सिंथेटिक कपड़े क्यों नही पहनने चाहिए – Synthetic cloths harm

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सिंथेटिक कपड़े Synthetic cloths कुछ खूबियों के कारण बहुत लोकप्रिय हैं लेकिन इनके शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी यह सोचने पर विवश कर देती है कि इन्हें पहने या नहीं . आपके रोजाना के उपयोग में आने वाले कई वस्त्र सिंथेटिक फाइबर से बने हो सकते हैं . कपड़ा किस मेटेरिअल का बना है यह टैग पर लिखा होता है .

प्राकृतिक रूप से हमे बहुत से फाइबर मिलते हैं जिनसे कपड़े बनाये जाते हैं जैसे – कॉटन , लिनन , सिल्क , वूल आदि . इन नेचुरल फाइबर या रेशों से बने कपड़े इन्सान बिना किसी विशेष नुकसान के हजारों सालों से पहनता आ रहा है .

विज्ञान की तरक्की के साथ फाइबर कृत्रिम रूप से बनाया जाने लगा जिसे सिंथेटिक फाइबर कहते हैं . इस Synthetic Fibre फाइबर से बने कपड़ों में कई प्रकार की विशेषतायें होती हैं जैसे ये वजन में हल्के , मजबूत , रिंकल फ्री होते हैं तथा जल्दी से दाग नहीं लगता और जल्दी ख़राब नहीं होते . कुछ कपड़े खिंच सकने वाले Elastic होते है जो बहुत आरामदायक महसूस होते हैं .

क्या आप जानते हैं कि सिंथेटिक कपड़े बनाने के लिए बहुत से हानिकारक केमिकल उपयोग में लाये जाते हैं . ये विषैले केमिकल हमारे शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं . सिंथेटिक कपड़ों में पोलिस्टर , नायलोन , एक्रिलिक , रेयोन , डेक्रोन आदि शामिल हैं .

कई वर्षों की रिसर्च के बाद यह पाया गया है कि सिंथेटिक कपड़ों की डाई करने , ब्लीच करने या उन्हें बनाने की प्रक्रिया के लिए उपयोग में आने वाले खतरनाक केमिकल्स के कारण कैंसर , हार्मोन में बदलाव, प्रतिरोधक क्षमता की कमी तथा मानसिक समस्या जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है .

आइये जाने कि सिंथेटिक कपड़े कौनसे होते हैं , कैसे बनते हैं और इनसे क्या नुकसान होता है .

सिंथेटिक कपड़े

पोलिस्टर – Polyester

सिंथेटिक कपड़ों में सबसे कॉमन नाम है पोलिस्टर . पोलिस्टर फाइबर सिंथेटिक पोलिम्स से बनते हैं जो विषैले होते हैं . इन विषैले तत्वों का असर कपड़े से पूरी तरह निकल नहीं पाता . कपड़े पहनने से ये विषैले तत्व हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जो गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं .

पोलिस्टर के कपड़े अधिक पहनने से स्किन का कैंसर , श्वसन तंत्र की बीमारी , खुजली, त्वचा पर चकत्ते , शुक्राणु की कमी आदि भी हो सकते हैं . इतना ही नहीं , इन्हें बनाते समय हवा और पानी में भी हानिकारक विषैले तत्व घुल जाते हैं .

पोलिस्टर से बने कपड़े जैसे टेरीलीन , डेक्रोन , वाईक्रोन आदि सभी नुकसानदेह होते हैं . जिनकी स्किन सेंसिटिव हो उन्हें इनका उपयोग नहीं करना चाहिए .

नायलोन – Nylon

अन्य सिंथेटिक कपड़े में नायलोन का उपयोग बहुत होता है . यह एक पेट्रोलियम उत्पाद है , इसे प्रोसेस करने के लिए कास्टिक सोडा , सल्फ्यूरिक एसिड व फोर्मेलडीहाईड का उपयोग होता है . इनके अलावा ब्लीचिंग तथा अन्य प्रोसेस के लिए क्लोरोफोम , लिमोनिन , पेंटीन , टेर्पीनोल आदि का उपयोग होता है .

इसी वजह से नायलोन सबसे अधिक प्रदुषण फ़ैलाने वाला कपड़ा है . यह शरीर के लिए बहुत नुकसान दायक होता है . इस पहनने से कैंसर , स्किन एलर्जी , सिरदर्द , सुस्ती आदि समस्या हो सकती है .

नायलोन में विषैले तत्व कपड़ा तैयार होने के बाद भी बचे रहते हैं जो नुकसानदायक होते हैं . यह गर्मी शरीर की गर्मी बाहर नहीं आने देता . गर्मी से यह formaldehyde उत्सर्जित करता है जिसके कारण स्किन एलर्जी , आँख से पानी आना आदि परेशानी हो सकती है .

