हाउसिंग लोन लेते समय क्या ध्यान रखें – Housing Loan

हाउसिंग लोन Housing Loan या होम लोन लेना आज के समय की जरुरत भी हो गई है सुविधा भी। हर इंसान का सपना होता है की उसका

खुद का एक घर हो। विशेषकर उन लोगों का जिन्होंने किराये के घर में कई प्रकार की परेशानी महसूस की हैं। किराये बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं।

जितना हर महीने किराया दिया जाता है उतने पैसे लोन की किश्त में देने से खुद के घर का आनंद लिया जा सकता है।

 

सरकार भी इसमें सहयोग करती है। हाउसिंग लोन पर ब्याज की दर बहुत कम कर दी गई है। हाउसिंग लोन लेने पर उसकी किश्त

Instalment  के लिए इनकम टैक्स में छूट दी जाती है। यह छूट सेक्शन 80 C के अंतर्गत दी जाती है। नया घर खरीदने के अलावा पुराने घर

में कुछ और अतिरिक्त निर्माण के लिए या कुछ बदलाव करने के लिए भी लोन उपलब्ध हो सकता है।

हाउसिंग लोन

हाउसिंग लोन कहाँ से लेना चाहिए और इसके लिए क्या करना पड़ता है इसकी जानकारी होने से यह काम बहुत आसान हो जाता है।

परन्तु कुछ सावधानियां रखनी भी जरुरी होती हैं अन्यथा सुविधा की जगह परेशानी हो सकती है।

आइये जानें इनके सम्बन्ध के कुछ महत्वपूर्ण बातें –

 

होम लोन देने वाली कई प्राइवेट और सरकारी संस्था मौजूद है। जिनसे संपर्क करके लोन लिया जा सकता है। बैंक भी हाउसिंग

लोन उपलब्ध कराते हैं। उनके नियम और शर्तें ब्रांच में संपर्क करके मालूम की जा सकती हैं। हाउसिंग फाइनेंस कम्पनियाँ विशेषकर

मकान के लिए लोन देने का ही काम करती हैं। वैसे तो लोन देने वाली कम्पनियों की कमी नहीं है , पर कुछ मुख्य कम्पनियाँ ये हैं –

 

हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी – HDFC

एल आई सी हाउसिंग फाइनेंस  – LIC HFL

पी एन बी हाउसिंग फाइनेंस – PNB HOUSING

इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस – IBHFL

दीवान हाउसिंग फाइनेंस – DHFL

 

कुछ संस्थाएँ विशेष लोगों को विशेष सुविधा देती है जैसे महिलाओं के लिए ब्याज दर कम हो सकती है। इस प्रकार की सुविधाओं की जानकारी

शाखा से ली जा सकती है।

 

हाउसिंग लोन कितने साल तक के लिए

 

इस सम्बन्ध में प्रत्येक संस्था का नियम अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर ज्यादा से ज्यादा 30 साल तक की अवधि तक होम लोन दिया जा

सकता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार जितने समय में लोन वापस चूका सकते है उतनी अवधि के लिए ले सकते हैं। जैसे  5 साल , 10 साल

, 15 साल ,  20 साल या 30 साल ।

 

लोन की अवधि तथा लोन की रकम के अनुसार ब्याज की दर अलग हो सकती है। आप चाहें तो समय से पहले ब्याज सहित लोन की पूरी रकम

का भुगतान करके किश्त बंद भी करवा सकते हैं। कुछ संस्था इसका चार्ज अलग से लेती हैं और कुछ नहीं। इनके सम्बन्ध में संस्था से

पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।

 

फाइनेंस करने वाली संस्था द्वारा लोन की प्रक्रिया के लिए प्रोसेसिंग फीस ली जा सकती है। जो लोन की राशि का ०. 5 % से 1 % तक हो

सकता है। यह राशि लोन की राशि के साथ जोड़ कर वसूली जा सकती है। कुछ संस्था प्रोसेसिंग फीस में छूट देती हैं , इसका फायदा लिया

जा सकता है।

 

होम लोन कितना

 

होम लोन कितना मिल सकता है यह आपकी मासिक आय  ( Monthly Income  ) , आपके जीवन साथी की मासिक आय , आपकी संपत्ति

