गुस्सा ज्यादा आने के कारण और काबू करने के उपाय – Anger Reasons and control

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गुस्सा Gussa  या क्रोध anger हमारी भावनाओं का एक हिस्सा है। यह गलत व्यवहार के प्रति विरोध की भावना है।  मनोविज्ञान के अनुसार सप्ताह में एक दो बार थोड़ा गुस्सा आ जाना सामान्य होता है।


लेकिन छोटी छोटी बात पर गुस्सा आना , क्रोधित होना और क्रोध अधिक देर तक रहना एक समस्या है। इस तरह के गुस्से और ताव में मारपीट या गाली गलौच की नौबत आ जाती है जिसके कारण पारिवारिक सम्बन्ध काम धंधा , नौकरी और स्वास्थ्य पर बुरा असर होने लगता है।

अधिक गुस्सा करना दिक्कत पैदा कर सकता है। यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है , सोचने समझने की ताकत छीन लेता है , शारीरिक और मानसिक नुकसान पहुंचा सकता है। गुस्सा आने पर बुरे विचार हावी हो जाते हैं।

कुछ लोग तो गुस्सा करना और दुसरों को प्रताड़ित करना अपना अधिकार समझते हैं। रिसर्च के अनुसार गुस्से पर काबू नहीं पाना गुस्से को और बढ़ाता चला जाता है। इससे गुस्सा करने वाले या सहने वाले का , किसी का भला नहीं होता है। अतः गुस्सा बंद होना ही चाहिए।

गुस्सा दिखाने के तरीके

Gussa dikhana

गुस्सा करने वाले लोग क्रोध दिखाने के लिए अधिकतर इस प्रकार का व्यवहार करते हुए पाये जाते हैं –

चिल्लाना , तोड़ फोड़ करना , गाली गलौच करना , हिंसा पर उतारू होना , डराना धमकाना , धौंस जमाना , सामने वाले की कमजोरी का बखान करना , दोषारोपण करना ,  खुद की गलती का दोष दूसरे पर डालना , अविश्वास व्यक्त करना , सामने वाले की बात नहीं सुनना , सामने वाले की फीलिंग की कदर नहीं करना , दरवाजे जोर से बंद करना, दूसरे को अनावश्यक सजा देना।

इसके अलावा गाड़ी तेज चलाना , रिश्ते तोड़ लेना  , अत्यधिक खर्चा करना  , खुद को अनोखा समझना , हमेशा खुद की तारीफ पाने की लालसा रखना , छोटी छोटी बातों पर तेज गुस्सा करना , शराब आदि नशा करना आदि तरीकों से भी गुस्सा दर्शाया जाता है।

गुस्सा करने के नुकसान

Side effects of anger

गुस्सा करने वाला व्यक्ति दूसरे का नुकसान कर पाये या नहीं लेकिन खुद का नुकसान तो जरूर कर लेता है। इससे उस व्यक्ति को हृदय रोग, डायबिटीज , प्रतिरोधक क्षमता में कमी , हाई ब्लड प्रेशर , नींद नहीं आना , डिप्रेशन , मानसिक तनाव आदि बीमारियाँ होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।

इसके अलावा इस स्वाभाव के कारण उस व्यक्ति का कैरियर पीछे रह जाता है , उसके रिश्ते टूट कर बिखर जाते है। वह व्यक्ति खुद अपनों के दिल पर ऐसे घाव बना देता है जो कभी भर नहीं पाते।

गुस्सा करने वाले व्यक्ति के अपने परिवार वाले भी उस पर विश्वास नहीं कर पाते , कोई उनसे आराम से बात नहीं कर पाता , ईमानदारी से सच बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते , विशेषकर बच्चों के लिए तो यह अनुभव भयानक होता है जो जिंदगी भर उनका दिल दुखाता है।

गुस्सा करने वाले लोगों की विशेषता

Gussa kaun karta he

गुस्सा करने वाले लोग अपने हिसाब से सब कुछ चाहने की जिद करते हैं। वैसे सभी की इच्छा होती है की जैसा वे चाहते हैं वैसा हो और नहीं होता तो दुःख और निराशा भी होती है लेकिन गुस्सैल लोग उन चीजों के लिए जबरदस्ती करते है और निराशा को गुस्से से व्यक्त करते हैं।

गुस्सैल लोगों को समझना चाहिए कि जबरदस्ती कोई चीज हासिल नहीं की जा सकती। किसी चीज को हासिल करने की इच्छा गलत नहीं है लेकिन इच्छा जिद में बदल जाये और ना मिलने पर गुस्सा आ जाये तो यह गलत है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार गुस्सैल लोगों का लक्ष्य  होता है – ” चीजें मेरे हिसाब से ही होनी चाहिए ”  उन्हें लगता है कि वे नैतिकता और न्याय पर चल रहे हैं इसलिए सही हैं और वे दृढ़ता से ऐसा मानते हैं।

उनकी बात नहीं मानना उन्हें असहनीय तिरस्कार या अपमान लगता है। उन्हें लगता है कि वे यह क्यों सहन करें या झेलें । दूसरा कोई सहन करता है तो करे।

