बच्चों के नाम क्या और कैसे रखें – Baby name

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बच्चों के नाम का विचार विमर्श बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है . कुछ माता पिता तो जन्म से पहले ही बच्चे का नाम सोच लेते हैं . लड़का हो या लड़की , नाम जीवन भर साथ रहता है और यदि नाम अच्छा हो बच्चों को हमेशा अपने नाम पर गर्व होता है .

अच्छे नाम का इंसान के व्यक्तित्व पर भी सकारात्मक असर होता है. माता पिता का कर्तव्य होता है कि बच्चे का नाम ऐसा रखें कि उसे अपने नाम पर कभी ग्लानि या शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी पड़े .अतः बच्चे के लिए अच्छा नाम चुनना जरुरी हो जाता है. परन्तु अच्छा नाम चुनना भी एक चुनौती पूर्ण कार्य होता है.

कभी कभी नाम बच्चों के लिए नाम चुनना बहुत दुविधा पूर्ण हो जाता है. कोई नाम पसंद ही नहीं आता है . सभी माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे का नाम अलग , अनोखा और नया हो . एक दुविधा और होती है कि बच्चे का नाम जन्म कुंडली या राशी के आधार पर निकले अक्षर पर रखें या अपनी मर्जी से कोई भी नाम रख लें .

समय और पसंद के साथ नाम बदलते रहते है . कुछ लोग पौराणिक नाम पसंद करते है , कथाओं में वर्णित कुछ नायकों के गुण और नाम आकर्षित करते हैं . इनसे प्रभावित होकर बच्चों का नाम उनके नाम पर रख दिया जाता है . इनमे से कुछ नाम सदाबहार होते हैं जो कभी पुराने नहीं होते जैसे “ अर्जुन “ .

कुछ लोग पुष्प के नाम पसंद करते हैं जैसे कमल , गुलाब , जूही आदि तो कुछ देवताओं के नाम पर जैसे शिव , महादेव लक्ष्मी , पार्वती आदि . परन्तु ये नाम अलग और अनोखे नहीं होते अतः समान नाम वाले कई लोग मिल जाते हैं .

अलग और अनोखा नाम रखने की चाह में कभी कभी बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते है जो नहीं रखे जाने चाहिए थे . उनका या तो अर्थ कुछ गलत या नकारात्मक होता है या उसे लगभग सभी लोग गलत तरीके से उच्चारित करते हैं और कभी नाम की स्पेलिंग सही लिखना अन्य लोगों के लिए मुश्किल होता है . ऐसा होने पर बाद में बहुत अफ़सोस होता है या फिर नाम बदलना पड़ता है .

बच्चे का नाम सम्बन्धी ये लेख पढ़ने से आपकी परेशानी बहुत हद तक दूर हो सकती है और एक अच्छा नाम बच्चे का रख सकते हैं . आइये जानें नाम क्या और कैसे रखें

बच्चों के नाम क्या और कैसे रखें

हिन्दू संस्कृति में बच्चे का नामकरण संस्कार जन्म से दसवें दिन या सूतक हटने पर किसी अच्छे दिन व मूहूर्त में किया जाता है . नामकरण संस्कार में पंडित जी नक्षत्र और राशी के आधार पर अक्षर निकालते है और उस अक्षर से शुरू होने वाले कुछ नाम सुझाते है .

हो सकता है कि उनके सुझाये गए नाम आपको पसंद नहीं आयें या पुराने टाइप के लगें . ऐसे में आपके पास विकल्प होते है . या तो आप उसी अक्षर से शुरू होने अन्य नाम खोजकर अच्छा नाम चुनकर रख लें . या बिना राशी देखे जो नाम आपको पसंद आये वह रख लें . इसे बोलता नाम कहते हैं और इसके आधार पर भी पंडितजी शुभ अशुभ या गृह नक्षत्रों की दशा आदि बता सकते हैं .

माना जाता है कि राशी के अक्षर पर नाम रखने से आयु और तेज में वृद्द्धि होती है और एक अलग व्यक्तित्व उभरता है . अतः पहला प्रयास राशी के आधार पर नाम चुनने का रखना चाहिए .

