स्लिप डिस्क के कारण लक्षण और बचाव – Slip Disk Protection

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स्लिप डिस्क Slip Disc एक आम समस्या हो गई है। इसके बारे में जानकर इससे बचाव किया जा सकता है। स्लिप डिस्क की समस्या में विशेष सावधानियां रखने से आराम मिल सकता है। आइये जानें क्या है स्लिप डिस्क और बचाव।

रीढ़ की हड्डी या मेरुदंड spinal cord में 26 अस्थिखंड vertebrae होते हैं। इन अस्थिखंडों के बीच में लचीली डिस्क होती है जो शोकर की तरह काम करके झटकों से बचाती हैं। यह लचीली डिस्क चलने , दौड़ने , कूदने या मुड़ने पर हड्डी को आपस में टकराने नहीं देती और इस तरह हड्डी को नुकसान से बचाती है।

इस डिस्क के दो हिस्से होते है। एक बाहरी और दूसरा अंदरूनी। अंदरूनी हिस्सा नर्म ( जैल जैसा ) होता है और बाहरी हिस्सा मजबूत होता है।

स्लिप डिस्क

अधिक दबाव , चोट , कमजोरी या अन्य किसी कारण से जब डिस्क के अंदर का नर्म हिस्सा बाहरी ठोस हिस्से को भेद कर बाहर निकल आता है तो इसके कारण दर्द होता है और परेशानी होने लगती है। इसे ही Slip Disc , प्रोलेप्स डिस्क या Herniated Disc कहते हैं।

उम्र बढ़ने पर यह समस्या ज्यादा होती है। यदि स्लिप डिस्क के कारण किसी नस पर दबाव पड़ता है तो उस नस से सम्बन्धित अंग सुन्न होना या दर्द होने की समस्या हो सकती है। कम उम्र में यह परेशानी होने पर वक्त रहते इसे ठीक करने के उपाय कर लेने चाहिए अन्यथा समस्या अधिक बढ़ने पर ऑपरेशन भी कराना पड़ सकता है।

स्लिप डिस्क

स्लिप डिस्क के लक्षण – Slip Disc Symptoms

स्लिप डिस्क मेरुदंड में गर्दन से लेकर पीठ के निचले हिस्से lower back तक में किसी भी हिस्से में भी हो सकता है। lower back में Slip Disc की समस्या सबसे ज्यादा होती है।

इसके लक्षण मेरुदंड में जिस स्थान पर यह समस्या उत्पन्न हुई है उसी के अनुसार महसूस होने लगते हैं। गर्दन में स्लिप डिस्क हो तो अलग हिस्से में और पीठ में Slip Disc होने के कारण अलग हिस्से में परेशानी होती है।

गर्दन में स्लिप डिस्क होने के लक्षण

गर्दन में दर्द और जलन।

कन्धों में या हाथ में दर्द।

हाथ के किसी हिस्से का सुन्न पड़ना।

दर्द गर्दन से लेकर हाथ तक हो सकता है।

रात को दर्द बढ़ जाता है।

हाथों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

पीठ में स्लिप डिस्क के लक्षण

पीठ में एक तरफ दर्द या सुन्न महसूस होना।

दर्द पीठ से पैरों की तरफ जाता हो।

रात को दर्द बढ़ जाता हो।

कम दूर तक चलने में परेशानी।

देर तक खड़े रहने या बैठे रहने से दर्द बढ़ जाना।

मांसपेशियों में कमजोरी।

पीठ में जलन और दर्द या झनझनाहट।

दर्द अलग अलग लोगों को अलग तरह से हो सकता है। यदि दर्द के साथ सुन्नपन या झनझनाहट हो और मांसपेशियों पर कंट्रोल हटता दिखे तो डॉक्टर से सलाह जरूर कर लेनी चाहिए। X – ray , सी टी स्कैन , एम आर आई आदि टेस्ट कराने से Slip Disc की सही स्थिति या दर्द और परेशानी का कारण पता लगाया जाता है।

