Aarti Sangrah In Hindi-आरतीयां

भगवान की पूजा में आरती ( God Aarti ) का बहुत महत्त्व होता है। पूजा की समाप्ति पर आरती गाने  (Aarti  Song ) से पूजा में अज्ञानवश या असावधानी से कोई त्रुटी रह जाती है तो उसकी पूर्ती हो जाती है। पुराणों में कहा गया है की जो प्राणी धुप आरती ( Dhoop aarti )दोनों हाथों से श्रद्धा पूर्वक लेता है वह अपनी करोड़ो पीढ़ियों का उद्धार कर लेता है और विष्णु लोक में परम पद को प्राप्त होता है ।

आरती ( aarti )करना और गाना सभी को बहुत अच्छा लगता है । लेकिन आरती (aarti )कैसे करनी चाहिए , आरती के लिए कैसा दीपक लेना चाहिए , दीपक मे कितनी बत्तियां होनी चाहिए , कपूर से करें या घी के दीपक से , दीपक को कितनी बार घुमाएँ , इष्ट देव के किस अंग की और करके घुमाएँ इत्यादि पर संशय बना रहता है।  और मन में संशय रहता है की पता नहीं आरती ( aarti ) सही तरीके से हुई या नहीं।

आजकल एकल परिवार के कारण आरती के बोल ( aarti lirics ) व आरती की लय भी पता नहीं होती। यहाँ आरती  ( Aarti songs)  हिंदी  में दिए गए है  ताकि पूजा के बाद आरती गाकर आप भी पूजा का पूरा आनंद ले सके। इनमे से ओम जय जगदीश हरे आरती ( Om Jai Jagdish hare Aarti ) सबसे ज्यादा गाई जाती है। जो की जगदीश यानि विष्णु भगवान के लिए गाई जाती है। गणेश जी , दुर्गा माँ , शंकर भगवान आदि सभी की अलग अलग आरती गाई जाती है।

आरती करने का तरीका  ( aarti karne ka tareeka ) 

आरती अपने इष्ट देव की प्रतिमा के चारों ओर घी के दीपक या कपूर को जलाकर उसे घूमाते हुए की जाती है। कृष्ण भगवान की आरती के समय घी का दीपक होना चाहिए।  घर में एक बत्ती के दीपक से आरती की जाती है। मंदिरों में पांच बत्ती , सात बत्ती या ग्यारह बत्ती वाला दीपक जलाकर आरती  की जाती है। यदि आप एक से अधिक बत्ती वाले दीपक से आरती करना चाहते है तो विषम संख्या में बत्ती होनी चाहिए , उनमे भी तीन , नौ व तेरह बत्ती नहीं होने चाहिए। पांच , सात , ग्यारह , इक्कीस संख्या शुभ होती है।

आरती करते समय पहले दीपक को चार बार इष्ट देव के चरणों की तरफ घुमाएँ ,  फिर दीपक को दो बार इष्ट देव की नाभि की ओर करके घुमाएँ  , इसके बाद एक बार इष्ट देव के मुख मंडल की ओर करके घुमाएँ , फिर इष्ट देव के चारों ओर घुमाएं । इस तरह सात बार दीपक को घूमाना चाहिए । आरती पूरी श्रद्धा व निष्ठां के साथ करनी चाहिए।

आरती ( Aarti )के समय ताली , घंटी , मंजीरे आदि बजाने से इष्ट देव में ध्यान अच्छे से लगता है और आरती का ( aarati )आनंद मिलता है। घंटी अपनी श्रद्धा के अनुसार सोने , चाँदी की या पीतल की ले सकते है । घंटी से मधुर ध्वनी निकालनी चाहिए। आरती ( aarati )में परिवार के सभी लोगों को इकठ्ठा होकर आरती गानी चाहिए । इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है और ईश्वर  की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है।

आरती ( aarati ) पूरी होने के बाद इष्ट देव का जयकारा करना चाहिए और फिर सभी को दीपक की लौ के ऊपर दोनों हाथ श्रद्धा पूर्वक फेरकर अपने सिर ,मुँह और फेरना चाहिए। इससे सारे शरीर की शुद्धि हो जाती है।

आपके लिए Aarti Sangrah प्रस्तुत है। इस  Collection of Aarti में सभी आरतीयों  को शामिल करने का प्रयास किया गया है। ये आरती ( aarti songs) गायें और आनंद लें।


 

Ganesh Ji Ki Aarti – गणेश जी की आरती 

lord-ganesha-1084346_1920

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा  ।   माता जाकी पार्वती पिता महादेवा  ।  ।  जय गणेश जय गणेश ….