यह ग़लतफ़हमी है की गुस्से को दबाना नहीं चाहिए। जब आप चीखते चिल्लाते हैं तो गाली गलौच करते हैं गुस्से की आग बढ़ती ही है कम नहीं होती। कुछ लोग समझते हैं कि गुस्सा , विरोध या धमकी का उपयोग करने से इज्जत बढ़ती है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। लोग आपके गुस्से से कुछ हद तक डर सकते हैं लेकिन इज्जत कभी नहीं देंगे।

गुस्सा करने वाले बढ़ा चढ़ा कर बोलते हैं और उनकी शिकायत कुछ इस तरह रहती हैं –

 ~  तुम हमेशा मुझे टोकते रहते हो ,

~  तुम कभी भी मेरी जरुरत के बारे में नहीं सोचते ,

~  कोई मेरी कदर नहीं करता ,

~  मुझे कभी वो श्रेय नहीं मिलता जो मिलना चाहिए।

गुस्सैल व्यक्ति सोचता है कि जानबूझकर उसे परेशान करने के लिए , उसकी पसंद का काम नहीं करने या उसे बेइज्जत करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अच्छी यादों के बजाय नकारात्मक बातों को याद रखता जाता है।  वो ऐसी छोटी छोटी बातें इकट्ठे करते जाता है और अंत में फट पड़ता है।

गुस्सा ज्यादा क्यों आता है इसके कारण

Gussa jyada aane ke karan

—  गुस्सैल स्वभाव जेनेटिक यानि अनुवांशिक हो सकता है अर्थात यदि माता पिता या परिवार के किसी सदस्य को गुस्सा अधिक आता हो तो आपको भी गुस्सा अधिक आ सकता है।

—  कभी कभी जन्मजात शारीरिक या दिमाग़ी बनावट गुस्से का कारण बन सकती है। इसी वजह से कुछ बच्चे जन्म से ही ज्यादा चिड़चिड़े, भावुक और गुस्सैल होते हैं।

—  हमें बचपन से ख़ुशी या टेंशन जैसी भावनायें व्यक्त करने की तो आजादी होती है लेकिन गुस्से को व्यक्त करने की आजादी नहीं होती। गुस्सा करने पर तुरंत डांट पड़ती है। गुस्सा आये तो क्या करें ये हम सीख नहीं पाते।

गुस्से को कैसे दर्शाना है या गुस्से को फायदे के लिए कैसे उपयोग में लाया जा सकता है ये हमें कभी नहीं सिखाया जाता। जबकि ऐसा हो सकता है।

—  रिसर्च में पाया गया है कि जिस परिवार में भावनाओं को नहीं समझा जाता , परिवार के सदस्य अपने अपने स्वार्थ की पूर्ती में लगे रहते है , परिवार का मुखिया खुद अस्तव्यस्त होता है और छोटी छोटी बात में गुस्सा करता है , उस परिवार के सदस्य ज्यादा गुस्सा करने वाले पाये गये हैं। इसके अलावा परिवार के सदस्य असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहने वाले हों तो यह भी गुस्से का कारण बन सकता है।

—   गुस्सा उन लोगों को जल्दी आता है जो हार स्वीकार करना नहीं जानते। वो खुद को इतना होशियार मानते हैं कि सोचते हैं उन्हें हार , असुविधा या नाराजगी बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए । थोड़ी सी भी उनकी गलती उन्हें बताई जाये तो उन्हें गुस्सा आ जाता है।

गुस्सा कैसे कंट्रोल करें

gusse ko kabu kaise kare

—  आप दूसरे लोगों को या परिस्थितियों को नहीं बदल सकते जो आपको गुस्सा दिलाते हैं लेकिन ऐसे में खुद में बदलाव लाने की कोशिश जरूर कर सकते हैं।

—  आपको भी महसूस होने लगता है कि गुस्सा आने पर आप पर एक ताकतवर और अप्रत्याशित चीज हावी हो जाती है जो आपको नुकसान पहुंचाती है , अतः इसे कतई हावी ना होने दें।

—  गुस्सा करने से पहले एक बार सोचें – क्या इस बात या स्थिति के लिए गुस्सा करना ठीक है ? क्या गुस्सा करके बचा हुआ दिन बर्बाद करना सही होगा ? क्या कोई दूसरा उपाय हो सकता है ? क्या यह कीमती समय का सदुपयोग है ?

—  गुस्सा बेकाबू होने से पहले पता चल जाता है की गुस्सा बेकाबू होने वाला है , ऐसा महसूस होते ही यदि उसे कंट्रोल करने के कदम उठा लिए जाये तो गुस्से को बेकाबू होने से रोका जा सकता है। ये संकेत इस प्रकार हो सकते हैं –

~  पेट में गाठें पड़ने लगती हैं।

~  जबड़े या मुठ्ठिया भिंचने लगती हैं

~  चेहरा लाल होने लगता

~  सांसें तेज हो जाती हैं।

~  सिरदर्द होने लगता है

~  हृदय की धड़कन बढ़ जाती है

~  कंधे कड़क हो जाते हैं

—   गुस्से को शांत करने के लिए  कुछ विशेष तरीके सीख लेने चाहिए जो इस प्रकार हैं –

~  गहरी साँस लें। यह साँस छाती से नहीं बल्कि पेट से आनी चाहिए।

~  तेज चाल से थोड़ा चल लें। इससे मन में दबा गुस्सा शांत हो जाता है। तब आप ठन्डे दिमाग से स्थिति संभाल सकते हैं।

~  गहरी साँस के साथ खुद से कहें शांत…  शांत….. शांत…..