यदि राशी के अक्षर से कोई नाम पसंद नहीं आये तो आपने पहले से सोचा हुआ नाम रखा जा सकता है . इसके अलावा अन्य किसी दोस्त , रिश्तेदार , पड़ोसी आदि द्वारा सुझाया गया कोई नाम पसंद आये उसे रख सकते हैं . कुछ किताबों में बहुत से नाम और उनके अर्थ दिए होते है उनमे से चुना जा सकता है . इन्टरनेट पर नामों के अनगिनत सुझाव मिल सकते है वहां से चुन सकते हैं .

ये बहुत से विकल्प आपके पास होते हैं लेकिन नाम चुनने से पहले कुछ बातों का ध्यान जरुर रखना चाहिए ताकि बाद में अफ़सोस ना हो . आइये जानें बच्चे का नाम रखते समय क्या ध्यान रखें –

बच्चों का नाम रखते समय ध्यान रखें –

— नाम बोलने तथा समझ आने में आसान होना चाहिए . बच्चा पहली बार स्कूल जाये तो कम से कम अपना नाम सही से बोल पाये जो सामने वाले को तुरंत समझ आ जाये .

— नाम की स्पेलिंग आसानी से लिखे जा सकने वाली तथा पढ़ कर सही बोले जा सकने वाली होनी चाहिए क्योंकि आजकल अधिकतर जगह नाम इंग्लिश भाषा में लिखना पड़ता है .

— नाम का कुछ अच्छा मतलब हो तो ठीक रहता है . कभी कभी पूछ लिया जाता है कि आपके नाम का मतलब क्या है.

— पुराने समय में नाम से जाति , गोत्र , देश आदि कई चीजों का पता चल जाता था . परन्तु अब ऐसा नही है . विदेशी नाम रखना फैशन और आधुनिकता की निशानी माना जाने लगा है . आप भी ऐसा नाम रख सकते हैं परन्तु उसे बोलना और लिखना आसान होना चाहिए .

— ईश्वरीय नाम जैसे परमात्मा , भगवान , ईश्वर , महादेव , देवी , ब्रह्मा आदि रखने से बचना चाहिए क्योंकि इंसान में अच्छी या बुरी दोनों तरह की प्रवृति होती है. कभी बुरी आदत या व्यवहार का बखान करने या उसे कोसते समय जाने अनजाने आप ईश्वरीय शक्ति के प्रति अपनी आस्था या निष्ठा खोने के दोषी बन सकते हैं .

— मनोविज्ञान और अक्षर विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार नाम का प्रभाव इन्सान के सूक्ष्म व्यक्तित्व पर भी गहराई से पड़ता है . अतः नाम में अच्छे गुण विकसित करने की संभावना होनी चाहिए तथा नकारात्मक या दुश्चरित्र वाले नाम नहीं रखने चाहिए .

— लड़का हो या लड़की नाम अच्छा चुनते समय बराबर प्रयास होने चाहिए . पहले लड़कियों के नाम ससुराल में बदल दिए जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होता . अतः लड़की का एक ही नाम जीवन भर साथ रहता है .

— बच्चे का नाम जल्दबाजी में ना रखें . अच्छी तरह सोच विचार करके रखें .

— कोशिश करें नाम इतना आसान हो कि लोग इसे छोटा करके ना बुलाएँ . इसके अलावा घर में प्यार के नाम जैसे बबलू , गुड़िया , गोलू , कालू , बब्बू , मोटू , राजू आदि से ना पुकारें वर्ना बड़े होने के बाद भी ये ही नाम पुकारे जाते है और तब बहुत अटपटे लगते हैं .

— नाम ऐसा हो कि स्कूल में दूसरे बच्चे मजाक न बनायें , स्कूल में हीनभावना के शिकार बच्चे जीवन भर उस असर से मुक्त नहीं हो पाते . अर्थपूर्ण और अच्छे नाम से बच्चे के प्रति लोगों का बर्ताव सकारात्मक हो जाता है .

—  बहुत लम्बा नाम ना रखें . सिर्फ दो या तीन अक्षर का नाम हो तो ज्यादा अच्छा रहता है . सरनेम जुड़ने के बाद नाम और लम्बा हो जाता है .

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