एक  दन्त  दयावंत  चार  भुजाधारी   ।   माथे   सिन्दूर सोहे मूष  की  सवारी  ।  ।  जय गणेश जय गणेश ….

अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया  ।  बाँझन को पुत्र देत  निर्धन को माया  ।  ।  जय गणेश जय गणेश ….

हार  चढ़े  फूल  चढ़े  और  चढ़े  मेवा  ।  लडूवन  का  भोग  लगे  संत करे सेवा  ।  ।  जय गणेश जय गणेश ….

दीनन की लाज  राखी  शम्भु  सुतवारी  ।  कामना को पूरा करो जग बलिहारी  ।  ।  जय गणेश जय गणेश ….


 

Om Jai Jagdish Hare Aarti – ओम जय जगदीश हरे आरती 

ओम  जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे ।  भक्त जनो के संकट , क्षण में दूर करे  । ।   ओम जय जगदीश . . . . .

जो  ध्यावे  फल पावे , दुःख  विनशे  मन  का ।  सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का  । ।   ओम जय जगदीश . . . . .

मात पिता तुम  मेरे , शरण  गहुँ में  किसकी । तुम बिन और  न दूजा , आस करूँ जिसकी  । ।   ओम जय जगदीश . . . . .

तुम   पूरण  परमात्मा  ,  तुम  अंतर्यामी  ।   पार   ब्रहम  परमेश्वर  ,  तुम  सबके  स्वामी  । ।   ओम जय जगदीश . . . . .

तुम  करुणा के  सागर  , तुम  पालन  करता ।  मैं  मूरख  खल  कामी  , कृपा  करो  भरता  । ।  ओम जय जगदीश . . . . .

तुम हो एक  अगोचर , सबके  प्राणपति  ।  किस  विधी  मिलूं  दयामय , तुमको मैं कुमति  । ।  ओम जय जगदीश . . . . .

दीनबन्धु    दुःख   हरता ,   तुम  रक्षक  मेरे  ।  अपने   हाथ   बढाओ  ,  द्वार   पड़ा   तेरे  । ।  ओम जय जगदीश . . . . .

विषय   विकार  मिटाओ  ,  पाप  हरो  देवा  ।  श्रध्दा   भक्ति  बढाओ ,  सन्तन  की  सेवा  । ।  ओम जय जगदीश . . . . .

तन    मन    धन  ,  सब   कुछ   हे   तेरा ।   तेरा    तुझको    अर्पण , क्या    लागे   मेरा   । ।  ओम जय जगदीश . . . . .

श्री जगदीश जी की आरती , जो कोई नर गावे ।  कहत शिवानन्द स्वामी , सुख सम्पति पावे  । ।  ओम जय जगदीश . . . .


 

Shiv Ji Ki Aarti -शिव जी की आरती 

.

जय शिव  ओंकारा , ओम  जय शिव  ओंकारा   ।  ब्रह्मा , विष्णु , सदाशिव , अर्धांगी धारा  । ।  ओम जय …

एकानन  चतुरानन   पंचानन  राजे    ।   हंसासन    गरुडासन    वृष   वाहन    साजे  । ।  ओम जय …

दो भुज चार चतुर्भुज  दसभुज अति सोहे  ।   त्रिगुण रूप निरखते , त्रिभुवन जन मोहे  । ।  ओम जय …

अक्ष   माला   वनमाला   मुंडमाला   धारी   ।   त्रिपुरारी   कंसारी   कर   माला   धारी  । ।  ओम जय …

श्वेताम्बर  पीताम्बर   बाघम्बर  अंगे  ।   सनकादिक   गरुणादिक   भूतादिक   संगे  । ।  ओम जय …

कर  के  मध्य  कमण्डलु  चक्र  त्रिशूलधारी  ।  सुखकारी  दुखकारी  जगपालन  कारी  । ।  ओम जय …

ब्रह्मा  विष्णु  सदाशिव  जानत  अविवेका  ।  प्रणवाक्षर  में  शोभित  ये  तीनो  एका  । ।  ओम जय …

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे  । ।  ओम जय


 

Maa Durga Ambe Ji Ki Aarti -अम्बे मां की आरती

 

जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी ।  तुमको निशदिन ध्यावत , हरि ब्रह्मा  शिवरी । । जय अम्बे गौरी …