Assets  , उत्तरदायित्व Liabilities तथा आय के स्थायित्व Stability of income पर निर्भर करता है।

 

लोन देने वाली संस्था यह सुनिश्चित करती हैं कि आप लोन समय पर वापस चूका सकेंगे या नहीं। आपकी उम्र के अनुसार भी लोन की राशि तय

की जा सकती है। आप आसानी से लोन की रकम चूका सकें उतना ही लोन लेना चाहिए । लोन की राशि प्राप्त करने के लिए आपको अपनी

आय का ब्यौरा बताना पड़ता है।

 

डाउन पेमेंट क्या होता है

 

जब आप लोन लेते हैं तो कुछ राशि आपको देनी पड़ती है। जैसे यदि 20 लाख का मकान खरीदना चाहते हैं तो 2 लाख आपको देने होंगे बाकि

18 लाख लोन के रूप में मिल जायेंगे। यह आपके द्वारा दी गई 2 लाख की राशि डाउन पेमेंट कहलाती है।

यदि आप लोन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं तो मकान की कुल कीमत का 80 से 90 % राशि का लोन मिल सकता है। इस सम्बन्ध में हर

संस्था का अपना अलग नियम होता है। सामान्यतया इसमें  रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी आदि की राशि भी शामिल होती है। ऐसा है या नहीं

यह मालूम कर लेना चाहिए।  डाउन पेमेंट की राशि जितनी हो सके ज्यादा रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि आपको कम राशि पर ब्याज

देना पड़े।

 

हाउसिंग लोन के लिए कौनसे दस्तावेज – Documents

 

हाउसिंग लोन के लिए फॉर्म के साथ सामान्य तौर पर निम्न दस्तावेज आपसे मांगे जा सकते हैं –

 

—  यदि आप नौकरी पेशा है तो सैलरी स्लिप ( जो आपका मासिक वेतन दर्शाती हो ) की कॉपी ।

—  यदि आप खुद का व्यापार करते हैं या सेल्फ एम्प्लॉयड हैं तो इन्कम टैक्स रिटर्न की कॉपी  ।

—  व्यापार से सम्बंधित ट्रेडिंग अकाउंट और बैलेंस शीट आदि की कॉपी ।

—  आपके बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट।

—  आपका फोटोग्राफ।

—  आई डी प्रूफ जैसे आधार कार्ड , वोटर आई डी कार्ड , पैन कार्ड , राशन कार्ड , पासपोर्ट आदि।

—  रेजिडेंशियल प्रूफ  जैसे बिजली का बिल ,  किराया नामा , लैंडलाइन फ़ोन का बिल आदि।

 

कुछ संस्था कोलेटेरल सेक्युरिटी की डिमांड कर सकती हैं  जैसे – इंश्योरेंस पॉलिसी , शेयर , NSC , म्युचुअल फंड , बैंक FD या अन्य निवेश

सम्बंधित दस्तावेज आदि।

 

लोन सेंक्शन होना – Senction of Loan

 

संस्था को दिए गए दस्तावेज ( Documents ) के आधार पर विचार किया जाता है कि आप लोन प्राप्त करने के योग्य हैं या नहीं। लोन की राशि

भी इन्ही दस्तावेज के आधार पर तय की जाती है। यदि आपको योग्य पाया जाता है तो इसकी सूचना आपको एक लेटर के माध्यम से दी जाती

है जिसमें लोन की राशि , उसकी अवधि , ब्याज की दर तथा अन्य शर्तें लिखी होती हैं। ये शर्तें कब तक और कैसे मान्य होंगी यह भी बताया

जाता है। इसे ही लोन सेंक्शन होना या सेंक्शन लेटर मिलना कहा जाता है।

 

फिक्स या फ्लोटिंग ब्याज दर

 

हाउसिंग लोन Home Loan  पर ब्याज की दर फिक्स या फ्लोटिंग हो सकती है। ये लोन लम्बी अवधि के होते हैं अतः यह महत्वपूर्ण होता है

कि तय करें कि आप फिक्स ब्याज दर का लोन लेना चाहते हैं या फ्लोटिंग ब्याज दर। फिक्स और फ्लोटिंग ब्याज दर इस प्रकार होती हैं –

 

फिक्स ब्याज दर –  एक बार निश्चित होने के बाद लोन की पूरी अवधि तक ब्याज दर एक समान रहती है। सरकार द्वारा ब्याज दर में बदलाव

