दाँतो के ब्रेसेस तार कौनसे लगवायें और क्या ध्यान रखें – Braces for teeth

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ब्रेसेस Braces for teeth लगाकर दाँतों की स्थिति ठीक की जाती है। इन्हे दाँतों में तार लगाना भी कहा जाता है। दाँत सही जगह स्थित होते हैं तो बत्तीसी सुन्दर दिखाई देती है और आपका हंसना दूसरे लोगों को लुभाता है।

लेकिन अगर दाँत टेढ़े मेढ़े या आगे पीछे हों तो भद्दे दिखते हैं और इसका अहसास आपको खुलकर ठहाका लगाने से रोकता है। ऐसे दाँतों की सफाई में भी मुश्किल आती है और कैविटी बनने की संभावना बढ़ जाती है।

Braces लगाने का उद्देश्य सिर्फ टेढ़े दाँत सीधे करके सुंदरता बढ़ाना ही नहीं होता। यदि दाँत की पंक्ति एक दूसरे के ऊपर सही तरीके से नहीं आती तो दाँतों का मुख्य काम भोजन काटना ,चबाना आदि सही तरीके से नहीं हो पाता।

यह काम सही तरीके से नहीं होने पर सिरदर्द , पाचन या बोलने सम्बन्धी समस्या हो सकती है। इसे भी ब्रेसेस से ठीक किया जाता है। अतः डेंटिस्ट ब्रेसेस लगाने की सलाह देता है तो जरूर विचार करना चाहिए।

बच्चों के जब दूध के दाँत टूटकर नए स्थायी दाँत आते है तब ये टेढ़े दिखाई दें तो यह समय Braces लगाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होता है क्योंकि मुँह का विकास जारी रहता है और जबड़े बड़ों की अपेक्षा ज्यादा लचीले होते हैं। इसलिए किशोर अवस्था आने से पहले इसका उपचार कर लेना ठीक रहता है।

यदि मसूड़े मजबूत हों तो ब्रेसेस लगवा कर किसी भी उम्र में टेढ़े दाँत सीधे करवाये जा सकते हैं। कमजोर मसूड़े या मुंह की सही तरीके से देखभाल नहीं करने वाले लोगों को इनसे परेशानी जरूर हो सकती है क्योंकि इनसे मसूड़ों पर दबाव पड़ता है। बहुत से लोग बड़े होने के बाद भी Braces लगवाते हैं और अच्छे परिणाम भी मिलते हैं।

ब्रेसेस लगाने से मसूंडों और दाँतों का खिंचाव थोड़ा दर्द या तकलीफ दे सकता है। मसूड़ों और होठों पर धातु या प्लास्टिक के कारण थोड़ी दिक्कत हो सकती है। ये कुछ दिन बाद में ठीक हो जाते हैं।

कुछ समय तक छाले , दर्द और खाने में दिक्कत जैसी परेशानी हो सकती है लेकिन धीरज रखने से कुछ ही समय में यह बीते दिनों की बात हो जाती है और एक बार इनकी आदत हो जाने पर महसूस ही नहीं होता कि ब्रेसेस लगे हुए हैं। और अंत में एक खूबसूरत मुस्कराहट आपके चेहरे पर खिलती है।

डेंटिस्ट और ऑर्थोडोन्टिस्ट में क्या अंतर है

Dentist and Orthodontist Difference hindi me

—  ब्रेसेस लगाने से दातों का टेढ़ापन , दूरी आदि ठीक किये जाते हैं। इस काम के लिए विशेष प्रकार के एक्सपर्ट होते है जो ऑर्थोडोन्टिस्ट कहलाते हैं।

—  ऑर्थोडोन्टिस्ट और डेंटिस्ट दोनों एक्सपर्ट दाँतों और मुंह से सम्बंधित समस्या दूर करते हैं। डेंटिस्ट बनने के बाद अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करके ऑर्थोडोन्टिस्ट बनते हैं।

—  डेंटिस्ट जहाँ दाँत की कैविटी , फिलिंग , मसूड़े की परेशानी आदि के लिए एक्सपर्ट होते हैं जबकि ऑर्थोडोन्टिस्ट दाँतों की बिगड़ी हुई स्थिति को सही करने के काम के भी एक्सपर्ट होते हैं। दाँतों के बीच अधिक जगह , टेढ़े मेढ़े दाँत , दाँत का अधिक पास पास होना या आगे पीछे होना जैसी समस्या को दूर करने के एक्सपर्ट होते हैं।

—  सभी ऑथोडोन्टिस्ट डेंटिस्ट होते हैं लेकिन सभी डेंटिस्ट ऑर्थोडोन्टिस्ट हों यह जरुरी नहीं।

ब्रेसेस कितने प्रकार के होते हैं

Type of braces in hindi

कई प्रकार के ब्रेसेस उपलब्ध हैं। इनकी कीमत में बहुत अंतर होता है। आप किस शहर में , किस क्लिनिक में इलाज करवाते हैं और दाँतों की स्थिति कैसी है इस पर कुल खर्च निर्भर करता है। अपनी सुविधा के अनुसार चयन करना चाहिए।

दाँतों के ब्रेसेस

धातु के ब्रेसेस –  Metal Braces

ये पुराने समय से काम लिए जा रहे हैं। ब्रेसेस के नाम से इन्ही की तस्वीर सामने आती है। अब कम दिखने वाले मेटल ब्रेसेस भी उपलब्ध है , इसके अलावा विशेष प्रकार के तार लगाए जाने लगे है जो जल्दी और दर्द रहित तरीके से दाँतों को सही करते हैं।

