गणगौर का उद्यापन करने की विधि – Gangaur Ka Udyapan Vidhi

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गणगौर का उद्यापन  Gangaur ka Udyapan विवाहित महिलाओं के लिए जरुरी माना जाता है। गणगौर का उद्यापन शादी के बाद कभी भी किया जा सकता है ।

इसे गणगौर का उजमना Ujmana या उजरना Ujarna भी कहते है कुछ परिवारों में लड़की की शादी के बाद पहले साल ही गणगौर का उद्यापन कर दिया जाता है।

गणगौर का त्यौहार और व्रत बड़े उत्साह से किया जाता है। महिलाएँ गणगौर का पूजन भक्तिभाव के साथ करके माँ गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करती है। गणगौर पूजन की विधि जानने के लिए यहाँ क्लीक करें . पूजा में गुणे चढ़ाये जाते है। गणगौर के गीत गाये जाते है। गणगौर के सभी प्रकार के गीत देखने के लिए यहाँ क्लीक करें 

गणगौर का उद्यापन

गणगौर का उद्यापन करने की विधि –

Gangaur Udyapan Vidhi

गणगौर का उद्यापन करने के लिए सोलह सामान की सुहाग पिटारी बनानी चाहिए।

गणगौर सुहाग पिटारी में यह सामान होता हैं :-

ये सभी 16 सामान 16 -16 चाहिए :

मेहंदी , काँच , कंघा , सिंदूर , बिंदी , काजल , चूड़ी , बिछिया , ब्लाउज पीस , रुमाल , नाक की लोंग या नथ , हेयर पिन या रिबिन  , स्टील की प्लेट ,  रूपये , चाँदी का तार , बॉस्केट या टोकरी जिसमे सारा सामान रखना हैं।

~   हर टोकरी में उपरोक्त सामान एक-एक रख लें। इस प्रकार सोलह पिटारी बनेगी।

~  प्रत्येक टोकरी में पंद्रह सामान होने चाहिए। टोकरी समेत सामान की संख्या सोलह हो जाएगी।

~  रूपये अपनी श्रद्धा के अनुसार 10 से 100 रूपये तक रखे जा सकते है।

~  गणगौर उद्यापन के लिए सोलह सुहागन औरतो को एक दिन पहले गणगौर के उद्यापन और भोजन का निमंत्रण दें।

~  गणगौर  के उद्यापन के दिन बगीचे से जेले लावे। पानी से भरे लोटे एक पर एक रखे और इन्हें फूल व दूब से सजाये। ये ही जेले कहलाते है।

~  औरतों के साथ गीत गाते हुए घर आये और घर आकर गणगौर की पूजा करें।

—  गणगौर की कहानी सुनें। कहानी जानने के लिए यहाँ क्लीक करें

~  गणगोर पूजने के बाद पूजा के स्थान के पास ये सामान रखें :

–  एक थाली में सोलह जगह चार-चार पूड़ी व हलवा निकाल कर रखें।

–  सोलह पिटारी सुहाग के सामान के साथ रखें ,

–  संखिया ( देवर ) के लिए तौलिया या कपड़े , नारियल व रूपये निकाल कर रख लें।

–  ननद के लिए बेस और सुहाग के सामान निकाल कर रखें।

~  अब हाथ जोड़कर ईशर गणगौर से प्रार्थना करें –

” आपकी कृपा से आज मैं गणगौर का उद्यापन कर रही हूँ ,

मेरा सुहाग , परिवार , घर में सुख सम्रद्धि और कृपा दृष्टि बनाये रखना “

इसके बाद महिलाओं को खाना खिलाएँ। सोलह सुहागनों को खाना खिलाते समय पहले थाली वाली चार पूड़ी व हलवा परोसें फिर बाद में जो भी आप ने बनाया है वह परोसें।

देवर या जेठूते (संखिया ) को भी खाना खिलाए। खाना खिलाने के बाद सभी औरतो (गोरनियो) को सुहाग पिटारी दें।

संखिया , साख्या या सखिया उद्यापन का साक्षी होता है। देवर या घर का कोई भी लड़का जैसे भांजा , भतीजा जा आपसे उम्र में छोटा हो – सगे भाई के अलावा संखिया बनाया जा सकता है।

संखिया को कपड़े / तौलिया , नारियल व रूपये देकर उसके कान में कहें –

मेरे  गणगौर के उद्यापन की हामी भरना , ” मैने  गणगौर का उद्यापन किया हैं मान लेना “

इस प्रकार गणगौर का उद्यापन संपन्न होता है।

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