लौंग नुकसान भी कर सकती है सावधान रहें – Beware Clove can be harmful too

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लौंग clove के पेड़ में लगने वाले फूल की गुलाबी खुशबुदार कली को सुखाने पर लौंग प्राप्त होती है । इसे मसाले और दवा के रूप में काम में लेते है। लौंग के पेड़ की पत्तियां , छाल ,आदि का भी उपयोग दवा में होता है।


एक समय था जब लौंग पैदा होने वाली जमीन के लिए युद्ध हुआ करते थे। अब इसकी बहुत पैदावार होती है। बांग्लादेश , इंडोनेशिया , भारत , श्रीलंका आदि देशों में Laung बहुतायत से पैदा की जाती है ।

पूरे साल भर इसके पेड़ में कलियाँ आती रहती है। Laung की कली पहले थोड़ा पीलापन लिए होती है , फिर धीरे-धीरे गहरे गुलाबी रंग की कली में बदल जाती है। इस अवस्था में इसे तोड़ा जाता है। इसे सुखाया जाता है। सूखने पर इसका रंग गहरा भूरा हो जाता है। इस प्रकार लौंग तैयार हो जाती है ।

लौंग

भारत में इसे कई नामों से जाना जाता है। हिंदी और उर्दू में लौंग , गुजराती  में लविंग Laving , बंगाली  में लबंग Labang  , पंजाबी  में लवंग lavang  , तमिल में किराम्बु Kirambu  या लवंगम  , मलयालम में ग्रामबु Grambu कहते है

लौंग के लाभदायक तत्व – Nutrients of Clove ( Lavang )

कृपया ध्यान दें :  किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं।  

लौंग का विशेष प्रकार का स्वाद इसमें मौजूद यूजेनोल Eugenol नामक रसायन के कारण होता है। Lavang में एक विशेष प्रकार का तेलीय तत्व युजेनिया कार्योफिलाता  Eugenia caryophyllata पाया जाता है।  वैज्ञानिक परीक्षणों और रिसर्च द्वारा Eugenia caryophyllata   को  एंटीऑक्सीडेंट , एंटी फंगल , एंटीमाइक्रोबाइल।, एंटीवायरल , जलन व दर्द मिटाने वाला और भी कई प्रकार से शरीर के लिए फायदेमंद पाया गया है।

लौंग

लौंग खनिज तत्व और विटामिन से भरी होती है। इसमें  कैल्शियम , आयरन , मैगनीज , पोटेशियम , फास्फोरस , मैग्नीशियम , सोडियम और जिंक आदि खनिज तत्व पाये जाते है।

इसमें विटामिन C  , विटामिन B12 , विटामिन B 6 , विटामिन A  , विटामिन E  , विटामिन D , विटामिन K  तथा फोलेट , थायमिन , नियासिन आदि भी होते है। इतने सारे खनिज और विटामिन का एक साथ मिलना तथा इसके तैलीय तत्व इसे एक विशेष दर्जा दिलाते है।

लौंग का उपयोग – Use Of Clove ( Lavang )

Lavang  के औषधीय  गुणों के कारण आयुर्वेदिक दवाओं में इसका भरपूर इस्तेमाल होता है। कई प्रकार के चूर्ण जैसे पाचन और एसिडिटी से सम्बंधित दवाओं में , खांसी , जुकाम , एलर्जी , मसल्स पेन आदि की दवाओं में  लौंग काम में आती है । एसिडिटी में काम आने वाला अविपत्तिकर चूर्ण को चखते ही उसमे  Lavang  का स्वाद  मिल जाता है।

हमारे यहाँ रसोई में Laung की मौजूदगी अनिवार्य होती है। गरम मसाले के रूप में या किसी और रूप  में इसका उपयोग जरूर किया जाता है। लौंग को भोजन में मिलाने से खुशबू और स्वाद में एक अभूतपूर्व बदलाव आ जाता है।

कुछ विशेष प्रकार की दाल के छोंके में Laung  भी डाली जाती है। कुछ लोगों की चाय में लौंग वाला मसाला होता है। गर्म तासीर होने की वजह से सर्दी में पकौड़े में लौंग डाली जाती है। लौंग की स्वादिष्ट नमकीन सेव भी बनाई जाती है।

बड़ी कम्पनियाँ  Laung  का उपयोग  टूथपेस्ट , साबुन , कॉस्मेटिक्स आदि में करके अपने प्रोडक्ट को  प्रभावशाली बनाती है।

इंडोनेशिया में Laung  की सिगरेट पी जाती है  जिसे क्रेटेक्स कहा जाता है। वहाँ इसका बहुत चलन है । हालाँकि सिगरेट में इसका यूज़ उतना ही हानिकारक है जितना तम्बाकू।

लौंग के गुण – Effects of Clove ( Labang )

—  यह पेट में गैस नहीं बनने देती। यदि किसी कारण से गैस बनती है तो  Labang  उसे बाहर निकाल देती है।

