पूर्णिमा व्रत , स्नान , फायदे , त्यौहार और जयंती – Pornima Vrat

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पूर्णिमा Poornima या पूर्णमासी Purnmasi का अर्थ है सम्पूर्ण चन्द्रमा यानि जब चाँद अपने पूरे आकार में दिखाई देता है। यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत , पूजा , दान , आदि शुभ माने जाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन व्रत करना Poornima ka vrat लाभदायक होता है। चन्द्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत खोला जाता है। पूर्णिमा के दिन एक समय भोजन करके व्रत करने और सत्यनारायण की पूजा करने से सुख संपत्ति प्राप्त होती है।

पूर्णिमा के दिन शिवजी , माँ पार्वती तथा भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है।

वैशाख पूर्णिमा , कार्तिक पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा का विशेष महत्त्व माना जाता है और इस दिन तीर्थस्थल पर स्नान , दान आदि करना शुभ माना जाता है।

पूर्णिमा व्रत

पूर्णिमा व्रत के फायदे

Purnima Vrat Benefits

पूर्णिमा का व्रत करना लाभदायक माना जाता है। इस व्रत को करने से ये लाभ होते हैं –

—  मानसिक कष्ट से मुक्ति मिल सकती है।

—  पारिवारिक कलह और अशांति दूर हो सकती है।

—  चन्द्रमा गृह की शांति के लिए यह व्रत लाभदायक होता है। यदि कुंडली के अनुसार चंद्र गृह पीड़ित या दूषित हो तो पूर्णिमा का व्रत करने से लाभ हो सकता है।

—  इस दिन शिव लिंग पर दूध , बेलपत्र , शमी पत्र आदि चढ़ाने से शिव कृपा प्राप्त होती है तथा रोगों से मुक्ति मिल सकती है।

—  अकारण भय और मानसिक चिंता पूर्णिमा के व्रत से दूर हो सकती है।

—  पूर्णिमा का व्रत करने से वैवाहिक जीवन सुख शांति पूर्वक बीतता है।

पूर्णिमा एक विशेष दिन होता है। इस दिन कई त्यौहार और जयंती आदि आते हैं । कौनसे महीने की पूर्णिमा के दिन का क्या महत्त्व है इसे यहाँ बताया गया है। आइये जानें पूर्णिमा के दिन कौनसा त्यौहार होता है।

चैत्र पूर्णिमा Chaitra Poornima – हनुमान जयंती

यह चैती पूनम भी कहलाती है। इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। भक्तजन इस दिन व्रत करते हैं , हनुमान चालीसा तथा सुन्दर कांड आदि का पाठ करते हैं। हनुमान जी धर्म के रक्षक , संकट मोचक तथा कल्याण करने वाले माने जाते हैं। हनुमान जी का स्मरण करने से बल , बुद्धि , निर्भयता , धैर्य तथा विवेक आदि गुण प्राप्त होते हैं।

वैशाख पूर्णिमा Vaishakh Poornima – बुद्ध पूर्णिमा / पीपल पूनम / कुर्मा जयंती

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दिन भगवान बुद्ध को बोध गया में पीपल के पेड़ के नीचे सत्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह दिन पीपल पूनम भी कहलाता है और इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है यानि इस दिन कोई भी शुभ कार्य , बिना किसी पंडित से पूछे किया जा सकता है।

वैशाख पूर्णिमा भगवान विष्णु के कश्यप अवतार का जन्म दिन है। इसे कुर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है संस्कृत भाषा में कुर्मा का अर्थ कछुआ होता है। भगवान विष्णु ने इस दिन कछुए के रूप में मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करके समुद्र मंथन में सहायता की थी।

आषाढ़ पूर्णिमा Ashadh Poornima – गुरु पूर्णिमा , व्यास जयंती

आषाढ़ माह की पूनम गुरु पूर्णिमा होती है। महर्षि वेदव्यास जी का जन्म इसी दिन हुआ था अतः यह व्यास पूर्णिमा भी कहलाती है। इसी दिन वेदव्यास जी ने महाभारत ग्रन्थ की रचना आरम्भ की थी। हमारी संस्कृति के अनुसार गुरु का स्थान ब्रह्मा विष्णु महेश से भी ऊपर होता है अतः उनका आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।

श्रावण पूर्णिमा Shravan Poornima – रक्षाबंधन , गायत्री जयंती

सावन महीन की पूनम को रक्षा बंधन मनाया जाता है जो सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है। यह श्रावणी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। भाई बहन के संबंधों का यह पावन अवसर होता है।

बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई की उन्नति की कामना करती है। भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का वचन देता है। रक्षा बंधन मनाने का तरीका जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

