करेला खाने से पहले इसे जरूर पढ़ें – Use Bitter guard carefully

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करेला Karela ( Bitter Guard ) अपनी कड़वाहट के लिए तो जाना ही जाता है , लेकिन इसके गुण इसकी कड़वाहट में ही छिपे होते है। गुणकारी होने के कारण ही करेला सब्जियों में एक विशेष स्थान रखता है।


आयुर्वेद के अनुसार भोजन में सभी प्रकार के रस शामिल होने चाहिए जैसे मीठा , कसैला , खारा , खट्टा तथा कड़वा आदि। करेले को भोजन में शामिल करने से कड़वा रस प्राप्त हो सकता है।

यह शरीर के लिए लाभदायक होता है। विशेषकर डायबिटीज के लिए करेला बहुत महत्त्व रखता है। लेकिन यदि सावधानी पूर्वक इस्तेमाल नहीं किया जाये तो यह नुकसानदेह भी हो सकता है। करेले की तासीर  karele ki tasir गर्म होती है अतः गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान रखना जरुरी होता है।

करेला

करेला बेल पर उगता है। इसका उबड़ खाबड़ छिलका इसे एक अनोखा रूप देता है। छोटा , कच्चा और हरा करेला सब्जी के लिए उपयोग में लाया जाता है। करेले की सब्जी कई प्रकार से बनाई जाती है। Karela भारत में लगभग सभी जगह खाया जाता है।

इसे गुजराती में करेलु karelu  ,बंगाली में कोरोला korola  , मराठी में कराली karali , तमिल भाषा में में पाखरकाई pakharkai , तेलुगु में काकरा काई kakrakai  ,  मलयालम में काईपक्का kaipakka आदि नामो से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे बिटर गार्ड bitter guard या बिटर मेलन bitter melon कहते हैं।

कुछ लोग कड़वे स्वाद के कारण करेला नहीं खा पाते। इस वजह से करेले के गुणों से वंचित रह जाते हैं लेकिन कड़वापन कम करने के उपाय करके कुछ कड़वाहट कम की जा सकती है।

करेले की कड़वाहट कैसे दूर करें – How to remove bitterness

—  करेले का छिलका चाक़ू से खुरच कर या पीलर की मदद से निकाल दें। इस पर नमक लगाकर एक घंटे के लिए रख दें। इसके बाद निचोड़कर पानी निकाले। अब इनकी सब्जी बनाने पर सब्जी में कड़वाहट कम हो जाएगी।

—  करेले को छिलका निकाल कर छाछ में भिगो दें। चार पाँच घंटे भीगने के बाद छाछ में से निकालकर साफ कपड़े से पोंछ लें। इनकी सब्जी बनायें। कड़वाहट नहीं होगी।

— करेले को छीलकर नमक मिले हुए पानी में उबाल लें। उबलने के बाद करेले पानी से निकाल लें। अब इनकी सब्जी बनाएंगे तो कड़वी नहीं लगेगी।

कृपया ध्यान दें :  किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लिक करके उसके बारे में विस्तार से जानें। 

करेला के पोषक तत्व – Bitter Guard Nutrients

इसमें प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट , फायबर , होते हैं। यह खनिज से भरपूर होता है। इसमें पोटेशियम , जिंक , मैग्नेशियम , फास्फोरस , कैल्शियम , आयरन , कॉपर , मैगनीज पाए जाते है ।

 विटामिन C , विटामिन A , इसमें प्रचुरता में होते है। विटामिन B समूह के फोलेट , थायमिन , नियासिन , राइबोफ्लेविन , पैण्टोथेनिक एसिड आदि भी इसके उपयोग से मिलते है।

इनके अलावा इसमें कॉलिन तथा ल्यूटेन नामक तत्व भी होते हैं जो त्वचा , बाल , नर्व तथा आँखों के लिए फायदेमंद होता है। इसमें बीटा केरोटीन भी पाया जाता है। इसकी अलावा इसमें फिटो- नुट्रिएंट्स  तथा  एंटीऑक्ससिडेंट होते हैं। इसमें फेनोलिक एसिड , सैपोनिन , एल्कलॉइड , पेप्टाइड , आदि होते हैं।

होमिओपैथी की दवा मोमर्दिया कैरेन्टिया करेले से बनाई जाती है। करेले को सुखाकर इसका पाउडर बनाकर दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

करेला के फायदे – Benefits Of Bitterguard

Karela ke fayde

—  यह रक्त में शक्कर की मात्रा को कम करता है तथा इन्सुलिन के यूज़ को नियंत्रित करता है। इसमें पाए जाने वाले कई तत्व इन्सुलिन की तरह काम करते हैं।

