माहवारी मासिक धर्म का महत्व – Menstruation Period Importance

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माहवारी mahvari , मासिक धर्म masik या पीरियड period स्त्रियों को हर महीने योनि से होने वाला लाल रंग के स्राव को कहते है। इस Menses के विषय में लड़कियों को अज्ञानता वश बहुत दुविधा का सामना करना पड़ता है।

पहली बार माहवारी period होने पर जानकारी के अभाव में लड़कियां बहुत डर जाती है। उन्हें बहुत शर्म महसूस होती है और अपराध बोध से ग्रस्त हो जाती है। उनमें हीनता की भावना पैदा हो जाती है।

इस प्रक्रिया से घबराने या कुछ गलत या गन्दा होने की हीन भावना महसूस करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।माहवारी मासिक धर्म एक सामान्य शारीरिक गतिविधि ही है जैसे उबासी आती है या छींक आती है। भूख , प्यास लगती है या सू-सू पोटी आती है। माहवारी को रजोधर्म भी कहते है।

मासिक धर्म की शारीरिक प्रक्रिया सभी क्रियाओं से अधिक महवपूर्ण है ,क्योंकि इस प्रक्रिया से ही मनुष्य का ये संसार चलता है। मानव की उत्पत्ति इसके बिना नहीं हो सकती।

प्रकृति ने स्त्रियों को गर्भाशय Uterus , अंडाशय Ovary , फेलोपियन ट्यूब  और योनि देकर उसे सन्तान उत्पन्न करने का महत्वपूर्ण काम दिया है अतः माहवारी या मासिक धर्म गर्व की बात होनी चाहिए ना कि शर्म या हीनता की । सिर्फ इसे समझना और संभालना आना जरुरी है।

आजकल के खुले माहौल के हिसाब से भी लड़कों और लड़कियों दोनों को इसका ज्ञान होना जरुरी हो गया है। जानकारी के बिना जननांगों को सिर्फ मजे मस्ती और आनंद के उपयोग किये जाने का साधन समझ लिया जाता है जो की गलत है।

मासिक चक्र – Mestruation cycle

Masik chakra kya hota he

दो माहवारी के बीच का नियमित समय मासिक चक्र  Menstruation Cycle  कहलाता  है। नियमित समय पर माहवारी  Menses होने का मतलब है कि शरीर के सभी प्रजनन अंग स्वस्थ है और अच्छा काम कर रहे है।

मासिक चक्र की वजह से ऐसे हार्मोन बनते है जो शरीर को स्वस्थ रखते है। हर महीने ये हार्मोन शरीर को गर्भ धारण के लिए तैयार कर देते है।

मासिक चक्र के दिन की गिनती माहवारी शुरू होने के पहले दिन से अगली माहवारी शुरू होने के पहले दिन तक की जाती है। उदाहरण के लिए यदि 2 तारीख़ को एक माहवारी शरू हुई। इससे अगली बार 30 तारीख़ को शुरू हुई तो मासिक चक्र 28 दिन का है।

और यदि अगली माहवारी 28 तारीख़ को हुई तो मासिक चक्र 26 दिन का है। लड़कियों में मासिक चक्र 21 दिन से 45 दिन तक का हो सकता है। महिलाओं को मासिक चक्र 21 दिन से 35 दिन तक का हो सकता है। सामान्य तौर पर मासिक चक्र 28 दिन का होता है।

कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उस शब्द के बारे में विस्तार से जाने। 

मासिक चक्र के समय शरीर में परिवर्तन –

Changes during Cycle , period hone par kya hota he

हार्मोन्स में परिवर्तन – Harmons Change

मासिक चक्र के शुरू के दिनों  में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन बढ़ना शरू होता है। ये हार्मोन शरीर को स्वस्थ रखता है विशेषकर ये हड्डियों को मजबूत बनाता है।

साथ ही इस हार्मोन के कारण गर्भाशय की अंदरूनी दीवार पर रक्त और टिशूज़ की एक मखमली परत बनती है ताकि वहाँ भ्रूण पोषण पाकर तेजी से विकसित हो सके । ये परत रक्त और टिशू से बनी होती है।

ओव्यूलेशन – Ovulation

संतान उत्पन्न होने के क्रम में किसी एक ओवरी में से एक विकसित अंडा डिंब निकल कर फेलोपीयन ट्यूब में पहुँचता है।इसे ओव्यूलेशन  Ovulation  कहते है।

सामान्य रूप से ये मासिक चक्र के 14 वें दिन होता है  ( यदि मासिक चक्र 28 दिन का है तो )।  कुछ कारणों से थोड़ा आगे पीछे हो सकता है। 

ओव्यूलेशन के समय कुछ हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन आदि अधिकतम स्तर पर पहुँच जाते है। इसकी वजह से जननांगों के आस पास रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है।