इसके अलावा यह हाइपर पिगमेंटेशन , डरमेटाईटिस तथा नर्वस सिस्टम से सम्बंधित परेशानी का कारण बन सकता है . नायलोन के कपड़े से नाइट्रस ऑक्साइड जैसे अन्य हानिकारक तत्व भी उत्सर्जित होते  हैं .

रेयोन – Rayon

यह विस्कोस भी कहलाता है . इसे बनाने के लिए लकड़ी का उपयोग होता है जिसमे यूकेलिप्टस , पाइन या बीच वुड जैसी लकड़ी शामिल हैं . वेस्ट कॉटन के छोटे रेशे Cotton linters से भी यह बनाया जाता है .

इसे बनाने के विशेष प्रोसेस के कारण इसे सिंथेटिक कहना अधिक उचित होता है .रेयान सस्ता और बहुत सॉफ्ट होता है . इसे ड्राई क्लीन करवाना पड़ता है क्योकि धोने से यह ख़राब हो जाता है .शुरू में इसे आर्टिफीसियल सिल्क कहा जाता था. दूसरे रेशे के साथ मिलाकर बनाया कपड़ा सस्ता पड़ने के कारण इसका बहुत उपयोग होता है .

इस बनाने के लिए कार्बन डाईसल्फाइड , सल्फ्यूरिक एसिड , अमोनिया , एसीटोन , कास्टिक सोडा आदि का उपयोग होता है . इन विषैले तत्वों का दुष्प्रभाव शरीर पर पड़  सकता है . कार्बन डाईसल्फाइड के कारण जी घबराना , सिर दर्द , उल्टी , छाती में या मांसपेशियों में दर्द , नींद नहीं आना जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं . नियमित अधिक समय तक रेयोन से बने वस्त्र पहनने से एनोरेक्सिया या पार्किन्सन जैसी बीमारी होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है .

रेयोन सिर्फ हमारे शरीर के लिए ही नुकसानदेह  नहीं है बल्कि इसे बनाने के कारण आस-पास का पानी , हवा भी प्रदूषित हो जाते हैं जिसका असर पेड़ पौधों तथा जानवरों पर भी पड़ सकता है .

एक्रिलिक – Acrylic

इस फाइबर को बनाने में भी कई प्रकार के विषैले तत्व उपयोग में लाये जाते हैं , इस फाइबर से बने सिंथेटिक कपड़े महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकते हैं . यह फाइबर अत्यधिक ज्वलनशील होता है अतः दुर्घटना की संभावना बहुत बढ़ जाती है . इसके अलावा यह आसानी से रिसायकल नहीं होता तथा बायो डिग्रेडेबल भी नहीं है .

एक्रिलिक फाइबर के स्पिनिंग प्रोसेस में उपयोग लिए गए DMF नामक तत्व त्वचा के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है . इसके कारण लीवर को नुकसान हो सकता है तथा अन्य शारीरिक परेशानियाँ पैदा हो सकती हैं .

स्पैन्डेक्स – Spandex

इस सिंथेटिक फाइबर में जबस्दस्त इलास्टिसिटी यानि खिंचने की क्षमता होती है तथा यह चुभता नहीं है इसकी सर्फेस स्मूथ होती है . इसलिए इसे शॉर्ट्स , लेगिंग्स , शर्ट्स और अंडर गारमेंट्स बनाने में काम लिया जाता है .

इसे बनाने के लिए भी कई तीक्ष्ण केमिकल का उपयोग होता है जिनके कारण लम्बे समय तक इन्हें पहनने से स्किन एलर्जी हो सकती है . इसे बनाने की फैक्ट्री में काम करने वाले लोग भी इससे प्रभावित होते हैं .

यह पसीना नहीं सोखता , पसीना आने पर इससे विषैले तत्वों का उत्सर्जन होता है और वे त्वचा में चले जाते हैं इस तरह एलर्जी का कारण बनते हैं . साथ ही पसीना नहीं सोख पाने से अन्य इन्फेक्शन भी जल्दी होते हैं . लम्बे समय तक इन्हें पहनने से नुकसान होता है .

निष्कर्ष :

यदि स्किन रेशेज , जी घबराना , थकान , जलन , खुजली , सिरदर्द , साँस लेने में दिक्कत आदि परेशानी हो रही हो और कुछ कारण पता नहीं चल पा रहा हो तो अपने कपड़े जरुर चेक कर लेने चाहिए कि कही वो तो वजह नहीं हैं ? कपड़े बनाने में प्रयुक्त केमिकल्स इन परेशानियों का कारण बन सकते हैं . अतः हमे प्राकृतिक रेशों से बने कपड़ों का उपयोग करना चाहिए जो शरीर के लिए तो लाभदायक है ही साथ ही ये इको फ्रेंडली भी होते हैं .

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