अहोई अष्टमी पूजन और व्रत विधि – Ahoi Ashtami Poojan and Vrat

अहोई अष्टमी का पूजन और व्रत माँ अपनी संतान की उन्नति , प्रगति और दीर्घायु के लिए रखती हैं । कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी होती है। यह दीपावली से ठीक सात दिन पहले आती है। दिवाली और अहोई अष्टमी का वार (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

अहोई माता की आरती अष्टमी वाली – Ahoi Astami Mata ki aarti

अहोई माता की आरती Ahoi mata ki arti अहोई अष्टमी के दिन विशेष रूप से पूजन के बाद गाई जाती है। अहोई अष्टमी का पूजन और व्रत का तरीका जानने के लिए यहाँ क्लिक करें। अहोई माता के पूजन के बाद कहानी सुनने (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

जल झुलनी वामन एकादशी – Jal Jhulani Vaman Ekadashi

जल झुलनी एकादशी Jal Jhulni Ekadashi एक बड़ी एकादशी मानी जाती है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी जलझूलनी एकादशी होती है। इसे वामन एकादशी Waman Ekadashi, डोल ग्यारस Dol gyaras, परिवर्तनि एकादशी Parivartani Ekadashi, तथा पद्मा एकादशी Padma Ekadashi, (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

पीपल के पेड़ की पूजा विधि और महत्त्व – Peepal Tree Pooja

पीपल का पेड़ Peepal tree सदियों से पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों में पीपल की जड़ में ब्रह्मा , तने में विष्णु और शाखाओं में शिवजी का वास बताया गया है।  गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं को वृक्षों में पीपल (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

कार्तिक स्नान का महत्त्व लाभ और तरीका – Kartik Snan

कार्तिक स्नान कार्तिक महीने की एक मुख्य धार्मिक परंपरा है। कार्तिक मास धार्मिक कार्य के लिए बहुत शुभ महीना होता है। इस महीने में कई मुख्य त्यौहार आते हैं जैसे करवा चौथ , तुलसी विवाह , दिवाली , कार्तिक पूर्णिमा आदि। इस मास (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

श्राद्ध कनागत पितृपक्ष क्या कब और कैसे – Shradh , Pitrapaksh , Kanagat

श्राद्ध करना श्रद्धा का प्रतीक होता है। यह अपने पूर्वजों को याद करने , सम्मान देने और धन्यवाद करने का जरिया है। सामान्यतया श्राद्ध माता , पिता , दादा , दादी के लिए किया जाता है। कुंवारे पुत्र , कुवांरी पुत्री , (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत सोलह दिन का – Radha ashtmi Mahalakshmi Vrat

राधा अष्टमी – Radha ashtami   भादों सुदी अष्टमी के दिन शक्ति श्री राधेरानी का एक कन्या के रुप  में कमल के पुष्प पर प्रादुर्भाव हुआ था। इस दिन सुबह वृषभानु जी ने देखा कि तालाब के चारों और महान दिव्य (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

मंगला गौरी व्रत और पूजा की सम्पूर्ण विधि – Mangla Gauri Vrat Pooja

मंगला गौरी व्रत Mangla Gauri Vrat सावन महीने के मंगलवार को किया जाता है। इस व्रत की शुरुआत सावन महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से की जाती है। इसके बाद चार या पांच साल तक लगातार सावन महीने के प्रत्येक (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

मंगला गौरी व्रत का उद्यापन सम्पूर्ण विधि – Mangla Gauri Vrat Udyapan

मंगला गौरी व्रत – Mangla Gauri Vrat   मंगला गौरी का व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए करती है। इसमें 16 या 20 मंगलवार के व्रत सावन महीने में किये जाते है। 16 मंगलवार के बाद 17 वें  मंगलवार (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

नाग पंचमी की पूजा और कहानी – Nag Panchmi Pooja and katha

नाग पंचमी / भैया पंचमी – Nag Panchami   नाग पंचमी सावन महीने की पंचमी तिथि के दिन मनाई जाती है। इस दिन महिलायें नाग देवता की पूजा करती है और उन्हें दूध अर्पित किया जाता है। महिलायें यह पूजा अपने भाई (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

गणगौर के गीत पूजन के बाद के – Gangor ke geet poojan ke bad

गणगौर के गीत पूजन के बाद के Gangaur ke Geet Poojan ke bad ke     गणगौर का गीत ओड़ो कोड़ो -:  Gangaur ka Geet odo kodo :-   ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख ये कुण गौरा (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

गुरु जी की आरती गुरु पूर्णिमा पर – Guruji Ki Arti

गुरुजी की आरती GURU JI KI AARTI <<<>>> <<<>>> आरती  गुरुदेव  की  कीजै , अपनों  जन्म सफल कर लीजै ।   कंचन थाल कपूर की बाती , जगमग जोति जले दिन राती । ।   भाव सहित गुरु भक्ति कीजै (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

दुर्गा चालीसा – Durga Chalisa

दुर्गा चालीसा  Durga Chalisa     नमो नमो  दुर्गे सुख  करनी , नमो नमो अम्बे दुःख हरनी । निरंकार  है  ज्योति  तुम्हारी ,  तिहु लोक फैली उजियारी । शशि ललाट मुख महा विशाला , नेत्र लाल भ्रिकुटी विकराला । रूप (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

लक्ष्मी माता की आरती – Lakshmi Maa Ki Aarti

 श्री लक्ष्मी माता की आरती Shri Laxmi Mata Ki Aarti <<>> <<>> ओम जय लक्ष्मी माता , मैया जय लक्ष्मी माता  । तुमको  निशदिन  सेवत ,  हरि  विष्णु  विधाता  । ।  ओम जय … उमा ,  रमा ,  ब्रह्माणी  ,   (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

