विटामिन डी के लिए कितनी धूप की जरुरत – Vitamin D

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विटामिन डी Vitamin D सूरज की रोशनी से मिलता है , यह तो सभी जानते है। लेकिन शरीर को कितनी मात्रा में  विटामिन डी की जरुरत होती है तथा उसके लिए कितनी धूप चाहिए यह सवाल महत्वपूर्ण है।


विटामिन D से क्या लाभ होते है तथा खाने पीने की कोनसी चीजों से विटामिन डी मिल सकता है यह जानना भी जरुरी है। प्राकृतिक भोजन के माध्यम से विटामिन डी कि पूर्ति होना मुश्किल होता है। शरीर को कुछ देर धूप मिलना आवश्यक होता है।विटामिन डी

विटामिन डी फैट में घुलनशील विटामिन है और यह भोजन की बहुत कम चीजों में पाया जाता है। यह एक मात्र विटामिन है जो हमारा शरीर खुद बना सकता है।

जैसा की सब जानते है विटामिन डी का मुख्य स्रोत सूरज से मिलने वाली धूप होती है। धूप की मदद से यह त्वचा द्वारा बनाया जाता है। इसके अलावा मशरूम की कुछ विशेष प्रजाति से विटामिन डी प्राप्त होता है।

कुछ मछलिया विटामिन D का अच्छा स्रोत होती है। जैसे ट्यूना मछली , मैकरेल मछली या सेलमन मछली। चीज़ तथा अंडे की जर्दी में भी कुछ मात्रा में विटामिन D प्राप्त होता है। कॉड लिवर आयल विटामिन D की दवा के रूप में दिया जाता है।

त्वचा द्वारा बनाया गया या भोजन से प्राप्त किया गया विटामिन डी सीधे तौर पर शरीर के काम नहीं आता। जब त्वचा पर सूरज की रोशनी पड़ती है तो विटामिन डी बनता है। वहाँ से इसे लीवर में भेजा जाता है।

भोजन से प्राप्त विटामिन डी भी आँतों से अवशोषित होकर लीवर मे पहुंचता है। लीवर इसे एक दूसरे तत्व में परिवर्तित कर देता है जो 25 (OH) D होता है। लिवर की अन्य जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

यह तत्व यहाँ से शरीर में सब जगह भेज दिया जाता है। जिसे शरीर सक्रिय विटामिन डी में परिवर्तित करके काम में लेता है। इसे कैल्सिट्रॉल कहते है। यह सक्रिय विटामिन डी रक्त में व हड्डियों में कैल्शियम के लेवल को नियंत्रित करता है तथा कोशिकाओं के आपसी तालमेल को बनाये रखने में मदद करता है।

खून में विटामिन डी कितना है यह टेस्ट करते समय रक्त में 25 (OH)D तत्व के लेवल की ही जाँच की जाती है।

विटामिन डी क्यों जरुरी – Vitamin D Need

सामान्यतया इसे सिर्फ हड्डियों के लिए जरुरी समझा जाता है। जबकि विटामिन D का महत्त्व इससे बहुत अधिक होता है। यह मांसपेशियों की कार्यविधि , ह्रदय की धड़कन , फेफड़ों के स्वास्थ्य , दिमाग के विकास तथा सुचारू रूप से काम करने तथा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनाये रखने में भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरुरी होता है। यदि आप कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर डाइट लेते हैं तो भी पर्याप्त विटामिन डी के बिना शरीर इनको ग्रहण नहीं करता। इससे हड्डियों में कैल्शियम की कमी होकर हड्डियां कमजोर हो जाती है।

इस वजह से हड्डी के आसानी से टूटने की संभावना बढ़ जाती है। विटामिन डी की कमी के कारण कमजोर हड्डी के अलावा हड्डी में दर्द या मांसपेशियों में कमजोरी की परेशानी भी हो सकती है।

बच्चों के लिए विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मिलना बहुत आवश्यक है अन्यथा रिकेट्स नामक रोग होने की संभावना होती है। रिकेट्स के कारण बच्चों में हड्डियां नर्म हो जाती है। जिसके कारण ढांचा बिगड़ सकता है , हड्डियां सीधी होने की बजाय जगह जगह से मुड़ जाती है जिसके कारण हाथ पैर टेढ़े हो जाते है।

सिर्फ माँ का दूध पीने वाले शिशु को विटामिन D की कमी हो सकती है यदि माँ को विटामिन D की कमी हो। इसके कारण बच्चे को रिकेट्स हो सकता है। इसके अलावा बच्चों को हमेशा धूप से बचाये रखने से उनमे इसकी कमी हो सकती है।

विटामिन डी की कितनी मात्रा की जरुरत होती है

How much Vitamin D is required

शरीर को प्रतिदिन सामान्य तौर पर 60 वर्ष की उम्र तक लगभग 600 IU ( International Unit )  विटामिन डी की आवश्यकता होती है तथा उसके पश्चात् लगभग 800 IU विटामिन D की जरुरत होती है।

शिशु जो माँ के स्तन का दूध पीते है उन्हें भी 400 IU विटामिन डी की आवश्यकता होती है। इसलिए दूध पिलाने वाली माँ को विटामिन डी की कमी नहीं होनी चाहिए।

