श्राद्ध कनागत पितृपक्ष क्या कब और कैसे – Shradh , Pitrapaksh , Kanagat

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श्राद्ध करना श्रद्धा का प्रतीक होता है। यह अपने पूर्वजों तथा परिवारजन को याद करने व सम्मान देने का जरिया है।  श्राद्ध माता , पिता , दादा , दादी , कुंवारे पुत्र , कुवांरी पुत्री , पति या पत्नी के लिए किया जाता है।

हर वर्ष आसोज (अश्विन) महीने में श्राद्ध किये जाते हैं। भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से आसोज ( आश्विन ) महीने की अमावस्या तक यानि सोलह दिन श्राद्ध पक्ष के होते हैं।

माना जाता है की इस समय पितृ अपने परिजनों के आस-पास रहते हैं। इस समय ब्राह्मण , गुरु , नाती को भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं।

श्राद्धपक्ष  shradh paksh  को कनागत  Kanagat , पितृ पक्ष  Pitra paksh , महालय पक्ष  Mahalay Paksh के नाम से भी जाना जाता है।

श्राद्ध कनागत कैसे करें

श्राद्ध पक्ष 2018  की तारीख

Shradh 2018 dates

 24 सितम्बर 2018 , पूर्णिमा सोमवार से  8 अक्टूबर 2018  , अमावस्या सोमवार तक

त्रयोदशी तथा चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध 7 अक्टूबर रविवार को होगा।

पूर्वज की परलोक गमन की तिथि वाले दिन श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष का अंतिम दिन अमावस्या का होता है। इसे सर्वपित्री अमावस्या कहते हैं। यदि पूर्वज की परलोक गमन की सही तिथि पता नहीं हो तो अमावस्या वाले दिन श्राद्ध किया जा सकता है।

माना जाता है कि पितरों के प्रसन्न होने से सारे देवता प्रसन्न होते हैं और मनुष्य  के तप , जप , पूजा , व्रत , अनुष्ठान आदि सफल होते है।

श्राद्ध कैसे किया जाता है –  shradh ki Vidhi

इस दिन पूड़ी , सब्जी , खीर , मिठाई आदि बनाते हैं । सामान्य तौर पर तुरई या काशीफल की सब्जी बनाई जाती है। चार जगह चार चार पूड़ी रखकर साथ में थोड़ी सब्जी , खीर , मिठाई रखी जाती है।

हाथ में थोड़ा पानी लेकर इनके चारों और घुमाते है। इसके बाद एक हिस्सा कौवे को, एक हिस्सा  कुत्ते को , एक हिस्सा गाय को देते हैं और एक हिस्सा पानी के जीवों के लिए तालाब आदि में डाला जाता है। तालाब ना हो तो यह हिस्सा गाय को दे सकते हैं।

पूर्वज के निमित्त भोजन थाली में परोसकर ब्राह्मण को खिलाया जाता है। ब्राह्मण से पहले घर का कोई सदस्य खाने पीने की कोई वस्तु नहीं खाता।

खाना खिलाने के बाद ब्राह्मण से आशीर्वाद लिया जाता है और उन्हें दक्षिणा में एक जोड़ा जनेऊ और कुछ रूपये 11  , 21 , 51 या श्रद्धानुसार वस्त्र आदि देकर विदा किया जाता है। इसके बाद ही परिवार के सदस्य , रिश्तेदार या मित्रगण आदि खाना खाते है।

पिता का श्राद्ध बड़ा श्राद्ध माना जाता है। पिता का श्राद्ध पुत्र द्वारा किया जाना चाहिए। पुत्र ना हो तो पत्नी द्वारा और पत्नी के भी ना होने पर सगे भाई द्वारा श्राद्ध किया जाना चाहिए। सगा भाई भी ना हो तब सपिंड ( एक ही परिवार के ) द्वारा श्राद्ध किया जा सकता है।

श्राद्ध के दिन भोजन में क्या होना चाहिए और क्या नहीं

श्राद्ध वाले दिन खीर , पूड़ी , तुरई की सब्जी आदि बनाये जाते है। चने या बेसन से कोई चीज नहीं बनाई जाती।

श्राद्ध में भोजन के लिए दूध , दही , घी , तिल , उड़द , चावल , जौ , जड़ वाली सब्जी जैसे आलू और फल आदि उचित माने जाते हैं। लेकिन  मसूर , राजमा , चना , अलसी , बासी भोजन या बासी फल आदि उपयुक्त नहीं होते हैं।

कुछ जगह इस दिन आटे में चीनी और मोयन मिलाकर एक छोटा रोट बनाया जाता है। जिसे रसोई में सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है और दूसरे दिन प्रसाद के रूप में घर के सदस्यों में बाँट कर खाया जाता है। यह रोट श्राद्ध के दिन ही बनाया जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार काम किया जा सकता है।

पितृ दोष के कारण होने वाली परेशानी

माना जाता है कि पितृ दोष के कारण संतान ना होना ,  गृह क्लेश होते रहना , बार बार धन की हानि , अशांति , निरंतर बीमारी , पुत्र या पुत्री के विवाह में विलम्ब , व्यापार में घाटा , कर्ज से दबा रहना आदि परेशानियाँ हो सकती हैं। श्राद्ध करने से इन परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।

श्राद्ध दिन के समय करना चाहिए , रात के समय नहीं। श्राद्ध किसी अन्य के घर में नहीं किया जाता , खुद के घर में किया जाता है। किसी धार्मिक स्थल या सार्वजनिक स्थान पर श्राद्ध कर सकते हैं। कुछ धार्मिक शहर जैसे प्रयाग , काशी , पुष्कर , हरिद्वार आदि श्राद्ध करने के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।

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