होंठ फटने के कारण और बचने के उपाय – Cracked Lips

8529

होंठ फटने Hoth fatne या Cracked Lips से सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही नष्ट नहीं होती है बल्कि खाने पीने में और बातचीत करने में भी परेशानी होने लगती है। ज्यादातर सर्दी के मौसम में और तेज गर्मी में यह परेशानी बढ़ जाती है।


कुछ लोगों को होंठ फटने की दिक्कत हमेशा होती रहती है। इसके कारण बार बार जीभ से होंठ गीला करने की इच्छा होती है पर ऐसा करने से कुछ मिनटों के लिए ठीक लगता है फिर परेशानी होने लगती है। आइये जाने इस परेशानी की कारण और होंठ फटने से बचने के उपाय तथा घरेलु नुस्खे।

होंठ फटने के कारण – Cause of cracked lips

होंठ फटने के Hoth fatne ke  कारण इस प्रकार हो सकते हैं :

होठ चाटना , चबाना या काटना

होठ जब भी थोड़े सूखे महसूस होते है तो उन्हें चाट कर गीला करने की इच्छा होने लगती है। होठों पर जीभ फिराने के कुछ मिनट बाद ही वापस होठ सूखे महसूस होने लगते है। फिर उन्हें नम करने की इच्छा होती है।

फिर से ऐसा करना पड़ता है और यह लगातार चलता रहता है। परंतु इससे समस्या कम नहीं होती बल्कि ज्यादा बढ़ जाती है। इससे होठ ज्यादा सूखने लगते है।

होठो पर एक सूखी परत सी बन जाती है। इस परत को कुछ लोग दांत से काट कर निकलने की कोशिश करने लगते है। कुछ लोगों की आदत होती है वे बार बार होठो को दांतों से हल्का हल्का चबाते रहते है। ये सभी हरकतें होठो के लिए नुकसान देह होती है।

होंठ के ऊपर जीभ फिराने से लार की एक परत बन जाती है। लार में एमिलेज़ और माल्टीज़ नामक पाचक एंजाइम होते है। ये एंजाइम होठो  की पतली और नाजुक परत को नुकसान पहुंचाते है।

जहाँ सामान्य त्वचा  16 परतों से बनी होती है वहीं होंठ की त्वचा में सिर्फ 4 -5 परत ही होती है। होठों की परत के पतली होने के कारण ही होठो का रंग गुलाबी दिखाई देता है जो असल में नीचे की परत में मौजूद रक्त से भरी केशिकाओं के कारण दिखाई देता है।

लार में मौजूद बेक्टिरिया जो वैसे तो नुकसानदेह नहीं होते लेकिन ये होठों को नाजुक और पतली परत के कारण नुकसान पहुंचा सकते है। अतः यदि होंठ चबाने , चाटने या काटने की बुरी आदत हो तो इसे तुरंत छोड़ देना चाहिए।

होंठ फटना

होठो का बचाव नहीं करना

होठो का तेज हवा से और धूप से बचाव बहुत जरुरी होता है। कई बार चेहरे पर तो सनस्क्रीन या लोशन आदि लगा लिए जाते है , लेकिन होठों पर कुछ नहीं लगाया जाता। होठों पर ना तो सिबेशस ग्रंथियां होती है , और ना ही हेयर फॉलीकल होते है । इस वजह से सामान्य त्वचा की तरह इनको नमी नहीं मिल पाती।

इसके अलावा होठो की त्वचा में दूसरी त्वचा की तरह मेलेनिन भी  नहीं होता , जिस पर त्वचा का रंग निर्भर करता है। मेलेनिन त्वचा को धूप की हानिकारक अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से बचाता है।

होठों पर मेलेनिन नहीं होने के कारण यहाँ की त्वचा के अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से नुकसान की अधिक संभावना होती है। अतः जरुरत के अनुसार होठों का बचाव किया जाना जरुरी होता है।

रूखी ( Dry ) हवा में इसका ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। सर्दी में मौसम में हवा रूखी ( Dry ) होने के कारण होठ ज्यादा फटते है। कमरे में  चलने वाले हीटर से भी हवा रूखी हो जाती है जो होंठ फटने का कारण बन सकता है। ऐसे में बचाव नहीं किये जाने से होठ फट जाते है।