सामान्य वयस्क के रक्त में विटामिन डी यानि  25 (OH) D की मात्रा 20 ng /mL  या इससे अधिक सामान्य मानी जाती है। यह मात्रा 12 ng /mL  से कम होने पर बच्चों में रिकेट्स तथा वयस्क में हड्डी के कमजोर होने की संभावना होती है।

इसकी मात्रा 12 ng /mL से 20 ng /mL के बीच रहने पर सावधान हो जाना चाहिए क्योकि इससे स्वास्थ्य प्रभावित होना शुरू हो जाता है।

विटामिन डी के लिए कितनी धूप चाहिए

How much sunlight needed

विटामिन डी सूरज की रोशनी से मिलता है। इसका मतलब ये नहीं की इसके लिए धूप में शरीर को जलाने की जरुरत है। विशेषज्ञ लोगों के अनुसार 10 बजे से 4 बजे तक की धूप चेहरे , हाथ , पैर या पीठ आदि पर  10-15 मिनट के लिए सप्ताह में दो – तीन बार पड़े तो पर्याप्त मात्रा में विटामिन D बन सकता है।

लेकिन यह कई चीजों से प्रभावित हो सकता है । जैसे मौसम , दिन में कौनसा समय है और कितने वक्त तक धूप शरीर पर गिर रही है। इसके अलावा  बादल की उपस्थिति , कोहरा , त्वचा का रंग  तथा सनस्क्रीन का प्रयोग आदि से भी इसमें अंतर आ सकता है।

दिन में कौनसा समय है  – सुबह और शाम को जब सूरज की किरणे बहुत टेढ़ी गिरती है तब विटामिन D कम बनता है। दोपहर के समय त्वचा अधिक विटामिन D बनाती है। क्योकि उस समय सबसे ज्यादा UV किरणें शरीर में प्रवेश कर पाती है।

बादल छाये होने पर : आसमान में बादल होने पर भी UV किरणे शरीर पर पड़ती है लेकिन कम मात्रा में। अतः बादल होने पर विटामिन D भी कम मात्रा में बनता है। फिर भी साधारण स्थिति का 50 % त्वचा बना ही लेती है। छाया में रहने पर भी कम मात्रा में विटामिन D बन सकता है।

त्वचा का हिस्सा : ज्यादा स्किन पर धूप मतलब ज्यादा विटामिन।  त्वचा के जितने बड़े हिस्से पर धूप गिरती है उतना ही अधिक विटामिन D बनता है। पीठ पर पड़ने वाली धूप से अधिक विटामिन D बनेगा बजाय चेहरे या हाथ या पैर की त्वचा के।

त्वचा का रंग : गहरे रंग की अपेक्षा गोरा रंग अधिक विटामिन D बनाता है। त्वचा में मेलेनिन की अधिक मात्रा के कारण  UV किरणों का प्रवेश त्वचा में कम मात्रा में होता है जिसके कारण कैंसर से बचाव तो होता है लेकिन साथ ही विटामिन D भी कम मात्रा में बनता है।

उम्र : अधिक उम्र में विटामिन D की कमी होने की संभावना ज्यादा होती है क्योंकि त्वचा की विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है तथा ज्यादा समय अंदर ही व्यतीत होता है। इससे धूप मिलना कम हो जाता है।

सनस्क्रीन :  धूप से होने वाले नुकसान से बचने के लिए सनस्क्रीन लोशन का उपयोग किया जाता है। यह विटामिन D के बनने में अवरोध पैदा करता है। अतः इसके अधिक उपयोग से विटामिन डी कम मात्रा में बनता है।

हालांकि सनस्क्रीन पर्याप्त मात्रा में और सभी जगह नहीं लगाए जाने के कारण लोशन का उपयोग करने के बावजूद कुछ मात्रा में त्वचा विटामिन D बना ही लेती है।

कांच : सूरज की UV किरणे कांच से प्रवेश नहीं कर पाती। इस वजह से कांच से बंद कमरे में रहने पर धूप पड़ने पर भी त्वचा विटामिन D नहीं बना पाती।

मोटापा : यदि बॉडी मास इंडेक्स 30 या अधिक हो यानि वजन ज्यादा होने पर विटामिन D की जरुरत भी ज्यादा होती है। अतः वजन अधिक होने के कारण विटामिन D की कमी हो सकती है।

धूप से विटामिन D मिलने का मतलब यह नहीं की अधिक धूप में ज्यादा रहें। क्योंकि इससे त्वचा का कैंसर होने की संभावना होती है। धूप के कारण त्वचा में रूखापन आकर झुर्रिया पड़ने की भी संभावना होती है।

विटामिन डी के कैप्सूल लेने चाहिए या नहीं

यदि धूप से और भोजन से विटामिन डी की पूर्ति नहीं हो पाती  तो इसके कैप्सूल लेने जरुरी हो जाते  है। दो प्रकार के विटामिन डी के कैप्सूल मिलते है विटामिन डी 2 और विटामिन डी 3 दोनों ही हड्डियों के लिए लाभदायक होते है। कुछ मल्टी विटामिन कैप्सूल में विटामिन डी भी होता है। यदि ऐसा हो तो अलग से विटामिन डी के कैप्सूल लेने की जरुरत नहीं होती। यदि आपको ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी हो और साथ में विटामिन डी की कमी भी हो तो आपको विटामिन के अधिक डोज़ लेने पड़ सकते है। ये दवाएँ डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।

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