सातुड़ी तीज का उद्यापन विधि – Satudi Teej Ka Udhyapan Vidhi

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सातुड़ी तीज का उद्यापन   Satudi Teej ka Udhyapan शादी का बाद किया जाता है। यह रीती रिवाज का एक अभिन्न अंग है। सातुड़ी तीज

का व्रत महिलाएँ उत्साह के साथ हर वर्ष करती है।  शादी हो जाने के पश्चात् महिलाओं द्वारा इस व्रत का उद्यापन  विधि पूर्वक किया जाता है।

यह उद्यापन पीहर ( मायके ) में किया जाता है। उद्यापन करने के बाद ही व्रत किया जाना सम्पूर्ण माना जाता है।

 

सातुड़ी तीज का उद्यापन

भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि जिसे सातुड़ी तीज ,कजली तीज या बड़ी तीज कहते है उसकी उद्यापन विधि के बारे में संपूर्ण

विवरण प्रस्तुत है। कुछ लोग उद्यापन को उजमन या उजवना भी कहते है। उद्यापन के बाद भी कुछ लोग तीज का व्रत पहले की तरह करते

रहते है। कुछ लोग उद्यापन करने के सिर्फ अगले साल तीज का व्रत नहीं करते उसके बाद आने वाले सालो में अपनी सुविधा के अनुसार व्रत

करते हैं ।

 

सातुड़ी तीज का उद्यापन विधि – Satudi Teej Udhyapan Vidhi

 

—  चार बड़े पिंडे सातु के बनाएँ ( एक सासू का , एक मंदिर का , एक पति का , एक खुद का )

 

—  सातु के सत्रह पिंडे सवा पाव -सवा पाव के बनाये ( सोलह सुहागन के लिए , एक सांख्या के लिए )

 

—  सत्रह स्टील के प्याले ( प्लेट ) मंगवा ले।

 

—  पिंडों को प्लेटो में रख कर , कुमकुम टीका करे और सब पर लच्छा , सुपारी , सिक्का , गिट लगाये।चाहें तो साथ में बिंदी का एक पत्ता भी

रख सकते है।

 

—  अब ये सातु पिंड वाली प्लेट एक एक करके सोलह सुहागनों को दे दें ।

 

—  एक बड़े पिंडे पर बेस ( साड़ी ब्लाउज ) , सुहाग का सामान (काजल , बिंदी ,चूड़ी आदि ) और रूपये रख कर  (51 ,101 इच्छानुसार )

कलपना निकाले व सासु जी को दें और पाँव छू कर आशीर्वाद लें। ये कलपना या बयाना होता है।

 

—  कलपना या बायना सासू नही हो , तो ननद को या किसी बुजुर्ग स्त्री को जिसने आपके साथ पूजा की हो उसे दे सकते है। इसे सबसे पहले

करके बाद में सोलह सुहागन को सातु दिया जा सकता है।

 

—  एक बड़ा पिंडा मंदिर में दे दें।

 

—  एक बड़ा पिंडा पति को झिला दें।

 

— एक पिंडा खुद के लिए रख लें।

 

—  अब संखिया (देवर या घर का कोई भी लड़का जैसे भांजा , भतीजा जा आपसे उम्र में छोटा हो  – सगे भाई के अलावा  ) को टावेल या पेंट

शर्ट व सातु वाली प्लेट , कुछ पैसे इच्छानुसार दे और कान में धीरे से बोले-

 

” मेरी बड़ी तीज का उद्यापन की हामी भरना , मैने उद्यापन किया है मान लेना “

 

इसी तरह सातुड़ी तीज का उद्यापन सम्पन्न होता है।

 

है तीज माता सबके जीवन में खुशहाली रखना।

बोलो तीज माता की जय !!!

 

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