अतः लिप बाम , वैसलीन , सरसों के तेल , मलाई , घी आदि का उपयोग होठो पर लगाने के लिए करना चाहिए। इससे होठ मुलायम बने रहते है ,फटते नहीं है।

मुंह से साँस लेना

मुंह से साँस लेना कभी मजबूरी  होती है तो कभी आदत। जुकाम लगने पर नाक बंद हो जाती है ऐसे में मुंह से सांस लेने में आती है। छोटे बच्चों के साथ अक्सर ऐसा होता है।

इसके अलावा जो लोग खर्राटे ज्यादा लेते है उनका मुंह खुला रहता है और वे साँस मुंह से लेते है। बार बार साँस की हवा का होठो पर से गुजरना होठो की नमी छीन लेता है और होठ सूख कर फटने लगते है।

इसलिए ज्यादा खर्राटे लेने वाले लोगों के होठ सूखे हुए रहते है। अतः ऐसी समस्याओं का इलाज जल्द कर लेना चाहिए। कभी कभी मुंह से साँस लेने की आदत सी हो जाती है इसे तुरंत छोड़ना चाहिए।

कुछ विशेष तत्व

टूथपेस्ट में ऐसे तत्व हो सकते है जो होठो में सूखापन ला सकते है। यदि आपको ऐसा महसूस हो तो टूथपेस्ट बदल लेना चाहिए। इसके अलावा और भी कोई उत्पाद ऐसा हो जिसे काम में लेने पर होठों में सूखापन लगे तो उसे बदलना चाहिए।

खट्टे फल का एसिड होठो को सूखा सकता है। टमाटर की सॉस , च्युइंग गम , कैंडी आदि में इस्तेमाल होने वाले सिनेमेट्स भी ऐसे तत्व हो सकते है जो होठों के सूखेपन के लिए जिम्मेदार हो सकते है।

पानी की कमी

यदि शरीर में पानी की कमी होती है तो इसका असर होठों पर तुरंत नजर आता है। पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर होंठ सूख जाते है। ऐसे में हवा से या धूप से होठों का सूखापन और बढ़ सकता है। गर्मी के मौसम में पानी कम पीने के कारण होठ सूख कर फट सकते है। अतः पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।

विटामिन बी व आयरन की कमी

विटामिन बी की कमी के कारण होठ सूखने की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा होठ फटने का  कारण आयरन या फोलेट की कमी भी हो सकता है। रक्त की जाँच से कमी का पता चलने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेने पर ये ठीक हो सकते है।

अक्सर होठो के किनारे फटने का कारण आयरन की कमी होता है जिसका अंदाज नहीं लग पाता , इसलिए रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा अवश्य चेक करवा लेनी चाहिए।

एलर्जी

कभी कभी मल्टी विटामिन के कुछ तत्व की एलर्जी के कारण होंठ सूखने की परेशानी पैदा हो सकती है। लिपस्टिक के कुछ तत्व एलर्जी पैदा कर सकते है।

इसी तरह खाने पीने के किसी विशेष वस्तु से या खाने में डाले जाने वाले रंग से एलर्जी के कारण होंठ सूख सकते है। ऐसे में इनका प्रयोग नहीं करना ही उचित होता है। यदि समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बीमारी और दवाएं

थाइरॉइड  , सिरोसिस , डायबिटीज आदि बीमारियों के होने से होंठ फटने की समस्या हो सकती है। कुछ अन्य बीमारी के कारण भी होंठ फटना या उनमे जलन सूजन आदि हो सकते है।

कभी कभी कुछ दवाएं जैसे झुर्रियों या एक्ने , ब्लड प्रेशर आदि की दवा के कारण भी होंठ सूख कर फटने लगते है । यदि लंबे समय तक इस प्रकार की परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श  जरूर कर लेना चाहिए।

होंठ के किनारे फटना या चिरना

होठो का किनारे ( जहाँ दोनों होंठ जुड़ते है ) की तरफ से कटना , किनारे से चिरना या होठों के किनारे पर सूजन या जलन आदि होना फंगल इन्फेक्शन या बेक्टिरिया आदि  के कारण हो सकता है।

