संतरा नारंगी के फायदे और किन्नू के फायदे में अंतर – Orange and Kinnu

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संतरा या नारंगी Orange दुनिया भर में सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले फलों में से एक है। संतरा, मौसंबी, किन्नू , माल्टा , नींबू आदि सभी एक ही प्रजाति के फल है। ये सभी सिट्रस ( Citrus ) कहलाते है।


कुछ भिन्नताओं के कारण इनका उपयोग अलग प्रकार से किया जाता है। इनमे से संतरा यानी नारंगी जिसे ऑरेंज कहते है , स्वाद और गुणों के कारण सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके कारण से ही नारंगी या ऑरेंज रंगों का नामकरण हुआ है। इसकी खुशबू मन को खुशगवार बना देती है।

सन्तरे से स्कवेश , जेम एंड सिरप आदि बनाये  जाते है। संतरे का स्कवेश बनाने की विधि जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

सन्तरे का उपयोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है , त्वचा को निखरता है।  यह हृदय के लिए अच्छा है , फेफड़े स्वस्थ रखता है।संतरा और किन्नू में फर्क

रूमेटाइड अर्थराइटिस , कैंसर , अल्सर तथा गुर्दे की पथरी को दूर रखने में यह सहायक होता है।

सन्तरे के उत्पादन Orange production में भारत का ब्राजील और अमेरिका के बाद विश्व में तीसरा स्थान है। केले और आम के बाद संतरा सबसे ज्यादा उगाये जाने वाला फल है।

भारत में संतरे का उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य महारष्ट्र , कर्नाटक , आंध्र प्रदेश , आसाम , पंजाब , मध्यप्रदेश , राजस्थान आदि है। नागपुर का संतरा देश विदेश में प्रसिद्ध है। इसके अलावा कुर्ग का संतरा भी प्रसिद्ध है।

इन्हें जीआई (GI ) प्रोटेक्शन भी प्राप्त है। नवम्बर दिसंबर से लेकर फरवरी मार्च तक किस्म और जगह के हिसाब से ताजा संतरा बाजार में  उपलब्ध होता है।

सन्तरे में प्रोटीन , फाइबर तथा कई प्रकार के खनिज और विटामिन पाए जाते है। इसमें विटामिन C की इतनी अधिक मात्रा होती है कि मात्र एक संतरा ( मध्यम आकार का ) खाने से दैनिक आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है।

इसके अलावा संतरा  विटामिन A  , फोलेट , कैल्शियम , कॉपर , पोटेशियम तथा थायमिन का अच्छा स्रोत है। इसमें विटामिन E , राइबोफ्लेविन , विटामिन बी -6 , पैंटोथेनिक एसिड , तथा  मैग्नीशियम भी पाए जाते है। इसमें फैट , कोलेस्ट्ररोल और सोडियम नहीं होता। अतः यह एक आदर्श आहार है।

इसमें कैलोरी ज्यादा नहीं होती। 100 ग्राम फल में मात्र 50 केलोरी होती है फिर भी यह तुरंत ऊर्जा देता है।

कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लिक करके उसके बारे में विस्तार से जानें। 

सन्तरे के फायदे व घरेलु नुस्खे –

Orange Benefits and Garelu Nuskhe

प्रतिरोधक क्षमता – Immune system

इसमें विटामिन C की प्रचुर मात्रा होने के कारण हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाव करते है फ्री रेडिकल कैंसर तथा हृदय रोग का कारण बनते है। इसके अतिरिक्त विटामिन सी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर वायरस के कारण होने वाले सर्दी जुकाम जैसे रोग से भी बचाव करते है।

त्वचा

स्किन के लिए संतरे का उपयोग बहुत फायदेमंद होता है। संतरे के छिलके का पाउडर चेहरे पर निखार लाने में , दाग धब्बे दूर करने में तथा कील मुँहासे दूर करने में काम लिया जाता है।

संतरा नियमित खाने या जूस पीने से प्रदूषण तथा धूप के कारण त्वचा को होने वाले नुकसान से बचाव होता है इस वजह से त्वचा में झुर्रियां नहीं पड़ती।

त्वचा के लिए फेस पैक , फेस मास्क आदि में संतरे का उपयोग किया जाता है। सन्तरे में मौजूद विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में महत्त्व रखता है जो त्वचा को जवां बनाये रखने में मदद करता है।

त्वचा को सुन्दर बनाने के अन्य उपाय जानने के लिए क्लिक करें और पढ़ें  : – घरेलु उबटन से सुंदरता निखारने के तरीके

ह्रदय

संतरे में वे सभी तत्व है जो ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होते है जैसे विटामिन सी , फाइबर , पोटेशियम , कैल्शियम आदि। पोटेशियम की कमी होने पर ह्रदय की धड़कन अनियमित हो जाती है जिसकी वजह से ह्रदय को नुकसान पहुंचता है।

