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ऋषि पंचमी की कहानी – Rishi Panchami ki kahani

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ऋषि पंचमी की कहानी व्रत के समय कही और सुनी जाती है। ऋषि पंचमी के दिन सप्तऋषि की पूजा की जाती और व्रत किया जाता है। ऋषि पंचमी की कहानी Rishi Panchami ki कहानी सुनने से सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है

ऋषि पंचमी की पूजा और व्रत करने की विधि के लिए यहाँ क्लीक करके पढ़ें।

ऋषि पंचमी की कहानी

Rishi Panchami Ki Kahani

एक गांव में गरीब माँ और बेटे रहते थे। भाद्रपद महीने में जब ऋषि पंचमी आई तो बेटा अपनी माँ से बोला ” माँ , मैं अपनी बहन के घर राखी बंधवाने जाना चाहता हूँ।

माँ ने कहा इस गरीबी में बहन के घर क्या लेकर जायेगा । बेटा बोला लकड़ी बेचने से जो भी पैसे  मिलेंगे , वही लेकर चला जाऊँगा और वह अपनी बहन के घर पहुँच गया।

उस समय बहन सूत कात रही थी सूत का धागा बार बार टूट रहा था। बहन उसे  जोड़ने में व्यस्त थी। देख ही नहीं पाई कि भाई आया है।

भाई ने सोचा अमीर बहन के मन में गरीब भाई के प्रति प्रेम नही है और वह वापस जाने लगा इतने में बहन का सूत का तार जुड़ गया उसने जैसे ही नज़र उठाई तो देखा भाई जा रहा है।

वह दौड़ कर गयी और भाई से बोली – भैया में तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी सूत बार बार टूट रहा था इसलिए बोल नहीं पाई। भाई को बड़े प्यार से बैठाकर राखी बाँधी। भाई ने अपनी बहन को सुन्दर भेंट दी ।

ऋषि पंचमी की कहानी

बहन ख़ुशी से पागल हो रही थी। उसने पड़ोसन से सलाह की और पूछा मेरा प्यारा भाई आया है , उसके लिए क्या खाना बनाऊ। पड़ोसन ने कहा घी में चावल बना लेना और तेल का छौक लगा देना।

बहन भोली थी पड़ोसन ने जैसा कहा वैसा ही किया । दो घंटे हो गए भाई ने कहा भूख लगी है बहन ने भाई को पड़ोसन वाली बात बताई और कहा चावल अभी बने नहीं हैं ।

भाई ने समझाया बहन , चावल घी में नहीं बनते। दूध और चावल की खीर बना लो । बहन ने खीर बनाई और सब ने भोजन किया।

सुबह अँधेरे भाई को जाना था। बहन ने सुबह जल्दी उठ कर गेँहू पीसे और लडडू बनाकर भाई के साथ डाल दिए। थोड़ी देर बाद बच्चे उठे और बोले हमें भी लडडू चाहिए ।

बच्चो को देने के लिए लड्डू तोडा तो उसमे से साँप के छोटे छोटे टुकड़े निकले। उसे भाई की फ़िक्र होने लगी। वो तुरंत दौड़ी। बहुत दूर जाने के बाद भाई दिखा तो भाई को आवाज लगाई।

भाई सोचने लगा ये मेरे पीछे दौड़ कर क्यों आई है। उसने ऐसे इतनी दूर दौड़ कर आने का कारण पूछा।

बहन बोली में तेरी जान बचाने आई हूँ तुझे जो लडडू दिए थे उसमें भूल से साँप के टुकड़े आ गए है । तुझे यही कहने आई थी। भाई बोला बहन मैं एक पेड़ पर पोटली टांक कर नीचे आराम कर  रहा था , तब कोई चोर मेरे लडडू चुरा कर ले गए ।

संयोग से लडडू चोर पास ही में थे। वे लडडू खाने वाले ही लेकिन उनकी बात सुन कर रुक गए। बहन के पास आकर बोले तुमने हमारी जान बचाई है। आज से तुम हमारी धर्म बहन हो। लडडू वही खड्डा खोदकर गाढ़ दिए।

बहन भाई को घर ले आई और तीसरे दिन सीख देकर भेजा। इसलिए भाई को राखी के दिन रात को नहीं रोकना चाहिए और जाते समय खाने का कुछ सामान साथ नहीं बांधना चाहिए।

खोटी की खरी। अधूरी की पूरी।

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