मकर संक्रांति मनाने का तरीका , कारण और महत्त्व – Makar Sankranti

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मकर संक्रांति makar sankrati एक त्यौहार भी है और एक खगोलीय घटना भी। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जिसे बहुत शुभ माना जाता है।  इस दिन पृथ्वी सूर्य से अधिकतम दूरी पर स्थित होती है। इसके बाद दूरी कम होना शुरू हो जाती है।

यहाँ से दिन बड़े होना और रातें छोटी होने की शुरुआत हो जाती है। सूर्य उत्तर दिशा में बढ़ने लगता है। इसलिये यह दिन उत्तरायण Uttrayan भी कहलाता है। इसके बाद सर्दी धीरे धीरे कम होती जाती है और शिशिर तथा बसंत जैसी सुहानी ऋतु का आगमन होता है।

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति एक ही तारीख Date पर क्यों आती है

सामान्य तौर पर त्यौहार तिथि के अनुसार मनाये जाते हैं। जैसे दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। ये सब त्यौहार चंद्रमा की गति के हिसाब से चलने वाले कैलेंडर के अनुसार मनाये जाते हैं। जबकि मकर संक्रांति का त्यौहार सूर्य कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है। इसीलिए मकर संक्रांति हमेशा एक ही तारीख पर आती है।

यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो हिन्दू और अंग्रेजी कैलेंडर दोनों के अनुसार हर साल एक ही दिन यानि 14 जनवरी को आता है। दूसरे सभी त्यौहार की तारीख बदलती रहती है। यह दिन सकरात Sakrat भी कहलाता है।

मकर संक्रांति कैसे मनाते हैं

Makar Sankranti Celebration in hindi

उत्तर भारत में इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू , तिल पपड़ी , गज़क आदि तिल के व्यंजन खाये जाते हैं।

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तिल गर्म होते हैं और तेज सर्दी से बचाते है तथा त्वचा का रूखापन ख़तम करते हैं। गुड़ की तासीर भी गर्म होती है।

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मकर संक्रांति के दिन कुछ जगह पतंग उड़ाई जाती है। कई तरह के व्यंजन बनाये जाते हैं।

इस दिन दान करना श्रेष्ठ माना जाता है जिसमे तिल मुख्य रूप से शामिल होता है। कुछ जगह 14 की संख्या में सामान का दान किया जाता है। जिसे तेरुण्डा Terunda कहते हैं। हर वर्ष अलग सामान बांटा जाता है जिसे ब्राह्मण या रिश्तेदारों को दिया जाता है। ( makar sankranti kaise manaye )

पंजाब में इसे लोहड़ी Lohadi या माघी Maghi , आसाम में माघ / भोगाली बिहु Bhogali bihu के रूप में मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह पोंगल Pongal के रूप में मनाया जाता है जहाँ चार दिन तक यह त्यौहार चलता है। पहला दिन भोगी पोंगल , दूसरा दिन सूर्य पोंगल ,   तीसरा दिन मत्तु पोंगल और चौथा दिन कन्या पोंगल रूप में मनाया जाता है।

इस दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर शुद्ध होते हैं। ब्राह्मण भोजन का आयोजन किया जाता है। गरीब और भिखारियों को श्रद्धा के अनुसार दान दिया जाता है।

मकर संक्रांति के अन्य महत्त्व

उत्तरप्रदेश में कुम्भ का मेला इसी दिन शुरू होता है।

सबरीमाला ( केरल ) के अयप्पा मंदिर में इस दिन मकर विलक्कू makar vilakku के नाम से बड़ी श्रध्दा से मनाया जाता है।

माना जाता है कि इस दिन गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए लोग गंगा नदी में स्नान करके आनंद प्राप्त करते हैं। गंगा सागर का मेला Gangasagar ka mela मकर संक्रांति के दिन ही भरता है।

कुछ जगह विशेष प्रकार के नेग , नियम ( बयें ) आदि महिलाओं द्वारा किये जाते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य परिवार के सम्बन्ध को मजबूत बनाना और रिश्तों की मान मर्यादा बढ़ाना होता है।

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