प्राणायाम कब कैसे करें और इसका शरीर दिमाग पर असर – Pranayam effects

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प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है प्राण और आयाम। प्राण का मतलब जीवनी शक्ति और आयाम मतलब विकास , फैलाव या बढ़ोतरी। अर्थात यह प्राणशक्ति या जीवन शक्ति को बढ़ाने की योगिक प्रक्रिया है।

प्राणायाम योग Yog का एक मुख्य भाग है । इसके द्वारा साँस की गति को नियंत्रित करके शारीरिक और मानसिक लाभ प्राप्त किये जाते हैं।

प्राणायाम में एक विशेष तरीके से साँस अंदर ली जाती है , बाहर निकाली जाती है या रोकी जाती है। साँस अंदर लेने को पूरक Poorak , बाहर निकालने को रेचक Rechak और रोकने को कुम्भक Kumbhak कहा जाता है।

प्राणायाम का शरीर और दिमाग पर असर

Pranayam ke fayde

दिमाग की स्थिति और साँस का आपस में गहरा सम्बन्ध होता है। तनाव की स्थिति में साँस अनियंत्रित हो जाती है और जब दिमाग शांत होता है या खुश होते हैं तब साँस की गति नियमित रहती है। साँस की गति को नियमित करने से दिमाग को शांत किया जा सकता है।

जब मानसिक शांति मिलती है तो दिमाग ज्यादा अच्छा काम कर पाता है। प्राणायाम से यही प्रभाव पैदा होता है।

प्राणायाम से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। इसके अभ्यास से फेफड़ों की शक्ति बढ़ती है जिसके कारण ऑक्सीजन अधिक मिलती है जो रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंचती है। रक्त द्वारा उचित मात्रा में ली गई ऑक्सीजन से प्रत्येक अंग स्वस्थ होता है।

प्रत्येक अंग की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने से उनकी कार्य क्षमता बढ़ती है; विशेषकर हृदय की जो एक दिन में लगभग एक लाख बार धड़कता है। हृदय की मांसपेशियों को प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन मिलने से हृदय स्वस्थ बना रहता है जिससे शरीर में रक्त का संचार सही बना रहता है।

प्राणायाम कैसे और कब करें

Pranayam kaise kab sahi

प्राणायाम करने का विशेष तरीका होता है। अतः इसे सीख कर या किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करना उचित होता है। कुछ लोग किसी भी वक्त साँस ऊपर नीचे जोर की आवाज के साथ चलाने लगते हैं जिसे वो प्राणायाम समझते हैं। यह गलत तरीका है। इससे लाभ के बजाय नुकसान होने की संभावना अधिक होती है।

प्राणायाम करने की कुछ विशेष नियम होते है जिनका पालन करने पर ही इसका फायदा मिल सकता है। इनका ध्यान अवश्य रखना चाहिए। प्राणायाम करने के लिए ध्यान रखने योग्य बातें इस प्रकार हैं –

—  सुबह का समय जब हवा शुद्ध होती है तब Pranayam करना श्रेष्ठ होता है।

—  वस्त्र आरामदायक पहनने चाहिए।

—  प्राणायाम हमेशा खाली पेट करना चाहिए। कुछ तरल पदार्थ लिया हो तो एक घंटे बाद और नाश्ता आदि लिया हो तो 2 घंटे बाद ही Pranayam करना चाहिए।

—  अपनी शक्ति और सुविधा के अनुसार ही प्राणायाम करें। अनुचित रूप से अधिक शक्ति ना लगायें।

—  प्राणायाम आसन पर बैठ कर करना चाहिए। वज्रासन , सुखासन ( पालथी लगा कर बैठना ) , सिद्धासन या पद्मासन इनमे से जिस अवस्था में आसानी से ज्यादा देर बैठ पायें उस अवस्था में Pranayam कर सकते हैं।

—  प्राणायाम करते समय मुँह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।

—  शरीर में तनाव नहीं होना चाहिए।

—  कमर , गर्दन और सिर सीधे और एक लाइन में होने चाहिए। Pranayam करते समय गर्दन ऊपर नहीं उठनी  चाहिए।

