तुलसी पौधे की देखभाल – Tulsi Plant Care

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तुलसी पौधे की देखभाल कैसे करनी चाहिए , यह जानकारी होने पर आपके घर मे तुलसी हमेशा हरी-भरी रह सकती है। हिन्दू धर्म में तुलसी का बहुत अधिक महत्त्व है। इसे पूजा जाता है। यह धार्मिक पौधा होने के साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभदायक होता है अतः हर घर में होना चाहिए। आइये जाने Tulsi ki dekhbhal कैसे करें , तुलसी को सूखने से कैसे बचाएँ और Tulsi को हरा भरा व हेल्दी कैसे रखें।

तुलसी के पौधे की उम्र – Life of Tulsi Plant

तुलसी के पौधे की उम्र लगभग दो से ढाई साल होती है इसके बाद पौधा कमजोर होकर सूखने लगता है। इस बीच तुलसी के पौधे से पके हुए बीज मिट्टी में गिरते रहते हैं। बारिश के मौसम में ये बीज अंकुरित हो जाते है और नए पौधे फूट आते हैं जो स्वस्थ होते हैं।  तुलसी के बीज लगभग 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अंकुरित होते हैं। आप खुद भी तुलसी के बीज मिट्टी में दबाकर नए पौधे तैयार कर सकते हैं।

बीज से तुलसी कैसे लगायें : Grow Tulsi by seeds

बीज से तुलसी लगाने के लिए अप्रैल का महीना उपयुक्त होता है। इसके लिए खाद मिश्रित मिट्टी पर तुलसी के बीज बिखेर दें। अब इस पर लगभग चौथाई इंच की मिट्टी की परत चढ़ा दें।  इसके बाद इस पर पानी छिड़क दें।  पानी का छिडकाव रोज करें। बहुत ज्यादा पानी नहीं डालें। मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए। एक से दो सप्ताह के बीच पौधे फूट आते हैं। पौधे जब चार पांच इंच के हो जाये तब उन्हें दूसरी जगह लगाया जा सकता है।

वास्तु के अनुसार तुलसी को उत्तर पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है।

तुलसी पौधे की देखभाल और घना करने का तरीका

tulsi plant care

तुलसी के पौधे मे रोजाना अधिक पानी डालना ठीक नहीं है। तुलसी में ज्यादा पानी डालने से रोग लग सकते है और वह सूख सकती है। इसके अलावा इन बातों का ध्यान रखने से तुलसी सूखेगी नहीं और घर में तुलसी हमेशा उपलब्ध रहेगी –

तुलसी का पौधा जब थोडा बड़ा हो जाये ( लगभग एक फीट ) तब उसकी मुख्य शाखा काट देने से साइड से फूट होती है इससे पौधा घना हो जाता है।

तुलसी के पौधे को धूप जरुरी होती है। इसे कम से कम दो घंटे की धूप अवश्य मिले इसका ध्यान रखें। लेकिन बहुत ज्यादा तेज धूप व गर्मी से भी इसे बचा कर रखें।

पौधे में जब फूल ( मंजरी ) आने लगते हैं तो पौधे की वृद्धि रुक जाती है। नए पौधे में फूल आने पर उन्हें तोड़ते रहना चाहिए। इससे पौधा घना होता रहता है। हमारी परंपरा के अनुसार इसे तुलसी का बोझ कम करना कहते हैं।

तुलसी के फूल , मंजरी या पत्ते नाख़ून से काट कर नहीं तोड़ने चाहिए। इससे तुलसी ख़राब हो सकती है।

तुलसी के पोधे को नाइट्रोजन की आवश्यकता अधिक होती है . इसके लिए दो सप्ताह में एक बार गौ मूत्र ( एक भाग गौमूत्र और दस भाग पानी के अनुपात में ) या कम्पोस्ट खाद कम मात्रा में ( दो तीन महीने में एक बार ) डाली जा सकती है। तुलसी में केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग ना करें।

सूखे , पीले पड़े हुए तथा मुरझाये हुए पुराने पत्ते हटा कर पौधे को हल्का बनाये रखना चाहिए।

तेज सर्दी तथा ओस तुलसी के लिए नुकसानदेह होती है। इससे पौधा नीला पड़ कर नष्ट हो सकता है। तेज सर्दी तथा ओस से तुलसी को बचाने के लिए उसे पतले कपड़े से ढक दें।

तुलसी विवाह के समय तुलसी को चुनरी ओढ़ाने से सर्दी से बचाव हो जाता है और पौधा सर्दी के कारण नष्ट नहीं होता है।

( इसे पढ़ें : तुलसी विवाह कब और कैसे करते है जानें सम्पूर्ण विधि )

तुलसी के पौधे में ज्यादा पानी नहीं डालें लेकिन मिट्टी में नमी बनी रहे उतना पानी अवश्य डालें। सर्दी में भी मिट्टी की नमी का ध्यान जरुर रखें। बरसात में पानी का निकास हो जाये ऐसी व्यवस्था रखें। गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी का ध्यान रखें।

तुलसी के पौधे में पानी डालते समय मिट्टी उछल कर पत्तों पर न लगे इसका ध्यान रखें। इससे बीमारी लग सकती है।

तुलसी के दो तीन पौधे रखें ताकि किसी एक पौधे में समस्या हो तो भी तुलसी की उपलब्धता बनी रहे।

तुलसी में रोग लगने पर क्या करें – Tulsi Disease

वैसे तो तुलसी में बीमारी कम ही लगती है लेकिन कभी कभी तुलसी में गोल भूरे या काले रंग के धब्बे जैसे बन जाते जो एक बीमारी है। लम्बे समय तक नमी या गीलापन इसका कारण होता है। यदि एक दो पत्तों पर ऐसे धब्बे नजर आएं तो उन पत्तों को तुरंत हटा देना चाहिए अन्यथा यह सब पत्तों में फैल कर पौधे को नष्ट कर सकते हैं।

पानी में नीम का तेल मिलाकर सप्ताह में दो तीन बार छिडकाव करने से भी काले धब्बे या अन्य रोग मिट जाते हैं।

यदि किसी प्रकार की कीटनाशक दवा का उपयोग कर रहें हैं तो तुलसी के पत्ते खाने में काम ना लें।

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