श्वेत प्रदर कारण बचाव व आसान घरेलु नुस्खे – Leucorrhoea Easy Home Remedies

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श्वेत प्रदर leucorrhoea में महिला के योनि मार्ग से सफेद , मटमैला या पीलापन लिए हुए चिपचिपा पानी जैसा रिसता रहता है। यह स्राव बिना बदबू वाला भी हो सकता है और बदबू वाला भी।

आम भाषा में इसे पानी आना या औरतों की धात गिरना Dhat girna भी कहते है। इसे ही ल्यूकोरिया या श्वेत प्रदर shwet pradar के नाम से जाना जाता है।

योनि से हल्का स्राव होना सामान्य बात है। इसमें और श्वेत प्रदर में फर्क होता है। योनि में प्राकृतिक रूप से सफाई करने के लिए पीलापन लिए सफेद रंग का बिना बदबू वाला तरल स्रावित होता है। यह स्राव संक्रमण से भी बचाता है।

लेकिन यदि किसी कारण से इस स्राव में पीलापन या गाढ़ापन अधिक दिखाई दे ,स्राव की मात्रा बढ़ जाये  या बदबू आने लगे तो यह श्वेत प्रदर कहलाता है।

श्वेत प्रदर

श्वेत प्रदर का वैसे कोई प्रभाव होता नजर नहीं आता। लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसान देह होता है। इसकी वजह से बहुत कमजोरी महसूस होने लगती है। महिलाओं को यह समस्या 15 -30 वर्ष की उम्र में अधिक होती है।इस रोग में किसी प्रकार का दर्द नहीं होता लेकिन यह किसी बीमारी का लक्षण जरूर हो सकता है।

कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल अक्षर वाले शब्दों पर क्लीक करने से उसके बारे में विस्तार से जानें।  

श्वेत प्रदर के लक्षण – Symptom of leucorrhoea

Shwet  Pradar ke Lakshan

योनि से होने वाले स्राव में पीलापन , गाढ़ापन या बदबू आना जैसे बदलाव होने के साथ यदि नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें या परेशानी महसूस करें तो यह श्वेत प्रदर हो सकता है :

—  योनि में जलन या खुजली होना

—  पेट के निचले हिस्से में भारीपन

—  जांघों में भारीपन

—  पिंडली या जांघों में दर्द

—  चिड़चिड़ापन

—  कब्ज

—  आँखों के आगे अँधेरा आना

—  सिरदर्द

—  कमर दर्द

—  बार बार पेशाब आना

—  भूख नहीं लगना

—  स्राव की मात्रा कभी कम कभी ज्यादा होना

—  कमजोरी

श्वेत प्रदर के कारण – Reason of leucorrhoea

shwet Pradar hone ke karan

गर्भावस्था की शुरुआत में , यौन उत्तेजना के समय , लड़कियों के यौवन काल में प्रवेश करते समय योनि के स्राव में परिवर्तन दिखाई देता है। यह परिवर्तन हार्मोन का स्तर बदलने से होता है और यह बिल्कुल सामान्य है।

लेकिन इन कारणों के ना होने पर भी योनि के स्राव में परिवर्तन हो और गन्दी बदबू आने लगे तो यह किसी बीमारी या संक्रमण के कारण हो सकता है अतः सचेत हो जाना चाहिए। यह इन कारणों से हो सकता है :

—  गर्भाशय के मुँह पर इन्फेक्शन : यह कॉपर टी या योनि में लगाए जाने वाले किसी गर्भ निरोधक के कारण , किसी विशेष प्रकार के कंडोम , क्रीम , जैली आदि से एलर्जी के कारण या किसी यौन संक्रमण के कारण हो सकता है।

इसमें पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है। गर्भ निरोधक के साधन और उनके फायदे नुकसान के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लीक करेंश्वेत प्रदर

—  योनि में फंगल इन्फेक्शन : यह ज्यादातर कम प्रतिरोधक क्षमता के कारण होता है। डायबिटीज , गर्भावस्था , गर्भ निरोधक गोली या किसी दवा इसका कारण हो सकते है। इसके अलावा गीले या गंदे अंडर गारमेंट्स पहनने या गंदे पेड , कपड़े आदि लगाने से भी यह हो सकता है। अप्राकृतिक मैथुन, सहवास की अधिकता भी कारण बन सकती है।

—  यौनांग की सफाई नहीं रखना , योनि की साफ सफाई के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लीक करें

शारीरिक कमजोरी , खून की कमी , शराब पीना , अनियमित समय पर भोजन करना , देर रात तक जागना , दिन में सोना , आँतों में सूजन , थाइरॉइड  ,आराम परस्त जीवन के कारण यह हो सकता है।

—   मानसिक तनाव ,  गुस्सा , अधिक मिर्च मसाले युक्त खाना , आदि के कारण भी श्वेत प्रदर हो सकता है।

