दाल के लिए ये ना भूलें – Dont Ignore This About Dal

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दाल Dal हमारे खाने में प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है। हर घर में दाल लगभग रोज बनाई जाती है। तीन चार या ज्यादा प्रकार की दाल हमें घर में रखनी पड़ती है। प्रत्येक दाल की एक अलग विशेषता होती है।

इन्हें स्टोर करने के लिए उन्हें बाजार से लाकर डिब्बों में भर लिया जाता है। कई बार डिब्बा काफी दिनों तक काम नहीं आता। ऐसे में  कीड़े पैदा होने की सम्भावना बन जाती है। इसके अलावा Dal के सम्बन्ध में ज्यादा जानकारी होने पर दालों का समुचित उपयोग हो पाता है।

कृपया ध्यान दें :  किसी भी लाल अक्षर वाले शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते है। 

दाल कितने प्रकार की होती है – Type of Pulses

मूंग की दाल – moong mogar

मूंग की दाल Mung ki dal पचने में बहुत हल्की होती है। यह स्वादिष्ट और शक्तिवर्धक होती है। हर मौसम में इसका उपयोग किया जा सकता है। साबुत मूँग को भिगोकर अंकुरित करना आसान होता है। अंकुरित मूंग डायबिटीज , पीलिया , कब्ज , अपच , हाई ब्लड प्रेशर में भी लिए जा सकते हैं ।

फ्लू या पीलिया के रोगी को उबली दाल का पानी देना लाभदायक होता है। मूंग का पानी हैजा , टायफाइड , बुखार , में भी दिया जा सकता है।

बाजार में दो प्रकार की mung ki dal  मिलती है। छिलके वाली और बिना छिलके वाली जिसे मूँग मोगर कहते है।छिलके वाली दाल ज्यादा फायदेमंद होती है। रोजाना दो कटोरी पकी हुई Dal खाने से प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है।

चने की दाल – Bengal gram , chikpeas

चना शक्ति के लिए सबसे अच्छा होता है। पहलवानी या कड़ी कसरत के बाद चना खाने से ताकत मिलती है। चने को अंकुरित करके खाने से कई प्रकार के विटामिन प्राप्त होते है। अंकुरित चना डायबिटीज में भी खाया जा सकता है।

चने को पीस कर बेसन बनाया जाता है। बेसन कई तरह से काम में लिया जाता है । बेसन की पकौड़ी बना कर खाना सबसे ज्यादा नुकसानदेह होता है। भुना हुआ चना खाने से नुकसान नहीं होता। चने को छिलके सहित पिसवाकर इसकी रोटी बनाकर खाना लाभदायक होता है।

मूंग की दाल में थोड़ी चने की दाल मिलाकर पकानी चाहिए इससे चने और मूंग दोनों के फायदे मिल जाते है। Chane ki dal  बनाकर खाने पर पचने में भारी होती है। अकेले चने की दाल Chane ki dal कम ही बनाई जाती है। चने के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

अरहर की दाल – pigeon pea

अरहर दाल

यह चने की Dal जैसी ही दिखती है। चने की दाल से थोड़ी ज्यादा दबी हुई होती है। इसे तुअर tuar दाल के नाम से भी जाना जाता हैं।

गुजरात में अरहर की मीठी Dal का बहुत प्रचलन है। दक्षिण भारत का सांभर जो इडली या वड़ा के साथ खाया जाता है। इसी अरहर की दाल Arhar ki dal से बनाया जाता है। यह पचने में भारी होती है। खुश्की पैदा करती है।

यह कब्ज और गैस पैदा कर सकती है। इस Dal को बनाते वक्त इसमें घी या तेल जरूर मिलाना चाहिए। पकने के बाद इसमें धनिया पत्ती या दूसरी पत्ते वाली सब्जी मिलाकर खाने से प्रोटीन का अवशोषण अच्छा होता है। अरहर की दाल खाने से रंग साफ होता है।

उड़द की दाल – Black gram

उड़द की दाल Udad ki dal पचने में बहुत भारी होती है। कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों को ये Dal नहीं खानी चाहिए। इस Dal को हींग ,अदरक आदि का छोंका लगा कर ही खाना चाहिए। बाजार में छिलके वाली और बिना छिलके वाली उड़द की दाल मिलती है। छिलके काले रंग के होते है।

छिलकें वाली उड़द दाल से माह की दाल बनती है। दाल मखनी में भी इसी का उपयोग होता है।