ये बेक्टिरिया या फंगस लार में मौजूद होते है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यदि मजबूत होती है तो इनसे कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने तथा मुंह पर चोट या खरोंच आने से या ज्यादा लार या थूक किनारे पर इकठ्ठा होने से ये बेक्टिरिया तेजी से बढ़ने लगते है।

इस वजह से वहाँ संक्रमण दिखाई देता है।  प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने का कारण बीमारी  या तनाव की स्थिति हो सकती है।

इसके अलावा होठों पर बेक्टिरिया के संक्रमण होने के और भी कई कारण हो सकते है जैसे गंदे हाथ होठों पर फेरना , पेन पेंसिल या नाख़ून चबाना , खाना खाते समय या सोते समय ज्यादा लार निकलना।

होठों पर ख़राब गुणवत्ता के बाम , लिपस्टिक , लिप ग्लॉस आदि लगाना। खून की कमी  होने पर भी होठों के किनारे फटने लगते है , रक्त की जाँच करवाने से इसका पता चलता है।

फटे होंठ के कारण जलन सूजन आदि हो सकते है। यदि होंठ लंबे समय तक फटे रहें या किनारों पर जलन सूजन या बहुत अधिक दर्द या एलर्जी जैसा दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या चुम्बन होंठ फटने का कारण हो सकता है

मुंह में मौजूद नुकसान नहीं करने वाले बेक्टिरिया भी होठों को नुकसान पहुंचा सकते है । लार में मौजूद पाचक एंजाइम जैसे एमिलेज़ और माल्टीज़ होठों की पतली परत को ख़राब करते है। जब भी होंठो पर लार की परत बनती है , होठो को नुकसान होता है।

चुम्बन ( kiss ) के समय होठों पर लार की परत बनती ही है। कुछ माता पिता छोटे बच्चों को प्यार जताने के लिए उन्हें होठो पर चुंबन देते है। इससे नुकसान हो सकता है।  चुम्बन से पहले अक्सर होठों पर जीभ फेरकर उन्हें नम बनाया  जाता है।

छोटे से चुम्बन के समय भी लार होंठ पर आ ही जाती है। और पुरुष महिला के आवेशपूर्ण कामुक चुम्बन के समय तो होंठ लार से भर जाते है। इससे बहुत नुकसान हो सकता है। हालाँकि कुछ विशेषज्ञ चुम्बन के अनेक फायदे भी बताते है।

होंठ फटने पर घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe For Lips

—  सुबह तथा रात को सोते समय नाभि को साफ करके उसमे गुनगुना सरसों का तेल लगाने से होंठ मुलायम होते है और फटने बंद हो जाते है।

—  सर्दी के कारण फटे होंठ ठीक करने के लिए दूध की मलाई में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम हल्के हाथ से थोड़ी मालिश होठो का फटना मिट जाता है।

—  बादाम का तेल रोजाना सुबह शाम होठो पर लगाने से होंठ फटना ठीक होता है।

—  होंठ काले और सूखे हो गए हों तो गुलाब के फूल की ताजा पत्तियां पीस कर इसमें ग्लिसरीन मिला लें। लिपस्टिक का उपयोग बंद करके इसे नियमित रूप से होठो पर लगाने से होंठ सुन्दर गुलाबी हो जाते है।

—  छाछ से निकले मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ गुलाबी और मुलायम होते है।

—  घी में जरा सा नमक मिलाकर सुबह शाम होठो पर और नाभि में लगाने से होंठ फटना बंद होता है।

—  सरसो के तेल में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम होठों पर और नाभि में लगाने से होंठ फटने बंद होते है।

इन्हें भी जानें और लाभ उठायें :

मोच आने पर क्या करें / अंगुली चटकाना और अर्थराइटिस / सूर्य जल चिकित्सा / पेशाब रुक नहीं पाना / पैर की नसें फूलना /  एड़ी फटना / कैल्शियम की कमी गर्भावस्था में जी घबराना / हकलाना / जोड़ों का दर्द / कब्ज /   पाईल्स के घरेलु उपाय / पित्ताशय की पथरी / हरीरा प्रसूता के लिए / ब्लैक हेड 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here