स्लिप डिस्क के कारण – Cause of slip disc

—  स्लिप डिस्क का पहला मुख्य कारण उम्र का प्रभाव होता है। उम्र बढ़ने के साथ डिस्क में कमजोरी के कारण Slip Disc हो जाती है। यह महिला की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा होता है।

—  दूसरा मुख्य कारण धूम्रपान होता है क्योंकि धूम्रपान के विषैले प्रभाव से डिस्क कमजोर हो जाती है।

— ज्यादा भारी वजन उठाने से डिस्क पर दबाव पड़ने के कारण स्लिप डिस्क हो सकती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। शरीर को घुमाते हुए या मोड़ते हुए वजन उठाने से भी Slip Disc हो सकती है।

—  मांसपेशी की कमजोरी स्लिप डिस्क का कारण बन सकता है।

—  शारीरिक गतिविधि का अभाव होने से वजन अधिक हो जाता है जो स्लिप डिस्क होने का कारण बन सकता है।

स्लिप डिस्क से नुकसान – Effects of slip disc

यदि स्लिप डिस्क अधिक हो और उपचार नहीं किया जाये तो नस स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त होकर अधिक नुकसानदेह हो सकती है। कभी कभी नस पर अधिक दबाव पड़ने से जांघों और पैरों में या गुदा में संवेदना समाप्त हो जाती है।

स्लिप डिस्क का इलाज – Slip disc treatment

स्लिप डिस्क का इलाज इस पर निर्भर होता है कि डिस्क कितनी स्लिप हुई है और उसके कारण कितनी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर एक्सरसाइज , स्ट्रेचिंग आदि से मांसपेशी को मजबूती देकर स्लिप डिस्क के दर्द का इलाज हो जाता है।

विशेषज्ञ की सलाह से विशेष कसरत नियमित रूप से करने से दर्द में आराम आ जाता है। वजन उठाना या जिस स्थिति में देर तक बैठने या खड़े रहने से दर्द होता हो उन्हें कुछ समय रोकना फायदेमंद होता है।

स्लिप डिस्क होने पर दर्द होने या असुविधा होने पर शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है। लेकिन इससे समस्या बढ़ती है अतः चिकित्सक की सलाह लेकर हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे पैदल घूमना आदि जारी रखने चाहिए।

यदि एक्सरसाइज और दवाओं आदि से आराम नहीं मिलता तो अंतिम उपाय के रूप में ऑपरेशन कराना पड़ सकता है। इस ऑपरेशन में सर्जन , डिस्क का बाहर निकला हुआ हिस्सा हटा देते है। इसे माइक्रो डिस्केक्टॉमी कहते हैं। समस्या अधिक होने पर सर्जन पूरी डिस्क निकाल कर दूसरी डिस्क लगा सकते हैं।

स्लिप डिस्क से बचाव – Prevention

स्लिप डिस्क से पूरी तरह बचाव हो पाना संभव नहीं होता लेकिन कुछ सावधानी रखने पर स्लिप डिस्क का खतरा कम जरूर किया जा सकता है। जो इस प्रकार हैं –

—  वजन उठाते समय ध्यान रखना चाहिए। पीठ के बल वजन उठाने की जगह घुटने मोड़ कर वजन उठाना चाहिए।

—  वजन सही रखना चाहिए।

—  पीठ , पैर , पेट , गर्दन आदि की नियमित कसरत करके मांसपेशी मजबूत रखनी चाहिए।

—  नियमित एक्सरसाइज और पौष्टिक भोजन लेने से अधिक उम्र में होने वाली स्लिप डिस्क से बचा जा सकता है।

—  बहुत अधिक देर कर एक स्थिति में नहीं बैठना चाहिए। थोड़ी थोड़ी देर में उठकर स्ट्रेचिंग कर लेनी चाहिए।

—  धूम्रपान जैसी गलत आदत हो तो तुरंत छोड़ देनी चाहिए। इसके अन्य भी बहुत से नुकसान होते हैं।

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