करंट लगने से नुकसान और बचने के उपाय – Electric shock preventions

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करंट लगने की छोटी मोटी घटनाएँ आम हैं। बिजली का हल्का सा करंट कभी न कभी सभी ने महसूस किया होगा। बिजली के उपकरण के बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल हो गया है। हर जगह बिजली की जरुरत होती है। बिजली जीवन को बहुत आसान बना देती है लेकिन दुर्घटना के समय उतनी ही खतरनाक साबित हो सकती है।

थोड़ी सावधानी रखकर बिजली के करंट से खुद को परिवार के सदस्य या अन्य को इस खतरे से यथासंभव दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए। आइये जाने बिजली सम्बन्धी सावधानियां तथा इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर शरीर को होने वाले नुकसान के बारे में।

जब भी किसी व्यक्ति को करंट लगता है तो या तो वह चिपक जाता है या झटके से दूर जा गिरता है। चिपकने से करंट शरीर में बहता रहता है जिससे नुकसान ज्यादा होता है। हार्ट से करंट पास होने पर हार्ट पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे दिमाग में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। इस वजह से बेहोशी आ सकती है या साँस रुक सकती है।

करंट से शरीर को नुकसान

हमारे घरों में सामान्यतया 230 वोल्ट का कनेक्शन लगा होता है। इतना वोल्टेज शरीर में नुकसान करने लायक करंट बहा सकता है। शरीर के किसी अंग में elecricity की मात्रा जितनी अधिक बहती है या जितने अधिक समय तक बहती है नुकसान होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है।

करंट का हल्का सा प्रभाव बिना किसी नुकसान के शायद सभी ने महसूस किया होगा। हमारी हथेली की सूखी त्वचा पर करंट थोड़ा कम लगता है क्योंकि वहाँ बाहरी परत डेड स्किन की होती है जो शॉक से बचाती है। लेकिन यदि हाथ गीले हों या स्किन चोट आदि के कारण त्वचा कटी हुई हो तो shock अधिक लगता है और उससे नुकसान ज्यादा हो सकता है।

करंट से चिपकने या छिटक कर दूर गिरने का कारण

इलेक्ट्रिक शॉक से मांसपेशियां प्रभावित होती है। करंट से चिपकना या दूर गिरना इस पर निर्भर होता है कि करंट किस प्रकार की मांसपेशियों को प्रभावित कर रहा है।

जैसे 10 mA से अधिक करंट फ्लेक्सर नामक मांसपेशियों ( अंगुलियां बंद करने के काम आने वाली तथा अंग को शरीर के पास लेन वाली मसल्स ) से गुजरे तो वह हिस्सा कड़क या जाम हो जाता है। इस वहज से व्यक्ति करंट से खुद को अलग नहीं कर पाता है और चिपका रह जाता है। चिपके रहने से करंट शरीर में प्रवाहित होता रहता है जो नुकसानदेह होता है।

यदि करंट एक्सटेंसर नामक मांसपेशियों ( अंगुलियां बंद करने वाली तथा अंग को शरीर से दूर ले जाने वाली मसल्स ) से गुजरता है तो व्यक्ति तेज झटके से दूर जा गिरता है। यह दूरी दस मीटर तक भी हो सकती है। इस प्रकार की दुर्घटना में करंट से अधिक नुकसान नहीं होता लेकिन गिरने के कारण अधिक चोट लग सकती है।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक शॉक लगने से अचानक हुए संकुचन के कारण शरीर के लिगामेंट्स , मसल्स या टेंडन फट सकते हैं। यदि पावर अधिक हो या अधिक देर तक रहे तो टिशू जल भी सकते हैं।