—  साँस लेते समय विचार करें कि प्राणशक्ति , ऊर्जा और तेजस्विता अंदर आ रही है और साँस छोड़ते समय विचार करें कि दुर्गुण , रोग , बीमारी आदि बाहर निकल रहे हैं। इससे अधिक फायदा मिलता है।

—  मुँह बंद रहना चाहिए। मुँह से हवा बिल्कुल अंदर बाहर नहीं होनी चाहिए।

—  नाक से हवा अंदर या बाहर जाते समय आवाज नहीं चाहिए।

—  साँस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

—  प्राणायाम करने के तुरंत बाद नहाना नहीं चाहिए। एक घंटे बाद नहा सकते हैं। नहाने के आधे घंटे बाद यह कर सकते हैं।

—  प्राणायाम करने से शरीर पर होने वाले असर का ध्यान रखना चाहिए। कुछ नुकसान होता दिखाई दे तो इसका अर्थ यह है कि आप सही तरीके से या सही प्रकार का Pranayam नहीं कर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।

प्राणायाम के लाभ और फायदे – Pranayam Benefits

—  नियमित प्राणायाम का अभ्यास करने से श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र , संचार तंत्र , तथा अन्तः स्रावी तंत्र को ताकत मिलती है जिसका लाभ पूरे शरीर को मिलता है।

—  इससे हृदय और मष्तिष्क को शक्ति मिलती है।

—  धीरे और गहरा साँस लेने की आदत पड़ती है।  हृदय की धड़कन कम होती है। अंदरूनी अंग मजबूत बनते हैं। तनाव तथा ब्लड प्रेशर कम होता है।

—  प्राणायाम करने से फेफड़े , हृदय , डायफ्राम , पेट , आंतें , गुर्दे , पेन्क्रियास की कार्यविधि सुधरती है।

—  पाचन क्रिया सुधरती है और पाचन सम्बन्धी बीमारियां मिटती हैं।

—  थकान या सुस्ती के कारण चिड़चिड़ाहट जैसी परेशानी दूर होती है।

—  प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है , शरीर से विषैले तत्व निकल जाते हैं।

—  प्राणायाम से नकारात्मक विचार , गुस्सा , डिप्रेशन , लोभ कामुकता आदि दूर होते हैं।

—  शरीर में हल्कापन आता है , शांति का अनुभव होता है , नींद अच्छी आती है , स्मरण शक्ति सुधरती है ,

—  उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों की ताकत कम होती चली जाती है जिसका दुष्प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है लेकिन प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने से फेफड़े स्वस्थ बने रहते है और अधिक उम्र का असर कम हो जाता है।

—  रक्त में यूरिक एसिड नहीं बढ़ता जो कि जोड़ों के दर्द और तकलीफ का कारण बनता है। इससे पीठ दर्द , सिरदर्द , मांसपेशियों और जोड़ों के जकड़न से दूर रहते हैं। डायाफ्राम और नसों में जमाव कम होकर रक्त संचार सुधरता है।

प्राणायाम कब नहीं करना चाहिए

Pranayam kab nahi kare

—  किसी भी प्रकार का ऑपरेशन हुआ हो तो छः महीने तक प्राणायाम नहीं करना चाहिये।

—  माहवारी Period के समय नहीं करना चाहिए ।

—  गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए।

—  निकट समय में हार्ट अटैक आया हो तो नहीं करना चाहिए।

—  ब्लड प्रेशर लो रहता हो तो विशेषज्ञ के मार्ग दर्शन में करना चाहिए।

—  बुखार , न्यूमोनिया या फेफड़े की बीमारी आदि हो तो नहीं करना चाहिए।

—  कीमोथेरेपी आदि चिकित्सा चल रही हो तो नहीं करना चाहिए।

—  दिमागी बीमारी की अवस्था जैसे अत्यधिक अवसाद , शोक , दुःख , कष्ट आदि हों तो नहीं करना चाहिए।

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