नया साल कहाँ , कैसे और क्यों मनाया जाता है – New Year Celebrations

181

नया साल New Year शुरू होने की ख़ुशी में लोग सेलिब्रेशन की तैयारी दिसंबर महीने मे ही शुरू कर देते हैं।  31 दिसंबर की रात दुनिया भर में लोग जश्न मनाकर रात 12 बजने का इंतजार करते हैं। जैसे ही 1 जनवरी का दिन शुरू होता है , लोग नए साल का स्वागत करते है । एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं दी जाती है।

पर क्या आप जानते हैं कि यह चलन कैसे और कब शुरू हुआ। इसके अलावा भारत में नया साल अलग अलग राज्यों में कब और कैसे मनाया जाता है। आइये जाने न्यू इयर सम्बंधित कुछ रोचक जानकारी –

ईसाई नया साल

1 जनवरी से शुरू होने वाला नया साल असल में ईसाई नव वर्ष है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर या अंग्रेजी कैलेंडर पर आधारित है । नया साल 1 जनवरी को मनाने की परंपरा 45 BC ( 45 ई. पू. ) से शुरू हुई जब रोम के शासक जुलियस सीजर ने जुलियन केलेंडर की शुरुआत की थी । इससे पहले नया साल 21 मार्च को मनाया जाता था।

अंग्रेजी ग्रेगोरियन केलेंडर Gregorian Calendar विश्व में सबसे अधिक अपनाया गया है। यह अक्तूबर 1582 में शुरू किया गया था और यह पुराने जुलियन केलेंडर का ही परिशोधित रूप है। इसमें हर चौथे साल लीप इयर Leap Year होता है जिसमे एक दिन अतिरिक्त जोड़ा जाता है। इसकी अत्यधिक लोकप्रियता के कारण ही पूरे संसार में 1 जनवरी को नए साल का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।

दुनिया के अनेक देश 1 जनवरी को नहीं बल्कि खुद के कैलेंडर के अनुसार अलग अलग समय पर नए साल का उत्सव मनाते हैं। जैसे इस्लामिक देशों में चाँद पर आधारित कैलेंडर अपनाया जाता है और उसके अनुसार मुहर्रम महीने का पहला दिन नए साल के रूप में मनाया जाता है।

चीन में नया साल 21 जनवरी से 20 फरवरी के बीच पड़ता है जो 2019 में 5 फरवरी को है। वहां लोग आतिशबाजी करते हैं , लाल रंग की लालटेन , लाल मिर्च सजाते हैं , दरवाजे और खिडकियों पर लाल रंग लगाया जाता है। लाल रंग के कपड़े इस खास अवसर के लिए खरीदते हैं।

हिंदी कैलेंडर के अनुसार नया साल चैत्र महीने में होता है जो मार्च में आता है।

हिन्दू नया साल – Hindu New Year

भारत में दो प्रकार के हिन्दू कैलेंडर अधिक प्रचलन में हैं। ये विक्रम सम्वत और शक सम्वत के नाम से जाने जाते हैं । शक संवत 78 AD में तथा विक्रम संवत 57 BC से शुरू हुआ था। शक सम्वत अधिक प्रचलित है।

दोनों ही कैलेंडर में महीनो के नाम समान है पर शक सम्वत में नया साल चैत्र महीने से शुरू होता है और विक्रम संवत में नया साल वैशाख से शुरू होता है। शक संवत तथा विक्रम संवत दोनों ही 12 महीनो में विभक्त किये गए हैं जिनमे चन्द्रमा की स्थिति के अनुसार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष होते हैं .

