बरगद का घरेलु नुस्खों में उपयोग और धार्मिक महत्त्व – Banyan Tree

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बरगद का पेड़ Banyan Tree एक विशालकाय वृक्ष है जिसे वट वृक्ष या बड़ का पेड़ भी कहते हैं। इसकी शाखाओं से निकलकर जमीन छूती जड़ें , इसका विशाल फैलाव , बड़े मोटे पत्ते और लाल फल जैसी विशेषताओं के कारण इससे सभी भली भांति परिचित हैं।

बरगद भारत का राष्ट्रिय पेड़ है। बड़ का पेड़ धार्मिक महत्त्व तो रखता ही है। यह कई प्रकार के रोगों के उपचार में भी काम आता है।

बड़ के पेड़ की छाल में भगवान विष्णु , जड़ में ब्रह्मा और शाखाओं में शिवजी का वास माना जाता है। बरगद के पेड़ को भगवान शिव का प्रतीक भी मानते हैं। कई अवसरों पर बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है।

वट सावित्री व्रत की पूजा का तरीका और व्रत की कथा के लिए यहाँ क्लिक करें

बरगद का पेड़ महत्वपूर्ण औषधीय पेड़ है। इसके फल , पत्ते , छाल तथा जड़ आदि का उपयोग कई रोगों के उपचार में किया जाता है।

बरगद के पेड़ का घरेलु नुस्खे में उपयोग इस प्रकार किया जा सकता है –

बरगद के पत्ते , छाल , फल , जड़ से घरेलु उपचार

Banyan leaf , bark , fruit and root use for home remedy

बिवाई या एड़ी फटना

बरगद का दूध कुछ दिन नियमित फटी हुई में भरकर मालिश करने से बिवाई ठीक हो जाती हैं।

मोच , सूजन 

बरगद के दूध से मोच पर मालिश करने से सूजन दूर होकर आराम मिलता है। ( banyan tree milk use )

गठिया रोग

गठिया के दर्द में बरगद के दूध में अलसी का तेल मिलाकर मालिश करने से लाभ मिलता है। ( Bargad se gharelu upchar … )

यौन शक्ति

— बरगद के पके हुए फलों को छाया में सुखाकर बारीक पाउडर कर लें। इसमें बराबर मात्रा में पिसी मिश्री मिला लें। रोजाना सुबह इस पाउडर को 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन से वीर्य का पतलापन , शीघ्रपतन आदि रोग दूर होते हैं तथा यौनशक्ति में कमी की समस्या दूर होती है। ( bargad ka fruit use )

— सूर्योदय से पहले बरगद के पत्ते को तोड़ने से टपकने वाला दूध ( 3 -4 बूँद ) एक बताशे में लेकर नियमित खाने से बल वीर्य वृद्धि प्राप्त होती है तथा शीघ्रपतन और स्वप्नदोष की समस्या दूर होती है।( bargad ka doodh )

पेशाब में जलन

बरगद के पत्ते का काढ़ा पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।

गंजापन

— बरगद के पत्तों की राख को अलसी के तेल में मिलाकर लगाने से गंजापन दूर होता है। बाल उग आते हैं।

— बरगद की जड़ का चूर्ण , जटामासी का चूर्ण , तिल का तेल और गिलोय का रस धूप में रखकर पानी सुखा लें। इसे  छानकर इस तेल की मालिश करने से गंजापन दूर होता है।

दांत में दर्द

— बरगद के दूध में रुई भिगोकर दांत में रखने से दर्द दूर होता है। ( Vat vriksh use for home remedy )

— बरगद की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ले और गरारे करने से दांत मजबूत होते हैं।

जुकाम

बरगद की कोमल लाल पत्तियां सुखा कर पीस लें। यह पाउडर आधा चम्मच एक गिलास पानी में उबाल लें। आधा कप रह जाये तब छानकर शक्कर मिलाकर चाय की तरह पी लें। इस प्रकार सुबह शाम पीने से जुकाम नजला तथा सिर की कमजोरी आदि ठीक होते हैं।

स्तन का ढीलापन

बरगद की जटा के आगे वाले हिस्से में मौजूद पीले और लाल तंतुओं को पीसकर बनाया हुआ लेप लगाने से स्तन का ढीलापन दूर होता है।

बवासीर

बरगद के पीले पत्ते की राख सरसों के तेल में मिलाकर लेप करने से बवासीर ठीक होते हैं।

दस्त

बरगद की कोंपल दही के साथ खाने से दस्त बंद होते हैं। ( banyan tree buds use )

घाव 

— घाव में कीड़े हो गये हो, बदबू आती हो तो बरगद की छाल के काढ़े से घाव को रोज धोने से तथा बड़ के दूध की कुछ बूंदे दिन में 3-4 बार घाव पर लगाने से कीड़े खत्म होकर घाव भर जाते हैं।

— साधारण घाव पर बरगद के दूध को लगाने से घाव जल्दी अच्छे हो जाते हैं।

फोड़े फुंसी

फोड़े-फुन्सियों पर बड़ के पत्तों को गर्म करके बांधने से वे शीघ्र ही पककर फूट जाते हैं फिर ठीक हो जाते हैं। ( bargad ke patte ke upyog )

मुंह के छाले

बरगद की छाल को पानी में उबालकर गरारे करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। ( Banyan tree bark use )

योनि का ढीलापन

बरगद की ताजा कोंपल के रस में साफ रूई या कपड़े का फाया भिगोकर योनि में रखने से योनि का ढीलापन दूर होता है और योनि टाईट होती है। ( Barh ka tree gharelu nuskhe …)

बरगद के पेड़ की पूजा

बरगद के पेड़ की पूजा कई अवसरों पर की जाती है विशेषकर सोमवार के दिन , शनिवार के दिन और अमावस्या के दिन बड़ के पेड़ की पूजा कई लोगों द्वारा की जाती है।

ज्येष्ठ मास में वट सावित्री व्रत करके वट वृक्ष का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इससे सौभाग्य , स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। इसी दिन शनि महाराज का जन्म हुआ था। सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की।

बरगद के पेड़ को मघा नक्षत्र का प्रतीक माना जाता है। मघा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति बरगद की पूजा करते हैं । इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति अपने घर में बरगद का पेड़ लगाते हैं ।

बड़ के पेड़ की पूजा शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए

बरगद के पेड़ में भगवान शिव का ध्यान करते हुए नियमित जल अर्पित करें।

हर शनिवार को इस वृक्ष के तने में काला सूत तीन बार लपेटें।

वहां दीपक जलाएं और वृक्ष से कृपा की प्रार्थना करें।

इसके बाद वटवृक्ष के नीचे बैठकर शनि मंत्र का जाप करें।

माना जाता है कि यह प्रयोग करने वाले व्यक्ति को कभी भी कोई ग्रह पीड़ा नहीं देता।

बरगद के पेड़ की पूजा सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए –

अमावस्या के दिन पीली सूत, फूल और जल लेकर प्रातः काल वट वृक्ष के निकट जाएं।

इसके बाद पहले वट वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं।

फिर वृक्ष की जड़ में जल डालें और पुष्प अर्पित करें।

वट वृक्ष की 9 बार परिक्रमा करें और पीली सूत उसके तने में लपेटते जाएँ।

सुखी दाम्पत्य जीवन की प्रार्थना करें।

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