योनि के स्राव में परिवर्तन हो जाता है। जिसके कारण स्त्री की सम्भोग की तीव्र इच्छा पैदा होती है। इस समय किये गये संभोग से गर्भ धारण करने की अधिकतम सम्भावना होती है। ये प्रकृति का सन्तान उत्पन्न करने में सहयोग है।

अंडा – Ovum

फेलोपियन ट्यूब में यदि अंडा शुक्राणु द्वारा निषेचित हो जाता है तो भ्रूण का विकास क्रम शुरू हो जाता है ,अन्यथा 12 घंटे बाद अंडा नष्ट होकर शरीर में विलीन हो जाता है। अंडे के नष्ट होने पर एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। गर्भाशय की रक्त व टिशू की परत की जरुरत ख़त्म हो जाती है।

ऐसे में यही परत नष्ट होकर योनि मार्ग से बाहर निकल जाती है। इसे ही माहवारी , MC , पीरियड या Menses कहते है, महीना आना या रजोधर्म भी यही है । इस दौर से गुजऱने वाली स्त्री को रजस्वला कहा जाता है।

garbh dharan

स्राव – Discharge

माहवारी के समय अक्सर यह शंका होती है की मासिक कितने दिन Masik Kitne din तक होना चाहिए तथा कितनी मात्रा में होना चाहिए जिसे सामान्य माने।

पीरियड यानि MC के समय निकलने वाला स्राव सिर्फ रक्त नहीं होता है । इसमें नष्ट हो चुके टिशू भी होते है। अतः ये सोचकर की इतना सारा रक्त शरीर से निकल गया , चिंतित नहीं होना चाहिए। इसमें रक्त की मात्रा लगभग 50 ml मात्र होती है।

प्रकृति के अनुसार माहवारी Menses तीन से छः दिन तक चल सकती है तथा स्राव की मात्रा भी अलग अलग हो सकती है। यदि स्राव इससे ज्यादा दिन तक चले या एक दिन में तीन से अधिक पेड लेने पड़ते हों तो डॉक्टर से सलाह कर लेनी चाहिए।

माहवारी से पहले के लक्षण – Premenstral Syndrome

लड़कियों को शुरू में अनियमित माहवारी , ज्यादा या कम दिनों तक पीरियड , कम या ज्यादा मात्रा में स्राव , डिप्रेशन आदि हो सकते है।

इसके अलावा पीएमएस  Premenstrual Syndrome  यानि माहवारी होने से पहले के लक्षण प्रकट हो सकते है। अलग अलग स्त्रियों को पीएमएस के अलग लक्षण हो सकते है।( इसे पढ़ें : मासिक से पहले परेशानी PMS के उपाय )

इस समय पैर , पीठ और अँगुलियों में सूजन या दर्द हो सकता है। स्तनों में भारीपन , दर्द या गांठें महसूस हो सकती है। सिरदर्द , माइग्रेन , कम या ज्यादा भूख , मुँहासे , त्वचा पर दाग धब्बे ,आदि हो सकते है।

इसके अलावा टेंशन , गुस्सा , डिप्रेशन या थकान आदि बढ़ सकते है। इस तरह के लक्षण पीरियड शुरू हो जाने के बाद अपने आप ठीक हो  जाते है। अतः धैर्य रखकर खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना चाहिए।   

मासिक किस उम्र या आयु में होता है – MC ki Age

सामान्य तौर पर लड़कियों में माहवारी 11 से 14 साल की उम्र में शुरू हो जाती है। लेकिन ये इससे जल्दी या देर से भी हो सकती है। इसमें फ़िक्र जैसी कोई बात नहीं होती। माहवारी शुरू होने का मतलब होता है कि लड़की माँ बन सकती है।

शुरुआत में माहवारी और ओव्यूलेशन के समय में अंतर हो सकता है। यानि हो सकता है की माहवारी शुरू नहीं हो लेकिन ओव्यूलेशन शुरू हो चुका हो। ऐसे में गर्भ धारण हो सकता है।

इसका उल्टा भी संभव है। यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि माहवारी शुरू नहीं होने पर भी प्रेगनेंट होना संभव है। अतः लड़कियों को सतर्क रहना चाहिये। माहवारी

लड़की को मासिक की जानकारी कब दें

लड़कियों में शारीरिक परिवर्तन दिखने पर या लगभग 10 -11 साल की उम्र में मासिक धर्म  Menses  के बारे में जानकारी दे कर इसे कैसे मैनेज करना है समझा देना चाहिए। ताकि शरीर में होने वाली इस सामान्य प्रक्रिया के लिए वे मानसिक रूप से भी तैयार हो जाएँ।

ये भी बताना चाहिए की इसमें अपवित्रता जैसा कुछ नहीं है। ये एक सामान्य शारीरिक क्रिया है जो एक जिम्मेदारी का अहसास कराती है। इसकी वजह से लड़कियों पर आने जाने या खेलने कूदने पर पाबन्दी नहीं लगानी चाहिए। लेकिन उनकी गर्भ धारण करने की सम्भावना समझा देनी चाहिए ताकि वे जरुरत पड़ने पर अपना बचाव कर सकें।

