पथवारी की कहानी शीतला माता के पूजन के समय – Pathwari Ki Kahani

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पथवारी की कहानी Pathvari ki kahani शीतला सप्तमी और अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजन के बाद पथवारी का पूजन करते समय सुनी जाती है। इससे पूजा का सम्पूर्ण  फल प्राप्त होता है।

पथवारी की कहानी

पथवारी की कहानी – Pathwari ki kahani

एक पाल पर पथवारी जी बैठी थी।

वहां दो व्यापारी लोग आये। एक के पास नमक से भरी गाड़ी थी , वह नमक बेचता था और दूसरे के पास चीनी से भरी गाड़ी थी , वह चीनी बेचता था।

पथवारी जी ने उन दोनों से पूछा की तुम्हारे पास क्या है। दोनों ने सोचा सच कहने पर कहीं पथवारी जी मांग ना लें।

इसलिए दोनों ने झूठ बोला।

चीनी वाले ने कहा –  ”  मेरे पास लूण है ” और नमक वाले ने कहा –  ” मेरे पास खांड है ”

थोड़ा आगे जाने पर उन्होंने देखा नमक की गाड़ी में नमक चीनी में बदल गया था और चीनी नमक में बदल गयी थी।

वो एक दूसरे पर चोरी का आरोप लगा कर झगड़ने लगे।

रास्ते में एक सज्जन व्यक्ति मिला उसने झगड़े का कारण पूछा तो एक ने कहा –  ” इसने मेरा लूण चुरा लिया ”

दूसरे ने कहा –  ” इसमें मेरी खांड चुरा ली ”

सज्जन व्यक्ति ने पूछा – क्या रास्ते में तुम्हे कोई मिला था ?  उन्होंने बताया कि पाल पर एक पथवारी नाम की बुढ़िया मिली थी।

इस पर सज्जन बोले की यह उसी बुढ़िया का काम लग रहा है। तुम उसी के पास जाओ। तुम्हारा समाधान वहीं होगा।

दोनों को अहसास हुआ की हमने झूठ बोला था , शायद इसीलिए यह सब हुआ है।

दोनों पथवारी के पास गए और कहा हमने आपसे झूठ बोला , हमें क्षमा कर दो हमारा सामान जैसा था वैसा ही कर दो।

हम आपको लूण और खांड भेंट में भी देंगे। पथवारी जी दोनों को क्षमा किया और सामान जैसा पहले था वापस वैसा हो गया।

लूण वाले ने दो बोरी लूण भेंट किया , चीनी वाले ने दो बोरी चीनी भेंट की ।

उन्होंने पूरे शहर में कहलवा दिया कि पथवारी जी से कोई भी झूठ नहीं बोले।

हे पथवारी माता जैसा पहले किया वैसे किसी के साथ मत करना बाद में नमक का नमक व चीनी का चीनी किया वैसे सबके करना। कहानी कहने वाले सुनने वाले व हुंकारा भरने वाले

सभी पर अपना आशीवार्द बनाये रखना।

बोलो , पथवारी माता की जय  !!

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