मोटा अनाज ( मिलेट्स ) क्या है और क्यों फायदेमंद हैं – Millets Benefits

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मोटा अनाज फायदेमंद होता है , जरूर खाना चाहिए । यह सलाह बड़े बुजुर्गों से अक्सर सुनने को मिलती है । मोटा अनाज कौनसा होता है और क्यों फायदेमंद होता है , आइए जाने ।

मोटा अनाज क्या है , क्यों वापस अपनाया जा रहा है

Why millets getting popularity again

मोटा अनाज सामान्यतया मिलेट्स Millets को कहा जाता है । हिन्दी मे इन्हे कदन्न कहते हैं । यह घास की प्रजाति का अनाज होता है । मिलेट्स अत्यंत पोषक , पचने मे आसान तथा उगाने मे भी आसान होते हैं । इनका सही तरीके से उपयोग कई प्रकार की बीमारी से बचाव कर सकता है ।

एक समय हमारे देश मे मिलेट्स ही मुख्य भोजन के रूप मे उगाए और खाए जाते थे । गेहूं और चावल का उपयोग कम ही होता था । हरित क्रांति की वजह से गेहूं और चावल ज्यादा उगाए जाने लगे और अधिकतम लोगों द्वारा खाए जाने लगे । इस तरह मिलेट्स हमारी थाली से गायब हो गए ।

अब वापस मिलेट्स के गुणों को देखते हुए इन्हे दैनिक भोजन के रूप मे अपनाया जाने लगा है ।

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मिलेट्स को सरकार द्वारा बढ़ावा

मिलेट्स के पोषक तत्वों को देखते हुए देश विदेश की सरकारों द्वारा इन्हे बढ़ावा दिया जा रहा है । क्योंकि मिलेट्स का अधिक उत्पादन भूख और कुपोषण की समस्या हल करने मे बहुत सहायक हो सकता है ।

हमारे यहाँ वर्ष 2018 को नैशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के रूप मे मनाया गया । वर्ष 2023 को इन्टरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के रूप मे मनाया जाएगा ।

मोटे अनाज Millets के नाम अंग्रेजी और हिन्दी मे

मिलेट्स कई प्रकार के होते हैं । बहुत से लोगों को नहीं पता कि मोटे अनाज को इंग्लिश मे क्या कहते हैं। मिलेट्स के नाम हिन्दी मे और इंग्लिश मे या कहें मोटे अनाज के अंग्रेजी नाम इस प्रकार हैं –

  • बाजरा – Pearl Millet
  • ज्वार – Sorgum
  • रागी , मडुआ – Finger Millet
  • छोटी कँगनी – Browntop Millet
  • कुटकी – Little Millet
  • कोदों , कोदरा , भगर के चावल  – Kodo Millet
  • सावाँ , सामा , झँगोरा – Barnyard Millet
  • कँगनी , चीनी बाजरा , टांगुन – Foxtail Millet

मिलेट्स के उपयोग से कई प्रकार की चीजें बनाई जा सकती हैं जैसे दलिया , खीर , रोटी , कुकीज , पुलाव , डोसा , पास्ता आदि ।

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रागी के मुद्दे , ज्वार की रोटी , बाजरे की रोटी , बाजरे का डोसा ( कंबु डोसा ) ये सब बहुत लोकप्रिय और फायदेमंद डिश हैं ।

मिलेट्स मोटे अनाज के फायदे – Millets Benefits

  • गेहू और चावल की अपेक्षा इनमे पोषक तत्व , खनिज , विटामिन आदि की मात्रा अधिक पाई जाती है । यह कुपोषण की समस्या दूर कर सकते हैं ।
  • फाइबर की अधिक मात्रा के कारण वजन कम करने मे सहायक हैं , रक्त मे शुगर की मात्रा नियंत्रित रखने मे सहायक हैं तथा ह्रदय के लिए लाभदायक है ।
  • इनमे प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है ।
  • सही तरीके से पकने के बाद मिलेट्स पचने मे बहुत आसान होते हैं । छोटे बच्चों के लिए भी ये उपयुक्त आहार साबित हो सकते हैं ।
  • मिलेट्स मे ग्लूटेन नहीं होता है । जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है उनके लिए ये बहुत अच्छा आहार है ।
  • इनका शरीर पर अम्लीय प्रभाव नहीं होता है ।
  • आकार मे छोटे होने के कारण ये बिना पोलिश किए हुए भी उपलब्ध हैं । जो अधिक लाभदायक होते हैं ।
  • इनमे कीड़े आदि लगने की संभावना कम होने के कारण पेस्टिसाइड आदि का उपयोग कम होता है ।

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मोटे अनाज की खास बातें – Millets Speciality

बाजरा (Pearl Millet ) भारत मे सबसे ज्यादा उगाया जाने वाला मिलेट है । इसमे चावल की अपेक्षा 8 गुना अधिक आयरन पाया जाता है । बाजरे की तासीर गरम होती है । इसे सरदी के मौसम मे खाया जाता है । यह पोटेशियम , मेग्नीशियम , आयरन , जिंक , फास्फोरस , कॉपर तथा विटामिन ए का अच्छा स्रोत है ।

रागी (Finger Millet ) मे विटामिन डी तथा कैल्शियम दोनों पाए जाते हैं । रागी मे प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है । यह त्वचा के लिए , हड्डी और दातों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है । रागी को चपाती , डोसा आदि के रूप मे उपयोग किया जा सकता है । इससे खीर या लड्डू भी बन सकते हैं । रागी का दलीया बच्चों को दिया जाता है क्योंकि यह पचने मे आसान तथा पोषक तत्वों से भरपूर होता है ।

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ज्वार की तासीर ठंडी होती है इसे गर्मी के मौसम मे खाया जाता है । ज्वार को चावल की तरह पका कर खा सकते हैं , ज्वार की रोटी बनाई जा सकती है । दलिया बना कर दूध के साथ खा सकते हैं ।

मोटे अनाज संबंधी सावधानी – Millets

मोटा अनाज लाभदायक जरूर है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह पार्शनी का कारण बन सकता है । अतः मोटा अनाज किसको नहीं खाना चाहिए तथा और क्या ध्यान रखना चाहिए , यह भी जान लेना चाहिए ।

थाई रॉइड से ग्रस्त लोगों को मोटे अनाज जैसे बाजरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए । इनमे मौजूद कुछ तत्व आयोडिन की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं ।

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मिलेट्स को पकाने से पहले 8 घंटे पानी मे भिगोकर रखना चाहिए ताकि उसमे मौजूद फाइबर अच्छी तरह पक सके । अन्यथा यह पाचन मे समस्या पैदा कर सकते हैं ।

मिलेट्स बिना पोलिश किए हुए ही खरीदना चाहिए । क्योंकि मिलेट्स के छिलकों मे औषधीय गुण वाले तत्व पाए जाते हैं ।

मिलेट्स को जिस पानी मे भिगोए उसे ही पकाने मे भी उपयोग करें । क्योंकि मिलेट्स मे कई प्रकार के पानी मे घुलनशील लाभदायक विटामिन और खनिज होते हैं ।

मिलेट्स से बने बाजार मे मिलने वाले उत्पाद की जगह , इनसे घर मे बनी हुई चीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए ।

थोड़ी सावधानी के साथ और सही तरीके से पका का उपयोग करने से मोटे अनाज अत्यधिक लाभदायक हो सकते हैं । साथ ही इनका स्वाद भी अच्छा होता है । इन्हे सप्ताह मे तीन दिन अपने भोजन मे जरूर शामिल करना चाहिए ।

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