मांग  सिन्दूर विराजत , टीको  मृग मद को ।  उज्जवल  से दोउ नैना , चन्द्र बदन नीको । । जय अम्बे गौरी …

कनक  समान  कलेवर ,  रक्ताम्बर   राजे ।  रक्त  पुष्प  गल  माला ,  कंठन  पर  साजे । । जय अम्बे गौरी …

केहरि  वाहन  राजत , खड़ग खपर  धारि ।  सुर  नर मुनि  जन सेवत , तिनके दुःख हारी । । जय अम्बे गौरी …

कानन  कुंडल  शोभित ,  नासाग्रे  मोती ।  कोटिक  चन्द्र   दिवाकर , राजत  सम ज्योति । । जय अम्बे गौरी …

शुम्भ  निशुम्भ  विदारे  , महिषासुर घाती  ।  धूम्र  विलोचन  नैना ,  निश दिन मदमाती । । जय अम्बे गौरी …

चंड   मुण्ड  संहारे  ,  शोणित   बीज  हरे  ।  मधु   कैटभ  दोउ  मारे  ,  सुर  भयहीन  करे । । जय अम्बे गौरी …

ब्रह्माणी  रुद्राणी , तुम  कमला  रानी  ।   आगम  निगम  बखानी ,  तुम  शिव  पटरानी । ।  जय अम्बे गौरी …

चौंसठ योगिनी  मंगल गावत , नृत्य करत भैंरू ।  बाजत ताल मृदंगा , अरु बाजत डमरू । । जय अम्बे गौरी …

तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता ।  भक्तन की दुःख हरता , सुख सम्पति करता । । जय अम्बे गौरी …

भुजा  चार  अति  शोभित , वर  मुद्रा  धारी ।  मनवांछित  फल  पावत , सेवत  नर नारी । । जय अम्बे गौरी …

कंचन  थाल विराजत , अगर कपूर बाती  ।  श्रीमालकेतु  में राज़त , कोटि  रतन ज्योति । । जय अम्बे गौरी …

श्री अम्बेजी की आरती , जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी , सुख सम्पति पावे । । जय अम्बे गौरी …


Durga Chalisa-दुर्गा चालीसा 

नमो नमो दुर्गे सुख करनी , नमो नमो अम्बे दुःख हरनी। निरंकार है ज्योति तुम्हारी , तिहु लोक फैली उजियारी।

शशि ललाट मुख महा विशाला , नेत्र लाल भ्रिकुटी विकराला। रूप मातु को अधिक सुहावे , दरस करत मन अति सुख पावे।

तुम संसार शक्ति लय कीना , पालन हेतु अन्न धन दीना। अन्नपूर्णा हुई जगपाला , तुम्ही आदि सुंदरी बाला।

प्रलय काल सब नाशन हारी , तुम गौरी शिव शंकर प्यारी। शिव योगी तुम्हारे गुण गावें , ब्रह्मा विष्णु तुम्हे नित ध्यावें।

रूप सरस्वती का तुम धारा , दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा। धरा रूप नरसिंह को अम्बा , प्रगट भई फाड़ कर खम्बा।

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो , हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो। लक्ष्मी रूप धरो जग माही , श्री नारायण अंग समाही।

क्षीरसिन्धु में करत विलासा , दया सिन्धु दीजे मन आसा। हिंगलाज में तुम्ही भवानी महिमा अमित ना जान बखानी।

मातंगी अरु घूमावती माता , भुवनेश्वरी बगला सुखदाता। श्री भैरव तारा जग तारिणी , छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी।

केहरि वाहन सोहे भवानी , लांगुर वीर चलत अगवानी। कर में खप्पर खड्ग बिराजे , जाको देख काल डर भाजे।

सोहै अस्त्र और त्रिशूला , जाते उठत शत्रु हिय शूला। नगरकोट में तुम्ही विराजत , तिहूँ लोक में डंका बाजत।

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे , रक्त बीज शंखन संहारे। महिषासुर नृप अति अभिमानी , जेहि अघ भार महि अकुलानी।

रूप कराल कालि को धारा ,सेन सहित तुम तिहि संहारा। परी भीर संतन पर जब जब , भई सहाय मातु तुम तब तब।

अमर पुरी अरू बासव लोका , तब महिमा सब रहे अशोका। ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी , तुम्हे सदा पूजें नर नारी।

प्रेम भक्ति से जो यश गावें , दुःख दारिद्र निकट नहीं आवें। ध्यावे तुम्हे जो नर मन लाई , जन्म मरण ताकौ छुटी जाई।

