सोयाबीन के फायदे नुकसान और इसे कैसे खायें – How to use soyabean

सोयाबीन soyabean से सभी लोग परिचित है। शाकाहरी लोगों के लिए हाई-प्रोटीन डाइट में सोयाबीन के उपयोग की बहुत चर्चा होती है।

सोयाबीन का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। इससे दूध , दही , पनीर आदि बनाये जा सकते है। सोयाबीन से पनीर बनाया जाता है

जिसे टोफू  Tofu कहते हैं । सोयाबीन की बड़ी Soya Chunks का उपयोग कई प्रकार की डिशेज और सब्जी बनाने में किया जाता है। खाने में

इनका उपयोग आजकल बहुत बढ़ गया है। ये सभी चीजें बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।

 

सोयाबीन के तेल का उपयोग दुनिया भर में खाना बनाने में होता है। ये सभी प्रोटीन से भरपूर होते है। शाकाहारी लोगों के लिए ये प्रोटीन के

अच्छे स्रोत हैं। विश्व भर में  Soyabean खाने में काम लिया जाता है। चीन में इसका उपयोग हजारों सालों से होता आ रहा है। जापान में इससे

मिसो Miso नामक सूप बनाया जाता है , जिसे रोजाना चावल के साथ नाश्ते में खाया जाता है। Soyabean से टेम्पेह Tempeh बनाया जाता है,

जिसका कई देशों में खाने में उपयोग होता है।

 

Soyabean को कभी लाभदायक बताया जाता है और कभी नुकसानदेह । इस बारे में बहुत कन्फयूजन रहता है। Soyabean फायदेमंद भी

हो सकता है और नुकसानदायक भी अतः इसका उपयोग सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।

आइये जानते है Soyabean ke fayde nuksan  तथा सोयाबीन का उपयोग किस प्रकार करना चाहिए।

 

सोयाबीन के पोषक तत्व – Soyabean Nutrients

कृपया ध्यान दे : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं। 

 

सोयाबीन में कई प्रकार के पोषक तत्व होते है। शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का यह सर्वश्रेष्ठ स्रोत है। इसमें शरीर के लिए जरुरी सभी प्रोटीन

Essential amino acid मौजूद होते हैं। इसके अलावा यह विटामिन , कार्बोहाइड्रेट , फाइबर तथा कई प्रकार के खनिज से भरपूर होता है।

इसमें विटमिन K  , राइबोफ्लेविन , फोलेट , विटामिन बी 6 , थायमिन , विटामिन C , तथा खनिज के रूप में आयरन , मेगनीज , फॉस्फोरस,

कॉपर , पोटेशियम , मेग्नेशियम , मेगनीज , ज़िंक , सेलेनियम तथा कैल्शियम पाए जाते हैं। कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट भी इसमें होते हैं।

Soyabean  श्रेष्ठ प्रोटीन , कार्बोज और वसा युक्त एक उत्कृष्ट आहार है।

सोयाबीन

 

सोयाबीन में लेसिथिन नामक तत्व होता है जो त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह तत्व हृदय के लिए भी लाभदायक होता है। मांस ,

मछली आदि प्रोटीन आहार में न्यूक्लिओ नामक प्रोटीन होता है। इससे यूरिक एसिड का निर्माण होता है। यूरिक एसिड के कारण गठिया जैसे

रोग हो जाते हैं। सोयाबीन में यह नहीं होता अतः इसका प्रोटीन अच्छा होता है। Soyabean के कार्बोज में स्टार्च और शर्करा कम होती है

इसलिए डायबिटीज और अधिक वजन के लोगों के लिए भी यह उपयुक्त होता है।

 

सोयाबीन के तेल में लाभदायक पाली सैचुरेटेड , अनसैचुरेटेड फैट , ओमेगा 3 तथा ओमेगा 6  फैटी एसिड होते हैं। Soyabean ke tel  में

घुलनशील विटामिन A  , D , E  तथा K  पर्याप्त मात्रा में होते है। यह एकमात्र ऐसा वनस्पति तेल है जिसमे विटामिन A पर्याप्त मात्रा में होता है।

 

सोयाबीन के फायदे  – Soyabean Benefits

 

मेटाबोलिज्म

 

मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया में प्रोटीन आवश्यक होता है। प्रोटीन शरीर की प्रत्येक कोशिका के लिए जरुरी होता है। शाकाहारी भोजन में प्रोटीन

की कमी होने की संभावना होती है अतः आप मांस , मछली , अंडा आदि नहीं खाते तो  Soyabean से इनके जैसे लाभ लिए जा सकते हैं।

 

हृदय

 

Soyabean से लाभदायक अनसैचुरेटेड फैट मिलते हैं जो कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं। इससे नसों में जमाव नहीं होता और हृदय रोग से बचाव

होता है। इसके अलावा इसमें लिनोलिक एसिड जैसे लाभदायक फैटी एसिड होते हैं जो मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं तथा ब्लड प्रेशर को