माहवारी आने पर क्या करें  – What to do

period hone par kya kare

माहवारी की तारीख़ Period date याद रखें या किसी केलेण्डर में नोट कर लें। अगली माहवारी 26 से 30 दिन के बीच शुरू हो सकती है। अतः इस तारीख़ से तीन दिन पहले से ही सेनेटरी नैपकिन अपने पास रखें ताकि जरुरत पड़ने पर परेशानी ना हो।

माहवारी या पीरियड आने पर खुद को अपवित्र या बीमार ना समझें। रोजाना के सभी काम आम दिनों की तरह ही कर सकते है।

मासिक के समय बड़ा संशय रहता है कि पूजा करें या नहीं , पीरियड में मंदिर जायें या नहीं या व्रत उपवास करें या है या नहीं। कहीं कहीं तो रसोई में जाना या खाना बनाना भी उचित नहीं माना जाता।

हमारे पारम्परिक धार्मिक रीती रिवाज के अनुसार मासिक के समय Mc hone par पूजा नहीं करनी चाहिये।

कुछ घरों में पीरियड होने पर रसोई में या मंदिर में नहीं जाने की भी परम्परा होती है और कुछ घरों में व्रत पूजन या तीज त्यौहार आदि में हिस्सा लेना वर्जित होता है।

ये आप पर निर्भर करता है की आप परम्परा को कितना और कैसे निभाना चाहते है । एकल परिवार होने के कारण कुछ परम्पराओं का निभाना मुश्किल हो जाता है। पहले इतने साधन भी उपलब्ध नहीं थे पर अब इसके लिए बहुत सुविधाजनक उत्पाद बाजार में मौजूद हैं। साथ ही अब मासिक के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त है कि यह शरीर की  एक सामान्य क्रिया मात्र है। अतः अपनी सुविधा और प्रचलन के अनुसार आप खुद निश्चय कर सकते हैं।

सैनिटरी पेड – Sanitary Pads

बाजार में कई तरह के सैनिटरी नैपकिन या पेड मिलते है। कॉटन वाले पेड और जेल वाले पेड मे से अपनी पसंद से चुन सकते है। हल्की ब्लीडिंग के लिए और स्पोटिंग के लिए पेंटी लाइनर  Panty Liners लेने चाहिए।

सेनिटरी पेड साइज के हिसाब से रेगुलर ,लार्ज और एक्स्ट्रा लार्ज मिलते है। विंग्स और बिना विंग्स वाले पेड भी आते है।अधिक और हैवी फ्लो के लिए ज्यादा सोखने वाले पैड मिलते है। जीन्स के साथ पहनने के लिए अल्ट्रा थिन पेड मिलते है।

अल्ट्रा थिन आल नाईट पेड काम में लेकर बेफिक्र होकर सो सकते है। सिर्फ एक ही प्रकार के पेड के बजाय फ्लो के हिसाब से अलग अलग प्रकार के पेड काम में लेने से आसानी हो जाती है। ये खुद के अनुभव से ही पता चलता है।

माहवारी कप / मेंसस कप –  Menstrual Cup

सिलिकॉन से बने नर्म माहवारी कप  Menstrual cup  एक नया साधन है। ये लगभग दो इंच के आकार के होते है और मेडिकल ग्रेड के सिलिकॉन से बने होते है। इन्हें सादा पानी से धोकर दुबारा काम लिया जा सकता है।

एक ही Menses cup कई सालों तक काम आ सकता है। इसे आठ से दस घंटे बाद धोकर दुबारा लगाया जाता है।माहवारी कप ( Mahvari cup ) पेड से तीन गुना तक स्राव झेल सकते है। ये period ke cup रात को सोते समय भी यूज़ कर सकते है।

शुरू में इन्हें काम में लेने में थोड़ी सी परेशानी हो सकती है लेकिन प्रैक्टिस  में आने के बाद इन Menses Cup से बहुत आसानी हो जाती है। इन्हें काम में लेने का तरीका पैकेट पर लिखे तरीके से आसानी से सीखा जा सकता है। इन्हें साबुन या केमिकल से नहीं धोना चाहिए।

टेम्पून – tempoon

माहवारी में  काम आने वाले योनि मे रखे जाने वाले टेम्पून आते है। जो स्राव को सोख लेते है। लेकिन ये हर किसी को सूट नहीं करते। इसके कारण बुखार , सिर दर्द , स्किन रैशेज आदि हो सकते है। अतः इन्हें सावधानी से काम में लेने चाहिए ।

पेंटी – Panty

—  साफ पेंटी पहने। दिन में कम से कम दो बार पेंटी बदलें।

—  साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। ।

—  पेंटी को डेटोल आदि से धोकर रोगाणु मुक्त रखें।

—  पेंटी को धूप में सुखाएँ।

—  हो सके तो कॉटन पेंटी ही काम में ले।

—  जननांग के बाल साफ रखें। नमी रहने से संक्रमण हो सकता है

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