करंट का हार्ट पर असर

हृदय की धड़कन हृदय में मौजूद विद्युतीय आवेग से संचालित होती है जो एलेक्ट्रोग्राम में दिखाई देती है। करंट के हृदय से गुजरने पर हृदय की धड़कन गड़बड़ा जाती है। इससे हृदय के पम्प करने की क्षमता बिगड़ सकती है। ज्यादा करंट लगने पर ह्रदय काम करना बंद कर सकता है , इससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है यदि तुरंत उपचार नहीं हो तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। अतः ऐसे में तुरंत उपचार मिलना जरुरी हो जाता है।

करंट से जलना

100 mA से अधिक का इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर शरीर पर जिस जगह करंट लगा वहां जलने का निशान हो जाता है। 10 एम्पियर से अधिक का करंट लगने पर व्यक्ति बुरी तरह जल सकता है।

आग से जलना या गर्म वस्तु से छू जाना और बिजली से जलने में फर्क होता है। बिजली से जलना मतलब शरीर में करंट गुजरने के कारण पैदा हुई गर्मी के कारण जलना होता है। ऐसे में टिशू अंदर से जल जाता है। हो सकता है की बाहर से कुछ नजर नहीं आये। अंदर की तरफ नुकसान बाहर दिखाई देने वाले नुकसान से कई गुना अधिक हो सकता है। यह आइस बर्ग इफ़ेक्ट कहलाता है।

करंट लगने वाली जगह निशान हो सकता है। वह स्थान कड़क हो जाता है , कभी कभी वहां दर्द महसूस नहीं होता क्योंकि वहां की नर्व्स नष्ट हो चुकी होती हैं।

यदि अत्यधिक मात्रा में टिशू नष्ट हो जाते हैं तो वे किडनी या रक्त के प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।

करंट का नर्वस सिस्टम पर प्रभाव

नर्वस सिस्टम पर हुए असर के कारण दर्द , झनझनाहट , कमजोरी या अंग को हिलाने में परेशानी हो सकती है , साँस लेने में परेशानी जैसा असर भी हो सकता है। किसी किसी को इसके कारण मानसिक रोग भी हो सकते हैं।

इलेक्ट्रिक शॉक के अन्य असर

इसके अलावा करंट के कारण आँख में मोतियाबिन्द हो सकता है , कुछ अंगों पर दुर्घटना के कई सप्ताह या महीने भर बाद भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं , कौनसे अंग से करंट गुजरा है यह उस पर निर्भर करता है।

करंट से कैसे बचें

12 साल से छोटे बच्चे को ज्यादातर कटे हुए या जॉइंट किये हुए तार से शॉक लगता है। अतः बिजली के तार या एक्सटेंशन कोर्ड आदि का उपयोग करते समय सावधानी रखनी चाहिए। बच्चों को बिजली के तारों से दूर रहने की हिदायत देकर रखनी चाहिए ।

प्लास्टिक हटे हुए या पुराने कटे फटे तार का उपयोग नहीं करना चाहिए। अक्सर दीवाली की लाइटिंग आदि के लिए पुराने पड़े हुए तारों को जोड़कर खुद ही फिटिंग कर ली जाती है जो गलत है। इससे दुर्घटना हो सकती है।

एक्सटेंशन कॉर्ड का उपयोग कम ही करें या उच्च गुणवत्ता की काम में लें। बच्चों से प्लग लगाने या निकालने जैसे काम नहीं करवायें।

बड़े बच्चों को समझा दें कि ट्रांसफार्मर , बिजली के खंबे आदि के पास न खेलें और ना उन पर चढ़ें। विशेष कर बारिश के मौसम में।

पतंग का गीला धागा बहुत बार दुर्घटना का कारण बन जाता है। गीला धागा बिजली के तार को छूने से बच्चे तक करंट पहुँच सकता है अतः सावधान रहें। ध्यान रखें कि जब बारिश हो रही हो तो बच्चे पतंग ना उड़ायें।