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी , योग ना होय बिन शक्ति तेरी। शंकराचार्य जब तप कीन्हो , काम क्रोध जीति सब लीनो।

निशदिन ध्यान धरो शंकर को , काहु काल नहि सुमिरो तुमको। शक्ति रूप का मरम ना पायो ,शक्ति तब मन पछतायो।

शरणागत हो कीर्ति बखानी , जय जय जय जगदम्बे भवानी। भई प्रसन्न आदि जगदम्बा , दी शक्ति नहीं कीन विलम्बा।

माको मातु कष्ट अति घेरो , तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो। आशा तृष्णा निपट सतावैं ,रिपु मूरख मोहि अति डर पावैं।

शत्रु नाश कीजे महारानी , सुमिरों इकचित्त तुम्हे भवानी।  करो कृपा हे मातु दयाला , रिद्धि सिद्धि दे करहु निहाला।

जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ , तुम्हरो यश मैं सदा ही गाऊँ। दुर्गा चालीसा जो कोई गावै , सब सुख भोग परम पद पावै।

भक्तों की शरण निज जानी , करहूँ कृपा जगदम्बे भवानी


****<<<<<  श्री हनुमत वन्दन  >>>>>****

अतुलितबलधामं  हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानीनामग्रगण्यम  ।

सकुलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुप्रियभक्तं वातजातं नमामि  । ।

****<<<<<  Shri Hanuman Aarti – हनुमान जी की आरती >>>>>****

आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की । । आरती कीजै….

जाके बल से गिरिवर कांपे ।  रोग  दोष जाके  निकट न झांके। ।आरती कीजै….

अंजनी  पुत्र   महा  बलदाई  ।  संतन  के  प्रभु   सदा   सहाई । । आरती कीजै….

दे  बीरा   रघुनाथ   पठाये  ।  लंका   जारि  सिया  सुध  लाये । । आरती कीजै….

लंका  सो कोट  समुद्र सी खाई । जात पवन सूत बार न लाई । । आरती कीजै….

लंका  जारि  असुर  संहारे । सियाराम  जी  के  काज  संवारे  । । आरती कीजै….

लक्ष्मण  मुर्छित  पड़े  सकारे ।  आनि  संजीवन  प्रान  उबारे । । आरती कीजै….

पैठी  पाताल  तोरि  जमकारे ।  अहिरावण  की भुजा  उखारे । । आरती कीजै….

बाएँ  भुजा असुरदल  मारे ।  दाहिने  भुजा  संत  जन  तारे। । । आरती कीजै….

सुर नर मुनि आरती उतारें ।  जय जय जय  हनुमान  उचारें । । आरती कीजै….

कंचन  थार  कपूर  लौ  छाई   । आरति  करत  अंजना  माई । । आरती कीजै….

जो हनुमान जी की आरती गावै । बसि बैकुन्ठ परम पद पावै। । आरती कीजै….


 

Hanuman Chalisa -हनुमान चालीसा 

***  <<  दोहा  >>***

श्री गुरु चरन सरोज रज , निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु , जो दायकु फल चारि ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके , सुमिरों पवन -कुमार ।  बल बुधि विद्या देहु मोहिं , हरहु कलेस बिकार ।।

***<<  चौपाई  >>***

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ।  जय कपीस तिहुँ लोक उजागर । ।

राम  दूत  अतुलित  बल धामा । अंजनी  पुत्र  पवन  सुत  नामा । ।

महावीर   विक्रम  बजरंगी  ।  कुमति  निवार  सुमति  के  संगी । ।

कंचन  बरन   बिराज  सुवेसा  ।  कानन   कुंडल  कुंचित  केसा । ।

हाथ  वज्र   और  ध्वजा  विराजे  ।  काँधे   मूँज  जनेऊ  साजै  । ।

संकर  सुवन  केसरी  नंदन ।  तेज  प्रताप  महा  जग  बन्दन । ।

विद्यावान  गुनी  अति  चातुर । राम काज  करिबे को आतुर । ।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिआ । राम लखन सीता मन बसिया । ।

सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा । विकट रूप धरी लंक जरावा । ।

भीम  रूप  धरी  असुर   संहारे  ।  रामचन्द्र  के  काज  संवारे । ।

लाय संजीवन  लखन  जियाये ।  श्री  रघुवीर  हरषि उर लाये । ।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई । ।