श्वेत प्रदर से बचाव – leucorrhoea Preventions

Shwet Pradar se bachne ke tareeke

कुछ सावधानियां रखने से इससे एक सीमा तक बचा जा सकता है। इनका  ध्यान रखना चाहिए :

—  पोष्टिक भोजन लें। जौ का दलिया , चोकर सहित आटे की चपाती , हरी सब्जियां , काली मिर्च , फल , मेवे  , गाजर , टमाटर , चुकंदर आदि खाएं ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

—  अचार , पापड़ , आलू , लाल मिर्च , खटाई , बैगन , बासी भोजन , शराब , प्याज , तला हुआ आदि न खाएँ।

—  चाय , कॉफी कम लें।

—  कामुक विचारों से दूर रहें।

—  सहवास में अधिकता ना करें।

—  अप्राकृतिक मैथुन से दूर रहें।

—  योनि में लगाए जाने वाला गर्भ निरोधक काम में लेने पर समय समय पर योनि और गर्भाशय की जाँच करवाते रहें।

—  कब्ज मत होने दें।

—  श्वेत प्रदर की सम्भावना होने पर  इसके विशेष कारण का पता लगाने के लिए पेशाब , रक्त , योनि के स्राव आदि की चिकित्सक की  सलाह के अनुसार जाँच करवाएँ

श्वेत प्रदर के घरेलु नुस्खे व उपाय

Shwet Pradar Ke Gharelu Nuskhe

—  सबसे पहले यौनांग की सफाई जरुरी है। इसके लिए नहाने से पहले एक टब में गुनगुना पानी भरकर इसमें एक चम्मच बोरिक पाउडर मिला दें। अब इस टब में कुछ देर बैठें। इससे योनि की सफाई भी होगी और आस पास के अंगों की सिकाई भी हो जाएगी।

—  मौलसिरी की छाल 100 ग्राम , डेढ़  लीटर पानी में डाल कर उबालें। एक लीटर रह जाये तब इसे छान कर इसमें एक चम्मच पिसी फिटकरी मिला दें। इससे योनि की सफाई करें।

—  बबूल की छाल और अशोक की छाल को पानी में उबाल लें। इसे छानकर इसमें फिटकरी मिलाकर इससे योनि साफ करें।

—  बड़ी इलायची और माजूफल दोनों का चूर्ण समान मात्रा में लेकर मिला लें। इसमें  बराबर की मात्रा में पिसी मिश्री मिला लें। इसमें से आधा चम्मच सुबह शाम ठन्डे पानी से फंकी लेने से श्वेत प्रदर ठीक होता है।

—  कमर दर्द या जोड़ों में दर्द के लिये त्रिफला गुग्गुल सुबह शाम एक गोली गर्म पानी के साथ लें।

—  गुलाब के ताजा फूल  2 -3  लें। इनकी पत्तियां धोकर साफ कर लें। इन्हें मिश्री के साथ खाकर ऊपर से मीठा दूध पिएँ। सुबह शाम दो सप्ताह लेने से श्वेत प्रदर ठीक होता है। इससे पेशाब की जलन , और शरीर की गर्मी भी दूर होती है।

—  नागकेसर – 10 ग्राम लेकर चावल के धोवन के साथ पीस लें। इसमें शक्कर मिलाकर पिएँ। यह एक कप रोजाना कुछ दिन पीने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है।

—  पठानीलोध को बारीक पीस लें। यह चूर्ण आधा चम्मच सुबह खाली पेट पानी से फांक लें। ऊपर से एक पका हुआ केला खा लें। कुछ दिन लेने से  इससे प्रदर रोग मिटता है।

—  एक चम्मच शहद में आधा चम्मच आंवले का चूर्ण मिलाकर एक महीने तक लेने से श्वेद प्रदर में आराम आता है।

—  केले का उपयोग किसी भी रूप में अवश्य करें। खाना खाने के बाद केला खाएं या  केले दूध की खीर बना कर खाएं अथवा एक केला काट कर उस पर एक चम्मच घी डालकर खाएं। इनमे से जिस तरह ले सकें केला लें इससे प्रदर रोग में आराम मिलता है।

—  कथीरिया गोंद एक चम्मच रात को  एक कप पानी में भिगो दें। सुबह इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर पी लें। कुछ दिन नियमित लेने से पित्त या गर्मी के कारण होने वाला प्रदर रोग मिटता है।

—  चावल का पानी यानि मांड श्वेत प्रदर में लाभकारी होता है। चावल के ताजा मांड में स्वाद के अनुसार शक्कर या नमक , भुना जीरा आदि मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर मिटता है। चावल के आधा गिलास मांड में आधा गिलास छाछ पीना भी इसमें बहुत लाभकारी होता है।

प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग अलग होती है इसलिए चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

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