सरसों का तेल उपयोग और फायदे – Mustard Oil Benefits and use

सरसों का तेल Mustard oil एक वेजिटेबल ऑइल है जो सरसों के बीज से निकाला जाता है। सरसों का तेल खाने के लिए लगभग पूरे उत्तर

भारत में काम लिया जाता है। इसका विशेष प्रकार का तीखा स्वाद कुछ लोगों को बहुत पसंद आता है खासकर बंगाली लोगों को। इस तेल में

बने अचार बहुत पसंद किये जाते हैं। शरीर पर मालिश के लिए , सिर में लगाने के लिए तथा दवाओं में भी इसका उपयोग होता है। इसके

अलावा सरसों का तेल साबुन और लुब्रिकेंट बनाने में भी काम आता है। तेल निकलने के बाद बचा हुआ केक जिसे खड़ कहते हैं पशुओं को

खिलाने और खाद बनाने में प्रयुक्त होता है।

सरसों का तेल

सरसों का तेल इसे गुजराती में राई नु तेल Rainu tel , मराठी में मोहरीचे तेल Mohariche tel , बंगाली में सरसे तेल Sarsay tel कहते हैं।

इसका स्मोकिंग पॉइंट 250oC होता है जो अधिक होता है , अतः इसे तलने के लिए काम लिया जा सकता है। अन्य कौनसे तेल है जो खाने

बनाने ता तलने Deep Fry के लिए अच्छे होते हैं  , जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

सरसों के तेल के पोषक तत्व – Mustard Oil Nutrients

 

सरसों के तेल में 60 % मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड ( 42 % ईरूसिक एसिड तथा 12 % ओलेइक एसिड ) तथा पोली अनसैचुरेटेड फैटी

एसिड ( 6 % ओमेगा-3 फैटी एसिड और 15 % ओमेगा-6 फटी एसिड होता है ) होते हैं। इनसे हानिकारक LDL नामक कोलेस्ट्रॉल कम होता

है और फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल HDL में वृद्धि होती है। अतः यह हार्ट के लिए फायदेमंद होता है। यह गुर्दे स्वस्थ रखता है तथा थायराइड की

समस्या से बचाता है। सरसों के तेल में लगभग 12 % सैचुरेटेड एसिड होते हैं।

 

ओमेगा – 3 फैटी एसिड शरीर के लिए बहुत जरुरी होता है और यह तेल से मिलता है। दूसरे तेलों से तुलना की जाये तो दूसरे अन्य तेल की

अपेक्षा इसमें ओमेगा -3 अधिक मात्रा में होता है।  सरसों के तेल में प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट , फाइबर , विटामिन या खनिज नहीं होते हैं।

 

बाजार में कच्ची घाणी सरसों तेल तथा रिफाइंड सरसों तेल उपलब्ध है। इनमे मुख्य अंतर इस प्रकार है –

 

कच्ची घानी सरसों तेल या ग्रेड 1 सरसों का तेल – Kachchi Ghani sarso tel

यह कोल्ड कम्प्रेशन तकनीक से निकाला जाता है। यानि सरसों का तेल बीजों को क्रश करके प्रेशर से दबाकर तेल निकाला जाता है। इसके

लिए भी पीली , भूरी या काली सरसों ( राई या लाहा ) या इनका मिश्रण काम में  लिया जाता है। इसे कच्ची घाणी तेल जाता है। इसमें सरसों की

खुशबू , तीखापन , रंग तथा पोषक तत्व अधिक होते है।

 

रिफाइंड सरसों का तेल – Refined sarso tel

रिफाइंड सरसों का तेल एक्सट्रैक्शन विधि से निकाला जाता है। इसमें पीली या काली सरसों ( राई या लाहा )  से अथवा इन दोनों के

मिश्रण से निकाला जाता है। तेल को रिफाइन किया जाता है जिसमे फ़ूड ग्रेड साल्वेंट ,ब्लीचिंग ,एक्टिवेटेड कार्बन , आदि का उपयोग किया

जाता है। इससे तेल के गंध , तीखापन तथा रंग आदि निकल जाते हैं। लाभदायक पोषक तत्वों की भी कमी हो जाती है।

 