मेटल ब्रेसेस सबसे कम कीमत वाले ब्रेसेस होते हैं। इनमें धातु के ब्रेकेट और तार होते हैं जो उच्च ग्रेड के स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं। लोकल और इम्पोर्टेड ब्रेसेस की कीमत में फर्क होता है।

इस प्रकार के ब्रेसेस के लिए  15,000/- से 35,000/- रूपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

सिरामिक ब्रेसेस  – Ceramic Braces

ये मेटल ब्रेसेस जैसे ही शेप और आकार के होते है परन्तु दाँत के रंग के होते हैं। कुछ में तार भी दाँत के रंग के ही होते हैं , इस वजह से भद्दे नहीं दिखते। ये मेटल ब्रेसेस से कुछ महंगे होते है। इनकी सफाई का ध्यान ज्यादा रखना पड़ता है।

इनकी कीमत 30,000/- से 55,000/- तक हो सकती है।

लिंगुअल ब्रेसेस – Lingual Braces

ये मेटल ब्रेसेस ही होते है लेकिन दाँतों में अंदर की तरफ लगाए जाते हैं। इसलिए बाहर नजर नहीं आते हैं। ये सामान्य से ज्यादा कीमत के होते हैं। इनकी सफाई थोड़ी मुश्किल होती है। शुरू में ज्यादा तकलीफदेह हो सकते हैं। इन्हे एक्सपर्ट डॉक्टर ही सही तरीके से लगा सकता है।

इनके लिए 72,000/- से 1,80,000/- रूपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

इनविजिबल , क्लियर ब्रेसेस – Invisible , Clear Braces

इसमें पारदर्शी प्लास्टिक से बने ढक्कन जैसी आकृति के अलाइनर दाँतों पर लगाये जाते हैं जिन्हे 15 दिन बाद बदल दिया जाता है। ये बिल्कुल दिखाई नहीं देते , कुछ भी खाया पिया जा सकता है।

जरुरत के समय इन्हे खुद हटा सकते हैं और खुद ही वापस भी लगा सकते हैं। ब्रश करने लिए इन्हे हटाकर वापस लगा सकते हैं। इससे दाँतों सफाई अच्छे से हो जाती है। इन्हे लगाने से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती। ये सभी को नहीं लगाए जा सकते। दाँतों की स्थिति अधिक जटिल है तो ये नाकाम हो सकते हैं।

ये बच्चों को नहीं लगाए जाते सिर्फ किशोर उम्र में या बड़ों को लगाये जाते हैं । यह सबसे अधिक महंगे ब्रेसेस होते हैं । इलाज में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है।

इनके लिए  75,000/- से 3,00,000/- तक खर्चा हो सकता है।

ब्रेसेस कितने समय तक लगाने पड़ते हैं

Braces how long to wear in hindi

यह थोड़ी लम्बी प्रक्रिया है। दाँतों की स्थिति और दूरी के अनुसार इस प्रक्रिया में छः महीने से दो साल का समय लग सकता है। अलग प्रकार के ब्रेसेस में समय कम या ज्यादा लग सकता है। मेटल ब्रेसेस अपेक्षाकृत जल्दी परिणाम देते हैं।

शुरू में आपको कुछ दर्द निवारक दवा खानी पड़ सकती हैं। नमक मिले पानी से कुल्ले करने से दर्द और खिंचाव में आराम मिलता है। इसे दिन में तीन चार बार कर सकते हैं इससे मुंह और ब्रेसेस साफ रहते हैं। चबाने और बोलने में थोड़ी दिक्कत महसूस हो सकती है।

ब्रेसेस लगे हों तो क्या ध्यान रखना चाहिए

Care with braces hindi me

—  दाँत और मुंह की सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

—  ब्रेसेस लगाने के बाद सामान्य ब्रश से ही सफाई की जा सकती है हालाँकि ब्रश जल्दी बदलना  पड़ सकता है क्योंकि धातु से बने ब्रेसेस से वह जल्दी ख़राब हो जाता है।

—  सफाई के लिए एक विशेष प्रकार का ब्रश आता है जिसे प्रोक्सा ब्रश कहते हैं। इससे ब्रेसेस ज्यादा अच्छी तरह साफ किये जा सकते हैं। 

—  माऊथवॉश का उपयोग करके भी दाँत और ब्रेसेस के बीच भोजन के कण और प्लाक जमने से रोका जा सकता है।

—  कुछ भी खाने के बाद अच्छे से कुल्ला जरूर कर लेना चाहिए।

—  कड़क और चिपकने वाली चीजें नहीं खानी चाहिए। अन्यथा तार या ब्रेकेट टूट सकते हैं। अतः इन चीजों से दूर रहना अच्छा होता है –

कड़क टॉफी , बादाम , मूंगफली , पॉपकॉर्न , चिपकने वाली टॉफ़ी , कड़क सोया चिप्स , कच्ची गाजर , गन्ना , सिकी हुई मक्का आदि। इसके अलावा मीठे पेय , कोल्ड ड्रिंक , बर्फ चबाने आदि से बचना चाहिए।

—  गन्दी आदत जैसे नाख़ून चबाना , पैंसिल या पेन मुंह में डालना आदि ब्रेसेस और दाँतों के लिए नुकसान देह हो  सकते हैं।

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