यह डायबिटीज के कारण होने वाले दुष्प्रभाव जैसे किडनी को नुकसान , ह्रदय रोग , मोतियाबिंद , ग्लूकोमा आदि से बचा सकता है। करेले का जूस रक्त में शक्कर की मात्रा को कम करता है।

यदि डायबिटीज की दवा ले रहे हों तो करेले का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। करेले को छाया में सुखाकर इसका चूर्ण दिन में एक बार एक चम्मच लेने से पेशाब में शक्कर मात्रा कम होती है।

सुबह करेले का रस आधा कप नियमित पीने से भी शक्कर कम होती है। डायबिटीज और इन्सुलिन के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

— करेले में एंटी बेक्टिरियल और एंटी वाइरल तत्व पाए जाते हैं जो कई प्रकार के संक्रमण से बचाते हैं। यह पेट में होने वाले अल्सर से बचाता है। यह अल्सर पैदा करने वाले बेक्टिरिया को रोकता है।

—  करेला पेट और आँतों की परेशानी दूर करता है । इसके विशेष तत्व लीवर को मजबूत बनाते हैं तथा लीवर की कार्यविधि को सुधारते हैं। लीवर के कार्यविधि के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लीक करें

करेला पाचन शक्ति के बढ़ाता है । भूख नहीं लगती हो , कब्ज रहती हो या खट्टी डकारें आती हों तो कुछ दिन नियमित Karele की सब्जी खाने से इन सबमे आराम मिलता है। इसके उपयोग से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

—  करेले में कैंसर को फैलने से रोकने वाले तत्व पाए गए है। दवा के साथ करेले के सत्व का उपयोग अधिक लाभदायक हो सकता है। यह कैंसरग्रस्त गांठ को बढ़ने से रोक सकता है।

—  करेले का उपयोग  शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकाल देता है। यह रक्त का संचार बढ़ाता है तथा प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है जिसके कारण सर्दी , जुकाम , फ्लू आदि के असर को दूर कर सकता है।

इसके उपयोग से एलर्जी , अस्थमा आदि में आराम मिलता है। चाइना में करेले का उपयोग वर्षों से कफ की दवा , ब्रोंकाइटिस तथा गले की खराश आदि के लिए किया जाता रहा है।

—  करेले में त्वचा की परेशानी जैसे एक्जिमा , सोराइसिस आदि बीमारियों को मिटाने वाले तत्व होते हैं। इसकी एंटीबक्टिरियल गुण के कारण यह स्किन के ऊपर लगाने पर भी लाभ देता है।

—  यह मेटाबोलिज्म को सुधरता है तथा रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।

—  शराब ज्यादा पीने से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Karele ka juice पीने से फायदा होता है।  

—  करेले का सीमित मात्रा में उपयोग माहवारी नियमित करता है।

—  पीलिया और गुर्दे की पथरी ठीक करता है। पीलिया रोग में करेले का रस चौथाई कप रोजाना पीने से पीलिया में लाभ होता है।

—  अर्थराइटिस में आराम दिलाता है। सरसों के तेल में करेले का रस मिलाकर मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

—  करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से वजन कम होता है।

—  करेले के रस से कुल्ले करने से मुँह के छाले मिटते हैं।

—  घमोरियां मिटाने के लिए चौथाई कप करेले के रस में एक चम्मच मीठा सोडा मिलाकर दिन में 2 -3 बार घमोरियों पर लगाने से बहुत लाभ होता है।

करेला के उपयोग में सावधानी  – Be careful

Karele se nuksan

—  हालाँकि करेले में रक्त में शक्कर की मात्रा को कम करने का गुण होता है लेकिन सिर्फ इसका उपयोग करने से डायबिटीज ठीक हो सकती है ऐसा नहीं कहा जा सकता। अतः डायबिटीज की दवा चल रही हो तो उसे बंद नहीं करना चाहिए। करेले का उपयोग भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।

—  गर्भावस्था में हों या गर्भधारण चाहते हों तो करेले का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके कारण गर्भपात हो सकता है। स्तनपान कराने वाली महिला को भी करेले के उपयोग से बचना चाहिए।

—  करेले के अधिक सेवन से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।

—  यदि निकट समय में सर्जरी कराई हो , व्रत कर रहे हों या किसी कारण से रक्त स्राव हुआ हो तो करेले का उपयोग नहीं करना चाहिए। यह चक्कर आने या बेहोशी का कारण बन सकता है क्योकि करेला रक्त में शक्कर की मात्रा को कम कर देता है।

— करेले की प्रकृति गर्म और खुश्क होती है। अतः गर्मी के मौसम में इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए।

—  लीवर या गुर्दे की समस्या से ग्रस्त हों तो करेले का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

—  करेले का बहुत ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिए अन्यथा पेट में दर्द , सिर दर्द , चक्कर आना आदि परेशानी हो सकती है।

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