होने पर भी लोन पर वही ब्याज दर लगाई जाती है जो लोन देते समय तय की जाती है।

 

फ्लोटिंग ब्याज दर – सरकार द्वारा समय के साथ ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है। फाइनेंस करने वाली संस्था चाहे तो आप द्वारा लिए

गये लोन की ब्याज दर में बदलाव कर सकती है। यानि यदि  ब्याज दर कम हो गई हो तो आपकी संस्था भी ब्याज कम कर सकती है ,और इसी

तरह ब्याज की दर बढ़ जाती है तो आपसे अधिक ब्याज लिया जा सकता है।

 

यदि आपको लगता है की आने वाले समय में ब्याज की दरें कम हो सकती है तो आपको फ्लोटिंग ब्याज दर का लोन लेना चाहिए और यदि

आपको लगता है की आगे जाकर  ब्याज की दरें बढ़ जाएँगी तो आप फिक्स ब्याज दर वाला लोन लें।

 

ई एम आई क्या होती है – EMI

 

लोन की राशि वापस लेने के लिए एक निश्चित राशि संस्था द्वारा तय की जाती है जो हर महीने ली जाती है। इस राशि में मूल रकम और ब्याज

दोनों के लिए राशि सम्मिलित होती है। हर महीने क़िस्त Instalment के रूप में ली जाने वाली यह राशि  EMI  कहलाती है।

संस्था से लोन की राशि प्राप्त होने के अगले महीने से EMI शुरू हो जाती है। जब EMI की किश्त दी जाती है तो यह राशि लोन की राशि में से

कम कर दी जाती है और बाकि बची हुई राशि पर ब्याज लिया जाता है।

 

हाउसिंग लोन लेते समय ध्यान रखने योग्य बातें

 

—  होम लोन वहाँ से लें जहाँ एक ही अवधि के लिए EMI सबसे कम हो। किसी एजेंट के सम्पूर्ण विश्वास के साथ अपनी गणित जरूर लगाएं।

 

—  यदि आप जल्दी लोन चूका सकते हैं तो ज्यादा लम्बी अवधि के लिए लोन ना लें। जितनी अवधि ज्यादा होती है उतना ही अधिक ब्याज

आपको चुकाना पड़ता है। लोन की अधिकतम अवधि 30 साल तक हो सकती है। अवधि जितनी अधिक होती है EMI उतनी ही कम होती है।

यह आकर्षण का कारण बन सकता है। लेकिन यह आपके लिए नुकसान दायक होता है।

 

—  समय से पहले लोन की पूरी राशि चुकाने पर कोई अतिरिक्त चार्ज है या नहीं ये पता कर लेना चाहिए ।

 

—  मकान के लोन में फर्निशिंग की राशि सम्मिलित की गई है या नहीं ये देख लें।

 

—  रोजाना या महीने के अनुसार घटती हुई राशि पर ब्याज लेने वाली फाइनेंस कंपनी लोन लेने के लिए चुननी चाहिये ना की साल के अनुसार

घटती राशि पर ब्याज लेने वाली।

 

—  जब लोन की राशि दी जा रही हो तब आप चाहें तो कम राशि देने की गुजारिश कर सकते है।

 

—  जो राशि आप आसानी से चुका पायें उतना ही लोन लेना चाहिए। एक थम्ब रूल के अनुसार आपके सभी लोन की किश्त मिलाकर आपकी

मासिक आय के 50 % से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

 

—  किसी भी लोन की किश्त समय पर दी जा रही हो , इसका ध्यान रखना चाहिए। अन्यथा किसी दूसरी जरुरत के लिए दूसरा लोन लेने में

परेशानी आ सकती है।

 

–समय के साथ लोन के सम्बन्ध में क़ानूनी बदलाव हो सकते हैं। अतः ध्यान रखें कानून में बदलाव से यदि आपको कोई फायदा मिलता हो तो

तुरंत इसका लाभ लेना चाहिए।

 

—  लोन लेने से पहले घर वालों से मशविरा जरूर करना चाहिए। क्योकि लोन चुकाने का प्रभाव सभी घर वालों पर आता है। अपने जीवन साथी

को इसके बारे में अवश्य अवगत करना चाहिए।

 

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