ब्राह्मण जन इस दिन किसी नदी में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देते हैं। गायत्री मन्त्र का जाप करते हैं। पुराना यज्ञोपवीत, जनेऊ उतार कर नया मन्त्र पूरित जनेऊ धारण करते हैं। यह दिन माँ गायत्री के जन्म दिन ( गायत्री जयंती ) के रूप में मनाया जाता है जिन्हे वेद माता भी कहते हैं ।

कुछ स्थानों पर गायत्री जयंती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष के एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन गायत्री मन्त्र का जाप विशेष फल दायी माना जाता है।

भाद्रपद पूर्णिमा Bhado Poornima  – उमा महेश्वर व्रत

इस दिन उमा महेश्वर व्रत रखा जाता है। यह व्रत स्त्रियों के लिए उत्तम संतान तथा सुख समृद्धि देने वाला माना जाता है। इस दिन शिवजी की अर्धनारीश्वर स्वरुप की पूजा की जाती है।  उमा महेश्वर व्रत मार्गशीष शुक्ल पक्ष की तीज के दिन भी रखा जाता है।

आश्विन पूर्णिमा Ashvin Poornima  – शरद पूर्णिमा , कोजगरा पूजा

इस दिन कृष्ण भगवान ने महारास रचाया था। चन्द्रमा इस दिन सोलह कलाएँ बिखेरता है। चाँद की रोशनी में खीर रख कर प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं ।

स्त्रियां इस दिन मनोकामना सिद्धि के लिए व्रत रखती हैं। शिवजी और कार्तिकेयजी की पूजा की जाती है। चन्द्रमा को अर्ध्य देकर व्रत खोला जाता है तथा उस समय विष्णु जी और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

शरद पूर्णिमा व्रत और पूजा के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

कार्तिक पूर्णिमा Kartik Poornima –

त्रिपुरा पूर्णिमा , गुरु नानक जयंती , पुष्कर मेला

सभी पूर्णिमा में कार्तिक पूर्णिमा का सबसे अधिक महत्त्व है। इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह किया जाता है। तुलसी विवाह की सम्पूर्ण विधि जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

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यह कार्तिक स्नान का अंतिम दिन होता है। सुबह स्नान के बाद सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है। जगह जगह गंगा तट पर स्नान के लिए लोग इकठ्ठा होते हैं जो मेले का स्वरुप ले लेता है। कार्तिक स्नान के विषय में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

पुराणों के अनुसार इस दिन विष्णु भगवान का मत्स्य अवतार हुआ था।

इस दिन शंकर भगवान ने त्रिपुर नामक राक्षस का वध किया था , इसलिए इसे त्रिपुरा पूर्णिमा भी कहते हैं।

इसी दिन सिख पंथ के आदिगुरु श्री नानक देव का जन्म हुआ था। जिसे गुरुनानक जयंती के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

राजस्थान के पुष्कर में इस समय पशु मेला होता है जिसे देखने देश विदेश से लोग आते हैं। यह मेला कार्तिक एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है।

मार्ग शीर्ष पूर्णिमा Aghan Poornima – श्री दत्तात्रेय जयंती

अगहन मास की पूनम दत्तात्रेय जयंती के रूप में मनाई जाती है विशेषकर महाराष्ट्र में। इस दिन महिलाएँ सुख समृद्धि और मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन दत्तात्रेय , उनके पिता अत्रि मुनि तथा माता अनुसूया की भी पूजा की जाती है।

पौष पूर्णिमा Paush Poornima – शाकम्भरी जयंती

पौष माह की पूनम शाकम्भरी नवरात्री का अंतिम दिन होता है। यह दिन शाकम्भरी पूर्णिमा भी कहलाता है। माँ भगवती ने पृथ्वी पर अन्न संकट और अकाल दूर करने के लिए इस दिन शाकम्भरी माता के रूप में अवतार लिया था।

माघ पूर्णिमा Magh Poornima – संगम माघ मेला ,स्नान

माघ महीने में इलाहबाद में बहुत विशाल माघ मेला भरता है , जिसमे साधु संत तथा भक्तगण इकठ्ठा होते है तथा कल्पवास करते हैं । यह मेला माघ पूर्णिमा पर समाप्त होता है।

माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान करने से सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। विष्णु भगवान का पूजन व स्तुति की जाती है। इस दिन यज्ञ , तप किये जाते हैं।  निर्धनों को भोजन , वस्त्र तथा अन्य कई वस्तुओं का दान किया जाता हैं।

फाल्गुन पूर्णिमा Falgun Poornima – होली

फाल्गुन माह की पूनम के दिन होली मनाई जाती है। यह सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है। इस दिन होलिका पूजन तथा होलिका दहन किया जाता है। होली पूजन की विधि जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

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