इमली फायदेमंद है या नुकसानदेह – Tamarind is beneficial or not

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इमली Imli का नाम सुनते ही दाँतों में खट्टापन महसूस होने लगता है। इंग्लिश में इसे Tamarind कहते है। खट्टी चटपटी Imli का स्वाद बचपन में शायद सभी ने चखा है। इसके घने विशाल पेड़ पर छोटे छोटे पत्ते होते है।


इमली के पेड़ की उम्र 200 वर्ष तक भी हो सकती है। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है। इमली के पेड़ में मई जून के महीने में छोटे सफ़ेद रंग के फूल आते हैं । कच्ची इमली kachchi imli हरे रंग की होती है। पकने के बाद भूरे रंग की हो जाती है और इसका गूदा नर्म खट्टा मीठा चटपटे स्वाद वाला हो जाता है।

रसोई घर में इमली का एक विशेष स्थान होता है। यह खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है साथ ही उचित मात्रा में उपयोग करने पर लाभदायक भी होती है।

इमली , गुड़ और खजूर की चटनी बहुत लोकप्रिय हैं। यह चटनी कई प्रकार की डिशेज में काम में ली जाती है। इमली से बने स्वादिष्ट पानी के कारण ही लोग गोल गप्पे ,पतासी या पुचके के स्वाद के दीवाने हैं। दक्षिण भारत में Imli का  उपयोग सब्जी , रसम , सांभर आदि बनाने में किया  जाता है।

इमली को गुजराती में आमली  , मराठी में चिंच , बंगाली में तेंतुल , तमिल में पुलि , तेलगु में चिंटचेतु के नाम से जाना जाता है।

Imli के पत्ते तथा फूल का उपयोग ऊन तथा रेशम की रंगाई में किया जाता है। ईमली का फूल मधुमक्खी के लिए नेक्टर का अच्छा स्रोत माना जाता है। Imli के बीज का पाउडर कई प्रकार की इंडस्ट्री में काम आता है।

टेक्सटाइल , पेपर , लेदर , प्लास्टिक आदि इंडस्ट्री में यह उपयोगी होता है। इसके बीज का पाउडर अमेरिका , जापान , चाइना आदि देशों को निर्यात किया जाता है ।

इमली के पोषक तत्व – Tamarind Nutrients

कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उसके बारे में विस्तार से जानें। 

इमली में बहुत से पोषक तत्व होते है। यह विटामिन और खनिज से भरपूर होती है। Imli में विटामिन बी समूह के कई विटामिन जैसे थायमिन , रिबोफ्लेविन , नियासिन ,  पायरीडॉक्सीन तथा फोलिक एसिड आदि प्रचुरता में मिलते है।

ये सभी विटामिन हमारे द्वारा किये गए भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करके विभिन्न अंगो तक सुचारू रूप से पहुँचाने के लिए आवश्यक होते है। इनके अलावा ईमली विटामिन A , विटामिन C , आयरन , फास्फोरस , कैल्शियम , मैगनीज , जिंक का अच्छा स्रोत होती है।  इसमें ताकतवर एंटी ऑक्सीडेंट तथा एंटी इंफ्लेमटरी तत्व होते है।

इमली में टार्टरिक एसिड होने के कारण इसका स्वाद चटपटा खट्टा होता है। जैसे नींबू में सिट्रिक एसिड के कारण खट्टा स्वाद होता है। टार्टरिक एसिड एक ताकतवर एन्टीऑक्ससिडेंट के रूप में काम करता है।

इससे फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाव होता है। इसके अलावा Imli  में कई प्रकार के फीटो केमिकल्स होते है जो शरीर के लिए लाभदायक होते है।

आयुर्वेद के अनुसार ईमली भूख बढ़ाने वाली , वायुनाशक , कफनाशक तथा  कृमिनाशक होती है। कच्ची हरी इमली नहीं खानी  क्योकि यह पित्त विकार , कफ विकार और रक्त विकार पैदा कर सकती है। पकी हुई Imli  का पानी ह्रदय की जलन , पित्त ज्वर , उल्टी , पीलिया आदि में लाभदायक होता है।

इमली के फायदे – Tamarind Benefits

पाचन

इमली के सेवन से भूख खुलती है । इसमें पाए जाने वाले विटामिन और फायबर के कारण इसका सेवन पाचनशक्ति बढ़ाता है। Imli में मौजूद फायबर आंतों की सफाई में सहायक होता है । यह पुराने कब्ज को भी मिटा सकती है तथा आंतों में होने वाले कैंसर से बचाव करती  है।

ह्रदय

ईमली में पाया जाने वाला फायबर हानिकारक LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। इससे  मिलने वाला विटामिन  C फ्री रेडिकल्स के प्रभाव से शरीर को बचाकर ह्रदय रोग तथा अन्य कई बीमारियों से बचाता है। Imli में पाया जाने वाला पोटेशियम ह्रदय की धड़कन नियमित रखता है तथा ब्लड प्रेशर को कम करके ह्रदय रोग से बचाता है।

खून की कमी

इमली में प्रचुर मात्रा में आयरन होता है। इमली के उपयोग से खून की कमी दूर हो सकती है। खून की कमी के कारण कई प्रकार की समस्या पैदा होने लगती है। जैसे कमजोरी , थकान , सिरदर्द , त्वचा रोग , आदि। इमली द्वारा मिलने वाले लोह तत्व के कारण शरीर के सभी अंगों तक रक्त पहुँचने में मदद मिलती है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है।

