सिंघाड़े के आटे का हलवा – Singhare ke aate ka halwa

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सिंघाड़े का हलवा Singhade ka halva सूखे सिंघाड़े को पीस कर उस आटे से बनाया जाता है। सिंघारा फलाहारी होता है यानि व्रत में इसे खाया जा सकता है। आइये जानें सिंघाड़ा आटे का हलवा कैसे बनायें।

सिंघाड़े के आटे से हलवे के अलावा अन्य कई व्यंजन बनाये जा सकते हैं।  जैसे सिंघाड़ा कतली singhara Katli , सिंघाड़े के आटे का पराठा , पूरी पकौड़ी इत्यादि। नवरात्रि , शिवरात्रि , जन्माष्टमी व ग्यारस के व्रत या उपवास के समय अक्सर सिंघाड़े का हलवा बनाया जाता हैं।

सिंघाड़ा पौष्टिक होता है। इसमें कैल्शियम तथा अन्य बहुत से पोषक तत्व पाए जाते है। महिला और पुरुष दोनों के लिए यह समान रूप से हितकारी होता है।

सिंघाड़े का हलवा कुछ समय नियमित  खाने से कमर दर्द दूर होता है और हड्डियां  मजबूत होती है। महिलाओं को होने वाले श्वेत प्रदर में इससे आराम मिलता है। यह बढ़ते बच्चों के शरीरिक विकास के लिए भी बहुत अच्छा होता हैं।

आइये जानते हैं सिंघाड़े का सागारी हलवा Singhare ka sagari halva बनाने का तरीका।

सिंघाड़े के आटे का हलवा  बनाने की सामग्री

सिंघाड़े का आटा                            1  कप

घी                                             1 कप

चीनी                                      3/4  कप

पानी                                         3  कप

पिसी इलायची                         1 /4  चम्मच

सिंघाड़ा के आटे का हलवा बनाने की विधि

—  सिंघाड़े का आटा छान कर तैयार कर लें।

—  पानी गर्म करके रख लें ।

—  एक कढ़ाई में घी डालकर गर्म करें।

—  घी गर्म होने पर इसमें सिंघाड़े का आटा डाल दें और धीमी आंच पर लगातार हिलाते हुए सेकें।

—  जब आटा गुलाबी सिक जाये तब इसमे गरम किया हुआ पानी डालकर हिलाए।

—  जब पानी पूरा सूख जाये तब इसमें चीनी डाल दें।

—  चीनी डालने से पतला हो जाता है , इसे लगातार हिलाते हुए थोड़ा गाढ़ा कर लें।

—  गैस बंद कर दें।

—  अब इलायची व मनपसंद मेवे डाल कर मिला दें।

—  सिंघाड़े के आटे का स्वादिष्ट और पौष्टिक हलवा तैयार है।

—  गर्म या ठंडा जैसा पसंद हो खायें और खिलायें।

सिंघाड़े के हलवे सम्बन्धी टिप्स – Tips

—  हलवा बनाते समय लगातार हिलाते रहें तकि बर्तन की तली में चिपके या जले नहीं।

—  हलवे में पानी गर्म करके डालने व लगातार हिलाते रहने से गुठलिया नहीं बनती हैं।

—  सिंघाड़े की बर्फी या कतली बनानी हो तो हलवे को दो मिनिट और पकायें। अब एक थाली में घी लगाकर थाली को ग्रीस कर लें। इस थाली में बनाये हुए हलवे को फैला लें। ठंडी होने पर बर्फी या कतली के शेप में काट लें।

—  वैसे तो सिंघाड़े का आटा बाजार में मिल जाता है। यदि सिंघाड़े का आटा उपलब्ध नहीं हो तो साबुत सूखे सिंघाड़े पंसारी के यहाँ से लाकर इमामदस्ते में कूट लें और फिर इन्हें मिक्सी में पीसकर छान लें। सिंघाड़े का आटा तैयार है , इसे काम में लें।

इन्हे भी जानें और लाभ उठायें :

फलाहारी कढ़ी राजगिरे के आटे की /  कुटटू के आटे की पूड़ी / साबूदाना खिचड़ी / आलू का चिल्ला / साबूदाना और आलू की सेव ( मूरके ) / आलू की चिप्स / बादाम का हलवा / ठंडाई / बादाम पिस्ते वाला दूध /

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