धूप की अल्ट्रावॉइलेट UV किरणें कब ज्यादा नुकसान देह – Ultraviolet rays

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सूरज की रौशनी Sunlight यानि धूप में मौजूद अल्ट्रा वॉइलेट किरणें  Ultraviolet rays हमारी त्वचा को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं। आइये जानें ये किरणें कब अत्यधिक हानिकारक होती हैं।

वैसे सूरज की धूप जीवन का आधार है। पेड़ पौधे सूरज की रौशनी के कारण ही जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। हमें धूप से विटामिन डी मिलता है जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है।

थोड़ी सावधानी रखकर और अल्ट्रावॉयलेट किरणों के बारे में जानकारी हासिल करके इनके नुकसान से बचा जा सकता है। आइये जानें सूरज को रौशनी में मौजूद UV किरणों से क्या नुकसान होते हैं और इनसे कैसे बचें।

अल्ट्रावाइलेट किरण से नुकसान

धूप में मौजूद अल्ट्रावॉइलेट किरणों से नुकसान

Effects of UV-Rays on skin

UV किरणों से त्वचा जल कर काली पड़ सकती है , जिसे सनबर्न कहते हैं। सनबर्न के अलावा अधिक अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से होने वाले नुकसान में त्वचा में समय से पहले झुर्रियां पड़ना , कसावट कम हो जाना , त्वचा लटक जाना , कोमलता नष्ट हो जाना , त्वचा पर धब्बे ( Age spots ) पड़ जाना , त्वचा सूखी , खुरदरी या निस्तेज हो जाना आदि हो सकते हैं।

अल्ट्रावॉइलेट UV किरणों में इतनी ऊर्जा Energy होती है कि यह त्वचा में मौजूद कोशिका के डीएनए DNA को नुकसान पहुंचा सकती है।

इसके कारण स्किन के कैंसर जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। हालाँकि ये किरणें शरीर में अधिक गहराई तक नहीं जा सकती इसलिए इनका नुकसान त्वचा तक ही सीमित रहता है।

बचपन में धूप से कई बार हुआ या ज्यादा हुआ सनबर्न, कुछ विशेष प्रकार के त्वचा के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है जो कई साल बाद या कई दशक बाद भी असर दिखा सकता है।

इसके अलावा अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से आँखों को बहुत नुकसान पहुँच सकता है। ये किरणें आँखों में मोतियाबिंद आने या रेटिना के क्षतिग्रस्त होने का कारण बन सकती हैं। इसी वजह से वेल्डिंग करने वालों को प्रोटेक्शन का ध्यान रखना पड़ता है। वेल्डिंग की प्रक्रिया में भी शक्तिशाली UV किरणों का उत्सर्जन होता है।

सनलाइट में कितने प्रकार की अल्ट्रा वॉइलेट किरणें होती हैं

वैज्ञानिकों के अनुसार वेव लेंथ के हिसाब से धूप Sun Light  में तीन तरह की UV किरणें होती हैं –

UVA :

ये सबसे कम एनर्जी वाली किरणें हैं। इनके कारण त्वचा पर उम्र का प्रभाव पैदा होता है तथा ये सीधे तौर पर नुकसान नहीं करती लेकिन DNA को थोड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके कारण झुर्रियां तो पड़ती हैं लेकिन कैंसर जैसा गंभीर नुकसान नहीं होता।

UVB :

इनमे UVA की अपेक्षा अधिक एनर्जी होती है। ये त्वचा की कोशिका के DNA को सीधे नुकसान पहुंचा सकती हैं।ये किरण त्वचा को जलाकर सनबर्न पैदा करती हैं। इन्हे अधिकतर कैंसर का कारण भी समझा जाता है।

UVC :

इनमे सबसे ज्यादा ऊर्जा होती है। लेकिन ये ओज़ोन परत के कारण सूरज से धरती तक नहीं पहुँच पाती। इसलिए धूप से इनके द्वारा नुकसान नहीं होता लेकिन इंसान द्वारा उपयोग में लाये गए कुछ उपकरण ये किरणें उत्सर्जित करते हैं।

वेल्डिंग , मरकरी लेम्प , बैक्टीरिया व् कीटाणु नाशक UV बल्ब आदि से UVC किरणें उत्सर्जित होती है जो नुकसान देह हो सकती हैं। इनसे बचना चाहिए।

धूप में अल्ट्रा वॉइलेट किरणें कब ज्यादा होती हैं

अल्ट्रा वॉइलेट किरणों की ऊर्जा या ताकत Energy धरती पर कितनी होगी यह कई बातों पर निर्भर करती है। जो इस प्रकार हैं –

—  दिन में कौनसा समय है : 10 बजे से 4 बजे तक UV-rays अधिक शक्तिशाली होती हैं ।

—  मौसम कौनसा है : गर्मी के मौसन में UV रेज़ ज्यादा एनर्जी वाली होती हैं और सर्दी के मौसम में कमजोर होती हैं।