सरसों या राई के दानों में कुछ ऐसे एंजाइम होते हैं जो पानी की मौजूदगी में गर्मी पाकर आपस में क्रिया करके एक आइसो थियोसायनेट

नामक विषैला तत्व बना सकते हैं जो नुकसान देह होता है। अतः सरसों का तेल उचित व्यवस्था में निकाला जाना आवश्यक होता है। नियंत्रित

तापमान पर कच्ची घाणी विधि से निकाला गया तेल नुकसान देह नहीं होता ( Ref : mustard oil  )

 

सरसों तेल के फायदे – Sarson Tel Benefits

कृपया ध्यान दे : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं। 

 

—  यह स्किन के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह त्वचा को फ्री-रेडिकल के नुकसान , अल्ट्रा वॉइलेट किरणों तथा प्रदुषण से बचाने में

सहायक होता है। यह झुर्रियों से भी बचाता है। यह रक्त का संचार बढ़ाकर प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।

 

—  सरसों का तेल उद्दीपक होता है। यह एपेटाइजर की तरह काम करके भूख बढ़ाता है। यह लीवर तथा आमाशय के रस में वृद्धि करके पाचन

क्रिया सुचारु करता है।

 

—  सरसों के तेल में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह मूत्र संस्थान , आँतो , तथा पाचन संस्थान के इन्फेक्शन मिटाता है।

 

— त्वचा पर मालिश करने पर भी इन्फेक्शन मिटाने में सफल होता है। सरसों के तेल की मालिश से रक्त संचार बढ़ता है जिसके कारण

महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त के माध्यम से भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। इससे तनाव भी दूर होता है। माँसपेशी के अधिक उपयोग से होने वाले

दर्द में आराम मिलता है। इससे त्वचा को पोषक तत्व मिलते हैं तथा उसमे नयापन आता है। इसलिए उबटन में भी इसका उपयोग होता है

 

—  यह मच्छर भगाने का काम भी करता है। इसे त्वचा पर लगाने से मच्छर नहीं काटते। इसकी धुआं करने से भी मच्छर भाग जाते हैं। इसी

वजह से दिवाली पर जलाये जाने वाले दिये में यह तेल डाला जाता है।

 

—  यह एंटी फंगल की तरह काम करता है। यह फंगस मिटाता भी है और फंगस को बढ़ने से रोकता भी है।

 

—  बालों के लिए सरसों का तेल बहुत लाभदायक होता है। इसमें मौजूद लिनोलिक एसिड जैसे फैटी एसिड बालों की जड़ों को पोषण देते है

तथा इसका उद्दीपक होना सिर की त्वचा में रक्त का संचार बढ़ाता है। लम्बे समय तक इसका उपयोग बालों का गिरना मिटा देता है।

 

—  इसका उपयोग पसीना बढ़ाता है। यह पसीना ग्रंथि को उत्तेजित करता है जिसके कारण पसीना अधिक आता है। यह खूबी शरीर का

तापमान कम करने के लिए , अतिरिक्त पानी और नमक कम करने के लिए काम आता है।

 

—  इसके उद्दीपक गुणवत्ता के कारण यह यह सर्दी  जुकाम , दर्द , कफ , सिरदर्द आदि दूर करता है और इसकी मालिश मांसपेशी मजबूत

बनाता है। यह श्वसन तंत्र पर प्रभाव डालता है तथा कफ बनने से रोकता है।

 

—  जोड़ों का दर्द इसकी मसाज से दूर होता है। सरसों के तेल में लहसुन पीस कर मिलाने से यह अधिक कारगर होता है। इससे जॉइंट पैन ,

शरीर में  दर्द , अर्थराइटिस आदि में आराम मिलता है।

 

—  मसूड़ों पर तेल की मालिश करने से संक्रमण से बचाव होता है। सरसों का तेल और नमक मिलाकर मसूड़ों पर लगातार कुछ दिन मसाज

करने से मसूड़े मजबूत होते हैं। मसूड़े स्वस्थ रखने के अन्य घरेलु उपाय जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

—  सरसों के तेल नियमित कुछ दिन नाभि में लगाने से फटे होंठ ठीक होते हैं।

 

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