कुम्भ मेला 2019 कब क्यों और कैसे – Kumbh Mela

230

कुम्भ मेला Kumbh ka mela 2019 में 14 जनवरी से 4 मार्च तक इलाहाबाद ( प्रयाग ) में आयोजित है . यह अर्धकुम्भ है . अर्धकुम्भ Ardhkumbh 6 साल में इलाहाबाद या हरिद्वार में होता है .

पवित्र नदी गंगा , जमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम Triveni Sangam के पावन स्थल पर लाखों लोग नदी में स्नान करके ऐसे अवसर का लाभ उठाते हैं . देश विदेश से लोग आकर इस विश्व प्रसिद्ध मेले का हिस्सा बनते हैं .

इलाहबाद कुम्भ मेला 2019 की तारीख Dates इस प्रकार हैं –

कुम्भ मेला 2019 की तारीख

Kumbh mela 2019 Dates

14 / 15 जनवरी , मंगलवार : मकर संक्रांति ( पहला शाही स्नान Shahi snan )

21 जनवरी , सोमवार         : पौष पूर्णिमा

4 फरवरी , सोमवार           : मौनी अमावस्या सोमवती ( मुख्य और दूसरा शाही स्नान )

10 फरवरी , रविवार          : बसंत पंचमी ( तीसरा शाही स्नान )

19 फरवरी , मंगलवार        : माघी पूर्णिमा

4 मार्च , सोमवार              : महाशिवरात्रि

इलाहबाद को पहले प्रयाग Prayag के नाम से जाना जाता था . यहाँ स्थित त्रिवेणी संगम सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है .  यह तीर्थराज कहलाता है . कुम्भ मेले में संगम स्थल पर स्नान करके मोक्ष प्राप्ति की कामना की जाती है

यहाँ पवित्र नदियाँ गंगा , यमुना और सरस्वती आकर मिलती हैं जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है . हालाँकि वर्तमान में सरस्वती नदी अस्तित्व में नहीं है लेकिन एक समय यह नदी अवश्य मौजूद थी . जिसके सम्बन्ध में कई मान्यतायें प्रचलित हैं . कुछ लोगों का मानना है कि सरस्वती नदी ऊपर नहीं पर जमीन के अन्दर बहती है , कुछ लोग घघ्घर नदी को प्राचीन सरस्वती नदी मानते हैं .

इलाहबाद में संगम स्थल पर लाखों लोगों के लिए विशाल स्तर पर व्यवस्था की जाती है . बड़ी मात्रा में टेंट लगाये जाते हैं , अस्थायी Potoon Bridge यानि तैरते हुए पुल बनाये जाते हैं . मेले में सुरक्षा तथा सुविधा से सम्बंधित कई प्रकार के कड़े इंतजाम किये जाते हैं . लोगों को चाहिए की वे शांतिपूर्ण तरीके से इस विश्व प्रसिद्द मेले व स्नान का आनंद उठायें .

कुम्भ मेले का विशेष आकर्षण शाही स्नान Shahi snan होते हैं जो साधू संतों का स्नान है . ये साधू इस अवसर पर जंगल , पहाड़ों या गुफाओं से निकलकर स्नान के लिए आते हैं . विभिन्न अखाड़े अपनी बारी के हिसाब संगम स्नान का लाभ उठाते हैं .

सबसे पहले नागा साधू Naga Sadhu शाही स्नान करते हैं . इन जटाधारी राख से लिपटे नागा साधुओं का स्नान एक अलग रोमांच पैदा करता है  .

कुम्भ के मेला सिर्फ धार्मिक कारण से नहीं है . कुछ विद्वानों के अनुसार इन स्थानों पर उस समय एक विशेष ऊर्जा तंत्र सक्रीय रहता है जो शरीर को आश्चर्यजनक रूप से लाभान्वित कर सकता है . उस समय वहां उपस्थित रहकर या नदी में स्नान करके उसका लाभ उठाया जा सकता है .