बड़े लोग छोटा मोटा काम खुद करते समय सावधानी रखें। पहले मेन स्विच से पावर सप्लाई बंद कर देनी चाहिए , पैर में रबर की स्लिपर पहन लेनी चाहिए , टेस्टर पास होना चाहिए ताकि शक होने पर चेक कर सकें की किसी तार में करंट है या नहीं। प्लायर पर रबर होना चाहिए।

किसी इलेक्ट्रिशियन को बुलवा कर करवा लें तो ज्यादा अच्छा रहता है क्योकि उनके पास उपयुक्त औजार आदि होते हैं तथा उन्हें इस काम को करने की प्रेक्टिस होती है।

शार्ट सर्किट या आग लगने की स्थिति में मेन स्विच बंद कर देना चाहिए। मेन स्विच ऐसी जगह होना चाहिए जहाँ जरुरत पड़ने पर तुरंत पहुंचा जा सके।

बिजली के उपकरणों की उचित देखभाल और सर्विस समय से करवाते रहना चाहिए।

तीन पिन वाला प्लग काम में लेना चाहिए। तीसरे अर्थिंग वाले हरे तार को भी जोड़ना चाहिए।

गीले हाथों से स्विच ऑन या ऑफ नहीं करना चाहिए।

प्लग के पिन लूज नहीं होने चाहिए , सही एम्पियर वाले स्विच उपयोग में लेने चाहिए।

किसी एक प्लग पर आवश्यकता से अधिक उपकरण नहीं लगाने चाहिए।

काम में नहीं आ रहे हों तो स्विच बंद करके रखने चाहिए।

मकान या बिल्डिंग में उचित अर्थिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।

यदि किसी इलेक्ट्रिक शॉक ग्रस्त व्यक्ति की मदद करने जा रहे हैं तो कहीं आप भी शिकार ना हो जायें इसका ध्यान रखना अतिआवश्यक होता है।

यदि बाहर कहीं बिजली का तार टुटा पड़ा दिखाई दे तो उससे दूर ही रहना चाहिए और तुरंत बिजली वालों को सूचित करना चाहिए।

बिजली के उपकरण जैसे सर्किट ब्रेकर , फ्यूज , प्लग या स्विच में पानी जाने से ये ख़राब हो सकते हैं और आपको shock लग सकता है अतः ध्यान रखें। वाशिंग मशीन का उपयोग करते समय स्विच में पानी ना जाये इसका ध्यान रखें। थोड़ा भी करंट लगने जैसा महसूस करें तो तुरंत इलेक्ट्रिशियन से रिपेयर करवायें।

पानी गर्म करने के लिए इलेक्ट्रिक रोड का उपयोग करते हो तो ध्यान रखें कि पानी का लेवल अधिक ना हो, रोड पर निर्देशित स्तर तक ही हो। बिना स्विच बंद किये रोड का ना छूएँ। चलती हुई रोड में पानी गर्म हुआ या नहीं हाथ डाल कर चेक करने की चेष्टा न करें।

करंट ग्रस्त व्यक्ति की मदद कैसे करें

यदि  करंट लगने के कारण व्यक्ति बेहोश हो जाये , दिखने , बोलने सुनने में दिक्कत होने लगे , अंग सुन्न पड़ जाएँ या साँस लेने में दिक्कत होने लगे तो तुरंत हॉस्पिटल या चिकित्सक के पास ले जाएँ , गर्भवती महिला को करंट लगने पर चेकअप जरूर करवायें।

किसी के करंट से चिपकने की स्थिति में तुरंत पावर सप्लाई बंद कर दें। यदि पावर सप्लाई बंद करने की स्थिति में नहीं हों तो लकड़ी या प्लास्टिक के सामान से उसे छुड़ाने की कोशिश करें।

हाई वोल्टेज का करंट लगने पर व्यक्ति भला चंगा नजर आने पर भी डॉक्टर के कहे अनुसार ECG , रक्त की जाँच , पेशाब की जाँच , CT scan या MRI जरूर करवा लेने चाहिए।

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