~  शरीर में टेंशन महसूस होने वाले हिस्सों को रिलेक्स करें। जैसे कंधे घुमा लें , गर्दन या सिर की मालिश कर लें।

~  अपनी हॉबी की तरफ ध्यान ले जायें , संगीत सुने , खुशबु , स्वाद , पिक्चर आदि का आनंद लें।

~  विचार कीजिये पिछली बार आपने किस तरह गुस्से पर काबू पा लिया था। इस बार भी वैसा ही करें।

~  योगासन और प्राणायाम मांसपेशियों और दिमाग को ताकतवर बनाते हैं और शांति देते है। इन्हे सीखें और काम में लें।

—  प्राणायाम के बारे में विशेष ध्यान रखने योग्य बातें जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

~   धीरे धीरे 10 तक गिने। दस तक गिनती से लाभ ना हो तो एक बार फिर से गिने।

—  खुद को याद दिलायें कि गुस्सा करने से कुछ सुधरेगा नहीं , इससे आपको भी ख़ुशी नहीं मिलेगी बल्कि दुःख ही मिलेगा।

—  गुस्सा जायज होते हुए भी विवेक रहित बना देता है। इसलिए अपने बुद्धिमान होने का सबूत पेश करते हुए खुद को याद दिलायें की दुनिया आपको नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं बनी है।

—  गुस्से में बहस करते समय ज्यादातर पिछली शिकायतों का पिटारा खोल लिया जाता है इससे समस्या उलझती है। वर्तमान की ही बात करें। यदि आप छोटी छोटी बात पर गुस्सा करते है तो लोग आप की बातों पर ध्यान देना बंद कर देते हैं।

—  कभी कभी आप पास का वातावरण चिड़चिड़ाहट और गुस्से का कारण बन जाता है। समस्याएं और जिम्मेदारी आपको गुस्सा दिलाने लगती हैं और आसपास के लोग और चीजें आपको जाल में उलझाने वाली लगने लगती हैं। ऐसे में एक ब्रेक लेना फायदेमंद हो सकता है। खुद के लिए थोड़ा पर्सनल समय निकालें।

—  अनदेखा करना सीखें। यदि बच्चे का कमरा देखकर आपको गुस्सा आता है तो दरवाजा बंद कर दें। जो चीज आपको गुस्सा दिलाती है उसे देखने से क्या फायदा। यह सोचना गलत है कि बच्चों को कमरा सही रखना चाहिए ताकि मुझे गुस्सा ना आये। सवाल बच्चों का नहीं है आप का है। आपको किसी तरह खुद को शांत रखना है।

—  यदि ट्रेफिक के कारण आपको गुस्सा आता है तो दूसरे रास्ते की तलाश कर लें या बस , पूल कार , ट्रैन आदि तलाशें।

—  यदि आप क्षमा करना नहीं जानते तो झगड़ा सुलझाना असंभव हो जाता है। सजा देने की भावना को ख़तम करने से ही समाधान निकलता है। सजा देने से हमारी जिंदगी में सुधार नहीं होता बल्कि खुद का नुकसान ही होता है।

—  दिमाग में आई किसी भी बात को कहने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सोच समझ कर ध्यान पूर्वक ही बोलना चाहिए। साथ ही दूसरे लोग जो बोल रहे हैं उसे भी ध्यान पूर्वक सुनना चाहिए।

—  रात के समय पति पत्नी किसी भी पॉइंट को डिस्कस करने पर गुस्सा में झगड़ा होने लगता है। इसका कारण दिन भर की थकान या घर या ऑफिस की कोई टेंशन हो सकती है। ऐसे में महत्वपूर्ण बातों को करने का समय बदल देना चाहिए।

—  धैर्य के साथ बताये तरीके अपनाने से फायदा जरूर मिलता है। गुस्से पर काबू करना आसान हो जाता है और परिणाम शानदार होते हैं। रिश्ते सुधर जाते हैं ,लक्ष्य प्राप्त होने लगते हैं और एक स्वस्थ और संतुष्ट जिंदगी जी पाते हैं।

—  यदि सारे उपाय आजमाने के बाद भी आपको लगता है की आपसे गुस्सा कंट्रोल नहीं हो पा रहा है और इसके कारण आपके पारिवारिक , व्यापारिक या ऑफिस के रिश्ते टूटने की कगार पर हैं तो आपको तुरंत अच्छे साइकोलोजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। वह आपकी सोच और व्यवहार में बदलाव लाने के तरीके बता सकते हैं , जो आपके गुस्से को आसानी से शांत कर सकते हैं।

References :

Controlling Anger Before it Controls You

Dealing with the Anger Habit

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