सहस्र  बदन  तुमरो  जस गावे । असकहि श्रीपति कंठ लगावै । ।

सनकादिक  ब्रह्मादी  मुनीसा ।  नारद सारद  सहित अहीसा । ।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कही सके कहाँ ते । ।

तुम उपकार सुग्रीवहिं  कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा । ।

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना । लंकेस्वर भए  सब जग जाना । ।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानु । ।

प्रभुमुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघ गए अचरज नाही । ।

दुर्गम  काज  जगत के जेते ।  सुगम  अनुग्रह   तुम्हरे   तेते । ।

राम   दुआरे  तुम  रखवारे  ।  होत   न   आज्ञा  बिनु  पैसारे । ।

सब  सुख  लहै  तुम्हारी सरना । तुम  रक्षक  काहू को डरना । ।

आपन   तेज  सम्हारो   आपै ।  तीनो  लोक   हांक  ते  काँपें । ।

भूत  पिशाच  निकट नहीं आवैं । महावीर  जब  नाम सुनावै । 

नासै   रोग  हरै  सब  पीरा  ।  जपत  निरंतर  हनुमत  बीरा । ।

संकट तें  हनुमान  छुड़ावै । मन क्रम बचन  ध्यान जो लावै । ।

सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके  काज सकल तुम साजा । ।

और  मनोरथ  जो  कोई लावै । सोई  अमित जीवन फल पावै । ।

चारों जुग  परताप तुम्हारा ।  है  परसिद्ध  जगत  उजियारा । ।

साधु  संत  के तुम  रखवारे  ।  असुर   निकंदन  राम  दुलारे । ।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता । ।

राम   रसायन  तुम्हरे  पासा । सदा  रहो  रघुपति  के  दासा । ।

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम  के दुःख बिसरावै । ।

अंत काल  रघुबर पुर जाई ।  जहाँ  जन्म  हरि भक्त  कहाई । ।

और  देवता  चित्त  न  धरई । हनुमत  सेई  सर्व  सुख  करई । ।

संकट  कटै  मिटे  सब   पीरा । जो  सुमिरै  हनुमत बलबीरा । ।

जै जै जै  हनुमान गोसाई ।  कृपा  करहु  गुरु  देव  की  नाईं । ।

जो  सत  बार  पाठ कर कोई । छूटहि  बंदि  महा  सुख  होई । ।

जो य ह पढ़े  हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा । ।

तुलसीदास  सदा  हरि  चेरा  ।  कीजै   नाथ   ह्रदय  में  डेरा । ।

***<< दोहा >>***

पवन तनय संकट हरन , मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित , हृदय बसहु सुर भूप ।।

******<<<<सियावर राम चन्द्र की जय >>>>*****


 

Shri Laxmi Mata Ki Aarti – श्री लक्ष्मी माता की आरती 

ओम जय लक्ष्मी माता , मैया जय लक्ष्मी माता  ।  तुमको निशदिन सेवत , हरि विष्णु विधाता  । ।  ओम जय …

उमा ,  रमा ,  ब्रह्माणी ,  तुम  ही  जग  माता  ।  सूर्य  चन्द्रमा  ध्यावत  ,   नारद ऋषि  गाता  । ।  ओम जय …

दुर्गा रूप  निरंजनि , सुख  सम्पति  दाता  ।  जो   कोई तुमको ध्यावे , ऋद्धि सिद्धि धन पाता । ।  ओम जय …

तुम  पाताल  निवासिनी , तुम  ही  शुभ  दाता  ।  कर्म  प्रभाव  प्रकाशिनी ,  भव  निधि की त्राता । ।  ओम जय …

जिस  घर  में  तुम  रहती , सब  सद्गुण  आता  ।  सब  संभव  हो  जाता ,  मन  नहीं  घबराता । ।  ओम जय …

तुम  बिन  यज्ञ  न  होते ,  वस्त्र  न  कोई  पाता  ।  खान  पान   का  वैभव  सब  तुमसे  आता  । ।  ओम जय …

शुभ  गुण  मंदिर  सुन्दर  ,   क्षीरोदधि   जाता  ।  रत्न  चतुर्दश  तुम  बिन ,  कोई  नहीं  पाता  । । ओम जय …

महालक्ष्मी  जी  की  आरती ,  जो  कोई  जन  गाता  ।  उर  आनंद  समाता  पाप  उतर  जाता  । ।  ओम जय …


