अंडा शाकाहारी या मांसाहारी , खायें या नहीं – Egg Veg or Non-veg

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अंडा शाकाहारी लोगों को खाना चाहिए या नहीं , इस बारे में कई तर्क वितर्क होते रहते हैं। यहाँ अंडे और मुर्गी के बारे में बताई गई बातों के आधार आप यह निर्णय कर सकते हैं कि अंडा खायें या नहीं खायें।


कुछ लोग अंडे को प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होने के कारण खाने की सलाह देते हैं। आइये जाने अंडा खाने के फायदे और नुकसान ,अंडे में पोषक तत्व के बारे में तथा अंडा खाना चाहिए या नहीं । इसके अलावा यह भी कि अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी।

अंडे में पाए जाने वाले पोषक तत्व – Egg Nutrients

अंडे में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। इसमें विटामिन , खनिज तथा उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन होते हैं। अंडे में पाए जाने वाले विटामिन में विटामिन B 12 , विटामिन B 2 , विटामिन A , विटामिन D , विटामिन B 5 , विटामिन E , सेलेनियम आदि की उपस्थिति होती है।

खनिज के रूप में अंडे में कैल्शियम , फास्फोरस , आयरन , पोटेशियम , मैंगनीज , आयोडीन , फोलेट तथा अन्य कई पोषक तत्व होते हैं। विटामिन तथा खनिज अंडे के पीले  भाग यानि जर्दी ( egg yolk ) में होते हैं और सफ़ेद हिस्से में सिर्फ प्रोटीन होते हैं। अंडे में कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है। एक अंडे में लगभग 212 mg  कोलेस्ट्रॉल हो सकता है।

कोलेस्ट्रोल की अधिक मात्रा के कारण इनका कम उपयोग ही अच्छा होता है।

कच्चे अंडे की अपेक्षा उबला हुआ या पका हुआ अंडा अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि इससे हमारा शरीर ज्यादा मात्रा में पोषक तत्व अवशोषित कर पाता है।

अंडा शाकाहारी या मांसाहारी – Egg Vegetarian or Non-veg

कुछ शाकाहारी लोग अंडे को शाकाहारी मानते हैं और इसे खाने योग्य समझते हैं। जबकि कुछ शाकाहारी लोग इसे मांसाहारी ही मानते हैं और न तो अंडा खाते हैं और ना ही ऐसी कोई डिश जिसमे अंडा डाला जाता है। जो लोग अंडे को शाकाहारी मानते है उनके हिसाब से –

—   बाजार में मिलने वाले अंडे में भ्रूण विकसित नहीं होता और इनके द्वारा किसी प्रकार के जीव की उत्पत्ति नहीं होती है।

—   मांस खाने वाले लोग मांसाहारी होते हैं। अंडे में मांस नहीं होने के कारण इन्हे मांसाहारी नहीं मानना चाहिये। विश्व के कई हिस्सों में अंडे को शाकाहारी माना जाता है। लेकिन भारत में इसे माँसाहारी ही माना जाता है।

—  माँस प्राप्त करने के लिए जानवर को मरना पड़ता है। अंडे प्राप्त करने के लिए कोई जानवर नहीं मरता। इसलिए ये मांसाहारी नहीं हैं।

—  जिस प्रकार एक जानवर से दूध मिलता है उसी प्रकार एक जानवर से अंडा प्राप्त होता है। अगर दूध को शाकाहारी माना जा सकता है तो अंडे को भी शाकाहारी मान सकते हैं।

—  कुछ चीजों में एग व्हाइट डाला जाता है। एग व्हाइट में सिर्फ प्रोटीन होता है उसमे जीवित कोशिका का अंश मात्र नहीं होता , अतः जिसमे एग व्हाइट डाला गया हो वो शाकाहारी है और खाई जा सकती है।

क्या बाजार में मिलने वाले मुर्गी के अंडे से चूज़ा नहीं निकलता

मुर्गी जो अंडा देती है , जरुरी नहीं है कि वो निषेचित किया हुआ हो। मुर्गी की ओवरी से निकलने के तुरंत बाद यदि अंडा निषेचित Fertilise होता है , तो ही उसमें से जीवन की उत्पत्ति संभव है अन्यथा नहीं।

निषेचित होने के लिए मुर्गे द्वारा मेटिंग जरुरी होती है। प्राकृतिक रूप से मुर्गी अंडे देती ही है तथा मुर्गा मेटिंग करे या ना करे मुर्गी के गर्भाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया भी समान ही होती है।