आरती कैसे करनी चाहिए – Aarti karne ka tareeka

आरती – Aarti   भगवान की पूजा में आरती  God Aarti  का बहुत महत्त्व होता है। पूजा की समाप्ति पर आरती गाने  (Aarti  Song ) से पूजा में अज्ञानवश या असावधानी से यदि कोई भी त्रुटी रह जाती है तो उसकी पूर्ति (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

हनुमान चालीसा – Hanuman Chalisa

हनुमान चालीसा  Hanuman Chalisa ***  <<  दोहा  >>*** श्री गुरु चरन सरोज रज , निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु , जो दायकु फल चारि ।। बुद्धिहीन  तनु   जानिके   ,   सुमिरों   पवन  कुमार । (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

हनुमान जी की आरती मंगलवार की – Hanuman Ji ki Arti

हनुमान जी की आरती Hanuman Ji Ki Arti आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट  दलन  रघुनाथ  कला की  । ।  आरती कीजै…. जाके   बल  से   गिरिवर   कांपे । रोग  दोष जाके निकट न झांके। । आरती कीजै…. (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

शनिवार की आरती – Shanivar ki aarti

शनिवार की आरती – Sanivaar ki arti <<<>>> आरती  कीजै  नरसिंह  कुंवर की ।   वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभु जी । ।   पहली   आरती   प्रह्लाद   उबारे ।  हिरणाकुश  नख   उदार  विदारे । ।    (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

संतोषी माता की आरती – Santoshi Mata Ki Aarti

संतोषी माता की आरती Santoshi Mata Ki Aarti     जय संतोषी माता  मैया  जय संतोषी माता , अपने  सेवक  जन  की सुख संपत्ति दाता । । जय संतोषी माता …. सुन्दर  चीर  सुनहरी   माँ  धारण  कीन्हो  , हीरा  पन्ना (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

निर्जला एकादशी व्रत पारण पूजा विधि और इसका महत्त्व -Nirjala Ekadashi

  निर्जला एकादशी ,  निर्जला ग्यारस  –  Nirjala Ekadashi   निर्जला एकादशी का महत्त्व साल भर में आने वाली 24 एकादशी में सबसे अधिक होता है। निर्जला का मतलब है बिना पानी। इस दिन किये जाने वाले व्रत में पानी भी नहीं (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

अक्षय तृतीया की पूजा और इस दिन का महत्त्व – Akshay Tritiya

अक्षय तृतीया – Akshay Tritiya   वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया के रूप में मनाई जाती है। इस दिन देवी लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा की जाती है।  यह दिन आखा तीज Akha teej और अक्ति Akti (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

शीतला माता की आरती – Sheetla Mata Ki Arti

 ~ शीतला माता जी की आरती ~   जय शीतला माता , मैया जय शीतला माता ।  आदि ज्योति महारानी , सब फल की दाता ।। जय शीतला माता …. रतन  सिंहासन  शोभित  ,  श्वेत  छत्र  भाता । रिद्धि सिद्धि चंवर (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

शीतला सप्तमी पर शीतला माता की पूजा और बासोड़ा – Sheetla Saptami and Basoda

शीतला सप्तमी , बासोड़ा , ठंडा बासी – Sheetla Saptami   शीतला सप्तमी या शीतला सातम shitla satam होली के सात दिन बाद मनाई जाती है। चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमीं के दिन यह त्यौहार मनाया जाता है। इस पर्व को बासोड़ा या (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

गणगौर का उद्यापन करने की विधि – Gangaur Ka Udyapan Vidhi

गणगौर का उद्यापन – Gangaur ka Udyapan   गणगौर का त्यौहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। महिलाएँ गणगौर का पूजन भक्ति भाव के साथ करके माँ गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करती है। गणगौर पूजन की विधि जानने के लिए (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

गणगौर का पूजन सोलह दिन का और सिंजारा – Gangaur Pooja Vidhi and Sinjara

गणगौर – Gangaur   गणगौर का त्यौहार उत्तर भारत के राज्यों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है,  विशेष कर राजस्थान में। उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , हरियाणा तथा गुजरात के कुछ भागों में भी गणगौर मनाई जाती है। (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

जय अम्बे गौरी आरती – Jay Ambe Gauri arti

जय  अम्बे  गौरी आरती Jay Ambe Gauri Arti     जय   अम्बे  गौरी ,   मैया  जय  श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत , हरि ब्रह्मा  शिवरी । । जय अम्बे गौरी … मांग  सिन्दूर विराजत , टीको  मृग मद (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

जय शिव ओमकारा आरती – Jay Shiv Omkara Arti

 जय शिव ओमकारा आरती Jay Shiv Omkara Arti जय  शिव ओमकारा , ओम  जय शिव ओमकारा    ।   ब्रह्मा  ,   विष्णु  ,  सदाशिव   ,  अर्धांगी    धारा  । । ओम जय … एकानन   चतुरानन     पंचानन (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

गणेश जी की आरती – Ganesh Ji Ki Aarti

 Ganesh Ji Ki Aarti  गणेश जी की आरती        जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा  ।   माता  जाकी  पार्वती   पिता  महादेवा  ।  । जय गणेश जय गणेश …. एक  दन्त  दयावंत  चार  भुजाधारी   ।  माथे (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )

शिव चालीसा महा शिवरात्रि के लिए – Shiv Chalisa

शिव चालीसा – Shiv Chalisa  ॥दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ।। ॥चौपाई॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ।। भाल  चन्द्रमा  सोहत  नीके  । कानन  कुण्डल (……यहाँ क्लीक करके पूरा पढें )