संतरे से मिलने वाला फोलेट भी एक ऐसा तत्व है ह्रदय के लिए हितकारी होता है। संतरे में फाइबर की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है। लगातार संतरे के उपयोग से LDL नामक हानिकारक कोलेस्ट्रॉल का कम होना पाया गया है।

ब्लड प्रेशर

यह ब्लड प्रेशर को भी सही बनाये रखता है उसे बढ़ने नहीं देता। इसमें मौजूद पोटेशियम तथा कैल्शियम इस प्रकिया में फायदेमंद साबित होते है। सन्तरे में सोडियम नहीं होना भी ब्लड प्रेशर के लिये लाभदायक होना एक कारण है।

गर्भवस्था में जी घबराना , उलटी

गर्भवस्था ( प्रेगनेंसी ) के समय उलटी , जी घबराने या खट्टी डकारआने पर सन्तरे का रस पीना लाभदायक होता है। यह हर दो तीन घंटे से एक कप थोड़ी मिश्री मिलाकर पीना चाहिए। सन्तरे का नियमित उपयोग करने से पैदा होने वाला शिशु भी गौरा , स्वस्थ और सुन्दर होता है। pregnant ladies को जी घबराने , उल्टी होने से बचने के लिए  घरेलु उपाय जानने के लिए यहाँ क्लीक करें

मोटापा अपने साथ कई प्रकार की बीमारियां ला सकता है। संतरे में फैट की कमी , पोषक तत्व का समिश्रण तथा फाइबर का होना इसे वजन कम करने के लिए एक उपयुक्त डाइट बनाता है।

अतः वजन कम करना चाहते है तो इसका उपयोग कर सकते है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण कमजोरी भी महसूस नहीं होगी। व्रत या उपवास के समय भी संतरे का उपयोग लाभदायक रहता है।

आँखें

कुछ दिन लगातार सन्तरे के रस में स्वादानुसार काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर पीने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। संतरे में पाया जाने वाला विटामिन ए आँखों के लिए बहुत लाभदायक होता है।

इसमें मौजूद तत्व ल्युटीन , बीटा केरोटीन , आदि आँखों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाये रखने में सहायक होते है। आँखों में जाने वाली रोशनी की मात्रा को कंट्रोल करने में मददगार होता है।। आँखों के स्वास्थ्य के लिए क्लिक करें और पढ़ें – गाजर के फायदे आंखो के लिए

गुर्दे की पथरी

सुबह खाली पेट संतरा खाकर गुनगुना पानी पीना गुर्दे के लिए फायदेमंद होता है। सन्तरे का रस थोड़ा पानी मिलाकर रोजाना खाली पेट पियें। यह पेशाब की मात्रा बढ़ाता है गुर्दे की सफाई करता  है। गुर्दे में पथरी बनने से रोकता है। शरीर में पानी की कमी की पूर्ति करता हैं।

दिमाग

संतरे में पाए जाने वाले फोलेट तथा पोलीफेनोल दिमाग के विकास तथा स्मरण शक्ति को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। अतः नियमित रूप से संतरे का सेवन करने से याददाश्त कमजोर नहीं पड़ती। दिमाग सुचारू रूप से काम करता रहता है।

कब्ज

सन्तरे में घुलनशील तथा अघुलनशील दोनों प्रकार के फायबर होते है। इसकी वजह से आंतो की सफाई सुचारू रूप से होती रहती है। फाइबर व विटामिन सी पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं । कब्ज नहीं होती। पाचन तंत्र सही रहता है। भूख अच्छी लगती है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

संतरा अधिक खाने से नुकसान – Effects of excess use

—  कोई भी चीज फायदा करती है इसका यह मतलब नहीं की इसकी अति की जाये। अति हर चीज की ख़राब होती है। ज्यादा मात्रा में संतरे खाने से पेट में दर्द या दस्त की परेशानी हो सकती है।

—  ज्यादा संतरे खाने से विटामिन सी की अधिकता भी हो सकती है जिसके कारण दस्त , उल्टी , छाती में जलन , पेट फूलना , सिरदर्द  तथा अनिद्रा आदि समस्या हो सकती है।

—  इसमें एसिड होने के कारण जिन्हें पहले से पेट में जलन रहती हो एसिडिटी हो या अल्सर आदि हो तो या जिन्हें GERD जैसी तकलीफ हो इन्हें अधिक मात्रा में संतरे खाने से बचना चाहिए। संतरे का जूस भी पानी मिलाकर पीना चाहिए।

—  कुछ विशेष प्रकार की दवा के कारण संतरे का उपयोग ज्यादा करना नुकसान देह हो सकता है । केले , संतरे आदि ज्यादा मात्रा में लेने से पोटेशियम की मात्रा बढ़ सकती है। गुर्दे के सही काम न कर पाने वाली स्थिति में पोटेशियम का निष्कासन नहीं हो पाता जिसके कारण परेशानी हो सकती है।