नर्वस सिस्टम

किसी भी कार्यविधि के लिए नर्वस सिस्टम का मजबूत होना आवश्यक होता है। ईमली से मिलने वाले विटामिन B समूह विशेषकर थायमिन जो कि Imli में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है चुस्ती फुर्ती बढ़ाता है तथा मांसपेशियों को कंट्रोल करने की शक्ति में बढ़ोतरी करता है।

वजन

इमली का उपयोग वजन कम करने में सहायक हो सकता है। इमली में HCA नामक विशेष तत्व होता है। यह तत्व शरीर पर चर्बी जमा होने से रोकने में मददगार होता है।

प्रतिरोधक क्षमता

विटामिन C की प्रचुर मात्रा के कारण Imli  में एंटीऑक्सिडेंट गुण तो होते ही है। इसके अलावा यह प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि करके कई प्रकार के संक्रमण से बचाता है। इमली के उपयोग से पेट के कीड़े मिटाने में भी मदद मिलती है।

इमली से घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe With Tamarind

—  इमली का पानी बहुत फायदेमंद होता है। इसे बनाने के लिए इमली को पानी में भिगो दें। तीन चार घण्टे बाद मसल कर पानी छान लें। इसमें जरुरत के अनुसार अतिरिक्त पानी मिलाकर खट्टापन कम कर लें। इसमें गुड़ , सेंधा नमक , भुने जीरे का पाउडर , काला नमक आदि स्वाद के अनुसार मिला लें। Imli ka pani  तैयार है। इसके फायदे इस प्रकार है।

~   इसे पीने से भूख खुलती है तथा पाचन शक्ति बढ़ती है।

~   यह पेशाब की जलन को दूर करता है।

~   इसे पीने से लू नहीं लगती। गर्मी में यह ठंडक देता है।

~   यह एसिडिटी को मिटाता है।

~   भांग का नशा दूर करता है।

~   चक्कर आना , थकान लगना , ज्यादा प्यास लगना इससे ठीक होता है।

—  पकी हुई Imli ka गूदा पानी के साथ पीसकर लगाने से हाथ पैरों की जलन में आराम मिलता है। इससे लू की जलन भी मिटती है।

—  इमली को पानी में उबाल लें। इस गुनगुने पानी से गरारे करने से टॉन्सिल , गले की सूजन आदि में आराम मिलता है।

—  इमली के पत्ते पानी में उबाल कर सेक करने से मोच और हड्डी की चोट में आराम मिलता है।

—   इमली के बीज दूध में उबाल कर छिलका निकाल दें। इन्हें पीसकर घी में भून लें। इसमें बराबर मात्रा में शहद मिला लें। इसमें से एक चम्मच दिन में एक बार चाट लें ऊपर से गुनगुना मीठा दूध पी लें । इस प्रयोग से वीर्य स्तंभन शक्ति बढ़ती है , कामेच्छा में वृद्धि होती है तथा स्वप्नदोष और शीघ्रपतन दूर होते है।

—  इमली के बीज को नीबू के रस के साथ घिस कर दाद पर लगाने से दाद खाज आदि मिट जाते हैं।

—  इमली के बीज को घिस पर आँख की गुहेरी पर लगाने से आंख की फुंसी ठीक होती है।

—  हड्डी में चोट लगने पर या मोच आने पर पकी हुई इमली के गुदे को तिल के तेल के साथ मिला कर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट दिन में तीन चार बार लगाने से दर्द में बहुत आराम मिलता है। यह लेप हड्डी भी जोड़ सकता है। जोड़ों का दर्द इस पेस्ट को लगाने से दूर होता है।

—  तिल्ली का तेल या सरसों का तेल गर्म करने से झाग ज्यादा बनते हो तो उसमे एक छोटा टुकड़ा इमली का डालने से झाग बनना बंद हो जाता है।

—  लोहे का तवा रोटी बनाने के बाद ज्यादा काला हो गया हो तो इमलि का गाढ़ा पानी लगाकर साफ करने से तुरंत साफ हो जाता है।

इमली से नुकसान – Tamarind Side Effects

—  इमली का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक हो सकता है।

— इमलि एलर्जी का कारण हो सकती है अतः यदि इमलि के कारण एलर्जी होती हो तो इसे उपयोग में नहीं लेना चाहिए।

— इमलि का अधिक सेवन त्वचा के लिए नुकसान देह हो सकता है। यह गुणसूत्रों तथा महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अतः ज्यादा मात्रा में इमलि का सेवन नहीं करना चाहिए।

—  यदि शरीर से किसी का रक्तस्राव हो तो इमली का उपयोग नहीं करना चाहिए।

— इमलि रक्त में ग्लूकोज की मात्रा कम कर सकती है। अतः डायबिटीज की दवा ले रहे हों तो इमली का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। साथ ही रक्त में ग्लूकोज की मात्रा लगातार चेक करते रहना चाहिए।

—   किसी भी प्रकार के ऑपरेशन से पहले या बाद में इमलि का उपयोग नहीं करना चाहिए। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को प्रभवित करने के कारण किसी भी आपरेशन के दो सप्ताह पहले से इमली का उपयोग बंद कर देना चाहिए।

इन्हें भी जानें और लाभ उठायें :

खीरा ककड़ी / पालक / हरी मिर्चप्याज / करेला / तुरई / भिंडी / चुकंदर गाजर / लौकी / मूली अदरक / आलू  / नींबू / टमाटर / लहसुन  / आंवला केला / अनार / सेब  / अमरुद / सीताफल /  अंगूर गन्ना  पपीता / संतरा नाशपती / बील खरबूजा / तरबूज आम / जामुन / मशरूम  

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