भारत में हिन्दू कैलेंडर के आधार पर कुछ राज्यों में मार्च या अप्रैल से और कुछ राज्यों में दीपावली से नया साल शुरू होना मानने की परंपरा है। उसी दिन नए साल का उत्सव विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। आइये जानें अलग अलग राज्यों में नया साल कैसे मनाया जाता है –

नया साल आन्ध्र प्रदेश और कर्णाटक में – उगादी

Ugadi New year

चैत्र महीने के पहले दिन से नए साल की शुरुआत होती है।  आन्ध्र प्रदेश और कर्णाटक के लोगों का मानते हैं कि इस दिन ब्रह्मा जी ने संसार की उत्पत्ति की शुरुआत की थी।  इस अवसर पर घर की साफ सफाई  की जाती है आम की पत्तियों से घर सजाया जाता है , रंगोली बनाई जाती है , नया साल उन्नति से भरपूर हो ऐसी कामना रखी जाती है।

नया साल महाराष्ट्र और गोवा में – गुडी पड़वा

New year as Gudi Padwa

चैत्र महीने के पहले दिन ” गुडी पड़वा ” के रूप में मनाया जाता है।  नए कपड़े पहने जाते हैं। रंग बिरंगी रंगोली बनाकर खुशियाँ मनाई जाती है। एक दूसरे को बधाई और मिठाइयाँ दी जाती हैं। घर घर में गुड्डी बनाकर उसकी पूजा की जाती है और उसे खिड़की पर रखा जाता है ताकि बुराइयाँ घर में प्रवेश ना कर पाए ।

नया साल सिन्धी समाज का – चेटी चंड

New year as Cheti Chand

चेती चंड चैत्र महीने का पहला दिन होता है।  सिन्धी भाषा में चैत्र को चेटी कहते हैं।  यह संत झुलेलाल Jhulelal के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पकवान बनाये जाते हैं , जल देवता वरुण देव की पूजा की जाती है तथा भजन आरती आदि गाये जाते हैं।

नया साल पंजाब में – बैशाखी

New year as Baisakhi

बैशाखी फसल कटने पर मनाया जाने वाला त्यौहार है।  यह हर साल 13 या 14 जनवरी को मनाया जाता है।  पंजाब में इस दिन नया साल शुरू होता है।  इस दिन पंजाब में गिद्धा या भांगड़ा आदि नृत्य किये जाते हैं।  यह दिन गुरु गोविन्द सिंग द्वारा खालसा Khalsa स्थापित किये जाने के रूप में भी मनाया जाता है।

नया साल बंगाल में – पोइला बैशाख

New year as Poila Baisakh

13 से 15 अप्रैल के बीच पड़ने वाला नए साल का पहला दिन बंगाल में पोइला बैशाख के रूप में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में इस दिन अवकाश होता है।  नया साल शुरू होने की ख़ुशी में लोग घर की सफाई और सजावट करते हैं।  माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं।  इस दिन नए शुभारम्भ किये जाते हैं।  नए बही खाते शुरू किये जाते हैं। पकवान बनाये जाते हैं और संस्कृतिक गतिविधि होती है।

नया साल कश्मीर में – नवरेह

Kashmiri new year Navreh

कश्मीर में हिन्दुओं का नया साल “ नवरेह “ मध्य मार्च में मनाते हैं । यह नया साल चैत्र महीने की प्रतिपदा के दिन शुरू होता है। इस दिन शाही व्यंजन बनाये जाते हैं , दोस्त परिवार के लोग मिलते जुलते हैं ,  नई दुल्हन नए कपड़े पहन कर अपने घर जाती हैं साथ में दही , फल , मिठाई आदि ले जाती हैं जिन्हे शुभ माना जाता है। बुजुर्ग लोग नई दुल्हन को पैसे या उपहार देते हैं। खाना पीना होने के बाद लोग पिकनिक मनाने बगीचों में जाते है वहाँ कहवा Kahwa बनाकर उसे पीने का आनंद लिया जाता है।

नया साल आसाम में – बोहाग बिहू

New year as Bohag Bihu

आसाम में नया साल बोहाग बिहू या रोंगाली बिहू के त्यौहार से शुरू होता है।  यहाँ से खेती का नया चक्र भी शुरू होता है। मेला भरता है। जवान लोग अपने लिए जीवन साथी का चुनाव करते हैं।  लड़कियां सुंदर वस्त्र पहन कर बीहू नृत्य Bihu Dance करती हैं और बीहु गीत Bihu songs गाती हैं।