नियंत्रण में रखने में सहायक होते हैं। इसमें पाया जाने वाला फाइबर भी कोलेस्ट्रॉल कम करता है और नसों को सुरक्षित बनाये रखने में

मददगार होता  है।

 

मेनोपॉज

 

सोयाबीन प्राकृतिक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी  HRT  की तरह काम करता है। इसमें पाये जाने वाले आइसोफ्लेवन्स एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी

के असर को कम करते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के समय एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जाती है। मेनोपोज़ के बारे में विस्तार से जानने के लिए

यहाँ क्लिक करें। हार्मोन की कमी से शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन और दिक्कत होने लगती है। Soyabean खाने से इसमें मौजूद

आइसोफ्लेवन के कारण ये दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। इससे चिड़चिड़ापन , हॉट फ्लैश आदि का असर कम हो जाता है। अतः मेनोपॉज के

समय होने वाली परेशानियों से बचने का यह एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है।

 

पाचन

 

Soyabean  में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है। फाइबर का आंतो की सफाई तथा आँतों की क्रियाशीलता में बहुत महत्त्व होता है। फाइबर

कब्ज से भी बचाता है। इस प्रकार Soyabean पाचन तंत्र को ताकत देता है। पाचन सही होने से शरीर को भोजन के पोषक तत्व मिल पाते है

जो स्वास्थ्य के लिए जरुरी है।

 

हड्डी

 

सोयाबीन में पाए जाने खनिज विशेषकर कैल्शियम , मेग्नीशियम , कॉपर , सेलेनियम , और जिंक हड्डी की मजबूती के लिए सम्पूर्ण योगदान देते

हैं। ये सभी तत्व नई हड्डी का निर्माण तथा हड्डी की मजबूती के लिया जरुरी होते हैं। उम्र बढ़ने से साथ हड्डी की कमजोरी अर्थराइटिस से बचने

के लिए Soyabean का नियमित उपयोग सहायक हो सकता है।

 

खून की कमी

 

सोयाबीन में कॉपर तथा आयरन प्रचुर मात्रा मात्रा में होते है। ये दोनों खनिज लाल रक्त कण में निर्माण के लिए जरुरी होते हैं। Soyabean में

पाए जाने वाले तत्व रक्त के निर्माण में मदद करके खून की कमी दूर करते है। शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रहने के लिए रक्त और

ऑक्सीजन की जरुरत होती है। इससे मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया सुधरती है और शरीर को ताकत मिलती है।

 

डायबिटीज

 

Soyabean में पाए जाने वाले खनिज तत्व तथा फाइबर के कारण इसे खाने से रक्त में शर्करा की मात्रा में बढ़ोतरी नहीं होती। अतः इसका

उपयोग डायबिटीज का खतरा कम कर सकता है।

 

नींद नहीं आना

 

सोयाबीन से मिलने वाला मेग्नेशियम नींद की प्रक्रिया में सहायक होता है। मेग्नेशियम की कमी गहरी नींद में बाधक बनती है। Soyabean के

नियमित उपयोग से मैग्नीशियम की कमी नहीं होती और नींद अच्छी आती है। नींद के घरेलु उपाय जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

सोयाबीन के नुकसान – Be Careful

 

संतान उत्पत्ति में बाधक

 

Soyabean  में एस्ट्रोजन हार्मोन जैसे तत्व होते हैं। पुरुषों में सोयाबीन का अधिक उपभोग कभी कभी हार्मोन के असंतुलन का कारण बन

सकता है। इसके कारण शुक्राणु की संख्या में कमी या यौन क्षमता में कमी की समस्या हो सकती है। अतः यदि दंपत्ति संतान पैदा करने की

कोशिश कर रहे हो यो Soyabean का उपयोग नहीं करना चाहिए। गर्भधारण की कोशिश में ओव्यूलेशन के समय महिलाओं को Soyabean

नहीं खाना चाहिए। गर्भधारण करने के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लीक करें। गर्भावस्था में भी Soyabean का उपयोग उचित नहीं

होता है।

 

थायराइड

 

सोयाबीन में थायराइड के हार्मोन को नष्ट करने वाले तत्व होते हैं अतः इससे थायराइड ग्रंथि में सूजन आकर कई प्रकार की थायराइड से

सम्बंधित परेशानी हो सकती है। हाइपोथायराइड यानि थायराइड की कमी हो तो Soyabean नहीं लेना चाहिए।

 

किडनी

 

सोयाबीन में ऑक्जेलेट होता है। अतः किडनी की परेशानी हो या गुर्दे में पथरी हो तो Soyabean का उपयोग चिकित्सक की सलाह लेने के

बाद ही करना चाहिए। जिन महिलाओं को एस्ट्रोजन हार्मोन से प्रभावित स्तन की गांठ हो तो उन्हें सोयाबीन का उपयोग कम करना चाहिए।

 

फाइबर

 

सोयाबीन में अघुलनशील फाइबर होते हैं। कुछ लोगों को फाइबर से पेट फूलने या दस्त आदि की परेशानी होती है। ऐसे में Soyabean का

