दिखाई देने में फर्क होता है। जो इस प्रकार है –

—  मोतियाबिंद में आंख के लेंस से रोशनी पार नही हो पाती लेंस पर एक परत सी चढ़ जाती है । जबकि चश्मे में आँख के लेंस से रोशनी पार हो जाती है लेकिन उसका फोकस सही जगह नहीं पड़ता।

—  बाहर से देखने पर आँख के लेंस पर सफेदी सी दिखाई पड़ती है। नंबर बढ़ने पर यह सफेदी नहीं दिखती , लेंस साफ दीखता है।

—  नंबर बढ़ने पर सिरदर्द हो सकता है। मोतियाबिंद के कारण सिरदर्द सामान्यतया नहीं होता है।

मोतियाबिंद

मोतियाबिंद के लक्षण – Cataract Symptom

मोतियाबिंद होने पर धुंधला दिखाई देना , वस्तुएँ पीली और अस्पष्ट या विकृत सी दिखाई देने लगती हैं। धूप या तेज रोशनी सहन नहीं होती। रात के समय या कम रोशनी में दिखने में परेशानी होती है तथा रंग बदरंग से नजर आने लगते हैं।

चमकदार रोशनी के चारों ओर छल्ले जैसे दिखने लगते हैं। मोतियाबिंद के कारण पर सिरदर्द , आँख से आंसू या आँख में जलन आदि तकलीफें नहीं होती हैं ।

मोतियाबिंद का इलाज ऑपरेशन है जिसमे आँख में से पुराना प्राकृतिक लेंस निकाल कर नया कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है।

मोतियाबिंद के कारण – Cataract Reason

मोतियाबिंद ज्यादातर अधिक उम्र के कारण होता है। एक उम्र के बाद लगभग 40% लोगों को यह हो जाता है। उम्र के अलावा अन्य कारण ये हो सकते हैं –

—  आँख में चोट

—  जन्मजात आँख में मोतियाबिंद

—  किसी दूसरी परेशानी के लिए आँख का ऑपरेशन

—  डायबिटीज 

—  धूम्रपान 

—  हवा में अधिक प्रदुषण

—  धूप में अधिक समय बिताना

—  अधिक शराब का सेवन

—  कुछ विशेष प्रकार के रेडिएशन

मोतियाबिंद बहुत धीरे धीरे बढ़ता है। शुरू में पता ही नहीं चलता , जब यह रोशनी को बाधित करना शुरू कर देता है तब पता चलता है।

मोतियाबिंद का ऑपरेशन – Cataract Surgery

मोतियाबिंद का ऑपरेशन cataract Surgery कब कराना चाहिए यह आँख के कारण होने वाली समस्या पर निर्भर करता है। यदि डाक्टर तुरंत ऑपरेशन कराने के सलाह नहीं दे तो जब भी आपको लगे आँख के कारण दिखने में परेशानी ज्यादा होने लगी है तब यह ऑपरेशन करवाया जा सकता है।

यह ऑपरेशन बहुत सफल ऑपरेशन है। इसमें सर्जन डॉक्टर पुराना लेंस निकालकर नया कृत्रिम लेंस लगा देते हैं। इसमें उच्च तकनीक से ऑपरेशन किया जाता है जिसमे टांके भी नहीं लगाए जाते है।

सामान्य तौर पर एक दिन में हॉस्पिटल से छुट्टी मिल जाती है। रिकवरी बहुत जल्द और आसानी से होती है। ऑपरेशन के बाद में चेकअप के लिए बुलवाया जा सकता है। 95 % लोग यह ऑपरेशन कराने के बाद बहुत संतुष्ट नजर आते है। साफ दिखाई देने की खुशी चेहरे पर झलकती है।

आँख की जाँच कब करानी चाहिए – Eye Checkup

आँख में मोतिया बिंद या कालापानी ( ग्लूकोमा ) का जल्दी से पता नहीं लग पाता है। एक उम्र के बाद इनके होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आँखों के डॉक्टर से आँख की जाँच नियमित रूप से करवाते रहना चाहिए। यदि परिवार में किसी सदस्य को यह परेशानी है तो जाँच और भी जरुरी हो जाती है।

वैसे तो एक वयस्क व्यक्ति को दो वर्ष के अंतराल से आँखों की जाँच करवा लेनी चाहिए लेकिन 50 वर्ष की उम्र के बाद साल में एक बार आँखों की जाँच करवा लेनी चाहिए और यदि डायबिटीज जैसी बीमारी हो तो जाँच अधिक बार करवा लेना ठीक होता है।

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Disclaimer : इस लेख का उद्देश्य जानकारी मात्र है। किसी भी उपचार के लिए आई स्पेशलिस्ट की सलाह अवश्य लें।

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