वार के अनुसार व्रत करने का तरीका – Vaar Ke Anusar Vrat

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वार के अनुसार व्रत करने पर उस दिन के हिसाब से ही भगवान की पूजा की जाती है और कुछ अलग नियम या कायदों का पालन किया जाता है। आइये जानते हैं कौनसे वार का व्रत किस तरह होता है।

सप्ताह में कम से कम एक व्रत अवश्य करना चाहिए। व्रत करने के अनेक अवसर और अनेक तरीके प्रचलित है।हमें अपनी सुविधा व श्रद्धा के अनुसार व्रत करने का दिन निश्चित कर लेना चाहिए। नियम पूर्वक इस दिन श्रद्धा और निष्ठां से व्रत करने पर फल अवश्य मिलता है।

Somvaar ka vrat -सोमवार का व्रत

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सोमवार का व्रत शिव जी की कृपा प्राप्ति के लिए होता है। इसमें फलाहार या परायण का कोई खास नियम नहीं होता लेकिन दिन रात में केवल एक ही समय भोजन करना होता है।

इस दिन शिव पार्वती का पूजन किया जाता है और पूजन के बाद कथा सुनी जाती है। सोमवार के व्रत तीन प्रकार के किये जाते है। साधारण सोमवार का व्रत , सौम्य प्रदोष व्रत ,सोलह सोमवार व्रत। इनकी विधि सामान होती हे पर कथा अलग अलग होती है। कुछ लोग सोमवार का व्रत दिन के तीसरे पहर तक ही करते है। क्लिक करके जानें ये कहानी –

सोलह सोमवार की कथा , प्रदोष व्रत की कथा , सोमवार के व्रत की कथा

 Magalvaar ka vrat -मंगलवार का व्रत

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मंगलवार का व्रत हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए होता है। सर्वसुख , राज सम्मान एवं पुत्र प्राप्ति के लिए ये व्रत किया जाता है। इस व्रत को इक्कीस सप्ताह तक करना अभीष्ट फल देने वाला माना जाता है।

इस व्रत में हनुमान जी की पूजा करते समय लाल रंग के कपडे पहने जाते है और लाल पुष्प , लाल चन्दन , लालफल और लाल मिठाई का उपयोग किया जाता है।  व्रत की कथा सुनने के बाद हनुमान चालीसा , हनुमानअष्टक और  बजरंग बाण का पाठ करने से शीघ्र फल मिलता है।मंगलवार व्रत की कहानी के लिए यहाँ क्लिक करें

Budhvaar ka vrat -बुधवार का व्रत

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बुधवार का व्रत गणेश जी के लिए या बुध भगवान के लिए किया जाता है। बुध ग्रह की शांति और सर्व सुख की कामना से स्त्री , पुरुष सभी इस व्रत को कर सकते है। इस व्रत की विधि और कहानी के लिए यहाँ क्लिक करें

इस व्रत में बुध भगवान की पूजा श्वेत कपड़ो में श्वेत पुष्पों और श्वेत चन्दन से की जाती है। सफ़ेद वस्तुओं का दान भी किया जाता है। इस व्रत में हरे रंग की वस्तुएं भी उपयोग में लाई जाती है।

 Guruvaar ka vrat -गुरुवार  का व्रत

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गुरुवार का व्रत वृहस्पति देवता को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत धन, अन्न , विद्या प्राप्ति की कामना से किया जाता है तथा रूपवान व गुणवान जीवन साथी प्राप्त करने के लिए भी ये व्रत करना श्रेष्ठ माना जाता है। 

इस व्रत में विष्णु भगवान की पूजा पीले रंग के कपड़ों में की जाती है। पूजा मे पीले पुष्प और पीले चन्दन का उपयोग किया जाता है। भोजन में भी पीली वस्तुएं ली जाती है जैसे चने की दाल , बेसन, पपीता , आम आदि ।

इस व्रत में केले का भी पूजन किया जाता है। स्त्रियों के लिए ये व्रत सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। व्रत की पूरी विधि और कहानी के लिए यहाँ क्लिक करें। 

 Shukravaar ka vrat -शुक्रवार का व्रत

शुक्रवार का व्रत संतोषी माता के लिए किया जाता है। इस दिन किसी भी प्रकार की खटाई वर्जित होती है। इस व्रत में गुड़ व भुने चने का उपयोग किया जाता है।

एक कलश में जल भरकर उसके ऊपर एक कटोरी में गुड़ व भुने चने रखेजाते है फिर कथा सुनी जाती है। कथा जानने के लिए यहाँ क्लिक करें। कथा सुनते समय हाथ में भी गुड़ व चने रखते है। ये व्रत घर परिवार में सभी प्रकार की सुख शांति देने वाला माना जाता है।

 Shanivaar ka vrat -शनिवार का व्रत

शनिवार का व्रत शनिदेव की कृपा प्राप्ति के लिए होता है।शनि देव की पूजा करते समय काले रंग के कपडे पहने जाते है। काले तिल , उड़द और काले तिल का तेल पूजन में शनिदेव को अर्पित किया जाता है।

शनि स्त्रोत का पाठ इस दिन करना श्रेष्ठ माना जाता है। शनि की दशा लगी हुई हो तो इस व्रत को करने से शनि की दशा के नुकसान से बचाव होता है। व्रत की पूरी विधि और कहानी के लिए यहाँ क्लिक करें। 

 Ravivaar ka vrat – रविवार का व्रत

यह व्रत सभी मनोकामना की पूर्ति करने वाला तथा मान सम्मान में वृद्धि व शत्रु का क्षय करने वाला माना जाता है। सुबह नहा धोकर स्वच्छ कपडे पहन कर पवित्र स्थान पर शांत मन से परमात्मा का स्मरण करते हुए सूर्य देव की पूजा की जाती है। व्रत की पूरी विधि और कहानी के लिए यहाँ क्लिक करें

एक समय भोजन करते है जिसमे तेल और नमक नहीं लेते। भोजन या फलाहार सूर्यास्त से पहले कर लेना चाहिए यदि सूर्यास्त हो चुका हो तो दूसरे दिन सूर्योदय पर अर्ध्य देने के बाद भोजन किया जाता है।

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