सरस्वती माँ के भजन वंदना प्रार्थना – Sarasvati Ma Vandana Bhajan

449

सरस्वती माँ का भजन बसंत पंचमी के दिन विशेष तौर पर गाया जाता है। स्कूल आदि में सरस्वती माता के गीत , सरस्वती माता के भजन या सरस्वती माता की वंदना करके माँ सरस्वती के आशीर्वाद की कामना की जाती है। यहाँ भजन , वंदना , प्रार्थना के बोल लिखे गए हैं। इन्हे पढ़ें गायें और आनंद उठायें।

सरस्वती माँ के भजन

सरस्वती माँ का भजन

Sarswati Maa Ka Bhajan

 

सुमिरूँ गणेश शारदा माई , सरस्वती माई….

अब घर बैठे शारदा माई ,

सरस्वती माई हिरदै मेरे डार चाँदनी

भूले-भूले अक्षर मैया दीजो री बताई !

नर सुमिरूँ नारायण सुमिरु ,

सुमिरूँ गंगे माई !

अपने गुरु चरनन सुमिरूँ ,

जिन के गुरु ने मोय विद्या रे पढ़ाई !

पांचो तो पंडन को सुमिरूँ ,

संकट भई सहाई !

भीमसेन अर्जुन कूं सुमिरूँ ,

सहसन मन की बने गदा रे उठाई !

एक दिन राजा नल ने सुमिरी ,

नल पे नल लगवाये !

गोपी चन्द्र भगत ने सुमिरी ,

गोरे से अंग में भूमि रमाई !

एक दिन रावण ने सुमिरी ,

लै गयौ सिया चुराई !

हनुमान ने ऐसी सुमिरी ,

सोने की लंका वाने पल में अब जराई !

तुलसीदास आस रघुवर की हरि चरनन बलिहारी

राम लखन ने ऐसी सुमिरी ,

बीस भुजा दस शीश रे उड़ाई !

अब हट बैठ शारदा माई …….

सुमिरूँ गणेश शारदा माई , सरस्वती माई ,

अब घर बैठे शारदा माई !

 ~~~~~~~

सरस्वती वंदना

Sarasvati Vandana

हे शारदा माँ , हे शारदा माँ ,

अज्ञानता से हमें तार दे माँ !

तू श्वेत वर्णी कमल पे विराजे ,

हाथों में वीणा मुकुट सर पे साजे !

हम हैं अकेले हम हैं अधूरे ,

 तेरी शरण हम हमें तार दे माँ !

तू स्वर की देवी संगीत तुझमें ,

हर शब्द तेरा हरेक गीता तुझमें !

मन से हमारे मिटा दे अँधेरा ,

हमको उजालों का संसार दे माँ !

मुनियों ने समझी गुनियों ने जानी ,

वेदों की भाषा पुराणों की वाणी !

हम भी तो समझें हम भी तो जानें ,

विद्या का हमको भी अधिकार दे माँ !

हे शारदा माँ , हे शारदा माँ ,

अज्ञानता से तू हमें तार दे माँ !

~~~~~~~ 

माँ सरस्वती की प्रार्थना

Sarasvati ma ki prarthana

माँ शारदे , माँ शारदे !

माँ शारदे , हंस वाहिनी , वीणा पाणि , ब्रह्म भामिनि ,

कला स्वामिनी , जग तार दे !

माँ शारदे , माँ शारदे !!

हृदय गगन में , मर्त्य भवन में , मुक्त पवन में , जन जीवन में ,

जन जीवन में ज्ञान भर दे !

माँ शारदे , माँ शारदे !!

ज्ञानहीन में , ध्यान हीन में , बुद्धि विहीन में , विवेक हीन में ,

विवेक हीन में , रश्मि भर दे !

माँ शारदे , माँ शारदे !!

माँ शारदे , हंस वाहिनी , वीणा पाणि , ब्रह्म भामिनि ,

कला स्वामिनी , जग तार दे !

माँ शारदे , माँ शारदे !!

~~~~~~ 

क्लिक करके पढ़ें ये आरती और आनंद लें :

 

गणेश वंदना शुभ कार्य से पहले

ओम जय जगदीश हरे आरती 

अम्बे माँ की आरती 

शिव जी की आरती 

गणेश जी की आरती 

शिव चालीसा 

हनुमान चालीसा 

हनुमानजी की आरती 

शनिवार की आरती 

संतोषी माता की आरती 

शीतला माता की आरती 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here