उपयोग सावधानी से करना चाहिए।

 

सोयाबीन के उपयोग का सबसे अच्छा तरीका – Best way to eat soyabean

 

सोयाबीन में फायटिक एसिड अधिक मात्रा में होता है। यह तत्व मुख्य खनिज जैसे आयरन , कैल्शियम , ज़िंक आदि को जकड़ कर रखता है

और इनके पाचन तथा शरीर में अवशोषण में बाधा उत्पन्न करता है। दाल गेहूं आदि में भी यह तत्व होता है लेकिन पानी में भिगोने , अंकुरित

करने या पकाने की प्रक्रिया से फायटिक एसिड और खनिज तत्वों का बंधन टूटता है और खनिज का अवशोषण आसान हो जाता है। सोयाबीन

में इन प्रक्रियाओं से भी फायटिक एसिड का बंधन नहीं टूटता। खमीरीकरण Fermentation से ही यह बंधन टूटता है। अतः सोयाबीन का

खमीरीकरण करके खाना सबसे अच्छा होता है।

 

सोयाबीन से बनने वाले मिसो , tempeh , natto आदि भी खमीरीकरण से ही तैयार किये जाते हैं। इसलिए ये पचने में आसान और फायदे

मंद होते है। सोयाबीन का दही बनाना भी खमीरीकरण का ही एक रूप है अतः सोयाबीन का दही या छाछ का उपयोग इसके फायदे लेने का

अच्छा तरीका होता है। इससे सोयाबीन के खनिज शरीर को पूरी मात्रा में मिलते हैं। सोयाबीन का दही बनाने के लिए सोयाबीन का दूध बनाना

होता है। सोयाबीन से दूध , दही , पनीर बनाने का तरीका इस प्रकार है :

 

सोयाबीन का दूध बनाने की विधि  – soyabean milk making

 

50 ग्राम पीले सोयाबीन रात को पानी में भिगो दें। लगभग 12 घंटे भीगने चाहिए। सुबह मसल कर छिलके निकाल कर फेंक दें। छिलके निकले

सोयाबीन को मिक्सी में बारीक़ पीस ले। इसमें आधा लीटर पानी मिलाकर छान लें। आधा लीटर सोयाबीन का दूध तैयार है। इसे हिलाते हुए

उबलने तक गर्म कर लें। नहीं हिलाने से चिपक सकता है। अब ठंडा या गर्म जैसा पसंद हो पिया जा सकता है।

दूध छानने में बाद बचे हुए पिसे सोयाबीन का उपयोग  इस प्रकार किया जा सकता है :

—  इसमें  आटा या बेसन तथा प्याज , हरी मिर्च नमक, मसाले आदि डालकर पराठे बना कर खाये जा सकते है।

—  रसेदार सब्जी में डाला जा सकता है। ग्रेवी गाढ़ी हो जाती है।

—  इसमें चना , मूंग या उड़द का आटा और मसाले मिलाकर मंगोड़ी बड़ियाँ , पकौड़ी , टिकिया आदि बना सकते हैं।

 

सोयाबीन का दही – Soyabean Curd

 

सोयाबीन के आधा लीटर गुनगुने दूध में दो चम्मच दही मिलाकर जमने के लिए रख दें। 7 -8 घंटे में दही जमकर तैयार हो जाता है। इसका

उपयोग सादा दही की तरह करें। इसकी छाछ बना कर भी उपयोग में ले सकते हैं। सोयाबीन के उपयोग का यह सबसे अच्छा फायदेमंद

तरीका है। दही कब और कैसा नहीं खाना चाहिए जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

सोयाबीन का पनीर टोफू – Soya paneer Tofu

 

सोयाबीन के दूध को गर्म करके उसमे नींबू का रस या टाटरी डालें। दूध फटने पर छान लें। दबा कर रखें और पनीर बना लें। यह पनीर ही टोफू

कहलाता है। गाय भैंस के दूध से नर्म , स्पंजी और सफ़ेद पनीर बनाने की विधि जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

क्लीक करके इन्हे भी जानें और लाभ उठायें :

 

बादाम / अखरोट / अंजीर पिस्ता काजू /

खजूर  /आम / पपीता / संतरा  / अमरुद  /

सीताफल  / बील  / सेब  / आंवला    / जामुन /

केला  / नाशपति 

 

चटनी , मुरब्बे , मुखवास , आदि चटखारे 

पसीना ज्यादा आने के कारण और उपाय

गले में खराश के घरेलु नुस्खे  

गर्भाशय में फाइब्रोइड के कारण और उपचार 

हिचकी रोकने के उपाय 

पेट में कीड़े मिटाने के घरेलु नुस्खे 

पीसीओडी व अनियमित मासिक धर्म

स्वाइन फ्लू के घरेलु नुस्खे 

रसोई के मसालों के गुण और उनके घरेलु नुस्खे 

 

Disclaimer : The above mentioned post is for informational purpose only and have been put together from the various published media and internet.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *