रुद्राक्ष से लाभ , असली की पहचान और कितने मुखी – Rudraksh kya kyo kaise

23

रुद्राक्ष Rudraksh का धार्मिक रूप से बहुत महत्त्व है। इसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। रूद्राक्ष  की माला Rudraksh ki mala को गले में धारण किया जाता है तथा जप करने के लिए भी इसका उपयोग होता है। आइये जाने रुद्राक्ष क्या होता है , कहाँ पाया जाता है , रूद्राक्ष से क्या फायदे होते हैं , ये कितने प्रकार के होते हैं तथा असली या नकली रुद्राक्ष की पहचान क्या है।

रूद्राक्ष असल में इसके पेड़ पर लगने वाले फल की गुठली है। यह पेड़ भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है। आसाम , उत्तरांचल , मध्यप्रदेश तथा  कर्नाटक के जंगलों में यह बहुत होता है। दक्षिण भारत में स्थित रामेश्वरम में काजू के आकार का एक मुखी रूद्राक्ष होता है।

नेपाल , इंडोनेशिया , मलेशिया आदि देश रुद्राक्ष के बड़े उत्पादक देश है जहाँ से भारत में इनका बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है। नेपाल के Rudraksh बड़े आकार के और मलेशिया के छोटे आकार के होते हैं। नेपाल के रूद्राक्ष श्रेष्ठ किस्म के होते हैं विशेषकर Ek mukhi रूद्राक्ष।

रुद्राक्ष पूजनीय क्यों है

Rudraksh ki pooja kyo

रुद्राक्ष शब्द रूद्र और अक्ष से मिल कर बना है। रूद्र यानि शिव और अक्ष यानि आंसू अर्थात शिव के आंसू । माना जाता है कि रूद्राक्ष की उत्पत्ति शंकर भगवान की आँखों के जलबिंदु से हुई है। पुराणों के अनुसार त्रिपुर नामक राक्षस से मुक्ति के लिए शिव जी से प्रार्थना की गई।

शिवजी घोर तपस्या में लीन थे। जब उनकी आँख खुली तो उसमे से कुछ जलबिंदु (आंसू ) निकल कर धरती पर गिरे और वहां रूद्राक्ष के पेड़ उग आये। इसलिए Rudraksh को शिवजी का अंश स्वरुप मानकर पूजा जाता है तथा इसे धारण किया जाता है।

रुद्राक्ष के लाभ – Rudraksh Benefits

इसे सन्यासी , गृहस्थी , पुरुष या महिला कोई भी धारण कर सकता है। माना जाता है कि रूद्राक्ष आध्यात्मिक तथा औषधीय रूप से लाभ प्रदान करता है। इसे धारण करने से सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती है। यह मन को शांति प्रदान करता है तथा कुण्डलिनी जाग्रत करने में मदद करता है। सदियों से ऋषि मुनि भी इन्ही कारणों से इसे धारण करते आये हैं।

रूद्राक्ष को धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष देने वाला तथा भूत प्रेत जैसी बाधा को भी दूर करने वाला माना जाता है। पूर्णिमा महाशिव रात्रि , अमावस्या तथा  ग्रहण आदि के समय इसे धारण करना शुभ माना जाता है।

रुद्राक्ष की माला पहनने से शारीरिक व्याधियों का शमन होता है तथा दीर्घ आयु प्राप्त होती है। साथ ही यह माला पापों का नाश करने वाली तथा भक्ति और मुक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है।

रुद्राक्ष कितने मुखी – Rudraksh

रुद्राक्ष पर पड़ी धारियों को मुख कहते हैं और उनकी गिनती के आधार पर उसे एक मुखी Ek mukhi rudraksh , पंचमुखी Panch mukhi rudraksh , सप्त मुखी Sapt Mukhi Rudraksh आदि नाम दिये जाते हैं। रुद्राक्ष एक मुखी से 21 मुखी तक हो सकते हैं। 15 मुखी से 21 मुखी रुद्राक्ष अब लुप्त जैसे हो चुके हैं। एक मुखी गोल रुद्राक्ष सबसे ज्यादा मूल्यवान और दुर्लभ होता है।

गणेश रुद्राक्ष – Ganesh Rudraksh

कुछ पंचमुखी Rudraksh पर गणेश जी की सूंड जैसी आकृति उभरी हुई होती है उससे गणेश रुद्राक्ष कहते हैं।

गौरी शंकर रुद्राक्ष – Gauri Shankar Rudraksh

कुछ Rudraksh प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए होते हैं उन्हें गौरी शंकर रुद्राक्ष कहते हैं। गौरी और शंकर का प्रतीक मानकर इसे धारण करना या इसकी पूजा करना दाम्पत्य जीवन के लिए लाभदायक समझा जाता है।