—  यह पेट के कीड़े नष्ट कर उन्हें बाहर निकालने का गुण रखती है। पेट के कीड़े मिटाने के घरेलु नुस्खे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

—  दाँत में दर्द होने पर Lavang  का उपयोग सभी करते है ।

—  जी मिचलाना  , उल्टी होना , हिचकी आदि ठीक करने में Lavang  बहुत प्रभावकारी है।

—  Laung  से लीवर को शक्ति मिलती है। लीवर का महत्त्व और इसके कार्य जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

—  इसके उपयोग से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

—  यह हर प्रकार मुँह की बदबू  दूर करती है।

लौंग कब नहीं लें – Laung Kab Nahi Le

—  यह खून को पतला करती है अतः यदि खून पतला करने वाली कोई दवा ले रहे हों , किसी भी प्रकार के रक्तस्राव से पीड़ित हो, निकट समय में सर्जरी करवानी हो तथा आपरेशन के तुरंत बाद Laung का उपयोग नहीं करना चाहिए।

—  जिसे रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा कम हो जाने की समस्या हो उसे Laung यूज़ नहीं करनी चाहिए।

—  किसी-किसी को Lavang से एलर्जी हो सकती है। स्किन रैशेज़ , सूजन , गला भिंचता महसूस हो सकता है। ऐसे में सावधान रहना चाहिए और Laung के कारण ऐसा हो रहा हो तो लौंग ना लें।

—  Laung का तेल लगातार त्वचा पर लगाने से जलन , सूजन आदि महसूस हो सकते  है। अधिक तेल का उपयोग न करें।

—  अधिक लौंग खाने से मुँह के अंदर की स्किन और मसूड़ों को क्षति पहुच सकती है। बहुत अधिक Laung ना खायें।

—  लौंग के तेल में त्वचा को सुन्न कर देने की विशेषता होती है। अतः पैन किलर के साथ Laung नहीं खानी चाहिए।

—  इसकी तासीर बहुत गर्म होती है। Laung की अधिक मात्रा  नुकसानदेह हो सकती है।

—  विशेषकर 5 साल से छोटे बच्चों को  Laung ke tel  के तेल से दूर ही रखना चाहिए।

लौंग के घरेलु नुस्खे – Laung Se Gharelu Upchar

सिर दर्द

चार लौंग पीस कर एक कप पानी में उबालें। आधा रह जाये तब छान कर शक्कर मिला कर रात को सोते वक्त पियें। कुछ दिन पीने से  सिरदर्द ठीक हो जाता है।

दाँत में दर्द

लौंग का तेल लगाने से दाँत के दर्द में आराम मिलता है। एक गिलास पानी में पाँच -छः  Lavang  डालकर उबाल लें इस पानी से कुल्ला करने से भी दाँत के दर्द में आराम आता है।

आँख में फुंसी

आँख की फुंसी पर लौंग घिस कर लगाने से फुंसी ठीक हो जाती है सूजन मिट जाती है।

गर्भावस्था में उल्टी , चक्कर , मितली आदि

दो लौंग बारीक पीस कर शहद के साथ चाटने से उल्टी आनी बंद होती है। अथवा दो इलायची और दो लौंग पानी के साथ बारीक पीस लें। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से गर्भवस्था के समय मितली , चक्कर आदि में आराम मिलता है।

अधिक लौंग ना लें। गर्भावस्था में उलटी और जी घबराने के बारे में तथा इसके घरेलु उपाय विस्तार से के लिए यहाँ क्लिक करें

खांसी

दो  Laung  सेककर बारीक पीस लें। एक कप गर्म दूध में मिलाकर पिए। कुछ दिन में खांसी ठीक हो जाती है।

प्यास अधिक लगती हो

उबलते हुए पानी में दो  Laung  डाल दें। गुनगुना रहने पर पिए। तेज प्यास या मुँह का सूखापन मिटता है।

दमा

दो  Laung  पीस कर एक कप पानी में उबाल लें। आधा रह जाने पर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पी लें। सुबह शाम ये खुराक लेने से दमा का कफ बाहर निकल जाता है ओर दमा में आराम मिलता है ।

मुँह की दुर्गन्ध

खाना खाने के बाद रोजाना  Lavang  को मुँह में रखकर चूसने से मुँह से बदबू आना बंद हो जाती है। साँस में बदबू आती हो तो वो भी इससे मिटती है।

वात रोग

Lavang  पाचन क्रिया को ठीक करती है। पेट की गैस मिटाती है। गैस के कारण होने वाले जोड़ो के दर्द में इससे आराम आता है। वात के कारण हुए मुँह के छाले लौंग से ठीक होते है।

पान के चूने से फटी जीभ

पान में चूना अधिक हो जाने से जीभ फट जाती है। ऐसे में एक  Lavang   मुँह में रखकर चूसें आराम मिलेगा।

कीड़े मकोड़े ने काटा हो

Laung  को पानी के साथ घिस कर ये पानी काटे हुए स्थान पर दिन में तीन चार बार लगाएं। आराम मिलता है।

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