इस दिन चावल से बनी मिठाई पीठा बनाया जाता है।  लोग एक दूसरे के घर जाकर नए साल की बधाई देते हैं और मिठाई आदि का आदान प्रदान करते हैं।

नया साल केरल में – विशु

Vishu Kerala New year

केरल के पहले महीने मेदम का पहला दिन ” विशु ” कहलाता है।  यह नए साल की शुरुआत होती है।  इस दिन मलयाली लोग सुबह जल्दी मंदिर जाते हैं।  शुभ और मांगलिक दर्शन करते हैं।  इसे विशुकानी Vishukanni कहा जाता है। गरीब लोगों को दान आदि दिए जाते हैं।  लोग नए कपड़े पहनते हैं , आतिशबाजी की जाती है , कई प्रकार के पकवान बनाये जाते है। दोस्त और परिवार के साथ भोजन किया जाता है जिसे सद्या Sadya कहते हैं। शाम को विशुवेला में इकट्ठे होते हैं।

नया साल तमिलनाडु में – वर्षा पिराप्पू / पुथांडु

Tamil New Year Puthandu

मध्य अप्रैल में शुरू होने वाला तमिल नया साल पुथांडू वठुकल के रूप में मनाया जाता है। यह चैथिराज महीने का पहला दिन होता है।  सुबह सबसे पहले कन्नी यानि शुभ चीज देखी जाती है जैसे सोना , चांदी , गहने , नए कपड़े , नया केलेंडर , दर्पण , चावल , नारियल , फल सब्जी , आदि।  इसे सौभाग्य देने वाला मानते हैं।

पुथांडू मनाने के लिए घर की साफ सफाई और सजावट की जाती है।  दरवाजे को आम की पत्तियों और फूल मालाओं से सजाया जाता है।  फर्श पर दीपक के चित्र बनाये जाते हैं जिन्हें विलाक्कू कोलम Vilakku Kolam कहते है।  पारंपरिक बडा पीतल का दीपक जलाया जाता है। तांबे का जल कलश जिसमें पानी भरते हैं आम के पत्ते  लगाकर उस पर नारियल रखा जाता है और उसकी पूजा की जाती है।  परम्परिंक व्यंजन जैसे पचडी Pachadi , पायसम Paysam आदी बनाये जाते हैं।

जैन नववर्ष – Jain New Year

जैन नववर्ष दीपावली से अगले दिन शुरू होता है। मान्यता के अनुसार, भगवान महावीर स्वामी को दीपावली के दिन ही मोक्ष प्राप्ति हुई थी। इसके अगले दिन ही जैन धर्म के अनुयायी नया साल मनाते हैं। इसे वीर निर्वाण संवत कहते हैं। गुजरात में भी नए साल का आरंभ दीपावली के दूसरे दिन से ही माना जाता है। व्यापारी भी इसी दिन से नए साल की शुरुआत मानते हैं।

पारसी नववर्ष – Parsi New Year

पारसी धर्म का नया वर्ष नवरोज उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव मनाया जाता है। 3000 वर्ष पूर्व शाह जमशेदजी ने नवरोज मनाने की शुरुआत की थी।

इन्हे भी जानें और लाभ उठायें :

पत्नी को खुश कैसे रखें बिना पैसे खर्च किये 

मच्छर क्यों और किसको ज्यादा काटते हैं

अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी

धूप की किरणें कब ज्यादा नुकसानदायक होती हैं

सूर्य जल चिकित्सा के फायदे

तांबे के बर्तन में पानी से फायदा

बच्चों के नाम क्या और कैसे रखें 

दिनों दिन बढ़ता घर खर्च कम कैसे करें 

हंसने के फायदे और लाफ्टर एक्सरसाइज का तरीका 

रद्दी पुराने अख़बार के शानदार 28 उपयोग