गौरी गणेश रुद्राक्ष – Gauri Ganesh Rudraksh

जुड़े हुए Rudraksh में यदि एक छोटा और एक बड़ा हो तो उसे माँ पार्वती और गणेश जी के रूप में पूजा जाता है।  इसे गौरी गणेश रुद्राक्ष कहते हैं।

असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान

— रूद्राक्ष को पानी में डालकर आधा घंटा उबालें। यदि किसी प्रकार का कोई अंतर नहीं आये तो उसे असली समझना चाहिए। पानी में डालकर उबालने से जोड़ लगाकर नकली बनाया हुआ Rudraksh खुल जाता है। अन्य कलाकारी की गई हो तो वह भी सामने आ जाती है।

— कुछ लोग बेर की गुठली को बिल्कुल Rudraksh जैसा बनाकर बेच देते हैं। पानी में उबालने पर बेर की गुठली नर्म हो जाती है इससे असली नकली की पहचान हो सकती है।

— वैसे तो पानी में डालने पर डूब जाने वाल रूद्राक्ष असली होता है लेकिन कुछ लोग नकली रूद्राक्ष को भी डूबने लायक बना लेते हैं। सीसम की लकड़ी से बना नकली रुद्राक्ष भी डूब जाता है। अतः यह जाँच अधिक विश्वसनीय नहीं होती है।

— रुद्राक्ष को यदि सूई से कुरेदते हैं तो रेशे निकलते हैं। ऐसा हो तो Rudraksh असली समझें अन्यथा नकली।

— रुद्राक्ष की उभरी हुई सतह यानि इसके पठार एक दूसरे से मेल नहीं खाते हों और अलग अलग आकार के हों तो यह असली होना चाहिए। Nakli Rudraksh के उभार एक जैसे पाए जाते हैं।

— असली रूद्राक्ष की धारियां आढी टेढ़ी होती हैं जबकि नकली में ये सीधी पाई जाती हैं ।

— सरसों के तेल में डालने से रंग गहरा हो जाये तो यह Asli Rudraksh होता है ।

— रूद्राक्ष पर कलाकारी करके शिवलिंग , त्रिशूल या सांप प्राकृतिक रूप से बनाकर लोगों को ठगा जाता है। ऐसे आकार देखकर लालच में नहीं आना चाहिए।

— अक्सर पंचमुखी रूद्राक्ष को एक मुखी या अधिक मुखी बनाकर बेचा जाता है। गौर से देखने पर संदेह निश्चित होता है। अतः सावधानी से पूर्ण निरीक्षण करना चाहिए।

रुद्राक्ष पहने तो ध्यान रखें

— रूद्राक्ष सोमवार को कच्चे दूध और गंगाजल से धोकर ” ॐ नमः शिवाय ” मन्त्र का जाप करके धारण करना चाहिए।

— Rudraksh की पवित्रता बनी रहे इसका विशेष ख्याल रखें।

— रात के समय इसे उतार कर रख देना चाहिए , सुबह स्नान के बाद वापस धारण कर लेना चाहिए।

— महिलाओं को मासिक के समय इसे नहीं पहनना चाहिए।

— किसी अन्य व्यक्ति के साथ Rudraksh बदलना नहीं चाहिए।

— छोटे आकार का Rudraksh अच्छा माना जाता है।

— रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को प्याज , लहसुन , मांस , मदिरा आदि से दूर रहना चाहिए।

इन्हें भी जानें और लाभ उठायें :

अशोक वृक्ष का धन पर वास्तु प्रभाव 

वास्तु में अनुसार दिशा का महत्त्व और असर 

कलोंजी को प्याज के बीज ना समझें 

स्टील के बर्तन सिंक कैसे चमकाएं 

पिस्ता क्यों जरुर खाना चाहिए शादीशुदा पुरुष को 

अंजीर के गुणकारी तत्व और फायदे 

पत्ता गोभी के ऐसे फायदे जो किसी सब्जी में नहीं 

पूर्णिमा व्रत के फायदे और महत्त्व 

फोन ईमेल ऑनलाइन ठगी आदि से कैसे बचें 

म्युचुअल फंड की SIP कैसे शुरू करें 

गाय का दूध इतना आश्चर्यजनक क्यों है 

अच्छी बुरी आदतों का गृह नक्षत्रों पर असर 

विवाह के समय पति पत्नी लेते हैं ये प्रतिज्ञा 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here