संतरे का छिलका खा सकते है या नहीं – Orange Peel

सन्तरे के छिलके ( Orange Peel ) विषैले नहीं होते है। बल्कि इनसे एक अनोखा स्वाद पैदा किया जा सकता है। छिलके में बहुत से पोषक तत्व होते है।

इसमें गूदे से अधिक फायबर होता है। इसमें फ्लेवोनोइड्स होते है जो दर्द सूजन आदि दूर कर सकते है तथा ब्लड प्रेशर को कम रखने में सहायक हो सकती है।

संतरे के छिलके में विटामिन A , C , B 6 , B 5 , कैल्शियम , रिबॉफ्लेविन , थाइमिन , नियासिन , फोलेट आदि खनिज होते है। बाहर के छिलके और अंदर के गूदे के बीच का सफ़ेद हिस्सा थोड़ा कड़वा होता है लेकिन इसमें भी विटामिन सी तथा फायबर बहुत होते है।

लेकिन छिलके में वह स्वाद और रस नहीं होता जो गूदे में होता है। इन्हें पचाने में भी परेशानी हो सकती है तथा हो सकता है कि इन पर पेस्टिसाइड्स मौजूद हों। कुछ मात्रा में इसे काम में लिया जा सकता है। केक व अन्य बेकरी सामान बनाते समय थोड़ी मात्रा में सन्तरे के छिलके (Orange zest ) को कस कर डाला जाता हैं। इससे उसमे फ्लेवर बढ़ता है।

संतरे और किन्नू में क्या फर्क है – Kinnu and Orange Diffrence

बाजार में संतरा  Orange और कीनू  Kinnow  दोनों  मिलते है। कीनू देखने में सन्तरे से ज्यादा रंगीन और चमकीला दिखता है। मन में संशय होने लगता है की सन्तरे खाएं या किन्नू। आइये देखें दोनों में क्या फर्क है और कीनू खाना चाहिए या संतरा :

किन्नू असल में सन्तरे और माल्टा की एक संकर प्रजाति ( हाइब्रिड किस्म ) होती है। इसे केलिफ़ोर्निया की सिट्रस प्रयोगशाला में होवार्ड बी फ्रॉस्ट नामक वैज्ञानिक द्वारा 1935 में विकसित किया गया था। संतरा इससे बहुत पहले से अस्तित्व में है।

कीनू पेड़ पर बहुत अधिक मात्रा में लगते है। एक पेड़ पर एक हजार तक किन्नू लग सकते है। जबकि संतरा इतना नहीं लगता।

किन्नू सबसे ज्यादा पंजाब में होता है जबकि संतरा सबसे अधिक महाराष्ट्र में होता है। दुनिया में किन्नू सबसे अधिक पाकिस्तान में पैदा होता है और संतरे के उत्पादन में ब्राजील सबसे आगे है।

किन्नू का छिलका सन्तरे की अपेक्षा ज्यादा नर्म होता है। अतः इसे पेड़ से तोड़ना और पैक करके एक्सपोर्ट करना मुश्किल होता है।

किन्नू में बीज की अत्यधिक मात्रा ( 20 -30 ) होती है। जिसके कारण इसका जूस या स्क्वेश के लिए व्यावसायिक उपयोग मुश्किल होता है क्योकि प्रोसेसिंग के समय बीज के साथ में पीसने के कारण स्वाद ख़राब हो जाता है।

इस वजह से किन्नू का उपयोग सिर्फ खाने में हो पाता है जबकि संतरा कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है। व्यावसायिक उपयोग तथा एक्सपोर्ट नहीं होने के कारण कीनू की कीमत बाजार में अपेक्षाकृत कम होती है।

विटामिन और खनिज में दोनों लगभग समान होते है। लेकिन स्वाद में कुछ फर्क अवश्य होता है। किसी को संतरे का स्वाद अधिक पसंद आता है और किसी को किन्नू का।

हो सकता है की कीनू सन्तरे से भी अधिक मीठा और स्वादिष्ट हो। अतः खाने के लिए खरीदना है तो कीनू निसंकोच खरीदें और रोज खायें । कम दाम में आपको संतरे जितने ही सभी पोषक तत्व मिल रहे है। घर में इसका जूस निकाल कर पियें। यह बहुत लाभदायक है।

इन्हें भी जानें और लाभ उठायें :

इमली / खीरा ककड़ी / पालक / हरी मिर्चप्याज / करेला / तुरई / भिंडी / चुकंदर गाजर / लौकी / मूली अदरक / आलू  / नींबू / टमाटर / लहसुन  / आंवला केला / अनार / सेब  / अमरुद / सीताफल /  अंगूर गन्ना  पपीता नाशपती / बील खरबूजा / तरबूज आम / जामुन / मशरूम  

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