—  सूरज की ऊंचाई : सूरज जितना  ज्यादा ऊपर होता है उतनी ही अधिक ताकतवर UV किरणें होंगी।

—  बादल :  बादल का UV किरणों पर प्रभाव दोनों तरह से हो सकता है। कुछ बादल UV किरणों को परावर्तित करके रोक भी सकते हैं और कुछ बादल इनका असर बढ़ा भी सकते है। अतः बादल होने पर भी UV किरणों से बचाव करना जरुरी होता है।

—  सतह से परावर्तित Reflect होना :  UV किरणें धरती की कुछ सतह से परावर्तित होकर बढ़ भी सकती हैं। इन्हे परावर्तित करने वाली सतह में पानी , रेत , स्नो फाल , चमकीली सतह जैसे फुटपाथ आदि शामिल हो सकते हैं।

यू वी इंडेक्स क्या होता है – What is UV Index

यूवी इंडेक्स सूरज की रौशनी में मौजूद अल्ट्रा वॉइलेट किरणों UV-rays की ताकत Energy  की मात्रा को मापने का तरीका है। इसे एक से बारह अंकों तक मापा जाता है।

एक से चार तक UV इंडेक्स से नुकसान नहीं होता लेकिन इससे अधिक नुकसान देह हो सकता है। इससे पता चलता है कि अल्ट्रा वॉइलेट किरणों का कितना प्रभाव है और इससे कितना नुकसान या सनबर्न हो सकता है। यह माप रोजाना बदल सकती है

क्योंकि UV रेडिएशन की मात्रा सूर्य की ऊंचाई , वातावरण में ओज़ोन की मात्रा और आकाश में बादल की स्थिति पर निर्भर होती है।

सामान्यतया उत्तरी भारत में UV इंडेक्स कम होता है और दक्षिण भारत में अधिक होता है। गर्मी के मौसम में दक्षिण भारत में यह 12 तक पहुँच जाता है। गोरी और काली त्वचा पर अल्ट्रा वॉइलेट किरणों का अलग असर होता है।

UV इंडेक्स का असर और उसका खतरा

UV इंडेक्स गोरी त्वचा गेहुएँ रंग वाली त्वचा काली त्वचा
1 कम नहीं नहीं
2 कम नहीं नहीं
3 मध्यम नहीं नहीं
4 मध्यम नहीं नहीं
5 अधिक कम नहीं
6 अधिक मध्यम कम
7 अत्यधिक मध्यम मध्यम
8 अत्यधिक मध्यम मध्यम
9 अत्यधिक मध्यम मध्यम
10 अत्यधिक अधिक मध्यम

कम खतरा : इसका अर्थ यह है की इससे नुकसान नहीं होगा। 2 घंटे या अधिक धूप से त्वचा लाल जरूर हो सकती है।

मध्यम खतरा :  यह खतरनाक तो नहीं लेकिन एक डेड घंटे से ज्यादा धूप से नुकसान हो सकता है। सनस्क्रीन लगा लेनी चाहिए।

अधिक खतरा : आधा से एक घंटे में ही सनबर्न हो सकता है। SPF 15 वाला सनस्क्रीन लगाना चाहिए। सीधी धूप से बचना चाहिए।

अत्यधिक खतरा : त्वचा 20 -25 मिनट में ही बुरी तरह झुलस सकती है। सीधी धूप से दूर रहें। त्वचा ढक कर रखें , SPF 15 से अधिक वाला सनस्क्रीन का उपयोग करें।

अल्ट्रा वॉइलेट किरणों के नुकसान से कैसे बचें

सूरज की तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचने के उपाय जरूर अपनाने चाहिए अन्यथा त्वचा को नुकसान हो सकता है । ये उपाय इस प्रकार हैं –

—  कोशिश करें कि बहुत तेज धूप में नहीं रहना पड़े। जितना हो सके जल्दी छाया में आ जायें । त्वचा की पूरी तरह ढ़क कर रखें।

—  सफ़ेद या हल्के रंग के कपड़े इन किरणों को परावर्तित कर देते हैं , इनका उपयोग करें।

—  आँखों को नुकसान से बचाने के लिए अच्छी गुणवत्ता कर UV प्रोटेक्शन देने वाले सनग्लॉस , गॉगल्स पहन कर रखें।

—  अच्छी गुणवत्ता वाला सनस्क्रीन का उचित मात्रा में नियमित उपयोग करें।

—  पानी तथा तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लें।

—  धरती की कुछ चमकीली सतह जैसे पानी , रेत , स्नो आदि से UV किरणें  परावर्तित होकर नुकसान पहुंचा सकती हैं , इनका ध्यान रखें।

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