कुम्भ का मेला कहाँ और क्यों होता है

यह तीन साल के अंतर से एक तीर्थ स्थल पर पवित्र नदी के तट पर होता है जो इस प्रकार हैं –

इलाहबाद   : गंगा , यमुना , सरस्वती के त्रिवेणी संगम स्थल पर

हरिद्वार      : गंगा नदी के तट पर

उज्जैन       : शिप्रा नदी के तट पर

नासिक      : गोदावरी नदी के तट पर

किसी एक तीर्थ स्थल पर बारह वर्ष बाद कुम्भ का मेला आयोजित होता है .

प्रयाग और हरिद्वार में छः साल के अन्तराल से अर्धकुम्भ मेला आयोजित होता है .

कुम्भ का मेला इन्ही चार जगहों पर क्यों आयोजित होता है इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो इस प्रकार है –

कुम्भ मेले की कथा – Kumbh mela story

एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप से देवता बहुत कमजोर हो गए थे .दैत्यों से बचने का उपाय पूछने वे भगवान विष्णु के पास गए . विष्णु जी ने उन्हें क्षीर सागर के मंथन से अमृत निकाल कर पीने की सलाह दी . यह काम दैत्यों के बिना संभव नहीं था . अतः उन्हें साथ लेकर समुद्र मंथन शुरू हुआ .

जैसे ही अमृत कलश निकला इंद्र का पुत्र जयंत उसे लेकर आकाश में उड़ गया . दैत्यों ने पीछा करके उसे पकड़ लिया और अमृत कलश छीनने लगे .देवता और दानवों में युद्ध हुआ जो लगातार बारह दिन तक चला जो मनुष्य के बारह वर्ष के बराबर होते हैं.

इस युद्ध के दौरान छीना छपटी में अमृत छलक कर पृथ्वी पर चार स्थानों कर गिरा . ये चार स्थान थे प्रयाग , हरिद्वार , नासिक और उज्जैन . अतः इन्ही जगहों पर बारी बारी से कुम्भ का मेला भरता है .

माना जाता है कि अमृत की खींचतान के समय चन्द्रमा ने उसे व्यर्थ बह जाने से रोका , गुरु ने अमृतकलश को राक्षसों से छुपाया , सूर्य ने अमृतकलश फूटने से बचाया और शनि ने इंद्र के कोप से रक्षा की . अतः जब सूर्य , चन्द्र , गुरु और शनि ग्रहों का संयोग एक राशी में होता है तभी कुम्भ के मेले का आयोजन किया जाता है .

उज्जैन के कुम्भ को सिंहस्थ कहा जाता है .

बृहस्पति के सिंह राशी में तथा सूर्य के मेष राशी में प्रवेश करने पर कुम्भ का आयोजन नासिक में गोदावरी नदी के तट पर किया जाता है . यह स्थिति 12 वर्ष में एक बार बनती है . इसे महाकुम्भ Mahakumbh भी कहते हैं .

इलाहबाद कुम्भ मेले की व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें .

इन्हे भी जानें और लाभ उठायें :

दीपावली का लक्ष्मी पूजन कैसे करें 

अनुलोम विलोम प्राणायाम की विधि 

पीपल के पेड़ की पूजा विधि और महत्त्व 

नीम के फायदे , उपयोग और गुण 

बबूल के पेड़ से पाएं सस्ता और कारगर उपचार 

खाटू श्याम बाबा की पौराणिक कथा 

भैंस का दूध फायदेमंद या नुकसानदायक 

झाड़ू कैसे रखें धन वृद्धि के लिए 

कद्दु काशीफल क्यों जरूर खाना चाहिए 

वास्तु के अनुसार दिशा का असर 

बैगन कब और किसे नहीं खाना चाहिए 

फलाहारी कढ़ी कैसे बनायें व्रत के लिए 

बालों में मेहंदी लगाने के फायदे नुकसान 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here