उड़द मोगर दिखने में मूंग मोगर जैसी ही होती है लेकिन इसका रंग सफ़ेद होता है। दही बड़े में बड़ा इसी उड़द मोगर से बनाया जाता है। इडली बनाने में भी चावल के साथ उड़द की दाल डाली जाती है। उड़द की Dal से मंगोड़ी , पापड़ आदि बनाये जाते है।

उड़द की दाल के लडडू बनाये जाते है जो की पुरुषों के लिए बहुत ही पौष्टिक होते है। यह दाल शक्तिवर्धक और वीर्यवर्धक होती है।

मसूर की दाल – lentils

बाजार में मिलने वाली लाल रंग की दाल मसूर की दाल Masur ki dal होती है। आयुर्वेद के अनुसार इसे सबसे अच्छा माना जाता है। यह कफ और पित्त प्रकृति के लोगों के लिए अच्छी रहती है। इसमें गुर्दे की पथरी को निकालने का गुण होता है।

अंकुरित मसूर खाने से आँखें तेज होती है। गर्भावस्था में अंकुरित मसूर खाने से लाभ होता है। इससे स्तन के दूध में वृद्धि होती है। सिर्फ लाल रंग होने के कारण कुछ लोग इसे काम में नहीं लेते। इसे काम में जरूर लेना चाहिए।

मसूर की दाल 10 -12 घंटे भिगोकर पीस कर इसे उबटन में काम में लेने से त्वचा के रोग दूर होते है।

दाल की कुछ विशेष बातें

—   dal  साफ करके धूप लगायें और डिब्बे में भरने से पहले डिब्बे में थोड़ी हींग डाल दें। पैकेट वाली दाल को डब्बे में भरने से पहले भी ये ही करें। दाल मे कीड़े नहीं पड़ेंगे।

—  अंकुरित दाल ( sprouted ) को अधिक समय तक ताजा रखने के लिए भिगोते समय पानी में चार पांच बूँद नीम्बू का रस डाल दें।

sprout

—  किसी भी daal या साबुत मूँग , मोठ व चने को कीड़ों से बचाने के लिए उस पर तिल्ली या सरसों का तेल लगाकर  रखना चाहिए।

—  dal से कचौरी , मंगोड़ी या पकौड़ी बनाने के लिए दाल भिगोने पर उसके छिलके निकालते है उन्हें फेंकने की बजाय उन्हें पीसकर आटा मिलाकर पौष्टिक और स्वादिष्ट परोठे बनाये जा सकते है।

—  dal को पकाने से पहले 15 मिनट के लिए पानी में नमक डालकर उसमें Dal भिगो दें। Dal जल्दी गल जाएगी।

—  जिस समय बीमारी के कारण अन्न से परहेज करना हो तो साबुत मूंग उबालकर पानी छान लें। इसमें स्वाद अनुसार नमक व काली मिर्च डालकर हींग का छौंका लगाकर थोडा थोडा पिला सकते है। यह सुपाच्य होता है और  ताकत देता है।

—  पसीना अधिक आता हो तो मोठ को सेंककर उसका आटा बना लें। एक मुठ्ठी आटे में आधा चम्मच नमक डालकर जहाँ अधिक पसीना आता हो वहाँ मलें। इससे ज्यादा पसीना आना कम हो जायेगा।

—  हिचकी आती हो तो साबुत उड़द ( udad ) कोयले पर डालकर इसका धुआं सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।

—  उड़द की dal पचने में भारी होती है किन्तु बहुत शक्तिवर्धक होती है। भीगी हुई उड़द की Dal को पीसकर इसे घी में सेक लें। इसमें आधा चम्मच शहद मिला लें। इसे खा कर ऊपर से मिश्री मिला गुनगुना दूध पी लें। इसका तीन सप्ताह लगातार उपयोग करने से पुरुषों में बल वीर्य ( veerya ) की भारी वृद्धि हो जाती है।

—  अरहर ( arhar ) की दाल गर्म और रुक्ष प्रकृति की होती है। यह पेट में गैस पैदा करती है। इसलिए इसे घी का छोंका लगाकर नीम्बू का रस डालकर खाना चाहिए। अरहर की Dal  का पानी पीने से भांग का नशा उतर जाता है।

—  आधा चम्मच मसूर की Dal और आधा चम्मच तरबूज के बीज दूध के साथ पीस कर लगाने से चेचक के दाग धब्बे व गड्डे ठीक हो जाते है।

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