Shri Sai Baba Ki Aarti – श्री साईं बाबा की आरती

आरती  उतारे   हम तुम्हारी  सांई  बाबा  ।

चरणों  के  तेरे  हम  पुजारी  बाबा ।

विद्या  बल  बुद्धि ,  बंधु  माता  पिता  हो ।

तन  मन  धन  प्राण  ,  तुम्ही  सखा  हो ।

हे  जगदाता  अवतारे  , सांई  बाबा ।

आरती  उतारे  हम  तुम्हारी  सांई  बाबा ।

ब्रह्म  के  सगुण  अवतार  तुम  स्वामी ।

ज्ञानी  दयावान  प्रभु  अंतरयामी ।

सुन  तो  विनती  हमारी  सांई  बाबा ।

आरती  उतारे  हम  तुम्हारी  सांई  बाबा ।

आदि  हो  अनंत  त्रिगुणात्मक  मूर्ति ।

सिंधु  करुणा  के  हो  उद्धारक  मूर्ति ।

शिरडी  के  संत  चमत्कारी  सांई  बाबा ।

आरती  उतारे  हम  तुम्हारी  सांई  बाबा ।

भक्तों  की  खातिर  जनम  लिए  तुम ।

प्रेम  ज्ञान  सत्य  स्नेह   , मरम  दिए  तुम ।

दुखिया  जनों  के  हितकारी  सांई  बाबा ।

आरती  उतारे  हम  तुम्हारी  सांई  बाबा ।


Shri Ram Ji Ki Aarti -श्री राम जी की आरती 

श्री  रामचंद्र   कृपालु   भज   मन   हरण   भव   भय  दारूणम ।

नव   कंज   लोचन   कंज   मुख   कर    कंज  पद  कंजारुणम ।

कन्दर्प   अगणित   अमित   छवि  नव  नील  नीरद  सुन्दरम ।

पट  पीत  मानहुं  तड़ित  रूचि  शुचि  नौमि  जनक  सुतावरम ।

भजु    दीनबंधु    दिनेश    दानव    दैत्य    वंश    निकन्दनम ।

रघुनन्द   आनन्द   कन्द    कौशल   चन्द   दशरथ   नन्दनम ।

सिर   मुकुट   कुंडल   तिलक   चारू   उदार   अंग   विभूषणम ।

आजानुभुज    शर   चाप    धर    संग्राम    जित    खरदूषणम ।

इति  वदति  तुलसी   दास   शंकर   शेष   मुनि   मन   रंजनम ।

मम   ह्रदय  कंज   निवास   कुरु   कामादि  खल  दल  गंजनम ।

मन  जाही   राचेउ   मिलिहि   सो  वर   सहज   सुन्दर   सांवरो ।

करुणा    निधान    सुजान     शील     सनेह     जानत    रावरो ।

एहि  भांती  गौरी  असीस  सुन सिय  सहित  हिय हरषित अली ।

तुलसी  भवानिहि  पूजि  पुनि  पुनि  मुदित  मन  मन्दिर  चली ।


Satya Narayan Ji Ki Aarti-सत्य नारायण जी की आरती

satynarayan

जय  लक्ष्मीरमणा  श्री  जय  लक्ष्मीरमणा  । सत्य नारायण  स्वामी  जन पातक हरणा । । जय लक्ष्मी…

रत्न  जड़ित  सिंहासन  अद्भुत  छवि  राजे । नारद  करत  निराजन  घंटा  ध्वनि बाजे । । जय लक्ष्मी…

प्रगट भये कलि कारण द्विज को दरस दियो । बूढो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो । । जय लक्ष्मी…

दुर्बल  भील  कठारो  इन  पर  कृपा करी ।  चन्द्रचूड़   इक  राजा   जिनकी  विपति  हरी । । जय लक्ष्मी…

वैश्य  मनोरथ  पायो  श्रद्धा  ताज  दीनी । सो  फल भोग्यो  प्रभुजी  फिर स्तुति  कीनी । । जय लक्ष्मी…

भाव भक्ति के कारण  छिन छिन रूप धरयो । श्रद्धा धारण कीनी तिनको काज सरयो । । जय लक्ष्मी…

ग्वाल  बाल  संग  राजा  वन  में  भक्ति  करी । मनवांछित  फल  दीनो  दीनदयाल हरी । । जय लक्ष्मी…

चढ़त   प्रसाद  सवाया   कदली   फल   मेवा  ।  धूप   दीप   तुलसी   से  राजी  सत्यदेवा । । जय लक्ष्मी…

श्री सत्य नारायण जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे । । जय लक्ष्मी…