मुर्गी की ओवरी से निकलने के बाद कई घंटे तक अंडे के निर्माण की प्रक्रिया चालू रहती है। मुर्गी के गर्भाशय में आने के बाद ही उस पर कैल्शियम की एक कड़क परत चढ़ती है , इसके पश्चात् अंडा मुर्गी के शरीर से बाहर निकलता है। फर्क सिर्फ यह होता है कि मेटिंग हुई है तो अंडे से चूज़ा निकलेगा वर्ना नहीं।

महिला के शरीर में अंडे का निषेचन और गर्भ ठहरने सम्बन्धी सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें। 

बाजार में मिलने वाले अंडे व्यापारिक स्तर पर मुर्गी पालन करने वालों द्वारा सप्लाई किये गए होते हैं। मुर्गी पालन और अंडे उत्पादन के व्यापार में मुर्गों को मुर्गियों से अलग रखा जाता है। इस वजह से अंडे बिना निषेचित हुए ही होते हैं अर्थात बाजार में मिलने वाले अंडे से चूज़े नहीं निकलते लेकिन उनमे खनिज , प्रोटीन या विटामिन समान ही होते हैं।

क्या अंडे खाने चाहिए

प्रकृति की तरफ देखें तो कोई भी मांसाहारी जीव , जीने के लिए जरुरी होने पर ही दूसरे जीव को मारकर उसका मांस खाता है। इंसान के लिए ऐसा जरुरी नहीं है। इंसान के पास ऐसे ढेरों विकल्प मौजूद हैं जिनसे वह अपनी आवश्यकता आसानी से पूरी कर सकता है अर्थात प्राकृतिक रूप से इंसान को अंडे या माँस खाना अनिवार्य नहीं है।

यदि इंसान किसी जीव को दर्द और तकलीफ देता है तो भावनात्मक रूप से यह हिंसा है। मुर्गी पालन में मुर्गियां बहुत ज्यादा दर्द और तकलीफ से गुजरती हैं ताकि इंसान को अंडे प्राप्त हो सके।

इसके अलावा अंडा उत्पादन में जीव हत्या भी शामिल होती ही है। किसी भोजन को प्राप्त करने में जीव को मरना पड़े तो यह एक प्रकार का मांसाहार ही हो गया।

आपको बाजार में जो अंडे मिलते है , उन्हें यहाँ तक आने की प्रक्रिया में मुर्गी को कई प्रकार की तकलीफ झेलनी पड़ती है जो इस प्रकार है –

—  मुर्गी पालन में पैसे कमाना सबसे बड़ा ध्येय होता है। इसके लिए मुर्गी को बहुत छोटी जगह में जीवन गुजारना पड़ता है। ये मुर्गियाँ जहाँ रहती हैं वहाँ उन्हें पंख फैलाने तक के लिए जगह नहीं मिलती है। इससे एक दूसरे से टकराकर चोट ग्रस्त होती रहती हैं।

—  एक दूसरे को चोंच ना मारे इसके लिए उनकी चोंच काट दी जाती है। जिसमें उन्हें इतना तेज दर्द होता है की कुछ तो दर्द के मारे वहीं मर जाती हैं।

—  प्राकृतिक वातावरण में जहाँ मुर्गी 10 से 15 साल जीवित रह सकती है , वहीं अंडे देने की क्षमता कम होने पर सिर्फ एक से डेढ़ साल की उम्र में उन्हें दुनिया से विदा कर दिया जाता है।

—  अधिक से अधिक अंडे प्राप्त करने के लिए चूजे और मुर्गियों में ऐसे जेनेटिक बदलाव कर दिए गए हैं कि इससे प्राकृतिक रूप से एक साल में 10 -15 अंडे देने वाली मुर्गी लगभग 200 – 250 अंडे देने लगी है।

इस प्रक्रिया में वे बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती हैं और उन्हें कई प्रकार की बीमारियाँ लग जाती हैं तथा उनमे से कई तो मर भी जाती हैं। ये एक प्रकार से इस जीव के प्रति अति क्रूरता और हिंसा है।

इसके अलावा बीमार मुर्गी द्वारा दिए गए अंडे बैक्टीरिया के संक्रमण से ग्रस्त हो सकते हैं तथा ऐसा अंडा खाने वाला भी इससे संक्रमित हो सकता है।

—  मुर्गे चूज़े यानि मेल चिक्स मुर्गी पालन या अंडों के व्यापार के लिए बेकार होते हैं क्योंकि उनसे अंडे प्राप्त नहीं हो सकते। अतः उन्हें अलग करके मार दिया जाता है।

अंडे खाने चाहिए या नहीं और अंडों को आप शाकाहारी माने या मांसाहारी यह निर्णय आपका व्यक्तिगत निर्णय होता है।

यह निर्णय आपकी परम्परा , संस्कृति और मानवता की भावना पर भी निर्भर करता है।

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